सोमवार, 24 जुलाई 2023

विकास की प्राथमिकता है जरूरी --गडे मुर्दे उखाड़ने से किसका होगा भला

 







जब कानून बन गया कि अयोध्या के छोड़ कर तमाम धर्म स्थल की स्थिति 1947 की होगी तो तमाम ध्रर्म स्थान के मुंद्दे उठाना ,,,,,क्या है......... इसका मतलब तो यही है कि .......... कानून .......................

किसी भी आगे बढ़ते देश के लिए जरूरी होता है कि वह गड़े मुर्दे उखाड़ने और अतीत के प्रेतों से उलझने में अपनी ऊर्जा लगाने के बजाय भविष्य की चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित रखे और अतीत के अपने अनुभव का इस्तेमाल उन चुनौतियों से निपटने में ही करे। यही सुनिश्चित करने के लिए 1991 में यह कानून लाया गया था कि अयोध्या मामले को छोड़कर देश के तमाम धर्मस्थलों के बारे में 1947 के स्टेटस को अंतिम मान लिया जाए। उसमें किसी तरह के बदलाव की बात न की जाए। जरूरी है कि इस कानून में लूपहोल ढूंढकर इसे नाकाम करने के बजाय हम इसकी भावना का सम्मान करें और धर्मस्थलों के अतीत से जुड़े विवादों को अतीत मान लें। एक देश और समाज के रूप में हमें अपनी प्रायॉरिटी तय करने का न केवल अधिकार है बल्कि अपने विकास की दशा और दिशा तय करने के लिहाज से यह एक अहम जिम्मेदारी भी है। आजादी के बाद से ही विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा अपना देश इस सिलसिले को बनाए रखे और आने वाले दिनों में विकास की रफ्तार को यथासंभव तेज करते हुए दुनिया के अग्रणी देशों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलता रहे, इसके लिए जरूरी है कि वह अपनी प्रायॉरिटी न बिगड़ने दे। ( साभार नवभारत टाइम्स)

शनिवार, 22 जुलाई 2023

बेटी के पिता हैं तो ऐसे करें ऐसे बचत हायर स्‍टडीज से लेकर मैरिज तक, सारी जिम्‍मेदारियां हो जाएंगी पू

 :बेटी के पिता हैं तो ऐसे करें ऐसे  बचत हायर स्‍टडीज से लेकर मैरिज तक, सारी जिम्‍मेदारियां हो जाएंगी पूरी



बेटियां सभी की लाडली होती हैं. लेकिन उनके जन्‍म के साथ ही पिता के कंधों पर कई बड़ी जिम्‍मेदारियां भी आ जाती हैं. जैसे-जैसे बच्‍ची बड़ी होती है, पिता को उसकी हायर स्‍टडीज से लेकर शादी तक की तमाम फिक्र सताने लगती है. ऐसे में ये बहुत जरूरी है कि आप उसके जन्‍म के साथ ही उनके लिए बचत भी शुरू कर दें. यहां जानिए कि किस तरह से आपको इनवेस्‍टमेंट प्‍लानिंग करनी चाहिए.


कमाई का 20 फीसदी बचाएं

फाइनेंशियल एक्सपर्ट दिलीप सिंह जी कहते हैं कि

पहले तो आपको अपनी कमाई का 20 फीसदी बचाने की आदत डालनी चाहिए और इस 20 प्रतिशत रकम को आप कहीं पर लॉन्‍ग टर्म के लिए इन्‍वेस्‍ट करना शुरू करें. ऐसी तमाम स्‍कीम्‍स हैं जो कंपाउंडिंग का फायदा देती हैं और तेजी से वेल्‍थ क्रिएशन करती हैं. इन स्‍कीम्‍स के जरिए आप अच्‍छा खासा अमाउंट जोड़ सकते हैं और इसे बेटी के भविष्‍य के साथ परिवार की अन्‍य जरूरतों पर भी खर्च कर सकते हैं. मान लीजिए कि आप 1 लाख रुपए महीने कमाते हैं तो आपको हर महीने 20,000 रुपए बचाकर इनवेस्‍ट करने चाहिए.


अलग-अलग स्‍कीम्‍स में करें निवेश


आज के समय में कई तरह की स्‍कीम्‍स हैं. लेकिन आप हर महीने जो भी इनवेस्‍टमेंट कर रहे हैं, वो अलग-अलग स्‍कीम्‍स में करें. जैसे कुछ पैसा आप पीपीएफ में लगा सकते हैं, कुछ रकम सुकन्‍या समृद्धि में हर महीने जमा करें और बचत का कुछ हिस्‍सा म्‍यूचुअल फंड में लगाएं. पीपीएफ और सुकन्‍या स्‍कीम्‍स सरकारी योजनाएं हैं और गारंटीड रिटर्न देने वाली हैं. वहीं एसआईपी के जरिए म्‍यूचुअल फंड में निवेश किया जाता है, जो मार्केट से लिंक्‍ड है. इसमें रिटर्न की गारंटी तो नहीं है, लेकिन लॉन्‍ग टर्म के इन्‍वेस्‍टमेंट में औसतन 12 फीसदी का रिटर्न मिलते देखा गया है, जो इन सरकारी स्‍कीम्‍स से कहीं ज्‍यादा है. ऐसे में आप अपनी निवेश की राशि को 2, 3, 4 हिस्‍सों में विभाजित करके अलग-अलग स्‍कीम में निवेश करें.


उदाहरण से समझिए


मान लीजिए किआप 20,000 रुपए हर महीने निवेश कर रहे हैं, तो इसमें से आप 10,000 रुपए SIP में लगा सकते हैं और 5,000-5,000 रुपए पीपीएफ, सुकन्‍या या किसी अन्‍य स्‍कीम में लगा सकते हैं. अगर आप हर महीने 10,000 रुपए SIP में लगातार 20 सालों तक लगाते हैं तो 12 फीसदी के हिसाब से 20 साल बाद आपको 99,91,479 रुपए मिलेंगे. वहीं 15 साल तक निवेश जारी रखने पर 50,45,760 रुपए मिलेंगे.

वहीं अगर PPF की बात करें तो पीपीएफ पर 7.1 फीसदी के हिसाब से ब्‍याज मिल रहा है. हर महीने 5,000 रुपए पीपीएफ में लगाने पर 15 साल बाद मैच्‍योरिटी पर आपको 16,27,284 रुपए मिलेंगे. वहीं सुकन्‍या समृद्धि जो खासतौर पर बेटियों के लिए चलाई जाती है, इस स्‍कीम पर 8 फीसदी के हिसाब से ब्‍याज मिल रहा है. इस स्‍कीम में हर महीने 5,000 रुपए निवेश करने पर मैच्‍योरिटी पर 26,93,814 रुपए मिलेंगे. इस तरह बेटी जब तक बड़ी होगी, आप तब तक अच्‍छा खासा पैसा जोड़ सकते हैं.


एकमुश्‍त रकम यहां निवेश करें


अगर आपके पास एकमुश्‍त रकम निवेश करने के लिए है तो आप इसे फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट, गोल्‍ड वगैरह में लगा सकते हैं. इसके अलावा आप बेटी के नाम से किसी जमीन या प्रॉपर्टी में भी निवेश कर सकते हैं. बेटी के बड़े होने पर आपको इस प्रॉपर्टी से काफी अच्‍छा रिटर्न मिल सकता है.

First right of contract workers on regular appointments in Medical University - Abhimanyu Yadav

 



The first meeting of KGMU contract workers union was held in an enthusiastic atmosphere


First right of contract workers on regular appointments in Medical University - Abhimanyu Yadav


Lucknow, 22 July.

Addressing hundreds of employees in the first union meeting of contract-outsourcing employees, President Abhimanyu Yadav said that long-term contract workers and outsourcing based employees working in KGMU should be given priority in the regular appointments of the institute.


Union office bearers were honored in the first meeting of the union formed to protect the labor interests of more than 6000 contract and outsourcing based employees working in KGMU. In this important union meeting held on Saturday, apart from compulsorily giving priority to outsourcing and contract employees in all government appointments, discussions were held on the future strategy regarding working conditions and salary allowances etc. Besides President Abhimanyu Yadav, General Secretary Sujit Kumar, Sanjay Verma, Pratibha Singh, Pawan Kanojia, Roshni Singh, Akash Singh, Subhash Chandra Awasthi, Sandeep Yadav, Anuj Mishra, Sangeeta etc. union officials were present in this meeting held on the fourth floor of New OPD building of KGMU.

चिकित्सा विश्वविद्यालय में नियमित नियुक्तियों पर




 उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुई केजीएमयू संविदाकर्मी यूनियन की पहली बैठक


चिकित्सा विश्वविद्यालय में नियमित नियुक्तियों पर संविदाकर्मियों कापहला अधिकार -अभिमन्यु यादव


लखनऊ, 22 जुलाई। 

संविदा-आऊटसोर्सिंग कर्मचारियों की पहली यूनियन बैठक में अध्यक्ष अभिमन्यु यादव ने सैकड़ों कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि केजीएमयू में लंबे समय से कार्यरत संविदाकर्मियों और आऊटसोर्सिंग आधारित कर्मचारियों को संस्थान की नियमित नियुक्तियों में प्राथमिकता दी जानी चाहिऐ


केजीएमयू में कार्यरत 6000 से ज्यादा संविदा और आऊटसोर्सिंग आधारित कर्मचारियों के श्रमिक हितों की सुरक्षा के लिये गठित यूनियन की पहली बैठक में यूनियन पदाधिकारियों को सम्मानित किया गया।शनिवार को आयोजित इस महत्वपूर्ण यूनियन बैठक में इस बैठक में आऊटसोर्सिंग और संविदा कर्मचारियों को सभी सरकारी नियुक्तियों में अनिवार्य रूप से प्राथमिकता देने के अलावा कार्यशर्तों और वेतन-भत्ते आदि के संबंध में भावी रणनीति पर विचार विमर्श हुआ। केजीएमयू के न्यू ओपीडी भवन के चौथे तल पर आयोजित इस बैठक में अध्यक्ष अभिमन्यु यादव के अतिरिक्त महामंत्री सुजीत कुमार,संजय वर्मा, प्रतिभा सिंह,पवन कनौजिया,रोशनी सिंह,आकाश सिंह, सुभाष चन्द्र अवस्थी, संदीप यादव,अनुज मिश्र, संगीता आदि संघ पदाधिकारी मौजूद रहे।

Many schemes through which the poor can get financial help in treatment Seminar on financial assistance in PGI

 




Many schemes through which the poor can get financial help in treatment

Seminar on financial assistance in PGI



Many assistance schemes are going on so that there is no financial problem in the treatment of the employees and general public. Head of Hospital Administration Department of Sanjay Gandhi PGI, Prof. R Harshvardhan told that Pandit Deendayal Upadhyaya State Employees Cashless Scheme, Ayushman Bharat, National Health Fund, Incurable Disease Fund, PM and CM Care Fund are government schemes, besides this, Kamdhenu Very Poor Medical Assistance Scheme is being run at the institute level. A seminar was organized on Saturday for information and awareness about schemes for the treatment of the poor. Poor patients come to the institute, many do not have money for treatment, so this event was organized to give information about the scheme to the doctors, residents, staff nurses, medical social workers, public relations officers and others of the institute.

 Chief Medical Superintendent of the Institute Dr. Sanjay Dheeraj

, Medical Superintendent

VK Paliwal said that health care scheme for every individual is the need of the hour. The Kovid era has taught us a lot that we have to keep ourselves safe at all times. Financial assistance schemes play a vital role in improving the lives of millions of citizens across the country. These schemes aim to address various socio-economic challenges and create a prosperous society. Director Prof. R k Dhiman said that due to lack of information, many people are not able to take advantage of the schemes. Nodal Officer Prof. Manoj Jain, Nodal Officer, Pandit Deendayal Upadhyaya State Employees Cashless Medical Scheme Dr. Indushree, Accounts Officer PGI Sanjay Dua, GM Policy and Public Health Dr. B.K. Pathak, G M Operation Satchis, Dr. Ravikant Singh, Operation Manager Neetu Singh, State Director, AHI Manisha Tripathi, Health Insurance Expert Priyanka Pathak among others.

कई योजना जिससे गरीबों को मिल सकती है इलाज में आर्थिक सहायता पीजीआई में आर्थिक सहायता पर सेमिनार

 



कई योजना जिससे गरीबों को मिल सकती है इलाज में आर्थिक सहायता

पीजीआई में आर्थिक सहायता पर सेमिनार

 


कर्मचारियों से लेकर सामान्य जन के इलाज में आर्थिक परेशानी न हो इसके लिए कई सहायता योजनाएं चल रही है। संजय गांधी पीजीआई के  अस्पताल प्रशासन विभाग के प्रमुख प्रो. आर हर्षवर्धन ने बताया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस योजना, आयुष्मान भारत, राष्ट्रीय आरोग्य निधि, असाध्य रोग निधि, पीए और सीएम केयर फंड सरकारी योजना है इसके अलावा संस्थान स्तर पर कामधेनु अति निर्धन चिकित्सा सहायता योजना चलायी जा रही है। गरीबों के इलाज के लिए योजनाओं की जानकारी और जागरूकता के लिए सेमिनार का आयोजन शनिवार को किया गया। संस्थान में गरीब मरीज आते है कई पास इलाज के लिए पैसे नहीं होते है ऐसे में संस्थान के डॉक्टर, रेजिडेंट, स्टाफ नर्स, मेडिकल सोशल वर्कर, जन संपर्क अधिकारी सहित अन्य को योजना की जानकारी देने के लिए यह आयोजन किया गया।    संस्थान के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय धीरज

, चिकित्सा अधीक्षक

वी.के. पालीवाल ने कहा कि  हर व्यक्ति के लिए स्वास्थ्य सहायता योजना समय की माँग हैं।  कोविड युग ने हमें काफी  सीख दिया है कि हर समय खुद को सुरक्षित रखना है। वित्तीय सहायता योजनाएं पूरे लाखों नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन योजनाओं का लक्ष्य विभिन्न सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का समाधान करना और समृद्ध समाज बनाना है। निदेशक प्रो. आर धीमन ने कहा कि   जानकारी के अभाव में कई लोग योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते हैं। नोडल अधिकारी प्रो. मनोज जैन, नोडल अधिकारी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना  से डॉक्टर इंदुश्री,  लेखा अधिकारी पी जी आई  संजय दुआ, जी एम नीति व सार्वजनिक स्वास्थ्य डॉ. बी.के. पाठक, जी एम ऑपरेशन सैचिस, डॉ. रविकांत सिंह, ऑपरेशन मैनेजर   नीतू सिंह, , राज्य निदेशक, एएचआई मनीषा त्रिपाठी, स्वास्थ्य बीमा विशेषज्ञ प्रियंका पाठक सहित कई लोग शामिल हुए।  

गुरुवार, 20 जुलाई 2023

PGI cured Prem Shankar of cancer for the third time-

 PGI cured Prem Shankar of cancer for the third time





When I got cancer for the third time, I felt that my life was over, but I got life


 Removed cancer in the third left colon and reattached the tubes from the previous surgery


 kumar sanjay




     


49-year-old Prem Shankar from Kanpur was a victim of stomach cancer twice. Gastro surgeon of Sanjay Gandhi PGI saved life twice with surgery and chemotherapy. Everything was going well but after 10 years his hemoglobin dropped again to five. When Prem Shankar came to the gastro surgeon of the institute, it was found that for the third time also the cancer has spread to the large intestine on the left side of the stomach. This time the place is different. Surgery was the only treatment for which Planning Prof. Ashok Kumar teamed up as this surgery was very complicated. Complicated surgery was done twice. The third time the cancer had spread to the places where the organs were joined after the first surgery. Pro. According to Ashok, when the stomach was opened under planning, the cancer (tumour) was not visible because the intestines were badly stuck together. First, after separating the intestine, the tumor was found, then along with this tumor, the cancer spread nearby, the lymph node was removed. After this, in the first surgery which was done in 2009, in which the bile duct, pancreatic duct and stomach were added, cancer cells had also spread. That part was taken out. The tubes were rerouted. In this way the surgery was completed in two steps which lasted for seven hours. Prem Shankar ji is completely fine now after the surgery. He has also been discharged from the hospital. Chemotherapy is being planned ahead, although the report is satisfactory.


The team performed surgery


 Pro. Ashok Kumar, Dr. Somnath, Dr. Srinivas, Dr. Prashant, Anesthesia Pro. Aruna Bharti, Prof. Chetna Dr. Jamal, Dr. Anil, Sister Anita and Sister Kanchan.



Surgery is usually not done in case of cancer for the third time.


 


It has been seen that surgeons refrain from doing surgery in case of cancer for the third time because success is very less. Surgery is also complicated. We accepted this challenge and got success. We are going to report this case in Nation International Journal. After cancer surgery, there should be continuous follow-up so that if there is any problem again, it can be detected earlier.


 


 


will find out the reason


Cancer is happening again and again. For the first time in the duodenum (near the pancreas), for the second time in the large intestine on the right side, this time in the large intestine on the left side. There may be a genetic reason behind this, which we are doing research to find out.



पीजीआई के विशेषज्ञों ने दिया तीसरी बार कैंसर को मात

 पीजीआई के विशेषज्ञों ने दिया   तीसरी बार कैंसर को मात



तीसरी बार  कैंसर हुआ तो लगा जिंदगी खत्म लेकिन मिल गई जिंदगी

 तीसरी बायीं तरफ की बड़ी आंत में कैंसर को निकाला और पिछली सर्जरी के नलियों को दोबारा  जोडा   

 


    

कानपुर से 49 वर्षीय प्रेम शंकर दो बार पेट के कैंसर से शिकार हुए । संजय गांधी पीजीआई के गैस्ट्रो सर्जन दो बार सर्जरी और कीमोथेरेपी से जिंदगी बचा लिए । सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन 10 साल दोबारा उनका हीमोग्लोबिन घट कर पांच हो  गया। प्रेम शंकर संस्थान के गैस्ट्रो सर्जन के पास आए तो पता चला कि तीसरे बार भी कैंसर पेट में बायीं तरफ बड़ी आंत में हो गया है। इस बार जगह दूसरी है। सर्जरी ही इलाज था जिसके लिए प्लानिंग प्रो. अशोक कुमार ने टीम साथ किया क्योंकि यह सर्जरी काफी जटिल थी। दो बार जटिल सर्जरी हो चुकी थी तीसरी बार कैंसर उन जगहों पर फैल गया था जहां पर पहले सर्जरी के बाद अंगों को जोड़ा गया था। प्रो. अशोक के मुताबिक प्लानिंग के तहत पेट जब खोला तो कैंसर ( ट्यूमर ) दिख  नहीं रहा था क्योंकि आंत आपस में बुरी तरह से चिपकी थी। पहले आंत को अलग करने के बाद ट्यूमर को खोजा फिर इस ट्यूमर के साथ आस-पास फैले कैंसर, लिम्फनोड को निकाला। इसके बाद पहली सर्जरी जो 2009 में जो हुई थी उसमें पित्त की नली, पैंक्रियाज की नली और आमाशय जो जोड़ा गया था उसमें भी कैंसर सेल फैल गया था। उस भाग को निकाला गया। नलियों को रास्ते को दोबारा बनाया गया। इस तरह दो स्टेप में सर्जरी पूरी हुई जो सात घंटे तक चली।  सर्जरी के बाद अब प्रेम शंकर जी पूरी तरह ठीक है। अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई है। आगे अब कीमोथेरेपी की प्लानिंग की जा रही है हालांकि रिपोर्ट संतोषजनक है।

टीम ने किया सर्जरी

 प्रो. अशोक कुमार, डा. सोमनाथ, डा. श्रीनिवास, डा. प्रशांत, एनेस्थीसिया प्रो. अरुणा भारती, प्रो. चेतना डा. जमाल , डा. अनिल, सिस्टर अनीता और सिस्टर कंचन ।  


तीसरी बार कैंसर होने पर अमूमन नहीं करते है सर्जरी

 

देखा गया है कि तीसरी बार कैंसर होने पर सर्जन सर्जरी करने से बचते है क्योंकि सफलता काफी कम मिलती है। सर्जरी भी जटिल होती है। इस चैलेंज को हमने स्वीकार किया जिसमें सफलता भी मिली । इस केस को हम नेशन इंटरनेशनल जर्नल में रिपोर्ट करने जा रहे हैं। कैंसर की सर्जरी के बाद लगातार फालोअप में रहना चाहिए जिससे दोबारा कोई परेशानी होने पर पहले पता लगा सकें।  

 

 

पता करेंगे कारण

बार –बार कैंसर हो रहा है। पहली बार ड्यूडेनम( पैंक्रियाज के पास) दूसरी बार दायी तरफ बड़ी आंत में इस बार बायीं तरह बड़ी आंत में कैंसर हुआ। इसके पीछे अनुवांशिक कारण हो सकता है जिसका पता लगने के लिए हम शोध कर रहे हैं।

सोमवार, 17 जुलाई 2023

new technology will increase the beauty of nose by 90 percent-Every month 25 people are coming to PGI to fix the beauty of the nose.











new technology will increase the beauty of nose by 90 percent



Every month 25 people are coming to PGI to fix the beauty of the nose.


 


Now people are coming to plastic surgeon not only for treatment but also for beauty. Every month 25 to 30 girls and boys are coming to the plastic surgery department of Sanjay Gandhi PGI to beautify the nose. Head of the department, Prof. in the continuing medical education program organized on the foundation day of the department. Rajeev Aggarwal delivered a special lecture on Rhinoplasty, a technique for reshaping the nose. Pro. Agarwal told that there are many types of defects in the texture of the nose, such as being buried, being crooked, and others. Most of the people look at the nose. There is a negative effect if the nose is not beautiful. There are 10 to 12 techniques to cure nose which are used in different problems. Through these techniques, it is possible to improve the texture of the nose up to 90 percent. In road accidents, many times the injury on the nose worsens, which can be corrected with surgery. If the white spot is not increasing, then its treatment is also possible through surgery skin replacement. On this occasion, Dr. Kapil Agarwal from KEM Mumbai, Dr. Taimur from Oman, Dr. Vaibhav Khanna from Mendata, Prof. SGPGI. Ankur Bhatnagar, Prof. Anupama Singh, Dr. Tanjum Kamboj, Dr. Bhupesh, Dr. Rajeev Bharti, Dr. Nikhalesh, Dr. Gautam and other experts told that the role of plastic surgery is due to accident, congenital malformation, burn, nervous problem, bed sore, wound. It plays an important role in treatment. Director Prof. RK Dhiman congratulated on the foundation day of the department.


  Wounds will heal quickly with new technology


Prof. of the Dept. Ankur Bhatnagar and Prof. Anupama Singh told that the wound can be cured quickly through negative pressure wound therapy. In this therapy, negative pressure is given on the wound with a machine, due to which the infection, pus comes out from the run. The obstructed blood flow in the wound begins to return to normal. The wound starts healing quickly. If the wound heals in a month with normal dressing, it heals in 14 to 15 days with this therapy.

Eye pressure is proving to be the main cause of glaucoma

 PG Course on PGI Ophthalmology





Like blood pressure, pressure also increases in the eye.


Pressure in the eye can damage the optic nerve


Eye pressure is proving to be the main cause of glaucoma


 


 


Like blood pressure, the pressure of the eye also increases (ocular hypertension), which can lead to optic nerve damage if not treated properly at the right time. This can prove to be the cause of glaucoma. It is not possible in all cases to restore eyesight after nerve damage. After the age of 40, every person should get eye pressure checked. All such information was given by the Department of Ophthalmology of Sanjay Gandhi PGI in the post graduate course. More than 110 students and more than 60 ophthalmologists from all over the state participated in the course. Students were informed about various eye diseases and their treatment. Head of the department Prof. Vikash Kanojia and Prof. Rachna Aggarwal told that feeling pressure or pain in the eyes is completely different from the rest of the eye problems. It starts from another part of the brain. Sometimes it also happens due to stress, headache, cluster headache, migraine etc. Glaucoma is a result of pressure inside our eye. There is pain in the eyes due to red eyes or allergies in the eyes. There is a feeling of pressure or pain, burning and stinging behind the eyes. Sometimes due to this, the strain in the eyes also increases. Experts said that the rate of loss of vision can be significantly reduced by taking treatment of pressure in the eye like taking blood pressure throughout life.


  


what is eye pressure


laucoma can occur if the eye pressure increases beyond a certain amount, the eye pressure is normally found between 10 to 21 millimeters of mercury. Sometimes this disease can be found even with normal pressure.


what is the treatment


 


 Prostamides, prostaglandin analogs and parasympathomimetic, beta-blockers increase fluid flow and carbonic anhydrase inhibitors (CAIs) prevent excess water retention. Alpha-adrenergic agonists reduce pressure in the eye by reducing aqueous production and increasing uveoscleral flow. Prostamide or prostaglandin combination with brimonidine has shown significant benefit.


Facial pits can be filled without operation with filler technology

 



Technology will start soon in PGI


There will be no need for operation to fill the depressed nose, thin lips and facial pits. Rather, the plastic surgeon will make the size of that part normal by inflating it with medicine by injection. This technique is called filler in medical language. Doctors of PGI's Plastic Surgery Department will soon use this technique on patients.

Head of the plastic surgery department of PGI Prof. Rajeev Aggarwal told that there is a pit somewhere in the skin of the face, throat, hands and feet or the skin is pressed. It is operated and transplanted by taking skin from another place. However, with the advent of filler technology, the operation will no longer be required. Rather, by applying the injection inside the pit and pressed skin, that part will swell up to normal size in a few minutes. Thin lips can also be enlarged with this technique. Dr. Aggarwal told that if there is any change in the size of that part after one to one and a half years. So you can get injected again.

Prof. Rajeev Aggarwal told that the cost of injection is around 10 to 15 thousand. Presently these injections are available in America, but many companies are making these injections in the country as well. After coming into the indigenous injection market, its prices will come down.

रविवार, 16 जुलाई 2023

फिलर तकनीक से बिना ऑपरेशन भरे जा सकेंगे चेहरे के गड्ढे

 फिलर तकनीक से बिना ऑपरेशन भरे जा सकेंगे चेहरे के गड्ढे






- पीजीआई में जल्द शुरू होगी  तकनीक 

दबी हुई नाक, पतला होंठ व चेहरे के गड्ढे को भरने के लिए ऑपरेशन की जरूरत नहीं होगी। बल्कि प्लास्टिक सर्जन इंजेक्शन लगाकर उस हिस्से का आकार दवा से फूलाकर सामान्य कर देंगे। इस तकनीक को चिकित्सा भाषा में फिलर कहते हैं। पीजीआई के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉक्टर इस तकनीक का उपयोग जल्द मरीजों पर करेंगे।
पीजीआई के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. राजीव अग्रवाल ने बताया कि चेहरा, गला, हाथ व पैर की त्वचा में कहीं गड्ढा है या त्वचा दबी हुई है। उसका ऑपरेशन कर दूसरे स्थान त्वचा लेकर प्रत्यारोपण किया जाता है। हालांकि फिलर तकनीक आने से अब ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी। बल्कि इंजेक्शन गड्ढा व दबी त्वचा के भीतर लगाने से वह हिस्सा कुछ मिनट में फूलकर सामान्य आकार में आ जाएगा। इस तकनीक से पतले होंठ को भी बड़ा किया जा  सकता है। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि एक से डेढ़ साल बाद उस हिस्से के आकार में यदि कुछ बदलाव होता है। तो दोबारा इंजेक्शन लगावा सकते हैं। 
प्रो राजीव अग्रवाल ने बताया कि इंजेक्शन की कीमत करीब 10 से 15 हजार है। मौजूदा समय में यह इंजेक्शन अमेरिका में उपलब्ध हैं, लेकिन देश में भी कई कम्पनियां यह इंजेक्शन बना रही हैं। स्वदेशी इंजेक्शन बाजार में आने के बाद इसकी कीमतें कम हो जाएगी।

ब्लड प्रेशर की तरह आंख में भी बढ़ता है प्रेशर-ग्लूकोमा का मुख्य कारण साबित हो रहा है आँख में प्रेशर


ब्लड प्रेशर की तरह आंख में भी बढ़ता है प्रेशर

आंख में प्रेशर को आप्टिक नर्व हो सकता है डैमेज

ग्लूकोमा का मुख्य कारण साबित हो रहा है आँख में प्रेशर

 

 

ब्लड प्रेशर की तरह आंख का भी प्रेशर बढ़(ओकुलर हाइपरटेंशन) जाता है जिसकी सही समय पर सही इलाज न होने पर आप्टिक नर्व डैमेज हो सकती है। यह ग्लूकोमा का कारण साबित हो सकता है। नर्व डैमेज होने के बाद आंख की रोशनी लाना तमाम मामलों में संभव नहीं होता है। 40 की उम्र के बाद हर व्यक्ति को आंख प्रेशर की जांच करानी चाहिए। ऐसी ही तमाम जानकारी संजय गांधी पीजीआई के नेत्र रोग विभाग द्वारा पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में दी गयी। कोर्स में पूरे प्रदेश से 110 से अधिक छात्र और 60 से अधिक नेत्र रोग विशेषज्ञ भाग लिए। छात्रों की आंख की कई बीमारी और इलाज के बारे में जनाकारी दी गयी। विभाग के प्रमुख प्रो.विकास कनौजिया और प्रो. रचना अग्रवाल ने बताया कि आंखों में दबाव होना या दर्द महसूस होना, आँखों की बाक़ी समस्या से एकदम अलग है। यह मस्तिष्क के दूसरे हिस्से से शुरू होता है। कई बार तनाव, सिरदर्द, क्लस्टर सिरदर्द, माइग्रेन आदि वजह से भी हो जाती है। ग्लूकोमा हमारी आँख के अंदर दबाव का एक परिणाम है। लाल आंखें हो जाना या आँखों में एलर्जी हो जाने से आँखों में दर्द तो होता है। आँखों के पीछे होने वाले दबाव या दर्द ,  जलन और चुभन का अहसास होता है। कई बार इसकी वजह से आँखों में खिंचाव भी अधिक बढ़ जाता है। विशेषज्ञों ने कहा कि आंख में प्रेशर का इलाज जैसे पूरे जीवन ब्लड प्रेशर का लेना होता है बैसे लेकर रोशनी घटने की दर को काफी कम किया जा सकता है।

  

क्या है आंख का प्रेशर

आंखों का प्रेशर एक तय मात्रा से ज़्यादा बढ़ा होता है तो ग्लूकोमा हो सकता है, आंखों का प्रेशर नॉर्मल तौर पर 10 से 21 मिलीमीटर ऑफ मरक्यूरी के बीच में पाया जाता है। कभी-कभी नॉर्मल प्रेशर के साथ भी ये बीमारी पाई जा सकती है।

क्या है इलाज

 

 प्रोस्टामाइड्स, प्रोस्टाग्लैंडीन एनालॉग और पैरासिम्पेथोमेटिक्स, बीटा-ब्लॉकर्स द्रव प्रवाह को बढ़ाता और कार्बोनिक एनहाइड्रेज़ इनहिबिटर (सीएआई) अधिक पानी बनने से रोकता है।  अल्फा-एड्रीनर्जिक एगोनिस्ट जलीय उत्पादन को कम करके और यूवेओस्क्लेरल प्रवाह को बढ़ाकर आंख में दबाव को कम करते हैं।  ब्रिमोनिडाइन के साथ प्रोस्टामाइड या प्रोस्टाग्लैंडीन कंबीनेशन में देने से काफी लाभ देखा गया है।

नई तकनीक से 90 फीसदी बढ़ेगी नाक की सुंदरता

 पीजीआई प्लास्टिक सर्जरी विभाग का स्थापना दिवस



नई तकनीक से 90 फीसदी बढ़ेगी नाक की सुंदरता

पीजीआई में हर महीने 25 लोग आ रहे है नाक की सुंदरता ठीक कराने

 

अब इलाज के ही नहीं सुंदरता के लिए भी लोग प्लास्टिक सर्जन के पास आ रहे है। संजय गांधी पीजीआई के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में हर महीने 25 से 30 लड़कियां और लड़के नाक की बनावट को सुंदर बनाने के लिए आ रहे है। विभाग स्थापना दिवस पर आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम में विभाग के प्रमुख प्रो. राजीव अग्रवाल ने नाक की बनावट ठीक करने की तकनीक राइनोप्लास्टी पर विशेष व्याख्यान दिया। प्रो. अग्रवाल ने बताया कि नाक की बनावट में कई तरह की खराबी होती है जैसे नाम दबी होना, टेढी होना सहित अन्य शामिल है। नाक पर सबसे नजर लोगों की पड़ती है। नाक सुंदर न होने पर निगेटिव प्रभाव पड़ता है। नाक को ठीक करने की 10 से 12 तकनीक है जिसका अलग –अलग परेशानी में इस्तेमाल होता है। इन तकनीकों के जरिए 90 फीसदी तक नाक की बनावट में सुधार संभव है। रोड एक्सीडेंट में कई बार नाक पर चोट लगने से खराब हो जाती है जिससे सर्जरी से ठीक किया जा सकता है। सफेद दाग यदि बढ़ नहीं रहा है तो इसका भी इलाज सर्जरी स्किन रीप्लेसमेंट के जरिए संभव है। इस मौके पर केईएम मुंबई के डा. कपिल अग्रवाल, ओमान से डा. तैमूर, मेंदाता के डा. वैभव खन्ना , एसजीपीजीआई के  प्रो. अंकुर भटनागर, प्रो. अनुपमा सिंह, डा. तंजुम कंबोज, डा. भूपेश, डा. राजीव भारती, डा. निखलेश , डा. गौतम सहित अन्य विशेषज्ञों बताया कि प्लास्टिक सर्जरी की भूमिका एक्सीडेंट, जंमजात बनावटी खराबी, बर्न, नसों की परेशानी, बेड शोऱ , घाव के इलाज में अहम भूमिका है। निदेशक प्रो.आरके धीमन ने विभाग के स्थापना दिवस पर बधाई दिया।

  नई तकनीक से जल्दी भरेगा घाव

विभाग के प्रो. अंकुर भटनागर एवं प्रो. अनुपमा सिंह ने बताया कि नेगेटिव प्रेशर वुंड थेरेपी के जरिए घाव को जल्दी ठीक किया जा सकता है। इस थेरेपी में एक मशीन के साथ नेगेटिव प्रेशर घाव पर दिया जाता है जिससे धाव से संक्रमण , पस बाहर आ जाता है । घाव में बाधित रक्त प्रवाह सामान्य होने लगता है। घाव जल्दी भरने लगता है। सामान्य ड्रेसिंग से यदि घाव एक महीने में भरता है तो इस थेरेपी से 14 से 15 दिन में भर जाता है। 

शनिवार, 8 जुलाई 2023

डॉ ज्ञान चंद्र ने पोस्टीरियर रेट्रोपेरिटोनियोस्कॉपिक विधि से की रोबोटिक सर्जरी

 

एसजीपीजीआई ने फि‍र रचा इतिहास, एड्रेनल ग्रंथि के ट्यूमर को एक छेद से निकाला





-डॉ ज्ञान चंद्र ने पोस्टीरियर रेट्रोपेरिटोनियोस्कॉपिक विधि से की रोबोटिक सर्जरी

-कुशिंग सिंड्रोम से ग्रस्‍त आठ वर्षीय बच्‍चा हो गया था शरीर से बेडौल

-चेहरे पर सूजन, गर्दन में कूबड़ के साथ ही पेट हो गया था मोटा

-दो ज्‍यादा दवाओं से भी कंट्रोल नहीं हो रहा था बच्‍चे का ब्‍लड प्रेशर

उत्तर प्रदेश में पहली एवं संपूर्ण भारत के किसी भी सरकारी संस्थान में होने वाली पहली ऐसी सर्जरी की गई, जिसमें किसी बच्चे की एड्रेनल ग्रंथि के ट्यूमर को पोस्टीरियर रेट्रो पेरिटोनियो स्कॉपिक विधि से रोबोट द्वारा निकाला गया है।

लखनऊ  निवासी 08 वर्षीय  विशाल  (परिवर्तित नाम) के दाहिनी एड्रिनल  ग्रंथि में ट्यूमर  हो गया था , जो लगातार बढ़ रहा था  और जाँच करने पर पता चला उससे कोर्टिसोल नामक हार्मोन अधिक मात्रा में स्रावित हो रहा था जिसे कुशिंग सिंड्रोम कहते है , जिसके कारण बच्चे का ब्लड प्रेशर बहुत बढ़ गया था  और उसके लिए उसको ब्लड प्रेशर की दो से ज्यादा दवाइया लेनी पड  रही थी। फिर भी बीच में बीच में उसका ब्लड प्रेशर बढ़ जाता था।  इसके अलावा इस हॉर्मोन की अधिकता से  उसका चेहरा सूज गया था, गर्दन में कूबड़ निकल आया था , पेट मोटा हो गया था तथा चेहरे पर बाल व मुहासे निकल आये थे जिससे आठ साल का बच्चा १३-१४ वर्ष का लगने लगा था। सी टी स्कैन कराने पर पता चला कि बच्चे की दाहिने एड्रेनल ग्रंथि, जो गुर्दे के ऊपर होती है , मे ट्यूमर  है। इसी क्रम में की गई जांचो से ज्ञात हुआ कि सारी तकलीफ ट्यूमर से निकलने वाले कोर्टिसोल नामक हॉर्मोन की वजह से है। 


 इन सब परिस्थितियों को देखते हुए बच्चे को डॉ ज्ञान चंद, एंडोक्राइन सर्जन के पास पी जी आई , लखनऊ  रेफर कर दिया गया।  डॉ ज्ञान चंद ने मरीज को भर्ती करके एंडोक्रिनोलोजिस्ट की मदद से पहले बच्चे  का ब्लड प्रेशर नियंत्रित किया। फिर अन्य जांचे करा कर उसका उपचार  तय किया।  जांचो से पता चला की  ट्यूमर बहुत ही जटिल है और आस पास के अंगो से चिपका हुआ है। 

डॉ ज्ञान चंद ने परिजनों को बताया की यदि पोस्टीरियर रेट्रो पेरिटोनियो स्कॉपिक रोबोटिक अड्रेनलेक्टोमी विधि द्वारा इसका ऑपरेशन किया जाये तो कम तकलीफ से टूयूमर को निकाला  जा सकता है।  इस विधि  से ऑपरेशन करने पर  मरीज को कम दर्द होता है ,  तेजी से ठीक हो जाता है , ट्यूमर भी पूरा निकल जाता है और  पारम्परिक रोबोटिक एड्रेनल सर्जरी से खर्चा भी कम आता है।  

परिजनों की सहमति के बाद बीते शुक्रवार को डॉ  ज्ञान चंद ने ढाई घंटे चले  ऑपरेशन द्वारा  विशाल के पेट से  रोबोटिक विधि द्वारा सफलता पूर्वक एड्रेनल टयूमर को पीठ की तरफ छोटे से  छेद द्वारा  निकल दिया।  

ऑपरेशन में डॉ ज्ञान चंद के साथ उनकी टीम में डॉ अभिषेक कृष्णा , डॉ दिब्या व डॉ रीनेल शामिल रहे। साथ ही एनेस्थीसिया में डॉ अमित रस्तोगी , डॉ संजय धिराज और उनकी टीम ने सहयोग किया ।


उक्त ऑपरेशन व बीमारी के बारे में जानकारी देते हुए डॉ ज्ञान चन्द ने बताया कि रोबोटिक पोस्टीरियर रेट्रो पेरिटोनियो स्कॉपिक अड्रेनलेक्टोमी  विधि द्वारा  एड्रेनल  ट्यूमर की सर्जरी में  बिना पेट में गए , पीठ की तरफ से बहार से ही  रोबोटिक सर्जरी द्वारा छोटे से छेद  से एड्रेनल ट्यूमर  को निकाला जाता है। पूरी प्रक्रिया बेहद जटिल है किन्तु मरीज़ को भविष्य में आने वाली कठिनाइयों से राहत देने वाली है क्योंकि कुशिंग सिंड्रोम में अमूमन मरीज़ को शल्य चिकित्सा के बाद इन्फेक्शन होने का तथा हर्निया बनाने का खतरा अधिक रहता है , जिससे मरीज़ को लम्बे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ जाता है या उसे बार बार ऑपरेशन कराने की आवश्यकता पड़ जाती है।   

लेकिन  रोबोटिक पोस्टीरियर रेट्रो पेरिटोनियो स्कॉपिक  विधि  द्वारा ऑपरेशन करने पर ऐसा नहीं होता । डॉ  ज्ञान ने अपने विभागाध्यक्ष डॉ गौरव अग्रवाल के मार्गदर्शन को भी सराहा। 

 उत्तर प्रदेश में इस प्रकार की पहली रोबोटिक सर्जरी हुई है एवं संपूर्ण भारत में किसी भी सरकारी संस्थान में होने वाली पहली ऐसी सर्जरी है जिसमें एड्रेनल ट्यूमर  को बच्चे में पोस्टीरियर रेट्रो पेरिटोनियो स्कॉपिक  विधि   द्वारा रोबोट से निकाला गया है।



बुधवार, 5 जुलाई 2023

जीन सिक्वेंसिंग से काफी पहले लग सकता है अनुवांशिक बीमारी का पता

 प्रो.एसएस अग्रवाल स्मृति व्याख्यान

 



जीन सिक्वेंसिंग से काफी पहले लग सकता है अनुवांशिक बीमारी का पता

 

गर्भधारण से पहले शिशु में लगाएं बीमारी की आशंका का पता  

 

नेक्स्ट जनरेशन जीन सिक्वेंसिंग तकनीक के जरिए गर्भधारण के पहले भी शिशु में आनुवांशिक बीमारियों का पता लग सकता है। होने वाली संतान स्वस्थ हो इसके लिए जरूरी है जिनके परिवार अनुवांशिक बीमारी डाउन सिंड्रोम, आंख की परेशानी, कम लंबाई, थैलेसीमिया, रीढ़ की हड्डी में बनावटी खराबी सहित अन्य से ग्रस्त बच्चे का जन्म हो चुका है उन दंपति के जरूर  जांच करानी चाहिए। जीन सिक्वेंसिंग में 20 हजार जीन की जांच एक साथ होती है यह काफी एडवांस तकनीक है। यह जानकारी संजय गांधी पीजीआई में प्रो,एसएस अग्रवाल के स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में एम्स दिल्ली के अनुवांशिक विशेषज्ञ प्रो.मधुलिका काबरा ने दी। बताया कि पांच फीसदी अनुवांशिक बीमारी का इलाज है । देखा गया कि बीमारी का पता न लगने से परिजन परेशान रहते है। बीमारी का पता लगने के बाद अगले संतान में आशंका का पता लगा जाता है। देखा गया है अभी भी बीमारी का पता लगने में आठ से 10 साल लग जाते है। परिजन भटकते रहते है। सही जानकारी मिल जाने के बाद परिजन काफी हद तक संतुष्ट हो जाते है। निदेशक प्रो. आरके धीमन और डीन प्रो.एसपी अंबेश ने कहा कि प्रो. अग्रवाल बहुत ही दूर दृष्टि वाले थे। तीस साल पहले ही उन्होंने देश के पहले जेनेटिक्स एंड इम्यूनोलॉजी विभाग को स्थापित किया। आज इम्यूनोलॉजी काफी महत्वपूर्ण हो गया है। जेनेटिक्स के विकास के बाद बीमारी का पता लगने से साथ कई बीमारियों में जीन थेरेपी भी शुरू हो गयी है। विभाग की प्रमुख प्रो. शुभा फड़के और क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रो. अमिता अग्रवाल ने बताया कि हम लोगों के प्रो. अग्रवाल टीचर रहे है । जब विभाग एक साथ था । आज उन्हीं की सोच की देन है कि तमाम बीमारियों का इलाज और जांच संभव हो पा रहा है। इस मौके पर मुख्य रूप से कर्मचारी महासंघ के पूर्व महामंत्री धर्मेश कुमार इम्यूनोलॉजी विभाग के विनोद त्रिवेदी कार्यालय अधीक्षक मनोज श्रीवास्तव सहित तमाम लोग उपस्थित हुए   

शनिवार, 1 जुलाई 2023

पीजीआई- बंद सांस नली को खोला और जोड़ा जबड़ा बचा बच्चे का जीवन

 पीजीआई- बंद सांस नली को खोला और जोड़ा जबड़ा बचा बच्चे का जीवन

 


चोट लगने से टूट गई थी निचले जबड़े की हड्डी और जीभ से बंद हो गई थी सांस नली

 

 

सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल बछरावां निवासी 5 वर्षीय रूद्र सोनी को लेकर परिजन 22 जून  को  प्रातः 10:00 बजे संजय गांधी पी जी आई के ट्रामा सेंटर पहुंचे । एपेक्स ट्रामा सेंटर के ओरल व मैक्सिलो फेशियल सर्जन डॉ. कुलदीप विश्वकर्मा ने बच्चे का निरीक्षण कर पाया कि बच्चे की जीभ हड्डी से अलग होकर साँस की नली में फंस गई थी व निचले जबड़े की हड्डी टूट गई थी। साथ ही बहुत अधिक मात्रा में रक्तस्त्राव हो रहा था। डा. कुलदीप व उनकी टीम ने रक्तस्राव की रोकथाम कर सभी जरूरी जाँचो के उपरान्त शीघ्रतम बच्चे को इमरजेंसी ऑपरेशन थियेटर में ले गए। पहले जीभ जो सांस नली को रोक रही थी उसे ठीक सांस नली की रुकावट को दूर किया। ट्यूब डालकर सांस नली को ठीक किया। इसके बाद निचले जबड़े की हड्डी को प्लेट लगाकर जोड़ा। बच्चा दो दिन वेंटिलेटर पर रखा । सब कुछ ठीक हो गया। डा. कुलदीप के मुताबिक बच्चा के पिता स्कूटी से लेकर जा रहे थे इसी दौरान चोट लगी। बताया कि  गंभीर चोटो मे निश्चेतना व सर्जरी दोनों ही जटिल होती है। चार घंटे की जटिल सर्जरी के बाद बालक की जीभ व जबड़े की हड्डी को जोड़ा गया। अपर ऐयर वे की चोट की वजह से ऐसे मरीजो को आपरेशन के बाद वेंटीलेटर पर रखा जाता है । रोगी बालक दो दिन बाद वेंटिलेटर से बाहर आया और उसके तीन दिन बाद वार्ड में शिफ्ट किया गया | बालक स्वस्थ व सकुशल है। संपूर्ण  उपचार 24 घंटे मुफ्त इलाज की सेवा के अन्तर्गत किया गया है।

इस टीम ने दिया जीवन

 ओरल व मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग से  डा0 अंजली चौधरी, डा0 सुरेन्द्र जामवाल व डा0 अनूप दीक्षित । एनेस्थीसिया की टीम मे डा. वंश, डॉ सुरुचि, डॉ गनपत, डॉ अर्चना, डॉ० मेघना, डॉ अर्पिता, डॉ० अजीत शामिल रहे। 

 

 

सोमवार, 5 जून 2023

SGPGIMS ने 7वीं अखिल भारतीय रैंक हासिल की, संस्थान ने वर्ष 2023 के लिए

 




राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) को मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा अनुमोदित किया गया था और 29 सितंबर, 2015 को माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री द्वारा लॉन्च किया गया था। यह ढांचा देश भर में संस्थानों को रैंक करने के लिए एक पद्धति की रूपरेखा तैयार करता है। एनआईआरएफ ( NIRF) मापदंडों के पांच व्यापक सामान्य समूहों में संस्थानों की रैंकिंग प्रदान करता है जो इस प्रकार हैं:

 i) शिक्षण, सीखना और संसाधन;

 ii) अनुसंधान और व्यावसायिक अभ्यास;

 iii) स्नातक परिणाम;

 iv) आउटरीच और समावेशिता; 

v) अवधारणा। 

इनमें से कई पैरामीटर विश्व स्तर पर  सामान्य हैं और शिक्षण, सीखने और अनुसंधान के लिए पर्यावरण के संकेतक के रूप में काम करते हैं। हालाँकि, कुछ भारत-केंद्रित पैरामीटर हैं, जो उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) में नामांकित हमारे युवाओं की बढ़ती संख्या की आकांक्षाओं को दर्शाते हैं।

संजय गांधी पी जी आई  की स्थापना 1983 में राज्य विधानमंडल अधिनियम के तहत की गई थी। इसे उच्चतम क्रम की चिकित्सा सेवा, शिक्षा और अनुसंधान प्रदान करने के लिए उत्कृष्टता केंद्र ( centre of excellence) के रूप में बनाया गया था। अस्पताल प्रशासन विभाग ने पहल की और यह सुनिश्चित किया कि वर्ष 2018 में एनआईआरएफ रैंकिंग के लिए चिकित्सा संस्थानों के लिए एक अलग श्रेणी बनाई जाए। इसके बाद,  यह विभाग संस्थान के डेटा को प्राप्त करने, छानबीन करने, समरूप बनाने, NIRF रैंकिंग के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने और जमा करने के लिए जिम्मेदार है। 


 वर्ष 2022 के लिए भारत रैंकिंग अभ्यास में भागीदारी के आधार पर, जहां SGPGIMS ने 7वीं अखिल भारतीय रैंक हासिल की, संस्थान ने वर्ष 2023 के लिए  भी इस प्रतिष्ठित NIRF रैंकिंग के लिए खुद को पंजीकृत किया था।

5 जून, 2023 को, श्री राजकुमार रंजन सिंह, माननीय विदेश राज्य मंत्री और शिक्षा, भारत सरकार ने विभिन्न श्रेणियों के लिए एनआईआरएफ 2023 रैंकिंग जारी की। NIRF 2023 के लिए, SGPGIMS ने मेडिकल श्रेणी में 7वां स्थान अर्जित किया।

एस जी पी जी आई की जारी एनआईआरएफ-2023 रैंकिंग के मुख्य अंशों का उल्लेख इंफ्रा में किया गया है:

समग्र स्कोर 67.18 से बढ़कर 69.62 हो गया (2.44 की वृद्धि)


छात्र संख्या (एसएस) में 9.67 से 13.76 की वृद्धि (4.09 की वृद्धि)


वित्तीय संसाधनों और उनके उपयोग में वृद्धि (FRU) 23.93 से 28.37 (4.44 की वृद्धि)


1.00 की बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) और पेटेंट, प्रकाशित, अनुदानित और लाइसेंस (IPR) में वृद्धि


विश्वविद्यालय परीक्षाओं (GUE) के लिए मीट्रिक में 22.80 से 25.00 तक की वृद्धि (2.20 की वृद्धि)


10.28 से 12.36 तक अन्य राज्यों/देशों (क्षेत्रीय विविधता; आरडी) से छात्रों के प्रतिशत में वृद्धि (2.08 की वृद्धि)


महिलाओं के प्रतिशत में वृद्धि (महिला विविधता) 23.44 से 24.74 (1.3 की वृद्धि)


SGPGIMS ने अपनी रैंकिंग स्थिति को बनाए रखा है, लेकिन छात्रों की संख्या, वित्तीय संसाधनों और उनके उपयोग और ऊपर बताए गए अन्य क्षेत्रों में सुधार दिखाया है।


बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) इस साल 8वें स्थान पर है, जबकि किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) 12वें स्थान पर है।


एनआईआरएफ रैंकिंग 2023 की समग्र कवायद  संस्थान के निदेशक प्रो. आर.के. धीमन और विभागाध्यक्ष, अस्पताल प्रशासन, डॉ. आर. हर्षवर्धन, के प्रयासों के माध्यम से की गई थी। प्रो. एस पी अंबेश, डीन और श्री वरुण वाजपेयी, कार्यकारी रजिस्ट्रार, भी एन आई आर एफ रैंकिंग अभ्यास में सहायक थे। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अस्पताल प्रशासन विभाग के रेजिडेंट्स चिकित्सकों का अतुलनीय योगदान रहा।

गुरुवार, 1 जून 2023

माइक्रोवस्कुलर तकनीक से जुड़ी उंगली कटी उंगली का पीजीआई में हुआ प्रत्यारोपण सर्जरी

 






माइक्रोवस्कुलर तकनीक से जुड़ी उंगली

 कटी उंगली का पीजीआई में  हुआ प्रत्यारोपण सर्जरी


सुल्तानपुर जिले के ग्राम सुरजाम में रहने वाले 9 वर्षीय श्लोक दायें हाथ की दो उंगली चारा काटने की मशीन में फंस  कट गयी जो पूरी तरह से अलग हो गई। परिजन बच्चे को कटी उंगली के साथ लेकर सुबह 10 बजे के आस-पास एपेक्स ट्रामा सेंटर पहुंचे । ट्रामा सेंटर से इस मामले की जानकारी मिली तो तुरंत प्लास्टिक सर्जरी विभाग की टीम एलर्ट हो हो कर कटी उंगली के प्रत्यारोपण के तैयारी में लग गयी। पहले अलह हुई उंगली के साफ किया गया इसके बाद जहां से उंगली कटी थी उसे साफ किया गया। सारी तैयारी के बाद बुधवार को तीन बजे सर्जरी शुरू हुई जो सात घंटे चली। प्रत्यारोपण पूरी तरह सफल रहा । विभाग के प्रमुख एवं मुख्य सर्जन प्रो. राजीव अग्रवाल ने बताया कि   उंगली के प्रत्यारोपण में अत्यंत सूक्ष्म एवं पतली धमनियों को माइक्रोवस्कुलर सर्जरी की तकनीक से जोडा गया।  यह सर्जरी जटिल एवं परिष्कृत होती है और इन धमनियों को जोड़ने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। प्रत्यारोपण एक  जटिल प्रक्रिया 8 से 12 घंटे लगते है। सर्जरी में  गंभीर जटिलता जुड़ी हुई हड्डियों ठीक से जोड़ने में होती है।  अधिकांश  मामलों में  अच्छे से परिणाम होते है। उंगली जो जोड़ी गयी है उसमें  कम गति शीलती सर्जरी के बाद हो सकती है।

ऐसे की गई सर्जरी

सबसे पहले कटी उंगली को जोड़ने के लिए  में हड्डी को के वायर से  जोडा जाता है। इसके   उंगली की धमनी ( आर्टरी) को जोड़ते है जिससे उंगली में रक्त का संचार हो जाये। इसके बाद उंगली की शिरा (वेन) को जोड़ते है फिर  बाद नस (नर्व) को जोड़ा जाता है के साथ  टेंडन को जोड़ते हैं।  आखिरी में त्वचा को जोडा ।

            

ऐसे लाएं कटे अंग

कटे हुए अंग का  साफ पॉलीथिन में रखना चाहिये ।  इस पॉलीथिन  दूसरी पॉलीथीन में डालना चाहिये जिसमें बर्फ पडी हो। इससे कटा हुए हिस्सा ठंडा रहे।

इस टीम ने दिया सर्जरी को अंजाम

प्लास्टिक सर्जरी विभाग से प्रो. राजीव अग्रवाल, डा. भारती. डा. निखलेश, डा. भूपेश, डा. गौतम नर्सिंग स्टाफ  प्रतिभा, अमृता   निश्चेतना विभाग से डा0 आरती अग्रवाल, डा सुमित, डा. दिव्या, डा. नुपूर