एपेक्स ट्रॉमा सेंटर, एसजीपीजीआई में जटिल चेहरे की चोट का सफल उपचार
सड़क हादसे में घायल 24 वर्षीय युवक के चेहरे की हड्डी, फेशियल नर्व और पैरोटिड डक्ट क्षतिग्रस्त; तीन चरणों में किया गया पुनर्निर्माण
लखनऊ। एपेक्स ट्रॉमा सेंटर, एसजीपीजीआई में सड़क दुर्घटना में गंभीर चेहरे की चोट से घायल 24 वर्षीय मरीज का सफल उपचार किया गया है। यह एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण केस था, जिसमें ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, न्यूरोसर्जरी और एनेस्थीसिया विभाग की टीमों ने समन्वित प्रयास से सर्जरी को अंजाम दिया।
मरीज के चेहरे पर गहरा घाव था। जांच में फेशियल नर्व की टेम्पोरल, जाइगोमैटिक और बक्कल शाखाएं पूरी तरह कटी मिलीं। लार को मुंह तक पहुंचाने वाली स्टेनसन्स डक्ट (पैरोटिड डक्ट) भी कट गई थी। साथ ही जाइगोमैटिक बोन (गाल की हड्डी) और जाइगोमैटिक आर्च में कमिन्यूटेड फ्रैक्चर था।
तीन चरणों में जटिल पुनर्निर्माण
सर्जरी की चरणबद्ध योजना बनाई गई। पहले चरण में टूटी हुई जाइगोमैटिक बोन और आर्च का पुनर्निर्माण कर चेहरे की आकृति बहाल की गई। दूसरे चरण में क्षतिग्रस्त फेशियल नर्व की माइक्रोसर्जिकल रिपेयर की गई। नर्व का एक हिस्सा नष्ट होने के कारण सुरल नर्व ग्राफ्टिंग कर दोनों सिरों को जोड़ा गया। तीसरे चरण में कटे स्टेनसन्स डक्ट को जोड़कर उसकी निरंतरता के लिए इंट्राडक्टल स्टेंट लगाया गया।
टीमवर्क से मिली सफलता
इस सर्जरी में ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी टीम ने केंद्रीय भूमिका निभाई। टीम में डॉ. कुलदीप विश्वकर्मा, डॉ. भारत शुक्ला, डॉ. अपूर्वा और डॉ. दीक्षा शामिल रहीं। प्लास्टिक सर्जरी टीम से डॉ. अंकुर भटनागर, डॉ. निखिलेश और डॉ. सताक्षी ने सॉफ्ट-टिशू व नर्व रिकंस्ट्रक्शन किया। न्यूरोसर्जरी से डॉ. वेद, एनेस्थीसिया से डॉ. वंश, डॉ. विष्णु, डॉ. जगदीश और डॉ. आरती ने सहयोग दिया। नर्सिंग टीम में सुनीता फ्रेडरिक, सरिता, अंकिता और दीक्षा शामिल रहीं।

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