रक्तदान से डरें नहीं, 98 फीसदी को नहीं होती परेशानी
पहली बार चक्कर तो विशेषज्ञों ने डर का तोड़ खोजा
लखनऊ
परिजन को खून की जरूरत पर लोग दोस्तों-रिश्तेदारों से रक्तदान को कहते हैं, पर कमजोरी, चक्कर जैसे डर से कई लोग आनाकानी करते हैं, । इसी डर को केजीएमयू-एसजीपीजीआइ के वैज्ञानिकों ने खारिज किया है। उनका कहना है यही छोटा-सा डर यूपी में हजारों यूनिट रक्त की कमी की बड़ी वजह है।
केजीएमयू और एसजीपीजीआइ के विशेषज्ञों ने दो साल में 5,003 लोगों पर स्टडी कर पाया रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित है। 98.3 फीसदी को कोई दिक्कत नहीं हुई। सिर्फ 1.7 फीसदी को चक्कर, पसीना जैसी सामान्य परेशानी हुई, जिसे वेसोवैगल रिएक्शन कहते हैं। यह बीमारी नहीं है। 2 मिनट पैर ऊंचे कर लिटाने, पानी पिलाने और 5 मिनट लेटने से ठीक हो गई। किसी को भर्ती करने की नौबत नहीं आई। यह रिसर्च केजीएमयू की डा. अर्चना सोलंकी, डा. आशुतोष सिंह और एसजीपीजीआई के प्रो. अतुल सोनकर व प्रो. प्रशांत अग्रवाल ने की है, जिसे एशियन जर्नल ऑफ ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन ने स्वीकार किया है।
बॉक्स: किन्हें ज्यादा ध्यान देना
स्टडी में कम उम्र के युवा, पहली बार वाले डोनर, कम वजन वाले, दोपहर में दान करने वाले और 30 मिनट से ज्यादा लाइन में इंतजार करने वालों में रिएक्शन थोड़ा ज्यादा मिला। विशेषज्ञों के मुताबिक ब्लड बैंक सुबह बुलाए, इंतजार कम कराए और पहली बार वालों से बातचीत करता रहे तो 90 फीसदी घटनाएं रुक सकती हैं। रक्तदान को जाएं तो डरें नहीं, पेट भरकर, पानी पीकर जाएं और स्टाफ को बताएं कि पहली बार आए हैं।
बॉक्स: खून की कमी से तीमारदार परेशान
20 साल पहले यूपी में स्वैच्छिक रक्तदान 2 फीसदी था। आज भी केजीएमयू, पीजीआई, लोहिया संस्थान और कल्याण सिंह कैंसर इंस्टीट्यूट में 70 फीसदी से ज्यादा रक्त परिजनों को देना पड़ता है। स्वैच्छिक दान 30 फीसदी से भी कम है। लखनऊ में रोज 200 यूनिट भी स्वैच्छिक नहीं मिल पाता, जबकि एक यूनिट से तीन जानें बचती हैं। थैलेसीमिया, कैंसर, प्रसव और रोड एक्सीडेंट में हर मिनट खून चाहिए।
बॉक्स: सुरक्षित दान का मंत्र
खाली पेट न जाएं, रात भर जाग कर न जाएं, दान के बाद 15 मिनट बैठें, जूस-पानी जरूर लें।




























