खून देने से नहीं आती है कमजोरी शरीर करता है भरपाई
किसी की ज़िंदगी बचाने की सबसे आसान कोशिश यह हो सकती है कि हम अपना ब्लड डोनेट करें। इसे महादान कहते हैं क्योंकि सिर्फ एक यूनिट खून दान देकर भी हम 3 से 4 लोगों की ज़िंदगी बचा सकते हैं। ज्यादा नहीं तो 3-4 महीने में एक बार ब्लड डोनेट किया जा सकता है।
अगर आपने अब तक ब्लड डोनेट नहीं किया है तो एक बार ज़रूर करें। यकीन मानें, बहुत ही ज्यादा खुशी मिलेगी। शरीर में डोपामाइन (हैपी हार्मोन) रिलीज होगा। मन चंगा रहेगा। वैसे भी हमारा शरीर उस खून के बदले उतना ही हीमोग्लोबिन महज 15 से 20 मिनट में तैयार कर लेता है। ऐसा भी नहीं है कि बहुत कमज़ोरी आती हो। लेकिन ब्लड डोनेशन से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है।
खून लैब में नहीं बनता इसलिए करें डोनेट
इंसान के शरीर को खून की ज़रूरत हो तो इंसानी खून ही चढ़ेगा। किसी जानवर का खून तो चढ़ नहीं सकता। वहीं, इंसानी खून को बाहर यानी कहीं लैब आदि में नहीं बना सकते। जब किसी के शरीर में खून की कमी होती है तो दवा भी ऐसी दी जाती है जिससे कि शरीर में खून बनने की प्रक्रिया तेज हो। हमारे शरीर में ज्यादातर खून का निर्माण हमारी हड्डियों में मौजूद बोन मैरो में होता है। इसलिए अगर किसी शख्स की जान बचाने के लिए खून की ज़रूरत है तो वह खून कहीं और से नहीं आ सकता। उसे कोई दूसरा शख्स डोनेट करके ही पूरा कर सकता है। इसलिए ब्लड डोनेट करना ज़रूरी है। सीधे शब्दों में कहें तो खून का कोई दूसरा सोर्स नहीं है। हमारे शरीर को जब इसकी ज़रूरत होती है तो दूसरे का शरीर ही इसे पूरा कर सकता है।
ब्लड डोनेट करने से हमें भी फायदा
- ब्लड डोनेट करने से शरीर में आयरन की मात्रा सही बनी रहती है।
- यह दिल के लिए भी फायदेमंद है और दिल को तसल्ली भी मिलती है कि चलो, हम किसी के काम आए।
-कई तरह की जांच मुफ्त में हो जाती हैं क्योंकि जब कोई शख्स ब्लड डोनेट करने जाता है तो पहले उसके ब्लड की जांच की जाती है। इनमें CBC (हीमोग्लोबिन आदि देखने के लिए), HIV, HCV, HBSAG, SYPHILIS, MALARIA शामिल हैं। इससे यह तसल्ली की जाती है कि वह शख्स इन्फेक्शन फ्री है।
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ये लोग कर सकते हैं ब्लड डोनेट
-उम्र 18 से 65 साल के बीच हो।
-वज़न कम से कम 45-50 किलोग्राम हो, साथ ही हीमोग्लोबिन कम से कम 12.5 g/dL हो।
-बीपी, पल्स रेट और बॉडी टेंपरेचर सामान्य हों।
-जिस दिन वह ब्लड डोनेट करने गया हो उसे फीवर, इन्फेक्शन आदि न हो।
-पुरुष हर 3 महीने (90 दिन) बाद और महिलाएं सामान्यतया 4 महीने (120 दिन) बाद ही दोबारा रक्तदान कर सकती हैं।
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कौन-कौन ब्लड डोनेट नहीं कर सकता?
एक सेहतमंद लोग ही ब्लड डोनेट कर सकते हैं। लेकिन ऐसा शख्स ब्लड डोनेट नहीं कर सकता:
-जो HIV पॉज़िटिव हो
-जिसे हेपेटाइटिस B या C इन्फेक्शन हुआ हो
- जो ड्रग्स लेता हो
-जो सेक्स वर्कर हो
-ज्यादातर मामलों में कैंसर, लिवर, हार्ट, किडनी, ब्रेन या लंग्स के मरीज
ये भी न करें रक्तदान
-सर्दी, खांसी, बुखार या इन्फेक्शन हो (ठीक होने के 1 से 2 हफ्ते बाद कर सकते हैं।)
-कोई ऐंटिबायोटिक दवा ले रहे हों (ठीक होने के 1 से 2 हफ्ते बाद कर सकते हैं।)
-हाल में मलेरिया, डेंगू या चिकनगुनिया हुआ हो (अमूमन 3 महीने या इससे ज्यादा समय बाद कर सकते हैं।)
-डेंगू के मामले में यह टाइमलाइन 6 महीने बाद की है। तब जब प्लेटलेट्स आदि सामान्य हो गई हों।
-अगर किसी ने परमानेंट टैटू बनवाया है या शरीर का कोई अंग छिदवाया है तो वह करीब 1 साल तक ब्लड डोनेट नहीं कर सकता।
-दांत निकलवाया हो। अगर उसमें इन्फेक्शन नहीं है तो 3 से 7 हफ्ते बाद कर सकते हैं।
-छोटी सर्जरी हुई हो तो करीब 3 महीने बाद ब्लड डोनेट कर सकते हैं।
-हाल ही में ब्लड चढ़ाया गया हो तो अमूमन एक साल तक ब्लड डाेनेट नहीं कर सकते।
-हेपेटाइटिस, थायरॉयड या हॉर्मोंस असंतुलन, जेनेटिक डिसऑर्डर और डिप्रेशन की दवा खाते हों।
-अगर किसी को शुगर है, लेकिन वह काबू में हो। साथ ही वह अभी ओरल दवा ही ले रहा हो यानी इंसुलिन इंजेक्शन लेना शुरू न किया हो तो वह ब्लड डोनेट कर सकता है।
महिलाएं तब नहीं कर सकतीं डोनेट
-प्रेग्नेंसी के दौरान
-डिलीवरी के बाद कुछ महीनों बाद तक
-ब्रेस्ट फीड कराती हों तो
-चूंकि 90 फीसदी महिलाओं को एनीमिया रहता है यानी खून की कमी रहती है। उनका ब्लड लेवल नॉर्मल से नीचे यानी 8-10 या 11 की रेंज तक रहता है, इसलिए महिलाओं को ब्लड डोनेट करने से मना किया जाता है। अगर किसी महिला का हीमोग्लोबिन लेवल सही स्तर पर हो
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कमज़ोरी नहीं आती, शरीर ऐसे करता है भरपाई
कई लोग इस बात से डरते हैं कि ब्लड डोनेट करने के बाद शरीर में खून की कमी हो जाती है जबकि ऐसा नहीं होता। एक बार में अमूमन एक यूनिट ब्लड डोनेट किया जाता है। इस 1 यूनिट में करीब 350ml ब्लड होता। इतना खून अमूमन कुछ मिनट से कुछ घंटों में ही तैयार हो जाता है, खासकर प्लाज्मा सबसे पहले।
प्लाज्मा चंद मिनटों में बनना शुरू
खून के सबसे बड़े घटक प्लाज्मा (ब्लड का लिक्विड पार्ट) की भरपाई बहुत जल्द शुरू होती है। खून का लगभग 55% हिस्सा प्लाज्मा होता है। ब्लड डाेनेट करने के महज 15-20 मिनटों के भीतर ही शरीर आसपास के टिश्यू और ब्लड कैपिलरीज़ (खून की नलियों) से पानी खींचकर खून की मात्रा को सामान्य करने लगता है। करीब 24 घंटे में काफी हद तक सुधार हो जाता है। वहीं, 48 घंटे के भीतर ज्यादातर प्लाज्मा वापस आ जाता है। यही वजह है कि ब्लड डोनेट करने के बाद पानी पीने की सलाह दी जाती है। ऐसा भी नहीं होता कि प्लाज्मा बनना शुरू हो तो आरबीसी, प्लेटलेट्स, आयरन आदि बनना रुक जाता हो, ये सभी साथ-साथ बनने शुरू होते हैं। हां, जिसके बनने की प्रक्रिया में कम वक्त लगता है, वह पहले तैयार हो जाता है।
प्लेटलेट्स और क्लॉटिंग फैक्टर्स
ब्लड डोनेशन के बाद बोन मैरो प्लेटलेट्स का उत्पादन बढ़ा देता है। प्लेटलेट्स की भरपाई आमतौर पर 2-5 दिनों में हो जाती है। क्लॉटिंग फैक्टर्स भी कुछ दिनों में सामान्य स्तर पर लौट आते हैं।
RBC: लाल रक्त कोशिकाएं तब बननी शुरू होती हैं...
ब्लड डोनेशन के कुछ घंटों के भीतर किडनी से एरिथ्रोपोइटिन (EPO) हार्मोन का स्राव बढ़ता है। यह हार्मोन बोन मैरो को नई RBCs बनाने का संकेत देता है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है। इससे 3-5 दिनों में नई RBCs बनने की गति बढ़ जाती है। महज 1-2 सप्ताह में रेटिकुलोसाइट्स (अपरिपक्व RBCs) बढ़ी हुई मात्रा में दिखाई देने लगती हैं।
इसलिए जब किसी की किडनी पूरी तरह काम नहीं करती तो उसे बाहर से एरिथ्रोपोइटिन (EPO) हार्मोन का इंजेक्शन बार-बार लगाना पड़ता है।
हीमोग्लोबिन 1-2 महीने में पुराने स्तर पर
एक यूनिट (350-450mL) ब्लड डोनेट करने के बाद हीमोग्लोबिन में सामान्यतः 1-1.5 g/dL की गिरावट आ सकती है। ज्यादातर सेहतमंद लोगों में हीमोग्लोबिन 4-8 सप्ताह (करीब 1 से 2 महीने में) में पुराने वाले लेवल के करीब पहुंच जाता है। इसलिए हमारे देश में एक बार ब्लड डोनेशन के बाद दूसरे के बीच लगभग 3 महीने का फर्क रखा जाता है।
आयरन की भरपाई सबसे धीमी
एक यूनिट ब्लड डोनेट करने के बाद करीब 200-250mg आयरन शरीर से निकल जाता है। नई RBCs बनाने के लिए शरीर को यही आयरन वापस जुटाना पड़ता है। अगर वह शख्स सही डाइट ले। आयरन से भरपूर भोजन करे जिसमें दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, गुड़, तिल, सोया, राजमा आदि हो तो यह कमी महज 2 से 3 महीने में पूरी हो जाती है।
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आपका ब्लड ग्रुप क्या है?
- ब्लड के चार मुख्य ग्रुप A, B, O और AB होते हैं। ये सभी ग्रुप प्लस और माइनस में होते हैं। इन ग्रुप के सब ग्रुप जैसे बॉम्बे ब्लड ग्रुप (hh): A1, A2, Ax, AeL आदि भी होते हैं। ये आम नहीं होते और इन्हें रेयर ब्लड ग्रुप कहा जाता है। वहीं, 'O' ग्रुप यूनिवर्सल डोनर है। इस ग्रुप के खून को सभी ग्रुप के लोगों को चढ़ाया जा सकता है। अगर इमरजेंसी है और ब्लड ग्रुप जानने का वक्त नहीं है तो तो O ग्रुप का ब्लड चढ़ा सकते हैं।
खुद के लिए भी करें डोनेट
अगर किसी शख्स की कोई ऐसी सर्जरी पहले से तय है जिसमें खून की जरूरत पड़ेगी, तो ऐसे में वह शख्स सर्जरी से पहले ही अपने खून को निकलवाकर स्टोर करवा सकता है। इस प्रक्रिया को ऑटोलोगस ब्लड डोनेशन कहते हैं।
ब्लड डोनेशन के बाद...
-अच्छे से पानी पी लें। फिर 30 से 40 मिनट आराम करें। अगर हल्का-फुल्का सिर दर्द हो भी आराम करें।
-किसी भी तरह का भारी काम जैसे- डांस, रनिंग, जिम आदि न करें। बेहतर होगा आधे घंटे तक ड्राइव भी न करें।
-अभी गर्मी का मौसम है। बाहर तेज़ धूप होती है। इसलिए ब्लड डोनेशन के बाद फौरन ही धूप में न निकलें।
- ऐसा फ्रूट जूस या फूड जैसे बिस्किट आदि लें जिसमें शुगर की मात्रा ज्यादा हो। इससे ब्लड शुगर लेवल जल्दी ही नॉर्मल हो जाता है।
-24 घंटे बाद तक न तो शराब पीएं और न ही स्मोकिंग करें।
- हर तीन घंटे में हेल्दी डाइट लें। बेहतर होगा कि अनार का जूस लें।






















