नाक से बहने वाले ‘दिमागी पानी’ की पहचान में नई तकनीक बनी वरदान
रीढ़ के रास्ते रंग डालने की जरूरत खत्म, नाक में लगाया गया विशेष रंग बना सहारा; 40 मरीजों में मिली सफलता
कुमार संजय
लखनऊ। पिछले छह महीनों से 27 वर्षीय एक महिला की दाईं नाक से लगातार साफ पानी बह रहा था। इसके साथ पूरे सिर में दर्द भी बना रहता था। कई जांचों के बावजूद डॉक्टर यह पता नहीं लगा पा रहे थे कि यह पानी आखिर कहां से निकल रहा है। आधुनिक जांचों में भी रिसाव की सही जगह सामने नहीं आई। आखिरकार संजय गांधी पीजीआई के विशेषज्ञों ने एक नई तकनीक का सहारा लिया। नाक के भीतर विशेष रंग लगाने के कुछ ही मिनट बाद रिसाव वाली जगह स्पष्ट दिखाई देने लगी और सफल सर्जरी कर समस्या का स्थायी समाधान कर दिया गया। यह मामला अब ऐसी नई तकनीक की सफलता का उदाहरण बन गया है, जो भविष्य में हजारों मरीजों के इलाज को आसान बना सकती है।
नाक से लगातार पानी बहना अक्सर लोग सामान्य एलर्जी, जुकाम या साइनस की समस्या समझ लेते हैं, लेकिन कई बार यह मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी की सुरक्षा करने वाले द्रव के रिसाव का संकेत होता है। इस गंभीर समस्या की पहचान और उपचार में संजय गांधी पीजीआई के विशेषज्ञों द्वारा स्थापित नई तकनीक बेहद कारगर साबित हो रही है।
मुख्य शोधकर्ता एवं न्यूरो सर्जरी विभाग के न्यूरोओटोलॉजिस्ट प्रो. रवि संकर मनोगरन के अनुसार महिला मरीज का कोई दुर्घटना या पूर्व सर्जरी का इतिहास नहीं था। जांचों से यह तो स्पष्ट हो गया था कि नाक से निकलने वाला तरल दिमागी पानी है, लेकिन रिसाव का स्रोत पता नहीं चल पा रहा था। दूरबीन आधारित सर्जरी के दौरान नाक के भीतर विशेष रंग लगाने पर रिसाव का स्थान स्पष्ट दिखाई देने लगा। इसके बाद चिकित्सकों ने उसी समय दोष को बंद कर दिया। सर्जरी के छह महीने बाद तक मरीज में दोबारा कोई रिसाव नहीं पाया गया।
प्रो. मनोगरन ने बताया कि इस सफलता के आधार पर किए गए अध्ययन में यह सामने आया है कि नाक के भीतर लगाए जाने वाले विशेष रंग की मदद से उन जटिल मामलों की भी पहचान की जा सकती है, जिन्हें आधुनिक रेडियोलॉजिकल जांचें भी नहीं पकड़ पातीं। यह शोध प्रतिष्ठित चिकित्सा पत्रिका न्यूरोलॉजी इंडिया ने स्वीकार किया है।
क्या होता है दिमागी पानी का रिसाव?
मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी एक विशेष द्रव से घिरे रहते हैं, जिसे आम बोलचाल में दिमागी पानी कहा जाता है। यह द्रव मस्तिष्क को झटकों से बचाने, पोषण पहुंचाने और तंत्रिका तंत्र के सामान्य कार्यों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब खोपड़ी के आधार, नाक की छत या आसपास की झिल्लियों में किसी कारण से छोटा सा छेद हो जाता है तो यह द्रव नाक के रास्ते बाहर आने लगता है।
यह समस्या सिर में गंभीर चोट लगने, सड़क दुर्घटना, पूर्व सर्जरी, जन्मजात विकृति या कुछ मामलों में बिना किसी स्पष्ट कारण के भी हो सकती है। ऐसे मरीजों में एक तरफ की नाक से लगातार साफ पानी बहना सबसे प्रमुख लक्षण माना जाता है। कई बार मरीज वर्षों तक इसे सामान्य जुकाम समझकर इलाज कराते रहते हैं और वास्तविक बीमारी का पता काफी देर से चल पाता है।
क्या है नई तकनीक?
प्रो. रवि संकर मनोगरन के अनुसार अब तक दिमागी पानी के रिसाव की सटीक जगह खोजने के लिए विशेष रंग को रीढ़ की हड्डी के रास्ते शरीर के भीतर डाला जाता था। इसके बाद दूरबीन आधारित सर्जरी के दौरान विशेष फिल्टर की सहायता से रिसाव की पहचान की जाती थी। यह तरीका प्रभावी तो था, लेकिन इससे तंत्रिका तंत्र पर दुष्प्रभाव का खतरा बना रहता था। साथ ही यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत जटिल भी थी।
नई तकनीक में रंग को शरीर के भीतर डालने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसे सीधे नाक के अंदर लगाया जाता है। जब यह रंग दिमागी पानी के संपर्क में आता है तो रिसाव वाली जगह स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगती है। इससे डॉक्टरों को दोष वाली जगह तुरंत पहचानने और उसका उपचार करने में मदद मिलती है। इस पद्धति से प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, सरल और मरीज के लिए कम जोखिम वाली बन जाती है।
40 मरीजों में सफल रहा प्रयोग
प्रो. मनोगरन ने बताया कि अब तक इस तकनीक का उपयोग 40 मरीजों में किया जा चुका है। इन सभी मामलों में नाक से निकल रहे तरल की प्रकृति और उसके स्रोत का पता लगाने में यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित हुई। कई मरीज ऐसे थे जिनमें सीटी स्कैन, एमआरआई और अन्य उन्नत जांचों के बाद भी रिसाव का सटीक स्थान स्पष्ट नहीं हो पा रहा था।
नई तकनीक की सहायता से डॉक्टरों ने न केवल यह पुष्टि की कि नाक से निकलने वाला तरल वास्तव में दिमागी पानी है, बल्कि यह भी पता लगाया कि वह किस स्थान से बाहर आ रहा है। इससे सर्जरी अधिक सटीक हुई और उपचार की सफलता दर में भी सुधार देखने को मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि जटिल मामलों में यह तकनीक उपचार की योजना बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
क्यों खतरनाक है दिमागी पानी का रिसाव?
दिमागी पानी मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को सुरक्षा प्रदान करता है। खोपड़ी के आधार या नाक के आसपास की हड्डियों और झिल्लियों में छेद हो जाने पर यह तरल बाहर निकलने लगता है। इससे शरीर और मस्तिष्क के बीच मौजूद प्राकृतिक सुरक्षा बाधा कमजोर हो जाती है।
यदि समय पर इलाज न कराया जाए तो मरीज को मस्तिष्क की झिल्लियों में संक्रमण जैसी गंभीर और जानलेवा जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। संक्रमण बार-बार होने लगे तो मरीज की स्थिति और गंभीर हो सकती है। कई मामलों में लंबे समय तक सिरदर्द, चक्कर, कमजोरी और जीवन की गुणवत्ता में गिरावट भी देखी जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार एक तरफ की नाक से लगातार साफ पानी बहना, नमकीन स्वाद महसूस होना, बार-बार सिरदर्द होना, झुकने पर पानी का बहाव बढ़ जाना और बार-बार संक्रमण होना इसके प्रमुख संकेत हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
दूरबीन आधारित सर्जरी बनी सबसे सफल उपचार
प्रो. रवि संकर मनोगरन के अनुसार आज नाक के रास्ते की जाने वाली दूरबीन आधारित सर्जरी इस बीमारी के इलाज का सबसे प्रभावी और सुरक्षित तरीका बन चुकी है। इसमें बाहरी चीरा लगाने की जरूरत नहीं पड़ती और नाक के रास्ते ही रिसाव वाली जगह तक पहुंचकर उसे बंद कर दिया जाता है।
इस प्रक्रिया में आधुनिक जैविक पदार्थों और शरीर के ऊतकों का उपयोग कर दोष को बंद किया जाता है। सर्जरी के बाद मरीज को अपेक्षाकृत कम दर्द होता है, अस्पताल में कम समय रुकना पड़ता है और सामान्य जीवन में जल्दी वापसी संभव हो जाती है। यही कारण है कि दुनिया भर में यह तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
भविष्य के लिए उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक दिमागी पानी के रिसाव की पहचान और उपचार को अधिक सुरक्षित, सटीक तथा किफायती बना सकती है। खासतौर पर उन मामलों में, जहां सीटी स्कैन या एमआरआई से रिसाव की जगह स्पष्ट नहीं हो पाती, यह तकनीक डॉक्टरों के लिए बड़ी मदद साबित हो सकती है।
प्रो. मनोगरन का कहना है कि शुरुआती परिणाम काफी उत्साहजनक हैं। यदि बड़े स्तर पर किए जाने वाले अध्ययनों में भी इसी प्रकार के परिणाम सामने आते हैं, तो आने वाले समय में यह तकनीक दिमागी पानी के रिसाव के इलाज की मानक प्रक्रिया का हिस्सा बन सकती है। इससे मरीजों को जल्दी और सटीक उपचार मिलने की संभावना बढ़ेगी तथा गंभीर जटिलताओं को भी रोका जा सकेगा।
बॉक्स : दिमागी पानी का रिसाव होने पर क्या हो सकते हैं दुष्प्रभाव?
प्रमुख लक्षण
एक नाक से लगातार साफ पानी बहना
बार-बार सिरदर्द
गले में नमकीन स्वाद महसूस होना
झुकने पर पानी का बहाव बढ़ जाना
बार-बार संक्रमण होना
गंभीर खतरे
मस्तिष्क की झिल्लियों में संक्रमण
तेज बुखार और गंभीर बीमारी
मस्तिष्क तक संक्रमण फैलने का खतरा
लंबे समय तक कमजोरी और सिरदर्द
गंभीर मामलों में जान का खतरा

























