शोक से संकल्प तक: पीजीआई में बहु-अंगदान, तीन लोगों को मिला नया जीवन
20 वर्षों बाद पीजीआई में ब्रेन स्टेम डेथ के बाद हुआ बहु-अंगदान
दो लोगों में किडनी एक में हुआ लीवर का प्रत्यारोपण और आगे दो लोगों में होगा कार्निया पत्यारोपण
“आत्मा भले ही शरीर से विलग हो जाए, परंतु दान किए गए अंग किसी अन्य के जीवन में नई आशा और ऊर्जा का संचार कर सकते हैं।” इस विचार को साकार करते हुए लखनऊ निवासी 42 वर्षीय श्री संदीप कुमार के अंगदान ने तीन जरूरतमंदों को नया जीवन दिया और आगे दो लोगों को रोशनी मिलेगी।
07 फरवरी 2026 को एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल संदीप कुमार का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चला, पर स्थिति में सुधार नहीं हुआ। 21 फरवरी 2026 की रात्रि उन्हें संजय गांधी पीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। 22 फरवरी 2026 को चार विशेषज्ञ चिकित्सकों के पैनल ने उन्हें ब्रेन स्टेम डेथ घोषित किया। परिजनों की काफी काउंसलिंग की गई और उन्हें बताया गया कि इनका अंग कई लोगों को जीवन दे सकता है।
परिजनों की सहमति के बाद राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन–उत्तर प्रदेश (सोटो-यू.पी.) के संयुक्त निदेशक एवं चिकित्सा अधीक्षक प्रो. राजेश हर्षवर्धन के मार्गदर्शन में पीजीआई और केजीएमयू के संयुक्त सहयोग से अंग-रिट्रीवल व प्रत्यारोपण की प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न हुई। केजीएमयू की प्रतीक्षा सूची में पंजीकृत रोगी को लीवर प्रत्यारोपित किया गया।
निदेशक डॉ. आर.के. धीमन ने कहा कि लगभग 20 वर्षों के उपरांत एसजीपीजीआई में ब्रेन स्टेम डेथ के बाद यह पहला बहु-अंगदान है, जो संस्थान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सोटो-यू.पी. की पहल के अनुरूप, एपेक्स ट्रॉमा सेंटर की नीति के तहत ब्रेन स्टेम डेथ के मामलों में यदि परिजन अंगदान की सहमति देते हैं, तो सहमति के समय से संपूर्ण उपचार व्यय माफ किया जाता है।
केजीएमयू में लीवर और पीजीआई में हुआ किडनी का प्रत्यारोपण
सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी की प्रो. सुप्रिया शर्मा एवं डॉ. राहुल के नेतृत्व में लीवर हार्वेस्ट किया गया। सोटो-यू.पी. द्वारा स्थापित ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से लीवर को शीघ्र केजीएमयू पहुँचाया गया, जहाँ सफल प्रत्यारोपण हुआ।
पीजीआइ के यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. एम.एस. अंसारी, प्रो. संजय सुरेका एवं डॉ. संचीत रुस्तगी की टीम ने किडनी रिट्रीवल किया, जबकि नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. नारायण प्रसाद की टीम ने दो मरीजों में किडनी प्रत्यारोपण की सभी तैयारियाँ सुनिश्चित कर सफल प्रत्यारोपण किया।
किडनी दो महिलाओं को लगी दोनों महिलाएं 10 साल से डायलिसिस पर थी इनकी उम्र 35 से 40 के बीच है।
कॉर्निया हार्वेस्टिंग व प्रत्यारोपण की प्रक्रिया डॉ. अपिजीत कौर के समन्वित प्रयासों से पूरी हुई।
इस टीम ने सफल लिया डोनेशन
एनेस्थीसिया विभाग के प्रो. देवेंद्र गुप्ता, डॉ. सुरुचि अंबास्ता एवं उनकी टीम ने डोनर मेंटेनेंस सहित पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई।
सोटो-यू.पी. की टीम— भोलेश्वर पाठक, डॉ. क्रिस अग्रवाल, डॉ. अक्षिता बंसल, डॉ. एकता, नीलिमा दीक्षित, डॉ. अभिषेक एवं डॉ. जय प्रकाश शर्मा ,हरीश चोपड़ा—ने शनिवार रात्रि से रविवार सायं तक सभी विभागों के साथ निरंतर समन्वय स्थापित कर इस बहु-अंगदान को सफल बनाया।
दिया गया गार्ड ऑफ आनर
अंगदान के उपरांत दिवंगत को सम्मानपूर्वक गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। इस अवसर पर निदेशक डॉ. आर.के. धीमन, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवेंद्र गुप्ता, सोटो-यू.पी. के संयुक्त निदेशक डॉ. राजेश हर्षवर्धन, नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. नारायण प्रसाद तथा एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख प्रो अरुण श्रीवास्तव एवं उनकी टीम उपस्थित रही।
दिवंगत श्री संदीप कुमार अपने पीछे पत्नी लक्ष्मी और आठ वर्षीय पुत्र को छोड़ गए हैं। इस दुखद घड़ी में उनकी पत्नी द्वारा लिया गया साहसिक और करुणामय निर्णय पाँच लोगों को नया जीवन देने में सहायक बना।
अंगों को ले जा रही एम्बुलेंस एपेक्स ट्रॉमा सेंटर, संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआईएमएस) से शाम 6:14 बजे रवाना हुई और 6:32 बजे किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) पहुँची।
एम्बुलेंस ने तेलीबाग – कैंट – हजरतगंज – केजीएमयू मार्ग का अनुसरण किया।
इस पूरे सफर को तय करने में कुल 18 मिनट का समय लगा।























