खर्राटे से कमजोर हो रहे फेफड़े और दिल
नींद के दौरान खर्राटे के चलते ऑक्सीजन की कमी और बार-बार सांस रुकने से फेफड़ों पर दबाव पड़ता है, जो लंबे समय तक रहने से गंभीर हृदय रोग का कारण बन सकता है। क्या हैं इसके कारण और बचाव के उपाय, आइए जानें…
खर्राटे के चलते कुछ लोगों की रात में बार-बार नींद टूटती है। दरअसल, सोते समय नाक या मुंह के जरिए हवा का प्रवाह बाधित होने से यह समस्या होती है। खर्राटे की समस्या कभी-कभार हो या सोते समय हल्के खर्राटे आते हैं, तो यह चिंताजनक नहीं है, लेकिन यह समस्या लगातार बनी रहती है, तो चिंताजनक है। इससे नींद की गुणवत्ता खराब होती है, साथ ही अनेक बीमारियों का जोखिम भी बढ़ता है।
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के रेस्पिरेटरी मेडिसिन, कार्डियोलॉजी एवं मानसिक रोग विभाग के एक साझा शोध में तथ्य सामने आए हैं कि खर्राटों की अनदेखी करने से स्ट्रोक, दिल का दौरा और हार्ट फेल्योर का खतरा बढ़ता है। साथ ही फेफड़ों की गंभीर बीमारी—क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और फाइब्रोसिस का जोखिम भी तीन गुना तक बढ़ जाता है।
दरअसल, नींद में सांस रुकने से ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिरता है, जिससे रक्तचाप और दिल पर दबाव बढ़ता है। इससे फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। केजीएमयू का यह शोध 26 जनवरी को वर्ल्ड जर्नल ऑफ कार्डियोलॉजी में प्रकाशित किया गया।
स्लीप एपनिया के लक्षण
जोर से खर्राटे लेना
सोते समय सांस फूलना
हल्की गतिविधि में सांस फूलना
रात में हांफकर जागना
सुबह उठने पर सिर दुखना
तेज सिर दर्द होना
सही ढंग से नींद न आना
दिन में अधिक नींद आना एवं थकान
केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन, कार्डियोलॉजी एवं मानसिक रोग विभाग के साझा शोध में तथ्य आए सामने।
खर्राटे से पीड़ित 72 प्रतिशत मरीजों में पल्मोनरी हाइपरटेंशन की पुष्टि हुई, जो सीओपीडी और हार्ट फेल्योर का जोखिम कई गुना बढ़ाता है।
कितनी गंभीर है यह समस्या
भारत में लगभग 11 करोड़ से अधिक लोग निद्रा विकार—ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए) से पीड़ित हैं। यह गंभीर समस्या है, जिसमें मरीजों में 60 प्रतिशत पुरुष एवं 40 प्रतिशत महिलाएं हैं। खर्राटे के साथ एपनिया है, तो इससे फेफड़े और दिल कमजोर होते हैं। इससे पल्मोनरी हाइपरटेंशन (फेफड़ों की धमनियों में उच्च रक्तचाप) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
कैसे होता है पल्मोनरी हाइपरटेंशन
शोध में शामिल लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष प्रो. अजय वर्मा के अनुसार, स्लीप एपनिया के दौरान व्यक्ति की सांस कुछ सेकंड से लेकर एक मिनट तक रुक सकती है। अध्ययन में 150 से अधिक ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के मरीजों को शामिल किया गया, जिनमें 71.68 प्रतिशत में पल्मोनरी हाइपरटेंशन की पुष्टि हुई। यह दुर्लभ और गंभीर रोग है, जिसमें फेफड़ों की धमनियों में दबाव बहुत अधिक बढ़ जाता है। इससे हृदय को खून फेफड़ों तक पहुंचाने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। ऐसी स्थिति में हार्ट फेल्योर का खतरा तीन गुना तक बढ़ता है।
समय पर पहचान और उपचार न होने पर ओएसए हृदय और फेफड़ों पर गंभीर दुष्प्रभाव डालता है। स्लीप एपनिया से पीड़ित व्यक्ति को डॉक्टर की सलाह पर पल्मोनरी हाइपरटेंशन की जांच जरूर करानी चाहिए।
स्लीप एपनिया को लेकर गंभीरता जरूरी
स्लीप एपनिया को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी है। यही कारण है कि ज्यादातर मरीज लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। यदि रोगी सही समय पर इलाज करा लें, तो समस्या गंभीर होने से रोकी जा सकती है। सबसे जरूरी है कि लक्षणों की पहचान करें। स्लीप एपनिया मुख्य रूप से नींद के दौरान गले की मांसपेशियों के अत्यधिक शिथिल होने के कारण होता है, जिससे वायुमार्ग संकुचित या बंद हो जाता है और सांस बार-बार रुकती है।
स्लीप एपनिया के मुख्य कारण
मोटापा (गर्दन की चर्बी)
शारीरिक बनावट
खराब दिनचर्या
उम्र और आनुवंशिक कारण
स्लीप एपनिया व पल्मोनरी हाइपरटेंशन से बचाव
स्लीप एपनिया से बचने के लिए स्वस्थ वजन, नियमित व्यायाम करने के साथ धूम्रपान और शराब से दूरी महत्वपूर्ण है। पीठ के बजाय करवट लेकर सोना, गले की मांसपेशियों को आराम देने वाली दवाओं से परहेज करना और सांस की नली को साफ रखने के लिए सीपीएपी मशीन का उपयोग कारगर है। सीपीएपी मशीन का प्रयोग स्लीप एपनिया के इलाज और इसके दुष्प्रभाव से होने वाले पल्मोनरी हाइपरटेंशन को कम करने में सबसे प्रभावी माना जाता है। हाइपोथायरॉइड या दंत उपचार भी मदद कर सकता है।
डॉ. प्रो. सुशीलांत
रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग, केजीएमयू
प्रो. अजय वर्मा
रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग, लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान
दैनिक जागरण के मुख्य मेडिकल संवाददाता की रिपोर्ट : विकास मिश्रा, लखनऊ











