: हाथ धोना बचा सकता है 50 फीसदी बीमारी
लापरवाही पड़ सकती है
भारी ग्लोबल हैंडवाशिंग डे आज, थीम - बी ए हैंडवाशिंग हीरो
हर साल 15 अक्टूबर को ग्लोबल हैंडवाशिंग डे मनाया जाता है। इस साल की थीम " - बनें हैंडवाशिंग हीरो" है। संजय गांधी पीजीआई के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रो. चिन्मय साहू के मुताबिक एक ग्राम मल में 10 करोड़ वायरस और 10000 करोड़ बैक्टीरिया होते हैं और हाथों के जरिए ही ये मुंह तक पहुंचते हैं। "कोविड के बाद लोगों में हाथ धोने की आदत फिर कम हो गई है। हमारे पास डायरिया और टायफाइड के जो केस आ रहे हैं, उनमें 20 फीसदी मरीज ऐसे हैं जो शौच के बाद और 60 फीसदी खाने से पहले साबुन से हाथ नहीं धोते। सिर्फ सही तरीके से हाथ धोने से डायरिया और सांस की 50 फीसदी बीमारियों को रोका जा सकता है।" प्रो. साहू ने कहा कि बच्चों में डायरिया और निमोनिया से होने वाली 30 प्रतिशत मौतें सिर्फ हैंड हाइजीन से रोकी जा सकती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनियाभर में 40 प्रतिशत आबादी के पास घर में साबुन से हाथ धोने की सुविधा नहीं है, भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 35 प्रतिशत से ज्यादा है। उन्होंने बताया कि केवल पानी से हाथ धोने से कीटाणु नहीं मरते। खाना बनाने और खाने से पहले, शौच के बाद, बच्चों का मल साफ करने के बाद, खांसने-छींकने और मरीज को छूने के बाद साबुन से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोना जरूरी है।
बॉक्स: हाथ धोने का सही तरीका 1. हाथों को पानी से गीला कर साबुन लगाएं। 2. हथेलियों, उंगलियों के बीच, नाखूनों और अंगूठे को कम से कम 20 सेकंड तक रगड़ें। 3. साफ पानी से धोकर तौलिये से सुखाएं। 4. हैंड सैनिटाइजर साबुन का विकल्प नहीं है।
बॉक्स इन बीमारियों की आशंका होगी कम
दस्त से बीमार होने वाले लोगों की संख्या में लगभग 23% से 40% तक । पेट की बीमारियों के कारण बच्चों के स्कूल से अनुपस्थित रहने वाले दिनों की संख्या में 29% से 57% तक। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में दस्त की बीमारी को लगभग 58% तक। सर्दी-जुकाम जैसी श्वसन संबंधी बीमारियों को लगभग 16% से 21% तक ।

























