एक साल बाद मिली सही नजर, नई तकनीक से बिगड़ा चेहरा भी हुआ ठीक
पीजीआइ में प्रदेश की पहली नेविगेशन-गाइडेड ऑर्बिटल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी
लखनऊ
गोरखपुर निवासी 30 वर्षीय युवक एक वर्ष पहले सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया था। हादसे में उसके चेहरे और आंख के आसपास की हड्डी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके कारण उसे हर चीज दो-दो दिखाई देती थी, चेहरा असमान नजर आने लगा था और सामान्य कामकाज करना भी मुश्किल हो गया था। एक साल तक इन परेशानियों से जूझने के बाद संजय गांधी पीजीआइ के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने नई तकनीक की मदद से उसकी आंख की हड्डी का सफल पुनर्निर्माण कर न सिर्फ उसकी सही नजर लौटाई, बल्कि चेहरे की विकृति भी ठीक कर दी।
यह उत्तर प्रदेश की पहली इंट्राऑपरेटिव नेविगेशन-गाइडेड सेकेंडरी ऑर्बिटल वॉल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी है, जिसमें पेशेंट-स्पेसिफिक इम्प्लांट (पीएसआई) और ओ-आर्म इमेजिंग तकनीक का संयुक्त उपयोग किया गया।
विशेषज्ञों ने बताया कि पुरानी चोट के कारण हड्डियां जुड़ चुकी थीं और चेहरे की सामान्य बनावट बदल गई थी, इसलिए यह ऑपरेशन डॉक्टरों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था।
एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के डा. भरत शुक्ला ने बताया कि मरीज एक वर्ष पहले गोरखपुर में हुए सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुआ था। दुर्घटना के बाद आंख की हड्डी में आई विकृति के कारण उसे लगातार दोहरा दिखाई देता था और चेहरे की बनावट भी बिगड़ गई थी। चोट के कारण ऊतकों में बदलाव आ जाता है और शरीर की सामान्य संरचना पहचानना कठिन हो जाता है। ऐसे में ऑपरेशन के दौरान थोड़ी-सी भी चूक मरीज की दृष्टि और चेहरे की बनावट पर स्थायी असर डाल सकती है।
उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के दौरान कंप्यूटर आधारित इंट्राऑपरेटिव नेविगेशन तकनीक से मरीज की सीटी स्कैन रिपोर्ट का रियल-टाइम मिलान किया गया। इसके आधार पर मरीज की थ्री-डी इमेजिंग से तैयार पेशेंट-स्पेसिफिक इम्प्लांट को बिल्कुल सही स्थान पर लगाया गया। सर्जरी पूरी होने से पहले ओ-आर्म इमेजिंग के जरिए इम्प्लांट की स्थिति की तत्काल जांच की गई, जिससे पुनर्निर्माण की सफलता की पुष्टि हो गई और भविष्य में दोबारा सुधारात्मक सर्जरी की जरूरत की संभावना भी काफी कम हो गई। निदेशक प्रो. आर. के. धीमन ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग से प्रदेश के मरीजों को अब जटिल चेहरे की चोटों का बेहतर इलाज अपने ही राज्य में मिल सकेगा।
बॉक्स :
क्या है इंट्राऑपरेटिव नेविगेशन तकनीक
इंट्राऑपरेटिव नेविगेशन एक कंप्यूटर आधारित अत्याधुनिक सर्जिकल तकनीक है, जिसे ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों के लिए जीपीएस की तरह काम करने वाली प्रणाली माना जाता है। इसमें मरीज के सीटी स्कैन की त्रि-आयामी तस्वीरों का ऑपरेशन के दौरान वास्तविक शारीरिक संरचना से मिलान किया जाता है। इससे सर्जन को हड्डी और आसपास के महत्वपूर्ण हिस्सों की सटीक स्थिति रियल-टाइम में दिखाई देती है। यही वजह है कि इम्प्लांट बिल्कुल सही स्थान पर लगाया जा सकता है और ऑपरेशन अधिक सुरक्षित व सटीक होता है।
बॉक्स : ऑपरेशन करने वाली टीम
ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के मुख्य सर्जन डा भरत शुक्ला,
डा. कुलदीप विश्वकर्मा
रेजिडेंट सर्जिकल टीम
डा. दीक्षा
डा. शशांक
डा. अभिजीत
डा. अपूर्वा
एनेस्थीसिया विभाग से
डा. रफ़त शमीम
डा. वंश
डा. निखिल
डा. शारिया
नर्सिंग ऑफिसर
आइरीन
दीक्षा

































