वर्ल्ड स्ट्रोक डे आज
साढ़े चार से 24 घंटे के भीतर इलाज से बच सकती है जान, यूपी में 90 फीसदी मरीज देर से पहुंचते हैं अस्पताल
30-40 साल के युवाओं में भी बढ़ रहे स्ट्रोक के मामले, हाई बीपी सबसे बड़ा जोखिम
कुमार संजय | लखनऊ
लखनऊ। ब्रेन स्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अब 30 से 40 साल के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। समय पर अस्पताल पहुंचने पर मरीज को थक्का घोलने वाले इंजेक्शन या थ्रोम्बेक्टॉमी से इलाज मिल सकता है। हालांकि, उत्तर प्रदेश में करीब 90 फीसदी मरीज निर्धारित समय-सीमा के बाद अस्पताल पहुंचते हैं। वर्ल्ड स्ट्रोक डे (29 अक्टूबर) पर एसजीपीजीआई के इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विभाग के प्रो. विवेक सिंह ने यह चिंता जताई।
उन्होंने बताया कि स्ट्रोक दो तरह का होता है। इस्केमिक स्ट्रोक में दिमाग की नस में थक्का जम जाता है, जबकि हेमरेजिक स्ट्रोक में नस फटने से रक्तस्राव होता है। करीब 80 फीसदी मामले इस्केमिक स्ट्रोक के होते हैं। एसजीपीजीआई की इमरजेंसी बिल्डिंग में स्ट्रोक यूनिट स्थापित है। इस्केमिक स्ट्रोक में शुरुआती साढ़े चार घंटे के भीतर थ्रोम्बोलाइसिस से थक्का घोला जा सकता है। बड़ी नस में ब्लॉकेज होने पर उपयुक्त मरीजों में 24 घंटे तक मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी से थक्का निकाला जा सकता है।
प्रो. सिंह के मुताबिक, कई मरीज पांच से दस साल तक एक ही बीपी की दवा लेते हैं, लेकिन नियमित जांच नहीं कराते। कुछ मरीजों की कैरोटिड नस में 70-80 फीसदी तक ब्लॉकेज मिलता है।
75 फीसदी मरीजों में हाई बीपी प्रमुख जोखिम
न्यूरोलॉजी विभाग की प्रो. विनीता एलिथबेज के मुताबिक, संस्थान के आंकड़ों में 74.5 फीसदी मरीजों में हाई बीपी और 27.3 फीसदी में डायबिटीज मिली। हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, धूम्रपान और अनियमित दिनचर्या भी जोखिम बढ़ाते हैं। यूपी में बुजुर्गों में स्ट्रोक की दर 1.6 फीसदी है।
बीपी की दवा लेने के बावजूद स्ट्रोक का खतरा बना रह सकता है। दवा छोड़ना, नियमित जांच न करना और अधिक नमक खाना इसके प्रमुख कारण हैं। कुछ मरीजों को डॉक्टर की सलाह पर दो-तीन दवाओं की जरूरत होती है। पापड़, नमकीन, अचार और रेस्तरां के खाने में अधिक नमक बीपी अनियंत्रित कर सकता है। दवा के साथ खानपान और व्यायाम पर ध्यान देना भी जरूरी है।
लक्षण: अचानक लड़खड़ाना, धुंधला दिखना, चेहरा टेढ़ा होना, एक हाथ में कमजोरी या बोलने में परेशानी होने पर तुरंत अस्पताल पहुंचें।
बचाव: बीपी की दवा तय समय पर लें, सप्ताह में दो बार घर पर बीपी नोट करें, रोज पांच ग्राम से कम नमक खाएं और 30 मिनट टहलें। धूम्रपान छोड़ें, शराब से बचें तथा शुगर-कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं। कैरोटिड डॉपलर डॉक्टर की सलाह पर कराएं। जोखिम कारकों पर नियंत्रण से स्ट्रोक की आशंका कम की जा सकती है।
फोटो कैप्शन: प्रो. विवेक सिंह और प्रो. विनीता एलिथबेज।





























