एलवाड तकनीक से हार्ट फेल्योर के मरीज को ट्रांसप्लांट तक रखा जा सकता है जीवित
बिना बेहतर परफ्यूजन के अधूरा है हृदय प्रत्यारोपण
परफ्यूजनिस्ट की एक चूक पूरे ऑपरेशन को कर सकती है असफल
लखनऊ। जब मरीज का दिल पूरी तरह फेल हो जाता है और दाता का दिल मिलने में समय लगता है, तब एलवाड तकनीक जीवनरक्षक बनती है। एलवाड यानी लेफ्ट वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस एक तरह का कृत्रिम पंप है, जिसे खराब हो चुके बाएं वेंट्रिकल के साथ जोड़ दिया जाता है। यह बैटरी से चलने वाला छोटा पंप लगातार शरीर में खून का प्रवाह बनाए रखता है और मरीज को महीनों तक प्रत्यारोपण तक जीवित रखता है। इसे ब्रिज टू ट्रांसप्लांट भी कहा जाता है। यह जानकारी कार्डियो वैस्कुलर थोरेसिक प्रोग्रेसिव वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दो दिवसीय कार्यशाला में संस्था के
महासचिव एवं आयोजक आरएमएल इंस्टीट्यूट के हृदय शल्य चिकित्सक प्रो डी के श्रीवास्तव ने दी। संस्था के अध्यक्ष एवं संजय गांधी पीजीआई के हृदय शल्य चिकित्सा विभाग के प्रो. शांतनु पांडे ने बताया कि हृदय प्रत्यारोपण केवल सर्जन का काम नहीं, पूरी टीम का काम है और इसमें परफ्यूजनिस्ट की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। परफ्यूजनिस्ट का काम प्रत्यारोपण से पहले मरीज को हृदय-फेफड़ा मशीन पर लेकर खून के बहाव और ऑक्सीजन को बनाए रखना होता है, ताकि सर्जन पुराना खराब दिल सुरक्षित निकाल सकें। इस दौरान तापमान, रक्तचाप, ऑक्सीजन और एलवाड डिवाइस के फ्लो, प्रेशर व एंटी-कोएगुलेशन को संभालना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है।
दाता का दिल आने पर उसे सीओटू गैस और ठंडे भंडारण तकनीक से सुरक्षित रखा जाता है। नया दिल लगाते समय हवा न जाने देना, थक्का न बनने देना और बाद में धीरे-धीरे मशीन से हटाकर नए दिल से पूरे शरीर में प्रवाह शुरू कराना ही परफ्यूजन की असली गुणवत्ता है। अच्छी परफ्यूजन का अर्थ है प्रत्यारोपित हृदय को बिना नुकसान के सही ऑक्सीजन के साथ स्थापित करना।
एलपीएस कानपुर से अनुज शुक्ला ने परफ्यूजन की गुणवत्ता पर, मैक्स अस्पताल दिल्ली से पवन कुमार ने एलवाड के महत्व व चुनौतियों पर, बीएचयू से डॉक्टर दिनेश मैनी ने मरम्मत के महत्व पर और एम्स दिल्ली से राजीव गुप्ता ने सीओटू गैस के उपयोग पर व्याख्यान दिया।
सुधा अस्पताल कोटा से दुर्गा पूजा मल्होत्रा ने ढाई से पांच किलो के बच्चों की सर्जरी का अनुभव साझा किया।
कार्यशाला में उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान के परफ्यूजनिस्टों ने भाग लिया। इस दौरान विनय प्रताप सिंह और प्रोफेसर प्रतीक भटनागर को आजीवन उपलब्धि सम्मान दिया गया।






























