एमडीआर रोकने में फार्मासिस्ट की अहम भूमिका : डॉ. देवेन्द्र गुप्ता
पीजीआइ में पहली बार मनाया गया विश्व फार्मासिस्ट दिवस
लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई में विश्व फार्मासिस्ट दिवस पहली बार मनाया गया। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवेन्द्र गुप्ता ने कहा कि मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस (एमडीआर) को रोकने में फार्मासिस्ट की भूमिका सबसे अहम है।
कार्यक्रम में सीनियर परचेज अफसर अभय मल्होत्रा, सीनियर परचेज अफसर एस.के. श्रीवास्तव, कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष धर्मेश कुमार और महामंत्री सीमा शुक्ला मौजूद रहे।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि संस्थान के निदेशक प्रो. महेन्द्र भंडारी ने वर्ष 1996 में फार्मेसी सिस्टम की स्थापना की थी, जो भारत का पहला सिस्टम था। आज इसका स्वरूप काफी बड़ा हो गया है।
उन्होंने कहा कि फार्मासिस्ट का काम सिर्फ दवा का डिस्पेंसिंग और वितरण करना ही नहीं है। दवाओं का दुरुपयोग न हो, यह उनकी बड़ी जिम्मेदारी है। दवा को किस तापमान पर रखना है, उसका ऑडिट भी जरूरी है। एंटीबायोटिक के अंधाधुंध इस्तेमाल से एमडीआर तेजी से बढ़ रहा है, जिसे रोकने में फार्मासिस्ट ही सही डोज और सही इस्तेमाल सुनिश्चित कर सकता है।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि विदेशों में वार्ड राउंड में डॉक्टर के साथ फार्मासिस्ट भी रहता है। डॉक्टर दवा लिखता है, लेकिन मरीज के बॉडी वेट के अनुसार डोज फार्मासिस्ट तय करता है। यही सिस्टम यहां भी लागू होना चाहिए। इस मौके पर चीफ फार्मासिस्ट राजेश त्रिपाठी सहित कई लोग उपस्थित हुए।






















