न्यूरोइंटरवेंशन तकनीक से बच्चों के दिमाग की नसों की बनावट में खराबी का इलाज संभव
संस्थान में 24 घंटे स्ट्रोक यूनिट है संचालित
जन्मजात खराबी से हो सकता है स्ट्रोक
लखनऊ
बच्चों में दिमाग की नसों की जन्मजात खराबी यानी चाइल्डहुड सेरेब्रोवैस्कुलर मालफॉर्मेशन गंभीर बीमारी हो सकती है। इसमें दिमाग की रक्त वाहिकाएं सामान्य तरीके से विकसित नहीं होतीं और नसों के बीच असामान्य जुड़ाव बन जाता है। इससे दिमाग में रक्तस्राव, दौरे और स्ट्रोक तक का खतरा हो सकता है। समय पर पहचान और आधुनिक इलाज से बच्चे को गंभीर जटिलताओं से बचाया जा सकता है। यह जानकारी संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआइ) के न्यूरोइंटरवेंशन रेडियोलॉजिस्ट प्रो. विवेक सिंह ने संस्थान में आयोजित इंडियन सोसाइटी ऑफ न्यूरोरेडियोलॉजी (आईएसएनआर) मिड-टर्म सीएमई-2026 में दी।
प्रो. विवेक सिंह ने बताया कि बच्चों में दिमाग की रक्त वाहिकाओं की कई तरह की जन्मजात विकृतियां देखी जाती हैं। इनमें सेरेब्रल एवीएम, वेन ऑफ गैलेन मालफॉर्मेशन, पियल आर्टिरियोवेनस फिस्टुला और स्यूडोएन्यूरिज्म प्रमुख हैं। इनकी वजह से दिमाग में खून का प्रवाह असामान्य हो जाता है। कई बार बीमारी का पता तब चलता है जब बच्चे को अचानक दौरा पड़ता है, तेज सिरदर्द होता है, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी आती है या ब्रेन हेमरेज हो जाता है।
उन्होंने बताया कि इलाज बीमारी के आकार, स्थान और उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है। न्यूरोइंटरवेंशन आधुनिक इलाज की ऐसी तकनीक है, जिसमें बिना बड़ी सर्जरी के शरीर की नस के रास्ते कैथेटर को दिमाग की प्रभावित नस तक पहुंचाया जाता है। इसके जरिए असामान्य रक्त वाहिकाओं में विशेष पदार्थ डालकर उनके रक्त प्रवाह को बंद किया जा सकता है। कुछ बच्चों में सर्जरी या रेडियोसर्जरी की भी जरूरत पड़ सकती है। सही मरीज का सही समय पर इलाज बेहद महत्वपूर्ण है।
एसजीपीजीआई के रेडियोडायग्नोसिस विभाग की प्रमुख प्रो. अर्चना गुप्ता ने बताया कि संस्थान बच्चों और वयस्कों में जटिल न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के लिए आधुनिक इमेजिंग और कम चीरा लगाने वाली उपचार सुविधाओं को लगातार मजबूत कर रहा है। संस्थान में 24 घंटे स्ट्रोक यूनिट भी संचालित है।
प्रो. विवेक सिंह ने बताया कि बच्चों में स्ट्रोक और रक्त वाहिकाओं की जन्मजात विकृतियों के इलाज के लिए रेडियोलॉजी, न्यूरोइंटरवेंशन, न्यूरोलॉजी और बाल चिकित्सा विशेषज्ञों की संयुक्त टीम की जरूरत होती है। प्रस्तावित एडवांस्ड पीडियाट्रिक सेंटर में बच्चों को जांच से लेकर उपचार तक की सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
सीएमई में देशभर के विशेषज्ञ बच्चों में स्ट्रोक, ब्रेन वैस्कुलर मालफॉर्मेशन और आधुनिक न्यूरोइंटरवेंशन , मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी, कैरोटिड इंटरवेंशन और इंट्राक्रेनियल प्रशिक्षण दिया जाएगा।

























