विश्व ऑस्टियोपोरोसिस डे
पीजीआइ में बुजुर्गों की जल्दी जुड़ेगी हड्डी, मिलेगा मुफ्त खास इंजेक्शन
कुमार संजय । लखनऊ
विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस पर बुजुर्गों के लिए अच्छी खबर है। एसजीपीजीआइ के ऑर्थोपेडिक्स विभाग में कूल्हे के पास की टूटी हड्डी (इंटरट्रोकैन्टेरिक फ्रैक्चर) को जल्दी जोड़ने के लिए शोध शुरू किया गया है। इसमें खास रसायन टेरिपैराटाइड इंजेक्शन मरीजों को निःशुल्क दिया जा रहा है। अपेक्स ट्रॉमा केंद्र के ऑर्थोपेडिक सर्जन प्रो. कुमार केशव ने बताया कि पहले 6 अध्ययनों (4 रैंडमाइज्ड ट्रायल और 2 अन्य) के 393 मरीजों के डेटा का विश्लेषण किया गया। इसमें टेरिपैराटाइड लेने वाले 175 मरीजों में हड्डी जुड़ने का समय सामान्य इलाज वाले 218 मरीजों से कम रहा। वेरस कोलैप्स जैसी जटिलताएं भी कम मिलीं। यह रिव्यू वर्ल्ड जर्नल ऑफ ऑर्थोपेडिक्स में प्रकाशित हुआ है। इसमें एनेस्थीसिया से डा. कुमार कौस्तुभ और सांख्यिकी से प्रो. प्रभाकर मिश्रा शामिल रहे हैं।
अब पीजीआई में शुरू हुआ नया इलाज
इसी परिणाम के आधार पर प्रो. केशव प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर के रूप में दवा का उपयोग कर रहे हैं। यह अध्ययन 9.95 लाख के इंट्राम्यूरल फंड से हो रहा है। इसमें 35 मरीजों को टेरिपैराटाइड इंजेक्शन मुफ्त दिया जाएगा। तीन माह के इलाज का खर्च करीब 12,000 रुपये है।
कैसे काम करती है दवा
ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डी खोखली हो जाती है, इसलिए फ्रैक्चर देर से जुड़ता है। टेरिपैराटाइड नई हड्डी बनाने की प्रक्रिया तेज करती है। क्या है इंटरट्रोकैन्टेरिक फ्रैक्चर यह कूल्हे के जोड़ के नीचे जांघ की हड्डी के ऊपरी हिस्से का फ्रैक्चर है, जो बुजुर्गों में सबसे आम है। इसमें ऑपरेशन कर इम्प्लांट से हड्डी जोड़ी जाती है, पर कमजोर हड्डी से देर लगती है और इम्प्लांट झुकने (वेरस कोलैप्स) की दिक्कत हो सकती है।
बॉक्स फ्रैक्चर का बड़ा कारण है
50 साल से अधिक उम्र की हर तीसरी महिला और हर पांचवें पुरुष में फ्रैक्चर का कारण ऑस्टियोपोरोसिस है। 50 से अधिक उम्र की 20 फीसदी महिलाओं और 10 से 15 फीसदी पुरुषों में यह बीमारी है, आम आबादी में दर 18.3 फीसदी है।
बॉक्स क्या होता है ऑस्टियोपोरोसिस
इसमें हड्डियों का घनत्व कम होकर वे खोखली हो जाती हैं। मामूली चोट पर फ्रैक्चर का खतरा बढ़ता है। 50 से अधिक उम्र, मेनोपॉज के बाद महिलाओं और कैल्शियम-विटामिन डी की कमी वालों में खतरा ज्यादा है। शुरुआत में लक्षण नहीं दिखते, बाद में कमर-कूल्हे में दर्द और शरीर झुकना संकेत हैं। बचाव के लिए दूध-दही, धूप, व्यायाम और बीएमडी जांच जरूरी है।



























