सोमवार, 2 मार्च 2026

हेडफोन बच्चों के सुनने की क्षमता कर रहा है प्रभावित

 



पीजीआई में विश्व श्रवण दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम

60 प्रतिशत मामलों में श्रवण हानि को रोकना संभव

 हेडफोन बच्चों के सुनने की क्षमता कर रहा है प्रभावित 


 उत्तर प्रदेश में करीब एक करोड़ सुनने की परेशानी से ग्रस्त

लखनऊ।

संजय गांधी गांधी पीजीआई के हेड एंड नेक सर्जरी विभाग द्वारा विश्व श्रवण दिवस पर जागरूकता   कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अमित केशरी और डॉक्टर रूद्र प्रकाश ने बताया कि भारत में लगभग 6.3 करोड़ लोग किसी न किसी स्तर की सुनने की समस्या से प्रभावित हैं। जनसंख्या के अनुपात के आधार पर उत्तर प्रदेश में करीब 90 लाख से एक करोड़ लोग श्रवण हानि से जूझ रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या बच्चों की है। यदि बच्चों में सुनने की समस्या समय पर नहीं पहचानी जाती तो इसका सीधा असर बोलने, सीखने, पढ़ाई और सामाजिक विकास पर पड़ता है।

प्रो. केशरी के अनुसार, बच्चों में श्रवण हानि के प्रमुख कारणों में जन्मजात समस्याएं, समय से पहले जन्म, बार-बार कान में संक्रमण, तेज आवाज का संपर्क, मोबाइल व हेडफोन का अत्यधिक उपयोग और कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव शामिल हैं। उन्होंने कहा कि लगभग 60 प्रतिशत मामलों में श्रवण हानि को रोका या नियंत्रित किया जा सकता है, बशर्ते समय पर जांच और इलाज हो। उपचार में दवाइयां, सर्जरी, हियरिंग एड, कॉक्लियर इम्प्लांट और स्पीच व ऑडियोलॉजिकल थेरेपी कारगर साबित होती हैं।

प्रो केशरी ने बताया कि इस वर्ष की थीम रही— “समुदायों से कक्षाओं तक: सभी बच्चों के लिए श्रवण देखभाल”। निदेशक प्रो. आर. के. धीमान के संरक्षण में लखनऊ के दो प्रमुख विद्यालयों—द मिलेनियम स्कूल और केंद्रीय विद्यालय—में श्रवण जागरूकता व्याख्यान, स्क्रीनिंग शिविर और पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की गई। बच्चों की प्योर टोन ऑडियोमेट्री जांच की गई और जरूरतमंद विद्यार्थियों को एसजीपीजीआई में निःशुल्क परामर्श के लिए रेफर किया गया।

दोनों विद्यालयों के कक्षा 1 से 8 तक के 150 से अधिक बच्चों ने पोस्टर प्रतियोगिता में भाग लिया। 2 मार्च को आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में एसजीपीजीआई के डीन प्रो. शलीन कुमार ने बच्चों में ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों को भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक बताया। विभाग के प्रोफेसर रुद्रा  ने कहा कि समय पर जांच, सही इलाज और जागरूकता से बच्चों को श्रवण हानि से बचाया जा सकता है।


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