पीजीआई में सेंट्रल वेनस कैथेटर पर कार्यशाला
सीवीसी में गलती पड़ सकती है भारी
हर 5 में से 1 मरीज में संक्रमण से सेप्सिस का खतरा
संजय गांधी पीजीआई में मरीजों को संक्रमण से बचाने के लिए सेंट्रल लाइन से होने वाले संक्रमण की रोकथाम पर बुधवार को कार्यशाला आयोजित की गई। अस्पताल प्रशासन विभाग के हॉस्पिटल इंफेक्शन कंट्रोल सेल द्वारा नर्सिंग अधिकारियों और छात्रों को प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि सेंट्रल वेनस कैथेटर (सी वी सी) एक विशेष ट्यूब होती है, जिसे बड़ी नस में डालकर दवा, फ्लूड और पोषण दिया जाता है। यदि इसके रखरखाव में गलती होती है तो 48–72 घंटे के भीतर खून में संक्रमण फैल सकता है। इससे तेज बुखार, ठंड लगना, सांस लेने में दिक्कत, ब्लड प्रेशर गिरना और अंगों पर असर जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। समय पर इलाज न मिलने पर यह स्थिति सेप्सिस में बदल सकती है। सीवीसी लगे मरीजों में करीब हर 5 में से 1 मरीज में संक्रमण विकसित हो सकता है, जो आगे चलकर सेप्सिस का कारण बनता है। इसलिए इसे रोकना बेहद जरूरी है। इंडो सर्जन प्रो. ज्ञान चंद ने संक्रमण रोकथाम में तय प्रोटोकॉल के पालन पर जोर दिया। चिकित्सा अधीक्षक प्रो. आर. हर्षवर्धन ने कहा कि छोटी-सी चूक भी मरीज के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. देवेंद्र गुप्ता ने नर्सिंग केयर संक्रमण रोकने में अहम बताया। कार्यशाला में डॉ. अश्मिता पॉल ने हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण दिया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शालिनी त्रिवेदी ने किया। प्रशिक्षण के दौरान सुरक्षित कैथेटर उपयोग, संक्रमण के शुरुआती लक्षण पहचानने और आपात स्थिति से निपटने के व्यावहारिक तरीके सिखाए गए। प्रो हर्ष वर्धन का कहना है कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से अस्पताल में संक्रमण दर कम होगी और मरीजों की सुरक्षा व इलाज की गुणवत्ता में सुधार आएगा।

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