गुरुवार, 5 मार्च 2026

पीजीआई में अत्याधुनिक न्यूरो-ओटोलॉजी लैब का उद्घाटन







 पीजीआई में अत्याधुनिक न्यूरो-ओटोलॉजी लैब का उद्घाटन, जटिल श्रवण रोगों की जांच व इलाज में मिलेगी मदद


बच्चों में सुनने की समस्या का समय से पहचान जरुरी

लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई में वर्ल्ड हियरिंग डे 2026 के अवसर पर अत्याधुनिक न्यूरो-ओटोलॉजी लैब का उद्घाटन किया गया। संस्थान के निदेशक प्रो. आर. के. धीमान ने इस लैब का शुभारंभ किया। इस मौके पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. देवेंद्र गुप्ता और न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. अवधेश जायसवाल भी मौजूद रहे।

नई न्यूरो-ओटोलॉजी लैब में श्रवण और संतुलन से जुड़ी बीमारियों की जांच के लिए अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं। इनकी मदद से सामान्य और जटिल कोक्लियर इम्प्लांट मामलों की बेहतर योजना बन सकेगी और मरीजों के इलाज को अधिक सटीक बनाया जा सकेगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह लैब कान से जुड़े तंत्रिका तंत्र की समस्याओं, चक्कर आने की शिकायत और बच्चों में सुनने की क्षमता से जुड़ी दिक्कतों की पहचान में विशेष रूप से सहायक होगी।

इस अवसर पर न्यूरोसर्जरी विभाग की न्यूरो-ओटोलॉजी यूनिट के प्रमुख डॉ. रवि शंकर ने कहा कि बच्चों में सुनने की समस्या की समय पर पहचान बेहद जरूरी है। यदि शुरुआती अवस्था में इसका पता चल जाए तो बच्चे के भाषण, भाषा विकास, सीखने की क्षमता और सामाजिक विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि समुदाय की भागीदारी से बच्चों में श्रवण समस्याओं की पहचान और उपचार को और बेहतर बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम में एसजीपीजीआई परिसर स्थित केंद्रीय विद्यालय के विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और श्रवण स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी प्राप्त की। इसके अलावा कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी करा चुके बच्चों के अभिभावकों तथा संभावित मरीजों के परिजनों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया और अपने अनुभव साझा किए।

 प्रो. धीमान ने कहा कि सुनने की कमी एक “मूक विकलांगता” है, जो धीरे-धीरे बढ़ती है, लेकिन समय पर जांच और उपचार से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से पीजीआई बच्चों के श्रवण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

कार्यक्रम का आयोजन वर्ल्ड हियरिंग  डे  2026 की थीम “कम्युनिटीज टू क्लासरूम्स – हियरिंग केयर फॉर एवरी चाइल्ड” (कम्युनिटीज टू क्लासरूम्स – हियरिंग केयर फॉर एवरी चाइल्ड) के तहत किया गया।

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