शनिवार, 28 मार्च 2026

पीजीआई में ब्रेन डेड महिला के परिजनों का बड़ा फैसला, दो मरीजों को मिला नया जीवन समय पर निर्णय से बना मानवता का उदाहरण

 




पीजीआई में ब्रेन डेड महिला के परिजनों का बड़ा फैसला, दो मरीजों को मिला नया जीवन समय पर निर्णय से बना मानवता का उदाहरण






 संजय गांधी पीजीआई में एक बार फिर मानवता की मिसाल सामने आई है। मध्य प्रदेश निवासी रानी देवी के परिजनों ने गहरे दुःख के बीच अंगदान का साहसिक निर्णय लेकर दो लोगों को नया जीवन दे दिया। रानी देवी को 20 मार्च 2026 को मस्तिष्क में रक्तस्राव (ब्रेन हेमरेज) के बाद पीजीआई के न्यूरोसर्जरी विभाग में भर्ती किया गया था। उनका इलाज डॉ. वेद प्रकाश मौर्य और डॉ. अनंता की देखरेख में चल रहा था। 23 मार्च को उनका जटिल ऑपरेशन किया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका। इसके बाद विभाग के प्रो अरुण श्रीवास्तव ने अंगदान की योजना पर विचार किया। 27 मार्च 2026 को चार वरिष्ठ चिकित्सकों के पैनल ने विस्तृत परीक्षण के बाद रानी देवी को ब्रेन स्टेम डेड घोषित कर दिया। इसके पश्चात ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर और स्टेट ऑर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सीटो) की टीम ने पति सुधीर सचान सहित परिजनों को अंगदान के लिए प्रेरित किया। दुःख की इस घड़ी में परिवार ने सहमति देते हुए मानवता का परिचय दिया। संस्थान के संयुक्त निदेशक के नेतृत्व में पूरी रात ट्रांसप्लांट और हार्वेस्ट टीमों के बीच समन्वय बनाए रखा गया। वेटिंग लिस्ट के आधार पर नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. नारायण प्रसाद के नेतृत्व में दो मरीजों का चयन किया गया। सभी जरूरी चिकित्सकीय जांच के बाद 42 और 52 वर्ष के दो पुरुषों को किडनी प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त पाया गया। हालांकि इस मामले में केवल दोनों किडनियों का ही सफल प्रत्यारोपण हो सका। लीवर ट्रांसप्लांट इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि समय रहते कोई उपयुक्त मरीज केजीएमयू, पीजीआई या अन्य केंद्रों पर उपलब्ध नहीं हो सका। विशेषज्ञों के अनुसार अधिक इंतजार करने पर किडनियां भी उपयोग में नहीं आ पातीं, ऐसे में समय पर लिया गया निर्णय दो जिंदगियों को बचाने में निर्णायक साबित हुआ। 28 मार्च 2026 की सुबह करीब 4 बजे सोटो-यूपी टीम ने दोनों किडनियां सुरक्षित रूप से ट्रांसप्लांट ओटी तक पहुंचाईं, जहां सफल प्रत्यारोपण किया गया। संस्थान के निदेशक प्रो. आर.के. धीमन ने बताया कि यह वर्ष 2026 का दूसरा कैडेवरिक डोनेशन है। उन्होंने कहा कि यह घटना समाज को यह संदेश देती है कि समय पर लिया गया एक निर्णय कई जिंदगियों को बचा सकता है। 



बॉक्स: इन डॉक्टरों ने निभाई अहम भूमिका ब्रेन स्टेम डेथ निर्धारण प्रक्रिया में प्रो. कुंतल कांति दास और डॉ. अंकित शामिल रहे। नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. नारायण प्रसाद के नेतृत्व में मरीजों का चयन किया गया, जिसमें डॉ. जेया मेयप्पन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। किडनी ट्रांसप्लांट टीम में यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख और ट्रांसप्लांट सर्जन प्रो. एम.एस. अंसारी, डॉ. संचित रुस्तगी और प्रो. संजय सुरेखा ने सर्जरी को सफल बनाया। एनेस्थीसिया टीम में प्रो. संदीप साहू, डॉ. दिव्या और डॉ. तपस ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया। इसके अलावा समन्वय की जिम्मेदारी संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक एवं सोटो के संयुक्त निदेशक प्रो राजेश हर्षवर्धन ने संभाली, जबकि ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर संजय सिंह, नीलिमा दीक्षित और भोलेश्वर पाठक की भूमिका अहम रही।

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