शुक्रवार, 1 मई 2026

नन्हे दिल को मिली नई धड़कन: एसजीपीजीआई में बिना ऑपरेशन शिशु का इलाज

 



नन्हे दिल को मिली नई धड़कन: एसजीपीजीआई में बिना ऑपरेशन शिशु का इलाज

PDA बीमारी से जूझ रहे प्रीमैच्योर बच्चे का ट्रांसकैथेटर डिवाइस क्लोजर से सफल उपचार

लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई के  हृदय रोग विशेषज्ञ नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ और निश्चेतना विशेषज्ञों ने मिलकर  समय से पहले जन्म लेने वाले यानि 34 हफ्ते में जन्मे एक बेहद नाजुक प्रीमैच्योर शिशु के दिल की गंभीर बीमारी पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस ( पीडीए )का बिना ऑपरेशन सफल इलाज किया गया।

हृदय रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर अंकित साहू के मुताबिक पीडीए एक ऐसी स्थिति है जिसमें जन्म के बाद दिल की एक रक्त वाहिका बंद नहीं होती और खुली रह जाती है। इससे खून का प्रवाह असामान्य हो जाता है, फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और बच्चे को सांस लेने में दिक्कत होती है। कई मामलों में यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।

यह शिशु एक हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी से जन्मा था, जिसमें मां को पहले 13 बार गर्भ हानि हो चुकी थी। जन्म के तुरंत बाद बच्चे को सांस लेने में गंभीर परेशानी हुई और उसे  को एनआईसीयू  में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। जांच में   पीडीए की पुष्टि हुई।

शुरुआत में दवाओं के जरिए इस नस को बंद करने की कोशिश की गई, लेकिन अपेक्षित लाभ नहीं मिला। इसके बाद करीब 45वें दिन  ट्रांसकैथेटर डिवाइस क्लोजर तकनीक अपनाई। इस प्रक्रिया में शरीर के अंदर एक पतली नली (कैथेटर) के जरिए छोटा उपकरण डालकर खुली नस को बंद किया जाता है, जिससे ओपन सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती।

इस जटिल प्रक्रिया को हृदय रोग विभाग के प्रमुख  प्रो. आदित्य कपूर और प्रो अंकित साहू ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। नवजात विभाग की टीम, जिसमें डॉ. फौजिया फरहत, डॉ. अभिषेक पॉल, डॉ. अनीता सिंह, डॉ. आकांक्षा वर्मा, डॉ. आरोही गुप्ता और डॉ. आर.के. श्वेताभ शामिल रहे, ने शिशु की लगातार निगरानी और देखभाल की। यह पूरी टीम विभागाध्यक्ष डॉ. कीर्ति एम. नरांजे के निर्देशन में कार्यरत रही।

प्रक्रिया के बाद बच्चे की हालत में तेजी से सुधार हुआ। धीरे-धीरे उसे वेंटिलेटर से हटाया गया, उसने खुद सांस लेना शुरू किया, दूध पीने लगा और उसका वजन भी बढ़ने लगा। अंततः 76वें दिन शिशु को पूरी तरह स्वस्थ होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

संस्थान के निदेशक प्रो. आर.के. धीमन ने इस सफलता पर पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञता और बेहतर टीमवर्क का उदाहरण है।