बुधवार, 27 मई 2026

हार्ट सर्जरी में दिल को सुरक्षा देगा खास घोल

 



हार्ट सर्जरी में दिल को सुरक्षा देगा खास घोल 




हार्ट सर्जरी में इस्तेमाल होने वाले दो सुरक्षा घोलों के प्रभाव का अध्ययन 


ओपन हार्ट सर्जरी के दौरान डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती दिल की मांसपेशियों को सुरक्षित रखने की होती है। सर्जरी के समय कुछ देर के लिए दिल की धड़कन नियंत्रित तरीके से रोकी जाती है, ताकि ऑपरेशन आसानी और सुरक्षित ढंग से किया जा सके। इसी दौरान इस्तेमाल होने वाले विशेष सुरक्षा घोलों को लेकर संजय गांधी पीजीआई और सेंटर फॉर बायोमेडिकल रिसर्च ने अहम अध्ययन किया है। अध्ययन में यह समझने की कोशिश की गई कि हार्ट सर्जरी में इस्तेमाल होने वाले अलग-अलग कार्डियोप्लेजिया घोल शरीर में किस तरह के जैव-रासायनिक बदलाव पैदा करते हैं और उनका दिल की कोशिकाओं पर क्या असर पड़ सकता है। हार्ट सर्जन प्रोफेसर एसके अग्रवाल के मुताबिक हार्ट सर्जरी के दौरान मरीज को “कार्डियोप्लेजिया घोल” दिया जाता है। यह घोल हृदय की रक्त वाहिकाओं के जरिए सीधे दिल तक पहुंचाया जाता है। इसका उद्देश्य कुछ समय के लिए दिल की धड़कन को नियंत्रित तरीके से रोकना और दिल की मांसपेशियों को ऊर्जा व सुरक्षा देना होता है। एनेस्थीसिया विभाग के प्रोफेसर अमित रस्तोगी के मुताबिक अध्ययन में दो प्रमुख कार्डियोप्लेजिया घोलों के प्रभावों की तुलना की गई। एक घोल की खासियत यह है कि इसका असर अपेक्षाकृत लंबे समय तक बना रह सकता है, जबकि दूसरे को जरूरत के अनुसार दोबारा देना पड़ सकता है। 


शोध में क्या पता चला 



अध्ययन में 22 मरीजों के रक्त नमूनों की जांच की गई। सर्जरी के दौरान और बाद में दिल तथा नसों से लिए गए रक्त का विश्लेषण 800 मेगाहर्ट्ज एनएमआर स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक से किया गया। जांच में पाया गया कि दोनों घोलों के इस्तेमाल के बाद शरीर में अलग-अलग तरह के मेटाबॉलिक बदलाव हुए। इनमें “सक्सिनेट” नामक जैव-रासायनिक पदार्थ का स्तर महत्वपूर्ण पाया गया। वैज्ञानिकों के मुताबिक सक्सिनेट शरीर में उस स्थिति का संकेत हो सकता है, जब दिल में रक्त प्रवाह रुकने और दोबारा शुरू होने के दौरान कोशिकाओं पर तनाव बढ़ता है। रक्त प्रवाह दोबारा शुरू होने पर यह प्रक्रिया हानिकारक ऑक्सीजन कणों के बनने से जुड़ सकती है, जो कोशिकाओं को प्रभावित कर सकते हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि अध्ययन में दोनों घोलों के प्रभाव में अंतर देखा गया है।

 मरीजों को क्या होगा फायदा


 प्रोफेसर अमित रस्तोगी का कहना कि यदि भविष्य में यह बेहतर तरीके से समझा जा सके कि किस स्थिति में कौन सा कार्डियोप्लेजिया घोल अधिक उपयुक्त हो सकता है, तो हार्ट सर्जरी के दौरान दिल की सुरक्षा को और बेहतर बनाया जा सकता है। इससे मरीजों के जल्दी स्वस्थ होने और जटिलताओं के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।

 इन्होंने किया शोध 


इस अध्ययन में संस्थान के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग के प्रो. अमित रस्तोगी और प्रो प्रभात तिवारी, सीवीटीएस विभाग के प्रो शांतनु पांडे और प्रो सुरेंद्र कुमार अग्रवाल तथा सीबीएमआर के डॉ. रिमझिम त्रिवेदी, डॉ. दुर्गेश दुबे और डॉ. दिनेश कुमार शामिल रहे। प्रो शांतनु पांडे के मुताबिक शोध “कम्पेरेटिव एनालिसिस ऑफ क्लिनिको-मेटाबॉलिक प्रोफाइल्स बिटवीन सेंट थॉमस एंड डेल नीडो कार्डियोप्लेजिया सॉल्यूशंस : ए पायलट स्टडी” विषय पर किया गया। यह शोध अंतरराष्ट्रीय मेडिकल पत्रिका “परफ्यूजन” ने स्वीकार किया है।

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