एसजीपीजीआई ने किडनी प्रत्यारोपण में बनाया नया रिकॉर्ड, प्रदेशभर में बढ़ेगी सुविधा
उपमुख्यमंत्री बोले- वन विभाग का गेस्ट हाउस संस्थान को दिलाने का होगा प्रयास, अंगदान बढ़ाने पर दिया जोर
उत्कृष्ट कार्य करने वाले हुए सम्मानित
संजय गांधी पीजीआई के नेफ्रोलॉजी विभाग के 39वें स्थापना दिवस समारोह में किडनी प्रत्यारोपण, अंगदान और मरीजों की सुविधाओं को लेकर कई बड़े ऐलान हुए। संस्थान ने इस वर्ष 178 सफल किडनी प्रत्यारोपण कर अब तक का नया रिकॉर्ड बनाया है। वहीं प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेजों में भी किडनी प्रत्यारोपण सेवाएं शुरू कराने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है।
समारोह में पहुंचे उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि वन विभाग का गेस्ट हाउस एसजीपीजीआई को देने के लिए वह वन मंत्री से बात करेंगे और जल्द निर्णय कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे बाहर से इलाज, पढ़ाई और प्रशिक्षण के लिए आने वाले मरीजों, तीमारदारों और छात्रों को राहत मिलेगी।
उन्होंने कहा कि परिसर में 10 से 20 कमरों के साथ लगभग 200 लोगों की क्षमता वाला एक बड़ा बैठक कक्ष विकसित किया जा सकता है। इससे मरीजों के परिजनों और शैक्षणिक गतिविधियों दोनों को सुविधा मिलेगी।
प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों तक पहुंच रही एसजीपीजीआई की विशेषज्ञता
संस्थान के नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नारायण प्रसाद, प्रोफेसर अनुपम कौल और प्रोफेसर सोनकर ने बताया कि एसजीपीजीआई अब केवल लखनऊ तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में किडनी प्रत्यारोपण सेवाओं का नेटवर्क तैयार कर रहा है।
उन्होंने बताया कि संस्थान की टीम ने किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ और मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज में किडनी प्रत्यारोपण सेवाएं शुरू करा दी हैं। वहीं राजकीय मेडिकल कॉलेज झांसी, सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज आगरा और गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज कानपुर को भी प्रत्यारोपण की अनुमति मिल चुकी है। उपयुक्त दाता और मरीज मिलते ही इन संस्थानों में भी प्रत्यारोपण शुरू हो जाएगा।
प्रोफेसर सोनकर ने बताया कि केवल केजीएमयू में ही एसजीपीजीआई की टीम 19 किडनी प्रत्यारोपण कर चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अलग-अलग केंद्रों पर यह सुविधा शुरू होने से मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
इस वर्ष 178 प्रत्यारोपण, लक्ष्य 250 तक पहुंचाने का
प्रोफेसर नारायण प्रसाद ने बताया कि पहले संस्थान में सालाना लगभग 135 किडनी प्रत्यारोपण होते थे, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 178 तक पहुंच गई है। विभाग का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 250 तक ले जाने का है।
उन्होंने बताया कि संस्थान लगातार अंगदान को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है। इसी का परिणाम है कि इस वर्ष चार मृत देहदाता किडनी प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के बेहतर समन्वय के कारण संस्थान में हृदय प्रत्यारोपण भी संभव हो पाया है। अंगदान की प्रक्रिया मजबूत होने से भविष्य में अन्य अंग प्रत्यारोपण सेवाओं को भी गति मिलेगी।
डायलिसिस सेवाओं का बड़ा विस्तार
संस्थान में डायलिसिस सेवाओं का भी तेजी से विस्तार किया गया है। पहले प्रतिदिन 120 से 125 मरीजों की डायलिसिस होती थी, जो अब बढ़कर लगभग 250 मरीज प्रतिदिन हो गई है। इसके लिए आपातकालीन एवं रिनल ट्रांसप्लांट सेंटर में चार समर्पित वार्ड बनाए गए हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुविधाओं और मानव संसाधनों दोनों का विस्तार किया जा रहा है ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।
किडनी के इमरजेंसी मरीजों के लिए विशेष व्यवस्था
संस्थान में फॉलोअप पर चल रहे किडनी मरीजों के लिए विशेष आपातकालीन व्यवस्था बनाई गई है। यदि किसी मरीज की हालत गंभीर होती है तो पहले उसे इमरजेंसी में बेड देने की कोशिश की जाती है।
यदि इमरजेंसी में बेड उपलब्ध नहीं होता तो मरीज या उसके परिजनों को हर सुबह रिनल ट्रांसप्लांट सेंटर की तीसरी मंजिल पर बुलाया जाता है। यहां सभी यूनिट के विशेषज्ञ चिकित्सक राउंड के बाद खाली हुए बेड और मरीज की गंभीरता का आकलन करते हैं। ज्यादा गंभीर मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर भर्ती किया जाता है, जबकि जिन मरीजों की स्थिति दवाओं और सलाह से नियंत्रित हो सकती है उन्हें उपचार देकर घर भेज दिया जाता है।
अंगदान बढ़ाने के लिए ट्रॉमा सेंटर को निर्देश
उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि प्रदेश में अंगदान को बढ़ावा देने के लिए और गंभीर प्रयास करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय ट्रॉमा सेंटर के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सड़क दुर्घटना या ब्रेन डेड की स्थिति वाले मामलों की सूचना तुरंत एसजीपीजीआई और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को दी जाए।
उन्होंने कहा कि समय पर सूचना मिलने से परिजनों की काउंसलिंग की जा सकेगी और जरूरत पड़ने पर वह स्वयं भी परिवार से बात करेंगे।
उत्तर प्रदेश में जरूरत ज्यादा, प्रत्यारोपण कम
प्रोफेसर अनुपम कौल ने बताया कि उत्तर प्रदेश में हर वर्ष लगभग 50 हजार मरीजों को किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है, लेकिन पूरे प्रदेश में केवल 500 से 700 प्रत्यारोपण ही हो पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस अंतर को कम करने के लिए अंगदान को जनआंदोलन बनाना होगा और प्रदेश में अधिक से अधिक प्रत्यारोपण केंद्र स्थापित करने होंगे।
उन्नत वृक्क रोग केंद्र बनाने का सुझाव
इस मौके पर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के मेडिकल कॉलेज के निदेशक प्री एस एन शंखवार ने कहा कि गुजरात की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी उन्नत वृक्क रोग एवं अनुसंधान केंद्र स्थापित किया जाना चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि एसजीपीजीआई के आपातकालीन एवं रिनल ट्रांसप्लांट सेंटर को एक समर्पित उन्नत वृक्क केंद्र के रूप में विकसित किया जाए, जिससे प्रदेश के लाखों मरीजों को लाभ मिल सके।
समारोह में यह सम्मानित
मृत देहदाता परिवारों को विशेष सम्मान
स्वर्गीय संदीप सिंह की पत्नी
स्वर्गीय रानी देवी के पति
लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड
डॉ. विजय खेर
विशिष्ट पूर्व छात्र सम्मान
डॉ. श्याम बंसल
सचिव, इंडियन सोसायटी ऑफ नेफ्रोलॉजी
मृत देहदाता प्रत्यारोपण कार्यक्रम में योगदान के लिए सम्मान
डॉ. एन. गोपालकृष्णन, निदेशक ट्रांसटान
श्रीमती ललिता रघुरमन, निदेशक मोहन फाउंडेशन
डॉ. विवेक कुटे, सचिव इंडियन सोसायटी ऑफ ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन
डॉ. अरविंद गुप्ता, विभागाध्यक्ष नेफ्रोलॉजी, प्रयागराज मेडिकल कॉलेज
सर्वश्रेष्ठ सीनियर रेजिडेंट सम्मान
डॉ. यशेंदु सारदा
डॉ. सौर्य सौरभ मोहाकुड़ा
डॉ. आकाश राय
डॉ. कृतिका गुप्ता
ब्रिजिंग द बॉन्ड अवॉर्ड
संतोष वर्मा
कस्टोडियन अवॉर्ड
राजीव खान
नाइटिंगेल ऑफ द ईयर सम्मान
अनीता शेरॉन
रजनी गांधा
पुष्पा अखिलेश
डॉली एंटनी
मोहम्मद नसीम
प्रिंसी
लवेश
डिलिजेंट वर्कर अवॉर्ड
रोहित
राम प्रताप
सुधा
संतोष कुमार
संजय
मधु
प्रेमचंद
महेश कुमार
प्रशांत सिंह
मीरा
गुड्डी
अभिषेक
बॉक्स : इस वर्ष की बड़ी उपलब्धियां
178 सफल किडनी प्रत्यारोपण
लक्ष्य 250 प्रत्यारोपण तक पहुंचाने का
चार मृत देहदाता किडनी प्रत्यारोपण
प्रतिदिन 250 मरीजों की डायलिसिस
चार समर्पित डायलिसिस वार्ड





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