रविवार, 3 मई 2026

पीजीआइ में सर्जरी ट्रेनिंग की नई पहल, मरीजों को मिलेगा ज्यादा सुरक्षित इलाज



पीजीआइ में सर्जरी ट्रेनिंग की नई पहल, मरीजों को मिलेगा ज्यादा सुरक्षित इलाज


सिमुलेशन आधारित नी आर्थ्रोस्कोपी कोर्स से डॉक्टरों की स्किल बढ़ेगी, ऑपरेशन होगा ज्यादा सटीक


 अब घुटने की सर्जरी कराने वाले मरीजों के लिए राहत की खबर है। संजय गांधी पीजीआइ में शुरू हुई नई सिमुलेशन आधारित ट्रेनिंग से डॉक्टरों की दक्षता बढ़ेगी, जिससे सर्जरी ज्यादा सुरक्षित, सटीक और कम जटिल होगी। इसका सीधा फायदा मरीजों को बेहतर इलाज और जल्दी रिकवरी के रूप में मिलेगा।

इसी दिशा में  ऑर्थोपेडिक्स विभाग ने उत्तर भारत का पहला “हैंड्स-ऑन नी आर्थ्रोस्कोपी सिमुलेशन कोर्स” आयोजित किया। यह कार्यक्रम एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के एडवांस स्किल लैब में हुआ, जिसमें देशभर से आए डॉक्टरों और ट्रेनी सर्जनों ने भाग लिया।

 कोर्स में वर्चुअल रियलिटी  आधारित सिमुलेटर के जरिए डॉक्टरों को घुटने की सर्जरी की बारीकियां सिखाई गईं। प्रतिभागियों को असली उपकरणों के साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी गई, जिसमें कैमरा हैंडलिंग, ट्रायएंगुलेशन, पोर्टल प्लेसमेंट और डायग्नोस्टिक आर्थ्रोस्कोपी जैसी तकनीकों पर फोकस किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के निदेशक प्रो. आर.के. धीमन के संरक्षण में हुआ। एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख प्रो. अरुण श्रीवास्तव आयोजन अध्यक्ष रहे, जबकि प्रो. पुलक शर्मा आयोजन सचिव रहे।

प्रो.  शर्मा ने बताया कि इस तरह की सिमुलेशन ट्रेनिंग से सर्जन बिना किसी जोखिम के पहले ही अभ्यास कर लेते हैं, जिससे ऑपरेशन के दौरान गलती की संभावना कम हो जाती है और मरीजों की सुरक्षा बढ़ती है। यह

 आधुनिक सर्जिकल ट्रेनिंग के क्षेत्र में नई ऊंचाई देने के साथ ही मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें