पिगटेल तकनीक से एंजियोग्राफी होगी और सुरक्षित
एंजियोग्राफी में पिगटेल कैथेटर सेहोगी नसों की सुरक्षा और जटिलताएं कम
दिल के इलाज में की जाती है एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी
कुमार संजय
दिल की बीमारियों में एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी आम प्रक्रियाएं हैं, लेकिन इन दौरान हाथ की नसों में चोट ( इंजरी) होना आम समस्या रही है। अक्सर गाइड कैथेटर की नुकीली टिप से नसों में रेज़र ब्लेड इफेक्ट बनता है, जिससे नस में ऐंठन, चोट, सूजन और ब्लॉकेज जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। संजय गांधी पीजीआइ के कार्डियोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने शोध में पाया गया कि पिगटेल असिस्टेड ट्रैकिंग (पीएटी) तकनीक इन समस्याओं को आधे से भी ज्यादा कम कर देती है।विशेषज्ञों ने 260 मरीजों पर अध्ययन किया। मरीजों को दो समूहों में बांटा गया। एक समूह में पीएटी तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जबकि दूसरे में पारंपरिक गाइड कैथेटर। परिणाम बताते हैं कि पीएटी तकनीक वाले समूह में हाथ की नसों में जटिलताएं केवल 11.5 प्रतिशत थीं, जबकि पारंपरिक कैथेटर में यह 25.4 प्रतिशत थी।
क्या होता है पिगटेल
मुख्य शोधकर्ता प्रो. नवीन गर्ग के मुताबिक पिगटेल कैथेटर एक पतली और लचीली नली होती है, जिसका सिरा गोल और घुमावदार (पिगटेल) होता है। इसे गाइड कैथेटर के अंदर डाला जाता है। इसका गोल सिरा नस के अंदर सुरक्षित रहता है, घर्षण और चोट का जोखिम कम करता है और ब्लॉकेज हटाने में मदद करता है। पारंपरिक कैथेटर की तुलना में यह मरीजों के लिए अधिक आरामदायक होता है। तकनीकी अंतर की बात करें तो पिगटेल कैथेटर की गोल टिप नसों को सुरक्षित रखती है, जबकि साधारण कैथेटर की नुकीली सीधी टिप नसों में चोट का खतरा बढ़ा देती है। लागत की दृष्टि से पिगटेल कैथेटर ₹1,500–₹3,000 अतिरिक्त खर्च बढ़ाता है, जबकि साधारण कैथेटर ₹2,000–₹5,000 के बीच उपलब्ध है।
शोध टीम
प्रो. नवीन गर्ग, डॉ. मुकेश कुमार यादव, प्रो. आदित्य कपूर , प्रो. सतेंद्र तिवारी प्रो. रूपाली खन्ना प्रो. अंकित साहू डॉ. हर्षित खरे डॉ. अर्पिता कथेरिया डॉ. अर्शद नजीर ने पीएटी तकनीक की सुरक्षा और प्रभावशीलता का मूल्यांकन और एंजियोग्राफी/एंजियोप्लास्टी के दौरान नसों में जटिलताओं में कमी विषय पर शोध किया जिसे इंडिन हार्ट जर्नल ने मान्यता दी है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें