सोमवार, 18 मई 2026

20 दिनों तक मौत से लड़ता रहा डेढ़ साल का मासूम, पीजीआई के डॉक्टरों ने सांस की नली से निकाली मूंगफली






20 दिनों तक मौत से लड़ता रहा डेढ़ साल का मासूम, पीजीआई के डॉक्टरों ने सांस की नली से निकाली मूंगफली
लगातार खांसी, बुखार और टूटती सांसों के बीच SGPGI की टीम ने बचाई बच्चे की जिंदगी
लखनऊ। कभी तेज खांसी, कभी सांस फूलना और कभी बुखार… जौनपुर का 15 माह का एक मासूम पिछले 20 दिनों से इन्हीं तकलीफों के बीच जिंदगी से जूझ रहा था। परिवार को लग रहा था कि यह सामान्य संक्रमण है, लेकिन असली वजह बच्चे की सांस की नली में फंसी एक छोटी-सी मूंगफली थी, जिसने उसकी हर सांस को खतरे में डाल दिया था। आखिरकार संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS) के चिकित्सकों ने समय रहते जटिल प्रक्रिया कर बच्चे की जान बचा ली।
परिजनों के अनुसार, बच्चे को लगातार खांसी, बार-बार बुखार और सांस लेने में परेशानी हो रही थी। कई जगह इलाज और दवाइयों के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हो रहा था। बाद में उसे SGPGIMS रेफर किया गया, जहां पीडियाट्रिक सर्जिकल सुपर-स्पेशियलिटी विभाग की टीम ने जांच और इमेजिंग के दौरान बच्चे की बाईं मुख्य ब्रोंकस (श्वास नली) में फॉरेन बॉडी फंसे होने की आशंका जताई।
स्थिति गंभीर होने पर तत्काल आपातकालीन ब्रोंकोस्कोपी की तैयारी की गई। पीडियाट्रिक सर्जरी, पल्मोनरी मेडिसिन और एनेस्थीसिया विभाग की बहु-विषयक टीम ने सामान्य एनेस्थीसिया के तहत बेहद सावधानी से प्रक्रिया को अंजाम दिया और बच्चे की सांस की नली से पुरानी मूंगफली को सफलतापूर्वक बाहर निकाल दिया। प्रक्रिया के तुरंत बाद बच्चे की सांस लेने में तकलीफ कम हुई और खांसी में भी राहत मिली।
यह जटिल उपचार पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रो. बसंत कुमार, पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रो. अजमल खान और एनेस्थीसियोलॉजी विभाग के प्रो. संजय कुमार के मार्गदर्शन में रेजिडेंट डॉक्टरों और ऑपरेशन थिएटर स्टाफ की टीम ने मिलकर किया।
चिकित्सकों ने बताया कि छोटे बच्चों में खेलते या खाते समय मूंगफली, बीज, सिक्के, बटन या खिलौनों के छोटे हिस्से सांस की नली में चले जाने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। कई बार इसके लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम या निमोनिया जैसे लगते हैं, जिससे सही कारण का पता देर से चलता है। समय पर पहचान न होने पर यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।
डॉक्टरों ने अभिभावकों से अपील की कि छोटे बच्चों को कभी भी बिना निगरानी के छोटे खाद्य पदार्थ या छोटी वस्तुएं न दें। यदि किसी बच्चे में अचानक तेज खांसी, दम घुटने जैसा महसूस होना, घरघराहट या सांस लेने में परेशानी शुरू हो जाए, तो इसे सामान्य संक्रमण मानकर नजरअंदाज न करें और तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करें।
इस सफल उपचार ने एक बार फिर साबित किया है कि SGPGIMS में उपलब्ध एडवांस्ड पीडियाट्रिक एयरवे इंटरवेंशन, त्वरित निदान और विशेषज्ञों के समन्वय से गंभीर से गंभीर स्थिति में भी बच्चों को नया जीवन दिया जा सकता है।

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