गॉलब्लैडर कैंसर से पीड़ित मरीज की मौत, पीजीआई प्रशासन ने पुलिस को दी सूचना
लखनऊ। बस्ती निवासी 61 वर्षीय मरीज मुस्ताक अली को एडवांस्ड एडेनो कार्सिनोमा ऑफ गॉलब्लैडर के उपचार के लिए 21 अप्रैल 2026 को डॉ. आशीष सिंह की देखरेख में गैस्ट्रो सर्जरी वार्ड में भर्ती किया गया था।
संस्थान की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 17 मई 2026 की रात मरीज की हालत स्थिर थी। वह सहज थे और कर्मचारियों से सामान्य रूप से बातचीत कर रहे थे।
18 मई 2026 की सुबह पास के बिस्तर पर भर्ती एक मरीज के तीमारदार ने मुस्ताक अली की हालत गंभीर होने की सूचना वार्ड के नर्सिंग स्टाफ को दी। नर्सिंग स्टाफ ने तुरंत उनकी जांच की, जिसमें मरीज की नब्ज और रक्तचाप नहीं मिला तथा वे कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे थे। उनकी दाहिनी गर्दन पर गहरा घाव था। मरीज के सिर के आसपास, बिस्तर पर और फर्श पर काफी मात्रा में खून फैला हुआ था।
वार्ड के नर्सिंग स्टाफ ने तत्काल सीपीआर शुरू किया और वार्ड के रेजिडेंट डॉक्टर को सूचना दी। स्थिति को देखते हुए रेजिडेंट डॉक्टर ने भी सीपीआर में सहयोग किया। प्रोटोकॉल के अनुसार करीब 15 मिनट तक सीपीआर करने के बावजूद मरीज को बचाया नहीं जा सका।
संस्थान प्रशासन ने मामले की जानकारी आगे की जांच के लिए तुरंत पुलिस को दे दी है।
क्या है
एडवांस्ड एडेनो कार्सिनोमा ऑफ गॉलब्लैडर तो इसका मतलब आमतौर पर कैंसर गॉलब्लैडर से बाहर फैल चुका है या ऑपरेशन से पूरी तरह निकालना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में इलाज का लक्ष्य अक्सर बीमारी को नियंत्रित करना, दर्द कम करना और जीवन की गुणवत्ता बेहतर रखना होता है।
जीवन अवधि हर मरीज में अलग होती है, लेकिन मेडिकल आंकड़ों के अनुसार:
कई मरीज कुछ महीनों तक जीवित रहते हैं।
कुछ मरीज कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी या इम्यूनोथेरेपी से 1 साल या उससे अधिक भी जी सकते हैं।
अगर शरीर कमजोर हो, लिवर बहुत प्रभावित हो, बार-बार संक्रमण या पीलिया हो, तो स्थिति ज्यादा गंभीर मानी जाती है।
इन लक्षणों से डॉक्टर गंभीरता का अंदाजा लगाते हैं:
तेजी से वजन घटना
बहुत कमजोरी
लगातार पीलिया
पेट में पानी भरना
तेज दर्द
खाना कम हो जाना
सांस फूलना या बार-बार संक्रमण

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