शनिवार, 30 मई 2026

रोबोटिक सर्जरी से 9 वर्षीय बच्ची को मिला नया जीवन

 





रोबोटिक सर्जरी से 9 वर्षीय बच्ची को मिला नया जीवन

केजीएमयू में पहली बार हुई कोलेडोकल सिस्ट की रोबोटिक सर्जरी

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग ने पहली बार रोबोटिक तकनीक से 9 वर्षीय बच्ची का जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक कर नई उपलब्धि हासिल की है।

कई अस्पतालों के बाद केजीएमयू में मिला समाधान

फर्रुखाबाद निवासी 9 वर्षीय माही लंबे समय से कोलेडोकल सिस्ट (Choledochal Cyst) नामक दुर्लभ जन्मजात बीमारी से पीड़ित थी। कई अस्पतालों में इलाज के बावजूद राहत नहीं मिलने पर परिजन उसे केजीएमयू लेकर पहुंचे। जांच के बाद विशेषज्ञों ने रोबोटिक सर्जरी की सलाह दी।

क्या है कोलेडोकल सिस्ट?

कोलेडोकल सिस्ट पित्त (बाइल) ले जाने वाली नलिकाओं में होने वाली असामान्य सूजन या फैलाव की जन्मजात बीमारी है। समय पर इलाज न होने पर यह लीवर संक्रमण, पीलिया, बार-बार पेट दर्द और अन्य गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है। इसके उपचार में प्रभावित पित्त नलिका को हटाकर पित्त के प्रवाह के लिए नया मार्ग बनाया जाता है।

सफल रहा पहला रोबोटिक ऑपरेशन

विभागाध्यक्ष प्रो. जे.डी. रावत के नेतृत्व में 20 मई 2026 को रोबोटिक तकनीक से ऑपरेशन किया गया। पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में इस बीमारी का यह पहला रोबोटिक ऑपरेशन था, जो पूरी तरह सफल रहा।

कम दर्द, तेजी से रिकवरी

रोबोटिक सर्जरी में छोटे चीरे लगते हैं, रक्तस्राव कम होता है और ऑपरेशन अधिक सटीकता से किया जा सकता है। यही कारण रहा कि माही की रिकवरी तेजी से हुई और 29 मई को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

टीमवर्क से मिली सफलता

सर्जरी टीम में डॉ. सुधीर सिंह, डॉ. गुरमीत सिंह, डॉ. कृति पटेल, डॉ. अमोल और डॉ. रौनक शामिल रहे। नर्सिंग स्टाफ रीता, संजय और राकेश तथा एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. मनीष सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कुलपति ने दी बधाई

केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने इस उपलब्धि पर पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता आधुनिक चिकित्सा तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकीय टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण है।

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