विश्व किडनी दिवस पर एसजीपीजीआई में वॉकाथॉन व जागरूकता कार्यक्रम, अंगदान का दिया संदेश
लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई के नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी व किडनी ट्रांसप्लांट विभाग ने स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) के सहयोग से विश्व किडनी दिवस के अवसर पर वॉकाथॉन और जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। विशेषज्ञों ने बताया कि
भारत में अनुमानतः हर 10 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी किडनी रोग से प्रभावित है। हर वर्ष लगभग 2 लाख लोगों को किडनी प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है, लेकिन केवल 10–12 हजार ट्रांसप्लांट ही हो पाते हैं। अंगदान दर अभी भी प्रति एक लाख आबादी पर लगभग 1 से कम है, जबकि कई विकसित देशों में यह 20–30 प्रति लाख तक है।
नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. नारायण प्रसाद और किडनी ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ प्रो. एम. एस. अंसारी ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को किडनी रोगों की रोकथाम, मृतक दाता (डिसीज़्ड डोनर) ट्रांसप्लांटेशन और अंगदान के प्रति जागरूक करना था। इसके बाद आयोजित सभा में चिकित्सकों, छात्रों और आम नागरिकों ने भाग लिया।
नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. नारायण प्रसाद ने बताया कि विश्व किडनी दिवस हर वर्ष मार्च के दूसरे गुरुवार को मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम किडनी हेल्थ फॉर ऑल: केयरिंग फॉर पीपुल, प्रोटेक्टिंग द प्लैनेट है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण, प्लास्टिक और विषैले रसायनों का बढ़ता प्रभाव किडनी स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। समय रहते जांच और उपचार से किडनी रोग की प्रगति को काफी हद तक रोका जा सकता है।
यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष एवं किडनी ट्रांसप्लांट एक्सपर्ट
प्रो. एम. एस. अंसारी ने बताया कि किडनी स्टोन (पथरी) किडनी रोगों का एक बड़ा कारण है, लेकिन यह सबसे अधिक रोके जा सकने वाले कारणों में भी शामिल है। उन्होंने कहा कि पर्याप्त पानी पीना, संतुलित आहार और नियमित जांच से पथरी और किडनी फेलियर के जोखिम को कम किया जा सकता है।
निदेशक प्रो. आर. के. धीमान ने कहा कि अंगदान मानवता की सबसे बड़ी सेवा है, क्योंकि एक व्यक्ति का दान कई लोगों को नया जीवन दे सकता है।
सोटो की ओर से प्रो. राजेश हर्षवर्धन ने उत्तर प्रदेश में अंगदान को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एसजीपीजीआई में हाल ही में सफल मल्टी-ऑर्गन रिट्रीवल और प्रत्यारोपण ने राज्य में मृतक दाता कार्यक्रम को नई गति दी है।
संस्थान के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवेंद्र गुप्ता ने कहा कि युवाओं और विद्यार्थियों को अंगदान के प्रति जागरूक करना बहुत जरूरी है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपनी बेटी की लिखी एक कविता सुनाकर अंगदान की मानवीय संवेदना को भी व्यक्त किया।
नेफ्रोलॉजी की प्रोफेसर प्रो. अनुपमा कौल ने कहा कि शोक के क्षण में किसी परिवार का अंगदान का निर्णय लेना असाधारण करुणा और साहस का उदाहरण है। यह एक ऐसा मानवीय उपहार है, जो कई परिवारों को नया जीवन दे सकता है।
कार्यक्रम के अंत में उन चिकित्सकों, रेजिडेंट डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने मृतक दाता प्रत्यारोपण कार्यक्रम को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इनमें एनेस्थीसियोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और सोटो से जुड़े विशेषज्ञ शामिल थे। नेफ्रोलॉजी विभाग के संतोष वर्मा सहित अन्य लोग विशेष रूप से शामिल हुए।


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