रील दे रहा है सर दर्द
लखनऊ। यदि सिर दर्द, माइग्रेन या कंधे-गर्दन के दर्द में दो-तीन महीने तक दवा लेने के बावजूद आराम नहीं मिल रहा और दवा बंद करते ही दर्द फिर शुरू हो जाता है, तो केवल दवाओं पर निर्भर रहना समाधान नहीं है। इसके पीछे अक्सर गर्दन के आसपास की मांसपेशियों और नसों में तनाव जिम्मेदार होता है। ऐसे मामलों में नर्व ब्लॉक तकनीक प्रभावी उपचार साबित हो सकती है।
यह जानकारी संजय गांधी पीजीआई के पेन क्लिनिक मैनेजमेंट विभाग के प्रोफेसर संदीप खुबा, प्रोफेसर सुजीत गौतम,प्रो चेतना तथा विभागाध्यक्ष प्रो. संजय धीराज ने दी। उन्होंने बताया कि इस विषय पर विभाग की ओर से दो दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की जा रही है, जिसमें दर्द के आधुनिक उपचार और नर्व ब्लॉक तकनीक के बारे में शिक्षकों व युवा चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक दर्द निवारक दवाएं लेने से किडनी और लिवर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए जिन मरीजों में दर्द बार-बार लौट आता है, उनमें कारण का सही मूल्यांकन कर उपचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 60 से 65 प्रतिशत लोग जीवन में कभी न कभी सिर दर्द से प्रभावित होते हैं। इनमें से 30 से 35 प्रतिशत मरीजों में टेंशन टाइप हेडेक तथा 20 से 25 प्रतिशत में माइग्रेन पाया जाता है। इसके पीछे मोबाइल पर्व रील देखना बड़ा कारण है।
लगातार मोबाइल देखने से गर्दन की मांसपेशियों में लगातार तनाव के कारण वहां की नसें प्रभावित हो जाती हैं। ऐसे मरीजों में सिंपैथेटिक नर्व ब्लॉक या अन्य नर्व ब्लॉक प्रक्रियाओं से दर्द के संकेतों को अस्थायी रूप से रोककर राहत दी जाती है। इस तकनीक में विशेष सुई के माध्यम से प्रभावित नस के आसपास दवा दी जाती है, जिससे दर्द का चक्र टूट जाता है और मरीज को लंबे समय तक राहत मिल सकती है।
उन्होंने सलाह दी कि लगातार सिर या गर्दन के दर्द से परेशान मरीजों को विशेषज्ञ से परामर्श लेकर पेन क्लिनिक में जांच करानी चाहिए।
मोबाइल देखने से गर्दन पर पड़ता है 25 किलो का भार
विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल फोन को झुककर देखने की आदत सिर और गर्दन के दर्द का बड़ा कारण बन रही है। सामान्य स्थिति में गर्दन पर सिर का भार लगभग 5 से 6 किलोग्राम होता है, लेकिन जब व्यक्ति मोबाइल देखने के लिए सिर झुका लेता है तो यह भार बढ़कर 25 से 30 किलोग्राम तक हो जाता है। लंबे समय तक ऐसा होने से गर्दन की मांसपेशियां तनावग्रस्त हो जाती हैं और आसपास की नसों पर दबाव पड़ने लगता है, जिससे सिर दर्द, कंधे का दर्द और माइग्रेन की समस्या बढ़ सकती है।


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