ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर की ट्रेनिंग से यूपी में बढ़ेगा अंगदान, एसजीपीजीआई में 'लाइफ कनेक्ट ट्रांस-कोऑर्ड' आज से शुरू
उत्तर प्रदेश में मृत दाताओं से अंगदान को एक नियमित अस्पताल प्रक्रिया बनाने और वेटिंग लिस्ट में मौजूद हजारों मरीजों को नया जीवन देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन - उत्तर प्रदेश, एसजीपीजीआई के अस्पताल प्रशासन विभाग और नेफ्रोलॉजी विभाग द्वारा नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन के तत्वावधान में पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 'लाइफ कनेक्ट ट्रांस-कोऑर्ड' आज से एसजीपीजीआई में शुरू हो गया। यह कार्यक्रम 29 अक्टूबर तक चलेगा।
प्रोफेसर राजेश हर्षवर्धन और प्रोफेसर नारायण प्रसाद ने बताया कि आईसीयू, डोनर के परिवार और ट्रांसप्लांट टीम के बीच सबसे अहम कड़ी होता है। अंगदान होगा या नहीं, यह अक्सर इस बात पर निर्भर करता है कि कोऑर्डिनेटर कितनी जल्दी संभावित डोनर की पहचान करता है, कितनी संवेदनशीलता से शोक संतप्त परिवार की काउंसलिंग करता है और कितनी तत्परता से कानूनी औपचारिकताएं पूरी करता है। सबसे अधिक आबादी वाले राज्य यूपी में इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। इसी को देखते हुए इस कार्यक्रम की थीम रखी गई है - "हर आईसीयू जीवन का एक संभावित उपहार है"।
प्रशिक्षण के दौरान कानूनी ढांचा, ब्रेन स्टेम डेथ की पहचान, डोनर केयर और परिवार से बुरी खबर साझा करने व अंगदान का अनुरोध करने जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए गए। इसमें मोहन फाउंडेशन के डॉ. आर. राघवेंद्र और वरिष्ठ ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर विशेषज्ञ जया जयराम सहित एसजीपीजीआई के विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण दे रहे है।
आने वाले दिनों में किडनी, लिवर, कॉर्निया, हाथ, त्वचा और बोन मैरो प्रत्यारोपण, ऑथराइजेशन कमेटी की प्रक्रिया, मेडिको-लीगल पहलू, सर्कुलेटरी डेथ के बाद अंगदान, अंगों को निकालने और उनके परिवहन तथा नोटो पंजीकरण जैसे विषय कवर किए जाएंगे। कोर्स में व्याख्यान के साथ केस स्टडी, समूह गतिविधि, फिल्म और क्विज भी शामिल हैं। डॉ. क्रिस अग्रवाल
. डॉ. दीक्षा दुबे . डॉ. मोशर्रफ हसन , डॉ. एकता यादव , डॉ. अर्पिता तिवारी ,. डॉ. नेहा राय , डॉ. सेजल गुप्ता ,. डॉ. हर्षिता चौधरी ,कार्यक्रम समन्वयक
भोलेश्वर पाठक , नीलिमा दीक्षित कार्यक्रम संचालन में विशेष सहयोग रहा।
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8 परिवारों के अंगदान से 22 जिंदगियां रोशन
2025 से एसजीपीजीआईएमएस, केजीएमयू, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, कमांड हॉस्पिटल और अपोलोमेडिक्स में 8 परिवारों ने अपने प्रियजन को खोने के गहरे दुख में भी अंगदान का साहसिक निर्णय लिया। उनके इस फैसले से 22 लोगों के जीवन में नई रोशनी आई। अप्रैल 2026 में प्रदेश का पहला सफल हृदय प्रत्यारोपण किया गया और मई 2026 में पहली बार मृत अंगदाता से कॉर्निया प्राप्त किया गया। फोटो को और साफ करें जो तीसरे व्यक्ति कल कोर्ट में खड़े हैं उनको और नजदीक लाए



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