मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026

मेनोपॉज धीमी प्रक्रिया नहीं, अचानक आने वाला बड़ा शारीरिक बदलाव :

 


रजोनिवृत्ति धीमी प्रक्रिया नहीं, अचानक आने वाला बड़ा शारीरिक बदलाव : 

 महिलाओं में रजोनिवृत्ति यानी मेनोपॉज को लेकर अब तक माना जाता था कि यह धीरे-धीरे होने वाला बदलाव है, लेकिन  वैज्ञानिकों के नए अध्ययन ने इस धारणा को बदल दिया है। शोध में सामने आया है कि शरीर में बदलाव ढलान की तरह नहीं, बल्कि खाई की तरह एक साथ आता है। यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल नेचर मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है।

 शोधकर्ताओं ने पाया कि 90 में से 52 स्वास्थ्य मानकों में अंतिम माहवारी के आसपास एक साथ बड़ा उछाल देखा गया। खास बात यह है कि समान उम्र के पुरुषों में ऐसा कोई बदलाव नहीं मिला।

कौन से टेस्ट बढ़े और कौन से घटे

अध्ययन के अनुसार शरीर के लगभग सभी तंत्रों में यह उछाल देखा गया।


जो टेस्ट बढ़े -

• कोलेस्ट्रॉल और रक्त वसा से जुड़े टेस्ट : एलडीएल कोलेस्ट्रॉल (खराब कोलेस्ट्रॉल) और एपोबी। ये दोनों हृदय रोग के प्रमुख कारक हैं। • लिवर से जुड़े टेस्ट : एएलपी, एएलटी, जीजीटी और बिलीरुबिन का स्तर बढ़ा। • किडनी से जुड़े टेस्ट : सिस्टेटिन सी और होमोसिस्टीन का स्तर बढ़ा। • हार्मोन से जुड़ा टेस्ट : एफएसएच (फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हार्मोन) में सबसे बड़ा उछाल। • हड्डी टूटने का मार्कर : बोन एएलपी और फेरिटिन। 

जो टेस्ट घटे -

• हड्डियों की मजबूती : रीढ़ की हड्डी का बोन मिनरल डेंसिटी (बीएमडी) और कैल्शियम, एल्बुमिन का स्तर घटा। शोध में बीएमडी में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। • महिला हार्मोन : एस्ट्राडियोल (ई2) और एएमएच हार्मोन का स्तर तेजी से घटा। यह गिरावट अंतिम माहवारी से करीब 12 से 15 साल पहले से ही शुरू हो जाती है। • सोडियम और ऑस्मोलैलिटी का स्तर भी घटा। 

जो टेस्ट सुधरे -

• आयरन, हीमोग्लोबिन और आरबीसी काउंट में सुधार देखा गया, क्योंकि माहवारी बंद होने से खून की कमी कम होती है।  हार्मोन थेरेपी से असर कम

शोध में यह भी पाया गया कि जो महिलाएं हार्मोन थेरेपी ले रही थीं, उनमें यह बदलाव काफी कम रहा। 80 में से 39 मानकों पर थेरेपी लेने वाली महिलाओं में अंतर साफ दिखा, खासकर हड्डी, लिवर और किडनी से जुड़े टेस्ट में।

विशेषज्ञों की सलाह

शोधकर्ताओं का कहना है कि 40 से 50 वर्ष की उम्र में जब माहवारी अनियमित होने लगे, उसी समय कोलेस्ट्रॉल और हड्डियों की जांच करा लेनी चाहिए। इससे हृदय रोग और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों को समय रहते रोका जा सकता है। हार्मोन थेरेपी पर कोई भी फैसला डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें