गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026

 





हेपेटाइटिस के इलाज में ऐतिहासिक सफलता: क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी के लिए दुनिया की पहली एंटीसेंस थेरेपी 'हिब्सागो' को मंजूरी


अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने 20 अक्टूबर 2026 को क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी के इलाज में नया इतिहास रच दिया है।  बेपिरोविरसेन ब्रांड नाम हिब्सागो को मंजूरी दे दी है। यह दुनिया की पहली एंटीसेंस ओलिगोन्यूक्लियोटाइड थेरेपी है जिसे हेपेटाइटिस बी के लिए मंजूर किया गया है। इसे कंपनी जीएसके ने बनाया है।


अब तक हेपेटाइटिस बी का इलाज आजीवन चलता था। एंटेकाविर और टेनोफोविर जैसी दवाएं वायरस को दबाए रखती हैं, लेकिन खत्म नहीं करतीं। हिब्सागो पहली बार चुनिंदा मरीजों को सस्टेन्ड फंक्शनल क्योर का मौका दे रही है, यानी इलाज पूरी तरह बंद करने के बाद भी वायरस का नियंत्रण में रहना।


कैसे काम करती है दवा

यह दवा हेपेटाइटिस बी वायरल आरएनए को टारगेट करती है। इससे वायरल प्रोटीन, खासकर एचबीएसएजी बनना कम हो जाता है। एचबीएसएजी कम होने पर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता वायरस पर लंबे समय तक नियंत्रण पा लेती है।


किन मरीजों को मिलेगी

1. बिना सिरोसिस वाले वयस्क मरीज 2. जो कम से कम 6 महीने से न्यूक्लियोसाइड एनालॉग थेरेपी पर हों 3. जिनका एचबीवी डीएनए सप्रेस्ड हो 4. जिनका एचबीएसएजी लेवल 3,000 आईयू प्रति एमएल से कम हो 

इलाज का तरीका

इसे अकेले नहीं लेना है। 24 हफ्ते तक हफ्ते में एक बार त्वचा के नीचे इंजेक्शन के रूप में मौजूदा एंटीवायरल के साथ लेना होगा। आखिरी इंजेक्शन के बाद भी कम से कम 24 हफ्ते तक पुरानी दवा जारी रखनी होगी। पहली डोज के बाद मरीज खुद इंजेक्शन लगा सकता है।


फेज थ्री बी-वेल ट्रायल के नतीजे

ट्रायल में 19 प्रतिशत मरीजों में फंक्शनल क्योर मिला, जबकि प्लेसीबो में 0 प्रतिशत था। जिनका एचबीएसएजी 1,000 से कम था, उनमें यह दर 26 प्रतिशत तक रही। फंक्शनल क्योर का मतलब है - इलाज बंद करने के बाद भी एचबीएसएजी निगेटिव रहना और एचबीवी डीएनए का पता न चलना।


सुरक्षा निगरानी

लिवर फंक्शन टेस्ट, प्लेटलेट काउंट, किडनी फंक्शन और एचबीवी डीएनए की नियमित जांच जरूरी है, ताकि लिवर रिएक्शन और थ्रोम्बोसाइटोपेनिया जैसे दुष्प्रभाव पकड़े जा सकें।


लंबे समय की निगरानी

फंक्शनल क्योर का मतलब वायरस का पूरी तरह खत्म होना नहीं है, इसलिए दोबारा संक्रमण और लिवर कैंसर की निगरानी जारी रखनी होगी।


खर्च कितना

कंपनी ने अभी कीमत नहीं बताई है, लेकिन बाजार अनुमान के मुताबिक शुरुआती लिस्ट प्राइस लगभग 13 लाख 20 हजार रुपये से 35 लाख 20 हजार रुपये प्रति कोर्स आंकी गई है। वहीं सालाना खर्च के अनुमान 44 लाख रुपये से 88 लाख रुपये तक लगाए जा रहे हैं।


जबकि भारत में पुरानी दवाएं एंटेकाविर 760 से 1,600 रुपये और टेनोफोविर 1,100 रुपये प्रति बोतल में मिलती हैं, यानी साल का खर्च 10 से 20 हजार रुपये। पुरानी दवा सस्ती पर आजीवन लेनी पड़ती है, नई दवा महंगी पर 24 हफ्ते में 5 में से 1 मरीज को दवा-मुक्त होने का मौका दे सकती है।

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