गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026

डायबिटीज में किडनी फेल होने से बचाएगी ये दवा, दो बड़े ट्रायल में साबित हुआ असर

 


डायबिटीज में किडनी फेल होने से बचाएगी ये दवा, दो बड़े ट्रायल में साबित हुआ असर

 इर्बेसार्टन और लोसार्टन ने डायलिसिस के खतरे को 28 फीसदी तक घटाया, डॉक्टर बोले- प्रोटीन आते ही शुरू करना होगा इलाज


लखनऊ। टाइप टू डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए राहत की बड़ी खबर है। अब किडनी को फेल होने से बचाया जा सकता है। साल 2001 में हुए दो ऐतिहासिक परीक्षणों आईडीएनटी और रेनाल ने यह साबित कर दिया है कि एआरबीएस समूह की दवाओं से किडनी खराब होने की रफ्तार को काफी हद तक रोका जा सकता है। खास बात यह है कि यह फायदा सिर्फ ब्लड प्रेशर कम करने से नहीं मिलता, बल्कि दवा का किडनी पर सीधा सुरक्षात्मक असर होता है।

क्या कहते हैं दोनों ऐतिहासिक ट्रायल

पहला परीक्षण था **आईडीएनटी यानी इर्बेसार्टन डायबिटिक नेफ्रोपैथी ट्रायल**। इसमें 1715 मरीज शामिल किए गए थे। इन मरीजों को रोजाना इर्बेसार्टन 300 मिलीग्राम दी गई। इसका फॉलोअप 2.6 साल तक किया गया।


दूसरा परीक्षण था **रेनाल यानी रिडक्शन ऑफ एंडप्वाइंट्स इन एनआईडीडीएम विद द एंजियोटेंसिन टू एंटागोनिस्ट लोसार्टन**। इसमें 1513 मरीजों को रोजाना लोसार्टन 50 से 100 मिलीग्राम दी गई। इसका फॉलोअप 3.4 साल तक चला।


दोनों ही परीक्षणों में ऐसे मरीज लिए गए थे, जिन्हें टाइप टू डायबिटीज के साथ हाइपरटेंशन और ओवर्ट नेफ्रोपैथी थी, यानी पेशाब में प्रोटीन आना शुरू हो गया था।

किस दवा से तुलना की गई, किसमें ज्यादा फायदा

आईडीएनटी में इर्बेसार्टन की तुलना एम्लोडिपिन 10 मिलीग्राम और प्लेसीबो यानी नकली दवा से की गई। नतीजा चौंकाने वाला रहा। इर्बेसार्टन ने प्लेसीबो की तुलना में किडनी फेलियर के संयुक्त खतरे को 20 प्रतिशत और एम्लोडिपिन की तुलना में 23 प्रतिशत तक कम कर दिया।


रेनाल में लोसार्टन की तुलना सिर्फ प्लेसीबो से की गई। इसमें लोसार्टन ने 16 प्रतिशत तक खतरा कम किया।


अलग-अलग पैमानों पर देखें तो क्रिएटिनिन के दोगुना होने को रोकने में इर्बेसार्टन ने 33 प्रतिशत का फायदा दिखाया, जबकि लोसार्टन ने 25 प्रतिशत का फायदा दिखाया। यानी इस मोर्चे पर इर्बेसार्टन आगे रही।


वहीं अंतिम स्टेज की किडनी बीमारी यानी डायलिसिस की नौबत को रोकने में लोसार्टन ने 28 प्रतिशत और इर्बेसार्टन ने 23 प्रतिशत फायदा दिखाया। इस मोर्चे पर लोसार्टन थोड़ी आगे रही। दोनों ने ही यह साबित किया कि किडनी को बचाया जा सकता है।

कैसे बचाती है ये दवा किडनी को

विशेषज्ञों के अनुसार शरीर में एंजियोटेंसिन टू नाम का हार्मोन किडनी की बारीक नसों को सिकोड़ देता है। इससे किडनी के फिल्टर पर दबाव बढ़ता है और प्रोटीन पेशाब के रास्ते बाहर निकलने लगता है। इर्बेसार्टन और लोसार्टन इसी हार्मोन के रिसेप्टर को ब्लॉक कर देती हैं।


इससे किडनी के अंदर का प्रेशर कम होता है, प्रोटीन लीकेज रुकता है और क्रिएटिनिन बढ़ने की रफ्तार धीमी हो जाती है। यही कारण है कि आज देश-विदेश की सभी गाइडलाइन कहती हैं कि डायबिटीज के मरीज के पेशाब में जरा सा भी प्रोटीन आए तो एआरबीएस दवा तुरंत शुरू कर देनी चाहिए।



खर्च कितना आएगा - ज्यादा असरदार और कम असरदार दवा में फर्क




1. ज्यादा कारगर - इर्बेसार्टन 300 मिलीग्राम


बाजार में इसका ब्रांडेड नाम आईरोवेल 300 के नाम से मिलता है।

• 1 पत्ते में 10 टेबलेट का दाम - 200 से 269 रुपयेऔर कहीं जेनेरिक में 55 रुपये प्रति पत्ता भी   • एमआरपी लिस्ट पर 312 रुपये लिखा है   

एक महीने का खर्च (रोज 1 गोली के हिसाब से 30 गोली):

• ब्रांडेड लेने पर - लगभग 600 से 800 रुपये महीना • जेनेरिक लेने पर - लगभग 150 से 250 रुपये महीना 

2. थोड़ी कम कारगर पर सस्ती - लोसार्टन 50 / 100 मिलीग्राम


रेनाल ट्रायल में यही डोज इस्तेमाल हुई थी। यह सबसे ज्यादा बिकने वाली और सस्ती एआरबीएस है।

• लोसार्टन 50 मिलीग्राम - 51 रुपये प्रति पत्ता (10 गोली)   • लोसार्टन 100 मिलीग्राम - 99 से 122 रुपये प्रति पत्ता   

एक महीने का खर्च:

• लोसार्टन 50 मिलीग्राम रोज 1 गोली - लगभग 150 से 180 रुपये महीना • लोसार्टन 100 मिलीग्राम रोज 1 गोली - लगभग 300 से 360 रुपये महीना 

सीधा मतलब -

अगर डॉक्टर इर्बेसार्टन 300 लिखते हैं तो ब्रांडेड का खर्च लोसार्टन से दोगुना पड़ता है, लेकिन जेनेरिक में दोनों का खर्च लगभग बराबर आ जाता है। लोसार्टन आज भी भारत में किडनी प्रोटेक्शन के लिए सबसे किफायती विकल्प है, इसलिए सरकारी अस्पतालों में इसी को ज्यादा लिखा जाता है।



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