गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026

पार्किंसन में कोलेस्ट्रॉल का नया रोल, चूहों पर मैग्नीशियम का असर दिखा


 


पार्किंसन में कोलेस्ट्रॉल का नया रोल, चूहों पर मैग्नीशियम का असर दिखा


पार्किंसन एक ऐसी बीमारी है जिसमें हाथ-पैर कांपते हैं, चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है। अब वैज्ञानिकों को इसका एक नया कारण मिला है - दिमाग की कोशिकाओं में कोलेस्ट्रॉल का फंस जाना।


पहले से कहा जाता रहा है कि शरीर में मैग्नीशियम कम होने से पार्किंसन का खतरा बढ़ सकता है। जापान में 249 मरीजों और 368 स्वस्थ लोगों पर हुई जांच में देखा गया कि जो लोग ज्यादा मैग्नीशियम वाला खाना खाते थे, उनमें बीमारी का खतरा लगभग एक तिहाई कम था। अमेरिका में 20 हजार लोगों पर हुई दूसरी स्टडी में भी यही बात दिखी। पर ये दोनों स्टडी सिर्फ इशारा करती हैं, पक्का कारण नहीं बतातीं।


अब 2026 में 'नेचर न्यूरोसाइंस' नाम की बड़ी पत्रिका में एक नई स्टडी छपी है, जिसने कारण समझाने की कोशिश की है।


वैज्ञानिकों ने क्या पाया?


पार्किंसन से जिन लोगों की मौत हुई, उनके दिमाग के उस हिस्से में जहां से चलना-फिरना कंट्रोल होता है, ABCA1 नाम का एक प्रोटीन बहुत ज्यादा मिला। यह प्रोटीन कोलेस्ट्रॉल को एक जगह से दूसरी जगह ले जाता है।


चूहों पर प्रयोग में पता चला कि यही प्रोटीन जब ज्यादा काम करता है तो डोपामाइन बनाने वाले न्यूरॉन्स के अंदर कोलेस्ट्रॉल भर देता है। इससे कोशिका का सफाई सिस्टम बंद हो जाता है, गंदा प्रोटीन जमा होने लगता है और न्यूरॉन मर जाता है। यही पार्किंसन में होता है।


चूहों पर मैग्नीशियम का प्रयोग


वैज्ञानिकों ने चूहों को 24 हफ्ते तक मैग्नीशियम साइट्रेट नाम की दवा दी। यह दवा ABCA1 प्रोटीन को रोकती है।


नतीजा ऐसा रहा -

बिना दवा वाले चूहों में सिर्फ 45% डोपामाइन कोशिकाएं बचीं। सबसे ज्यादा डोज पाने वाले चूहों में 79% कोशिकाएं बच गईं।

उनके चलने-फिरने की क्षमता भी लगभग दोगुनी हो गई।

जैसे-जैसे डोज बढ़ी, दिमाग में जमा कोलेस्ट्रॉल और जहरीला प्रोटीन कम होता गया।


आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब?


इससे लगता है कि दिमाग में कोलेस्ट्रॉल का फंसना पार्किंसन को बढ़ा सकता है और मैग्नीशियम उसे रोकने में मदद कर सकता है।


लेकिन ध्यान दें - यह प्रयोग सिर्फ चूहों पर हुआ है। दवा इंजेक्शन से दी गई थी, गोली के रूप में नहीं। इंसानों के लिए कौन सी डोज सही है, यह अभी पता नहीं है। इसलिए खुद से मैग्नीशियम की गोली लेना शुरू न करें। यह रिसर्च सिर्फ इतना कहती है कि अब इंसानों पर इसकी जांच करना जरूरी है।

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