माइक्रोवस्कुलर तकनीक से जुड़ी उंगली
कटी उंगली का पीजीआई में हुआ प्रत्यारोपण सर्जरी
सुल्तानपुर जिले के ग्राम सुरजाम में रहने वाले 9 वर्षीय श्लोक दायें हाथ की दो उंगली चारा काटने की मशीन में फंस कट गयी जो पूरी तरह से अलग हो गई। परिजन बच्चे को कटी उंगली के साथ लेकर सुबह 10 बजे के आस-पास एपेक्स ट्रामा सेंटर पहुंचे । ट्रामा सेंटर से इस मामले की जानकारी मिली तो तुरंत प्लास्टिक सर्जरी विभाग की टीम एलर्ट हो हो कर कटी उंगली के प्रत्यारोपण के तैयारी में लग गयी। पहले अलह हुई उंगली के साफ किया गया इसके बाद जहां से उंगली कटी थी उसे साफ किया गया। सारी तैयारी के बाद बुधवार को तीन बजे सर्जरी शुरू हुई जो सात घंटे चली। प्रत्यारोपण पूरी तरह सफल रहा । विभाग के प्रमुख एवं मुख्य सर्जन प्रो. राजीव अग्रवाल ने बताया कि उंगली के प्रत्यारोपण में अत्यंत सूक्ष्म एवं पतली धमनियों को माइक्रोवस्कुलर सर्जरी की तकनीक से जोडा गया। यह सर्जरी जटिल एवं परिष्कृत होती है और इन धमनियों को जोड़ने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। प्रत्यारोपण एक जटिल प्रक्रिया 8 से 12 घंटे लगते है। सर्जरी में गंभीर जटिलता जुड़ी हुई हड्डियों ठीक से जोड़ने में होती है। अधिकांश मामलों में अच्छे से परिणाम होते है। उंगली जो जोड़ी गयी है उसमें कम गति शीलती सर्जरी के बाद हो सकती है।
ऐसे की गई सर्जरी
सबसे पहले कटी उंगली को जोड़ने के लिए में हड्डी को के वायर से जोडा जाता है। इसके उंगली की धमनी ( आर्टरी) को जोड़ते है जिससे उंगली में रक्त का संचार हो जाये। इसके बाद उंगली की शिरा (वेन) को जोड़ते है फिर बाद नस (नर्व) को जोड़ा जाता है के साथ टेंडन को जोड़ते हैं। आखिरी में त्वचा को जोडा ।
ऐसे लाएं कटे अंग
कटे हुए अंग का साफ पॉलीथिन में रखना चाहिये । इस पॉलीथिन दूसरी पॉलीथीन में डालना चाहिये जिसमें बर्फ पडी हो। इससे कटा हुए हिस्सा ठंडा रहे।
इस टीम ने दिया सर्जरी को अंजाम
प्लास्टिक सर्जरी विभाग से प्रो. राजीव अग्रवाल, डा. भारती. डा. निखलेश, डा. भूपेश, डा. गौतम नर्सिंग स्टाफ प्रतिभा, अमृता निश्चेतना विभाग से डा0 आरती अग्रवाल, डा सुमित, डा. दिव्या, डा. नुपूर
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