रविवार, 11 फ़रवरी 2024

Foundation Day of PGI Pulmonary Medicine Department - Vaccine will reduce the problem of COPD

 






Foundation Day of PGI Pulmonary Medicine Department


Vaccine will reduce the problem of COPD


TB patients are more likely to develop COPD


 



COPD (Chronic Obstructive Pulmonary Disease) patients can reduce their problems by getting influenza and pneumococcal vaccines. Head of Pulmonary Medicine Department of Sanjay Gandhi PGI, Prof. Alok nath and Prof. Mansi Gupta told in the session organized on Air Way Diseases on the occasion of foundation  day of the department and alumni meet that if there is cough, phlegm and difficulty in breathing for more than two months, then consult a pulmonary specialist and there is a possibility of COPD. can be reduced to a minimum. During this problem, the air passages of the lungs shrink, due to which there is difficulty in breathing. When this happens, carbon dioxide is not able to come out from inside the body. The risk of this disease in people suffering from TB is higher than that of ordinary people, hence TB treatment should also be taken completely. This problem has increased so much that it is being known as TB Associated COPD (TOPD). The main reason for this problem is pollution along with smoking. Anti-IgE, anti-IL-5 and anti-IL-RA biological medicines have also been used for the treatment of this disease, which are providing considerable relief. Bronchodilator inhalers are the most important medications in initial treatment. They relax the airways to keep them open. Some bronchodilators start working within a few seconds and can last for 4-6 hours. Used immediately when trouble occurs. Long-acting bronchodilators take longer to start working but last longer. These are taken daily. May be combined with steroids. The conference was inaugurated by Director Prof. RK Dhiman did it and expressed happiness over the progress of the department. Medical University Prof. Suryakant, Prof. Rajendra Prasad, Prof. Ved Prakash, Prof. KB Gupta and others gave information about COPD and asthma.

वैक्सीन से कम होगी सीओपीडी की परेशानी- टीबी के मरीजों में अधिक है सीओपीडी की आशंका


पीजीआई पल्मोनरी मेडिसिन विभाग का स्थापना  दिवस

वैक्सीन से कम होगी सीओपीडी की परेशानी

टीबी के मरीजों में अधिक है सीओपीडी की आशंका

 


सीओपीडी(क्रोनिक आब्सट्रेक्शन पल्मोनरी डिजीज) के मरीज इंफ्लुएंजा और न्यूमोकोकल वैक्सीन लगवा कर परेशानी कम कर सकते हैं।  संजय गांधी पीजीआई के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रो. आलोक नाथ एवं  प्रो, मानसी गुप्ता ने विभाग के स्थापना एवं एल्युमिनाई मीट के मौके पर एयर वे डिजीज पर आयोजित अधिवेशन में  बताया कि दो महीने से अधिक खांसी, बलगम और सांस लेने में परेशानी हो तो किसी पल्मोनरी विशेषज्ञ से सलाह ले कर सीओपीडी की आशंका को कम कम किया जा सकता है। इस समस्या के दौरान फेफड़ों के वायु मार्ग सिकुड़ जाते हैं, जिस वजह से सांस लेने में परेशानी आती है. ऐसा होने पर शरीर के अंदर से कार्बन डाई ऑक्साइड बाहर नहीं निकल पाता है।टीबी ग्रस्त लोगों में इस बीमारी की आशंका आम लोगों के मुकाबले अधिक है इसलिए टीबी का भी इलाज पूरी तरह से लेना चाहिए । यह परेशानी इतनी बढ़ गयी है कि इसे टीबी एसोसिएटेड सीओपीडी (टीओपीडी) के नाम से जाना जा रहा है। इस परेशानी का मुख्य कारण धूम्रपान के साथ प्रदूषण है। इस बीमारी के इलाज के लिए एंटी आईजीई , एंटी आईएल -5 और एंटी आईएल आरए बायोलॉजिकल दवाएं भी गयी है काफी राहत दे रही है। प्रारंभिक इलाज में  ब्रोंकोडाइलेटर इनहेलर सबसे महत्वपूर्ण दवाएं हैं। वे वायुमार्गों को खुला रखने के लिए उन्हें शिथिल करते हैं। कुछ  ब्रोन्कोडायलेटर कुछ ही सेकंड में काम करना शुरू कर देते हैं और 4-6 घंटे तक रह सकते हैं। परेशानी होने के दौरान तुरंत उपयोग किया जाता है।लंबे समय तक काम करने वाले ब्रोंकोडाईलेटर्स को काम शुरू करने में अधिक समय लगता है लेकिन लंबे समय तक टिकते हैं। इन्हें प्रतिदिन लिया जाता है। स्टेरॉयड के साथ जोड़ा जा सकता है। अधिवेशन का उद्घाटन निदेशक प्रो. आरके धीमान ने किया और विभाग के प्रगति पर हर्ष जताया। मेडिकल विवि के प्रो. सूर्यकांत, प्रो. राजेंद्र प्रसाद, प्रो. वेद प्रकाश, प्रो. केबी गुप्ता सहित अन्य लोगों ने सीओपीडी और अस्थमा के बारे में जानकारी दी।    


PID will be tested for free in PGI Even general doctors can detect PID with TLC test







 PID will be tested  free in PGI


 


Even general doctors can detect PID with TLC test 

 




Even a general practitioner can detect the possibility of primary immunodeficiency (PID) in the early stages. If a person of any age is getting repeated infections. There is no improvement with normal oral antibiotics. If you have to be admitted and the lymphocyte count is low, then you need to consult a specialist to confirm the suspicion of PID. Professor, Head of Clinical Immunology Department of Sanjay Gandhi PGI. Amita Aggarwal and Foundation for PID America Prof. Sudhir Gupta told in the convention of Indian Society of PDI that TLC test for any pathology can be done for twenty to thirty rupees. To confirm this disease, further immunoglobulin Ig, IgA and IgM tests are done along with lymphocyte sub-cell testing by flow cytometry and then genetic testing is done for specific confirmation. Foundation for PID has provided financial support for free testing of patients in the institute. Will examine poor patients for free. The Foundation has assured to help in the treatment also. This disease has also been included in the Rare Disease Policy of the Government of India, making its treatment possible. Dr. Troyan Torgerson, Dr. Siringo Rosenzwing from America attended the convention. Many experts including Dr. Dan Kastner gave information. Director Prof. RK Dhiman said in the inauguration of the convention that the institute will provide every resource.


 


25 to 30 new patients every year


Pro. Amita Aggarwal said that every year 25 to 30 new patients are diagnosed with PID. Due to lack of testing and awareness, 16 thousand patients are diagnosed in the country while the number is around 10 lakh. Intravenous IgG is given for treatment.






10 percent are miss diagnosed


Five to 10 percent of missed diagnoses occur because PID causes many problems including skin, lungs, auto immune disease, liver etc. Many times PID is not detected.






 Life increases with treatment



If PID is not treated, 50 percent of patients may die within 20 years. Treatment leads to longer life.

पीजीआई में होगी पीआईडी का होगा फ्री परीक्षण-टीएलसी जांच से सामान्य चिकित्सक भी भांप सकते है पीआईडी

 





पीजीआई में होगी पीआईडी का होगा फ्री परीक्षण

 

20 रुपए की टीएलसी जांच से सामान्य चिकित्सक भी भांप सकते है पीआईडी  

 


प्राइमरी इम्यूनो डिफिशिएंसी (पीआईडी) के आशंका का पता शुरुआती दौर में सामान्य चिकित्सक भी लगा सकते हैं। किसी भी उम्र के व्यक्ति को यदि बार –बार संक्रमण हो रहा है। सामान्य खाने वाली एंटीबायोटिक से सुधार नहीं हो रहा है। भर्ती करना पड़ रहा है और लिम्फोसाइट की संख्या कम है तो पीआईडी के आशंका की पुष्टि कराने के लिए विशेषज्ञ से पास भेजने की जरूरत है।  संजय गांधी पीजीआई के क्लिनिकल इम्यूनोलाजी विभाग की प्रमुख प्रो. अमिता अग्रवाल और फाउंडेशन फार पीआईडी अमेरिका प्रो. सुधीर गुप्ता  ने इंडियन सोसाइटी ऑफ पीडीआई के अधिवेशन में बताया कि टीएलसी की जांच बीस से तीस रूपए में किसी भी पैथोलॉजी पर हो जाती है। इस बीमारी के पुष्टि के लिए आगे इम्युनोग्लोबुलिन आईजी, आईजीए और आईजीएम की जांच के साथ लिम्फोसाइट सब सेल की जांच फ्लोसाइमेंट्री से करने के बाद विशेष पुष्टि के लिए जेनेटिक जांच कराते हैं। फाउंडेशन फार पीआईडी ने संस्थान में मरीजों के फ्री परीक्षण के लिए आर्थिक सहयोग किया है । गरीब मरीजों की फ्री जांच करेंगे। फाउंडेशन इलाज में भी मदद करने के लिए आश्वस्त किया है। इस बीमारी भारत सरकार रेयर डिजीज पॉलिसी में भी शामिल कर लिया है इससे इलाज संभव हो रहा है। अधिवेशन में अमेरिका से डा. ट्रोआंय टोरगर्सन, डा. सेरींगो रोसेनजवींग. डा. डान कस्टेनर सहित कई विशेषज्ञों ने जानकारी दी। निदेशक प्रो. आरके धीमान  ने अधिवेशन के उद्घाटन में कहा कि संस्थान हर संसाधन उपलब्ध कराएगा।

 

हर वर्ष 25 से 30 नए मरीज

प्रो. अमिता अग्रवाल ने बताया कि हर साल 25 से 30 नए मरीज पीआईडी के डायग्नोस होते है। जांच और जागरूकता की कमी के कारण देश में 16 हजार मरीज डायग्नोस है जबकि संख्या 10 लाख के आस पास है। इलाज के लिए इंट्रावेनस आईजीजी दिया जाता है। 



10 फीसदी होते है मिस डायग्नोस

पांच से 10 फीसदी मिस डाग्योनस होते है क्योंकि पीआईडी में स्किन, फेंफड़ा, आटो इम्यून डिजीज , लिवर सहित कई परेशानी रहती है।  कई बार पीआईडी का पता नहीं लगता है।



 इलाज से बढ़ती है जिंदगी


पीआईडी का इलाज न होने पर 20 साल में 50 फीसदी मरीजों की मृत्यु हो सकती है। इलाज से  लंबी जिंदगी मिलती है।  

शनिवार, 3 फ़रवरी 2024

सही समय पर सही इलाज से सेप्सिस से बच सकता जीवन

 



आईएमए ने सेप्सिस पर आयोजित किया जागरूकता कार्यशाला


 


सही समय पर सही इलाज से सेप्सिस से बच सकता जीवन


 


किसी भी तरह का घाव तो सफाई और ड्रेसिंग का रखें ध्यान


 


एंटीबायोटिक इस्तेमाल बिना सलाह न करें इस्तेमाल


   


भारत में हर साल 1 करोड़ लोग सेप्सिस से ग्रस्त होते है जिसमें 30 लाख असमय मृत्यु के शिकार हो जाते है। दुनिया भर में 5 में से 1 मौत प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सेप्सिस से संबंधित है। यह जानकारी संजय गांधी पीजीआई के इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन के सदस्य एवं संजय गांधी पीजीआई के इमरजेंसी मेडिसिन के प्रो. तनमय घटक ने  आईएमए( इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ) लखनऊ की तरफ से आयोजित सेप्सिस पर जागरूकता कार्यशाला मे दी। प्रो.  तनमय ने बताया कि हाथ की सफाई करें, अपने आप एंटीबायोटिक का इस्तेमाल न करें, बुखार लंबा होने पर डाक्टर से सलाह ले कर काफी हद तक सेप्सिस से बचा जा सकता है।  सेप्सिस की पहचान है और यदि शीघ्र निदान किया जाए तो इसका आसानी से इलाज किया जा सकता है। सेप्सिस से होने वाली मृत्यु दर और जटिलताओं को कम कर सकें। डा. आरके सिंह, डॉ. देवेन्द्र गुप्ता, डॉ. पीके दास, डॉ. हैदर अब्बास, डॉ. यश जावेरी, डॉ. फारूक, डॉ. सोमनाथ लोंगानी सहित अन्य विशेषज्ञों ने बताया कि कोई भी घाव होने पर उसकी सफाई और ड्रेसिंग पर विशेष ध्यान देना चाहिए।


 


 


इनमें अधिक है सेप्सिस का खतरा


-65 वर्ष से अधिक उम्र के लोग, नवजात शिशु और शिशु, और गर्भवती लोग।


-मधुमेह , मोटापा , कैंसर और गुर्दे की बीमारी जैसी चिकित्सीय स्थितियों वाले लोग ।


-कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग।


-जो लोग अन्य चिकित्सीय कारणों से अस्पताल में हैं।


गंभीर चोटों वाले लोग, जैसे बड़े जले हुए या घाव।


कैथेटर, आईवी या श्वास नलिका वाले लोग।


 


 


 


सेप्सिस का कारण क्या है?


जीवाणु संक्रमण सेप्सिस के सबसे आम कारणों में से एक है। फंगल, परजीवी और वायरल संक्रमण भी सेप्सिस के संभावित कारण हैं। आपको सेप्सिस तब हो सकता है जब कोई संक्रमण आपके पूरे शरीर में एक श्रृंखलाबद्ध प्रतिक्रिया शुरू कर देता है जिससे अंग निष्क्रिय हो जाते हैं।सेप्सिस की ओर ले जाने वाला संक्रमण शरीर के कई अलग-अलग हिस्सों में शुरू हो सकता है। सामान्य स्थान और संक्रमण के प्रकार जो सेप्सिस का कारण बन सकते हैं उनमें शामिल हैं:

शुक्रवार, 2 फ़रवरी 2024

माई बॉडी माई चॉइस ,,,,,पतन का कारण



my body my choice  फिर जब लड़की एक तरह की ,,,, बन जाती है तो फिर वो चाहती है कि सभी ऐसी हों, ताकि उसे समाज तिरस्कृत न कर पाए..



 जहां सनी लियोनी खड़ी हो जाये हजारो की भीड़ कर रहे थे। इससे बेटियों-बहनों ने क्या सीखा कि वो आप आज टिकटोक-रील्स के मुजरों में देख ही रहे हो।

ज्यादा बताने की जरूरत नही कि कैसे गन्द भरे समाज की ओर हम बढ़ रहे हैं जहां अपनी पीढ़ीयां बचानी हर दिन के साथ मुश्किल ही होगी। पूरा पश्चिम इसी तरह बर्बाद, परिवारविहीन, डिप्रेस, लोनली, ड्रग्स एडिक्ट और ना जाने क्या क्या बना है।


   अभी बड़ा मजा आ रहा है सबको। चुइये बाप अपनी बेटियों के साथ टिकटोक मे ठुमके लगा रहे हैं। नोरा जैसियों ने रियल्टी शो के डांस, भांडो के चोली के पीछे जैसे गानों से भी बुरे कर दिए हैं कि माँ बाप अपनी छोटी छोटी बच्चियों(4-5 साल की) से भौंडे स्टेप्स करा तालियां पीटते हैं।  नाटक वाली जिन्हें घर घर देखा जाता है और फेवरेट बनाया जाता है जब वो इंस्टा में आती हैं तो अपने असली रंग दिखा रही होती हैं। फिल्मी कोठे का तो क्या ही बताना क्योंकि जितना लिखो कम ही होगा।


   शोहरत का शॉर्टकट घर घर खराब कर रहा है। एक भी मोहल्ला अब इस सांस्कृतिक प्रदूषण से बचा नही है। सबने मोटो अपना लिया है कि बदनाम हुए तो क्या हुआ, नाम तो हो रहा है। और ये गन्द तो अभी चल ही रही थी कि इससे बड़ा सांस्कृतिक प्रहार भारत मे प्रवेश कर चुका है LGBTQ के नाम पर जिसमें अपना चंदा मामा लेवल का भी मुख्य सिपाही है।


     ये गन्द तो वो हाल करेगा कि लोग अपनी बेटियों से खुद कहेंगे कि बेटी बन ले तू जितनी मर्जी सेक्सी, करा लें जैसे मर्जी बोल्ड शूट, यहां तक कि न्यूड शूट... बस हाथ जोड़कर विनती है कि लड़की ही बने रहना और इस LGBTQ के आतंक के चुंगल में मत फंसना।


आजकल जो मेट्रो, सड़क आदि पर नंगी पुंगी लड़कियां हैं वो इसी का बाय प्रोडक्ट है। लड़कियों ने ये समझ लिया है कि नंगई तो सबसे आसान तरीका है रातोरात प्रसिद्धि पाने और पैसा बनाने का। इंस्टाग्राम इसी वजह से सेमी पोर्न का अड्डा बन गया है। माँ बाप इसी में खुश हैं कि उनकी बेटी तो सेलेब्रिटी बन गयी है। लड़के नंगे नही हो सकते तो उनका शॉर्टकट है कि गालीगलौज करो, फूहड़ता दिखाओ। बाकी और क्या करना है तो पश्चिम वाले इंस्टा में क्या कर रहे हैं, उसकी नकल करो और उधर तो निप्पल शो हो रहे हैं। पुट्ठे दिखाने की होड़ है तो यहां भी बच्चे को दूध पिलाने के बहाने से लेकर नहाने के वीडियो बना अपने अंग दिखाए जा रहे हैं। गांव गांव तक कि लड़कियां चूल्हे में रोटी बनाने के बहाने से क्लीवेज से लेकर निप्पल दिखा रही हैं। कुछ तो खुद का सेक्स तक दिखा रही हैं तो कुछ चुम्माचाटी का वीडियो डाल रही हैं। ऊपर से पश्चिम की डिमांड पर फेसबुक जो इंस्टा का भी मालिक है उसने निप्पल या पुट्ठे दिखाने अब allow कर दिए हैं। अब ऐसे में आपकी ID पर रिपोर्टिंग भी नही हो सकती कि ये अश्लीलता फैला रही है।


, my body my choice  फिर जब लड़की एक तरह की वैश्या बन जाती है तो फिर वो चाहती है कि सभी ऐसी हों, ताकि उसे समाज तिरस्कृत न कर पाए..


इस खेल का सबसे आसान माध्यम इंस्टा बन गया है। उसी तरह इंटरनेट इस #CulturalCrusade का सबसे बड़ा हथियार बन गया है। आप बैन कीजिये वो VPN के माध्यम से आपके पास पहुंच जाएगा। सरकार ने टिकटोक पर बैन किया तो इंस्टा आ गया। इंस्टा पर बैन होगा तो कुछ और आजायेगा। कानून बना भी इसे रोका नही जा सकता क्योंकि यहां तो पोर्न बैन करने पर लोग विरोध करने आ गए थे कि ये तो निजता पर हमला है। आप कानून बनाइये दूसरी तरफ कोर्ट में बैठे नालीवादी इसे निरस्त कर देंगे।


और उन माँ बापों को कैसे रोकेंगे जो खुद अपनी औलादों की आड़ में प्रसिद्धि पाने का जुगाड़ करे हुए हैं। ये तो वो प्रदूषण बन गया है जिसमे आपको खुद घर मे ऑक्सीजन मास्क लगाकर रहना पड़ेगा। मास्क हटते ही आपके घर मे भी ये प्रदूषण आपके बच्चे के फेफड़े खराब करना शुरू कर देगा।


भारत में पोर्न महामारी कैसे बन गया? ऐसा क्या हुआ कि इंटरनेट यूज करने वाले लोग पोर्न को सर्च करने लगे? गूगल के कुछ उपयोगी टूल्स के जरिए हमने इन सवालों के जबाव तलाशने की कोशिश की और जो नतीजे सामने आए वह हैरतअंगेज हैं।

गूगल साल 2004 से अब तक के सर्च इंट्रेस्ट आंकड़े उपलब्ध करवाता है। 2004 से 2010 तक भारत कभी भी पोर्न सर्च करने वाले शीर्ष दस देशों में नही रहा। 2011 में भारत पहली बार इस सूची में 9वें स्थान पर आया। लेकिन 2012 में भारत इस सूची में पांचवे स्थान पर था और पिछले साल में हम चौथे स्थान पर है।(ये आंकड़ा भी पुराना है)। त्रिनिदाद एवं टोबैगो, पापुआ न्यू गिनी और पाकिस्तान हमसे आगे हैं।


यही हाल सेक्स शब्द सर्च करने का भी है। भारत गूगल पर सेक्स सर्च करने के मामले में हमेशा से आगे रहा है। लेकिन सितंबर 2011 के बाद इसमें भी अप्रत्याशित तेजी आई। अब सवाल यह उठता है कि 2011 में ऐसा क्या हुआ कि पोर्न भारत में महामारी की तरह फैला और लगातार फैलता जा रहा है। तो इसका जबाव है कि 2011 में पहली बार एक पोर्न स्टार मेनस्ट्रीम मीडिया के जरिए खबर बनी। दरअसल सनी लियोन ने बिग बॉस के जरिए भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में कदम रखा। बिग बॉस का हिस्सा बनते ही सनी लियोनी खबरों में छाई रही। यदि गूगल सर्च कीवर्ड्स के इंट्रेस्ट पर नजर डालें तो साल 2012 में सनी लियोनी एकमात्र ऐसी सख्शियत थी जो राइसिंग सर्च में टॉप टेन कीवर्ड्स में जगह बना सकीं। यानि 2011-2012 में सनी लियोनी को खूब सर्च किया गया और सनी लियोनी को सर्च करते-करते भारतीय पोर्न तक पहुंच गए। हालत यह हुए कि इंटरनेट पर पोर्न से दूर रहने वाले भारतीय दो साल के भीतर ही सबसे ज्यादा पोर्न सर्च करने के मामले में चौथे नंबर पर आ गए।


 इस देश मे दिल्ली की सड़कों पर "Kiss of love" चलाया गया। असली कारण इसी में छुपा था क्योंकि इसे ऑर्गनाइज करने वाले खुद सेक्स रैकेट चलाते पकड़े तक जा चुके थे। इतना ही नही इस अभियान के पीछे  वो थे जो शादी को कहते हैं कि ये एक संस्थागत वैश्यावृत्ति है जहां बाप अपनी बेटी को पराए मर्द को भोगने को सौंप देता है और वो उसका मैरिटल रेप करता है। असली प्यार तो चुनकर करना है और एक से क्यों देश मे Free Sex होना चाहिए जहां लड़की चाहे जितना मर्जी और जितनों से मर्जी सेक्स करे। ऐसा नही करोगे तो हम तुम्हे वैश्यावृत्ति से जन्मी सन्तान मानेंगे।


इसका बिजनेस पहलू समझना हो तो ये है कि भले ही सनी लियोनी के आने से पहले भले ही लोग पोर्न देखते रहें हों लेकिन एक तो इस मात्रा में नही देखते थे, दूसरा कितनी पोर्न वाली/वाले का नाम जानते थे। इसके उलट आज की पीढ़ी कम से कम दर्जन भर ऐसों का नाम जानती है और न सिर्फ जानती है बल्कि इतना कॉमन कर चुकी कि ये न्यू नॉर्मल बना दिया गया है। इससे पोर्न इंडस्ट्री ने जबरदस्त मार्किट खड़ा किया अपना भारत में। ऐसा ही मॉडलिंग इंडस्ट्री, फिटनेस इंडस्ट्री, अंडरगारमेंट्स इंडस्ट्री और कितनी ही इंडस्ट्री भारत मे फल फूल गयी। नतीजा, जब पोर्न इंडस्ट्री यहां भी खुद को पोर्न"स्टार" कहलवाने लगी तो फ़िल्म तो बड़ी पिछड़ी सोच की हो गयी तो हुआ ये कि पहले किसिंग नॉर्मल बनी, फिर क्लीवेज नॉर्मल किया गया और अब पुट्ठे नॉर्मल किये जा रहे हैं। पोर्न, फ़िल्म, फिटनेस, मॉडलिंग, अंडरगारमेंट सभी का संगम ये बन गया है। 

इसके साथ ही एकाएक ऐसी फिल्मों की बाढ़ आ गयी है जो बस सेक्स और वो भी explicit लेवल का सेक्स बना बना बेच रहा है। आज फैमिली शो, अवार्ड शो आदि में भी किस तरह ये "सेलेब्रिटी" कपड़े पहनकर आती हैं आप TV लगाकर खुद परिवार के साथ लज्जित होते है। टिकटोक के ठुमको से शुरू हुई कहानी Only fans जैसे एप्प तक जा चुकी हैं जहां कुछ रुपयों में आप भरपूर वर्चुअल सेक्स और अंग प्रदर्शन का आनंद ले सकते हैं।


कहते थे कि लज्जा स्त्री का गहना होती है लेकिन लज्जा तो इन इंडस्ट्री के सामने गिरवी रखे जाने लगी है। जिसका नुकसान ये है कि जब आप शरीर को सिर्फ भोग और प्रदर्शन का माध्यम समझने लगते हैं तो फिर आप उसी तरह नही रुक पाते जैसे एक नशे का एडिक्टेड नही रुक पाता। और फिर बड़ा आसान हो जाता है समझौता करना भी। इसका उदाहरण दूं तो ब्रिटेन में 50% टीनएज लड़कियां अपने लैंड लार्ड से किराए के बदले सेक्स करती हैं। इसका कारण भी उनका समाज है जहां परिवार सिस्टम तरीके से तोड़ा गया कि 18 की होते ही वहां घर छोड़ "इंडिपेंडेंट" होना ही होना है वरना समाज ही तुम्हे कच्चा चबा जाएगा कि तू बालिग होकर भी मां बाप के साथ कैसे रह सकती है। अब ये लड़कियां बच्ची तो होती हैं और जरूरते बड़ी बड़ी। जॉब ऐसी मिल नही पाती की शौक भी पूरे हों। ले देकर घर ढूंढती हैं जहां समझौते करने पड़ते हैं। बॉयफ्रेंड बनाती हैं जो कुछ शौक पूरे कर सके। इधर उधर हाथ पैर मारती हैं ताकि बेहतर जॉब हाथ लग सके जहां भी समझौते करने पड़ते हैं। अब चूंकि समाज पहले से ही फ्री सेक्स समर्थक होता है तो ये आसानी से तैयार हो जाती हैं और आसानी से फिर सामने वाले के सामने खुद को सरेंडर कर देती हैं, बस काम निकलना चाहिए।।


  यही बच्चियां फिर जब बड़ी होती जाती हैं तो इनके लिए वन मैन वुमन रहना मुश्किल हो जाता है क्योंकि जैसे ही मन भरा या शौक पूरे होने में कमी आयी तो तुरन्त रिलेशन खत्म करने से भी ये पीछे नही हटती जो आपको हमको इनके एक पति से दूसरे, दूसरे से तीसरे, तीसरे से चौथे में जाते दिखता है। स्कारलेट जॉनसन(अवेंजर की नताशा रोमनोफ) का तो आपको आर्टिकल है जहां वो कहती है कि कोई औरत एक मर्द के साथ पूरी जिंदगी कैसे रह सकती है।


  इसी का एडिशन वन नाईट स्टैंड इनके गानों फिल्मों यहां तक कि असल जिंदगी में देखते हैं कि तुरन्त कोई मर्द पकड़ा रात बिताई और टाटा बाई बाई। इसी के अन्य दुष्परिणाम हमें सिंगल मदर, लोनली जीवन, डिप्रेशन, ड्रग एडिक्शन, पागलपन, सुसाइड आदि में दिखते हैं। इसी का दुष्परिणाम परिवार सिस्टम ध्वस्त होना होता है। इसी का दुष्परिणाम पेरेंटिंग का खात्मा होता है जो वैल्यू सिखाता है, जो ट्रेडिशन सिखाता है, जो कल्चर सिखाता है। बिना इसके एक पढा लिखा लेकिन जानवर माफिक समाज बनने लगता है जिसे अपनी जिम्मेदारी का कोई एहसास नही, कम से कम पारिवारिक जिम्मेदारी का। बच्चा और कुत्ता ऐसे समाज मे एक समान होता है कि बेबी कर लो या पप्पी ले आओ, जब तक बड़ा हो खूब दुलार करो और फिर एक दिन कुत्ता 18 साल में मर जायेगा और बच्चा 18 होते ही घर छोड़ देगा।


पोर्न इंडस्ट्री के आने से सिर्फ इतना ही नही हुआ। पोर्न ने नंगई के साथ साथ बौद्धिक नंगई भी बढ़ाई है स्टेप सिस्टर सेक्स, स्टेप डॉटर सेक्स, स्टेप ब्रदर सेक्स, स्टेप फादर सेक्स जैसी चीजें दिमाग मे घुसेड़ के सिर्फ अभी अपनी सगी बहन, मां, बाप, भाई ही छूट रखे हैं बाकी के कजिन अब उस नजर से देखे जाने लगे हैं। और ये भी कब नॉर्मल हो जाये बस दिमाग मे भरने की बात भर जितना दूर है। आज ट्विंकल खन्ना कहती है कि मेरा बेटा मुझे माँ की नजर से नही देखता। ये वो बॉलीवुड सोसायटी है जो सबसे ज्यादा पश्चिम से कनेक्टेड है। पश्चिम में हॉट मॉम, हॉट सिस्टर इस तरह कॉमन हो गया कि लड़के का दोस्त इसे मुंह पर बोल देता है अपने दोस्त को और इसे हामी भर स्वीकार लिया जाता है। भारत मे है किसी की हिम्मत कि किसी की माँ बहन के लिए उसका दोस्त ऐसे शब्द कह दे।


भारत की तो लड़कियां भी बेचारी कन्फ्यूज हैं। वो जबरदस्ती इंडियन-वेस्टर्न का घालमेल कर गलतफहमी में जी रही हैं। उन्हें ट्विंकल खन्ना की उस बात को ध्यान से समझना चाहिए क्योंकि तुम्हारे ही बच्चे फिर इसके प्रभाव में आने वाले हैं। तुम जो अभी उछल रही हो, कल को तुम्हारे कारनामे जब बच्चे बड़े होकर देखेंगे तो तुम्हारा भी ट्विंकल बनना तय है। तुम खुद ऐसी हो तो तुम्हारी बेटी को उससे ज्यादा गन्दा होने से कैसे रोक पाओगी क्योंकि ये बीमारी रिवर्स में तो चलेगी नही कि मम्मा हॉट थी मैं सिंपल बनूंगी, बल्कि होगा ये कि मम्मा हॉट थी मैं सुपरहॉट बनूंगी। रोक पाओगी उसे? किस मुंह से रोक पाओगी?


एक और चीज जहां इंडियन लड़कियां कंफ्यूज हैं या मजबूरी का शिकार हैं कि किसी को खुद पर बहनजी का ठप्पा नही चाहिये। यहां लड़कियां तीन वजह से सेक्सी एंड हॉट बनने को उतारूँ हैं। पहला कि उन्हें किसी से कमतर नही दिखना है, दूसरा उन्हें अटेंशन पाना है और तीसरा उन्हें मोडर्न लगना है। कमतर का अर्थ है कि तू कर सकती है तो मैं भी कर सकती हूँ। अटेंशन का अर्थ है कि सेक्सी दिखूंगी तो फॉलोवर बढ़ेंगे, लोग नोटिस करेंगे और क्या पता मैं भी सेलेब्रेटी बन जाऊं। और मोडर्न का मतलब कि ऐसी नही बनूंगी तो पिछड़ी कहलाऊंगी और लोग मजाक बनाएंगे कि आ गयी संस्कारी बहनजी। और इस वजह से दिल भले ही भारतीय हो शरीर पश्चिम हो गया है। ये लड़कियां पूजा पाठ भी कर लेती हैं, मन्दिर भी चली जाती हैं, परिवार वाली बनना चाहती हैं, बस कपड़ों और हरकतों से भारतीय नही बनना चाहती।। और जैसा बताया कि कपड़े पश्चिमी करने तो शुरुआत भर है, आगे सब कुछ पश्चिमी होता जाएगा जब नालिवाद आपको जकड़ना शुरू करेगा जो अभी its my body and its my choice के पहले गियर में है। और जहां शर्म गयी वहां सब कुछ यूं फिसलता जाएगा जैसे मुट्ठी से रेत फिसलती है और इसे कोई कितनी भी कोशिश कर ले ये रुकेगा ही नहीं। 100 में से 10 शायद वापसी कर भी लें 90 पश्चिम वाले मकड़जाल में फंसते ही चले जायेंगी जिसका अंत परिवार सिस्टम का अंत है और इसकी शुरुआत ही इसलिए साजिशतन हुई थी कि न्यू वर्ल्ड ऑर्डर वाले चाहते थे कि कोई परिवार न रहे जिससे फिर कोई समाज न टिक पाए और फिर ये एक नया जॉम्बी समाज बनाएं जो इनके इशारे पर काम करे जहां कोई अपना कल्चर न मानता हो, जहां कोई अपना ट्रेडिशन न मानता हो, जहां कोई अपना बिलीफ न मानता हो और जहां कोई अपनी सोच समझने की शक्ति न रखता हो।


बिगबॉस जो बिग ब्रदर का भारतीय वर्जन है यदि वह उसका विदेशी वर्जन देख लेते तो समझ जाते कि यह किस लेवल का घटिया शो है. विदेश में तो लड़की को नंगी होकर टास्क से लेकर खुलेआम ऑन कैमरा कपड़े बदलना, नहाना और सेक्स करना तक दिखाते हैं और वो वामपंथ में जकड़े लोग बड़ी बेशर्मी से खुलेआम यह "टास्क" करते भी हैं.


यह शो ही सांस्कृतिक पतन करने का जरिया है.. फिर वो विदेश हो या देश. इसी शो ने इस देश को अंतराष्ट्रीय वैश्या सनी लियोनी पेश की थी जो आज यदि सड़क पर खड़ी हो जाए तो हजारों यही संस्कृति की दुहाई देने वाले उसे देखने को खड़े रहते हैं. इसी शो के स्क्रिप्टेड कहानी से आपको यह दिखाया जाता है कि "बड़े" लोग किस तरह जीते हैं, सोचते हैं... ताकि आप भी उनकी सोच की कॉपी कर सको और उनकी सोच हमेशा इसी तरह होगी कि जब सनी लियोनी बताएगी कि "I am a porn star" तो "बड़े" लोग तालियों से उसका स्वागत करें और फिर जब कोई आम भारतीय उसे वैश्या कहे तो "बड़े" लोगों जैसा बनने वाले उस आम भारतीय को छोटी सोच और दकियानूसी ख्यालात वाला कहने लगें.


नतीजा-- आज हर दूसरी भारतीय लड़की फिल्मों(मुख्यत: वेब्सिरिज) में नंगी हो रही है.... क्योंकि एक तो उसे इससे पैसे मिल रहे हैं दूसरा जब समाज इस चीज को स्वीकार करकर शोहरत भी दे रहा है तो फिर ये संस्कृति-संस्कार का चूतियापा लेकर काहे अपना नुकसान करवाना? 

वैसे भी इस देश में भांड "हीरो" "हीरोइन" होते हैं।


अब फिर बिग बॉस के चर्चें हैं। गाली दी जा रही है कि ऐसे लोग कैसे जीत रहे हैं लेकिन लोग ये नही समझ रहे कि दुनिया का कोई भी रियल्टी शो में सिर्फ उसका नाम रियल होता है बाकी अब स्क्रिप्टेड होता है जो छपरी जीत रहे हैं ये जिताये जा रहे हैं ताकि इस तरह ही छपरी पीढ़ी जिसे GenZ कहते हैं वो तैयार कराई जाए। इनका बौद्धिक विकास नगण्य रहता है इसलिए इनको शिकार बनाना भी आसान है और इनके देखा देखी बाकी के युवा भी इसके लपेटे में आते हैं जब वो इस तरह के शो की चर्चा करते करते इसका शिकार हो जाते हैं वरना ये ZenG उन्हें अपने बगल में बिठाने से बहिष्कृत कर देंगे। इन्हें जिताकर लाइम लाइट में लाने का उद्देश्य है कि आप इन्हें फॉलो करें। न सिर्फ सोशल मीडिया पर बल्कि असली जीवन मे भी वरना आप कूल नही हैं बल्कि आप तो धरती पर बोझ बनकर जी रहे हैं। फिर जो जो इनसे करवाया जाएगा वो आपको करना ही पड़ेगा कूल दिखने को और ये किस तरह के निम्न बुद्धि के होते हैं ये कोई भी समझदार समझ सकता है। बिग बॉस बना ही इसलिए है ताकि आप उस "घर" की तुलना अपने घर से करें और मायूस होकर सोचें कि आपके घरवाले, रिश्तेदार, मोहल्ले तो साले बकवास जीवन जीते हैं, असली जीवन तो बिग बॉस वालों का है। फिर जब आप इन्हें निजी जीवन मे जीते हैं तो आप घर से बागी बनते हैं कि मुझे ऐसी चुइया जिंदगी नही चाहिए मुझे तो मेरे "आदर्श" की तरह जीना है। आपको हैरानी नही होती कि 3 महीने चलने वाला ये शो क्यों साल में दो बार कर दिया गया है अर्थात आपके जीवन के प्रत्येक वर्ष आप आधे वर्ष इन्हें ही देख रहे हैं।


समाज इसी तरह बागी बनता है। एक 3 घण्टे की फ़िल्म से ज्यादा प्रभाव इस तरह के शो बनते हैं जो घर मे आसानी से उपलब्ध भी है और हर दिन इनकी चर्चा आप स्कूल कॉलेज में भी कर रहे हैं कि आज तो ये हुआ और आज तो वो हुआ। यही काम तो डेली सोप ने घर की महिलाओं के साथ किया कि सास कैसे बनना है, बहु कैसे बनना है, क्लेश कैसे सीखने है आदि आदि। एकता कपूर तो इन नाटकों के जरिये परिवारों में आग लगवाने को माहिर ही है। इसपर कितने लोग पहले कितनी बातें कर भी चुके हैं।


यही बिग बॉस भी का काम है। ऊपर की पोस्ट दो चार पुरानी पोस्टों की मिक्स है तो आप बार बार सनी लियोनी शब्द देख रहे होंगे और सोचते होंगे कि अब सनी लियोनी को कौन ध्यान देता है लेकिन सनी लियोनी ही वो पहली सीढ़ी थी जहां से शुरुआत हुई थी जो अब किस स्तर पर है आपको भी पता है। ऐसे ही बिग बॉस का भविष्य देखना हो तो बिग ब्रदर के इंटरनेशनल शोज़ देखिए और आप समझ जाएंगे कि ये आपके घर परिवार समाज को कहां ले जाएगा। अभी तो इसका उससे रिलेशन, उसका उसके बाहों में पड़े रहना, स्विमिंग पूल में नहाना, चुम्बन, क्लेश, एक दूसरे को एक्सपोज़ करना जैसा शुरुआती पड़ाव है जैसा सनी लियोनी थी और जब आप इसमें ढल जाएंगे तो आप वैसे ही कहँगे कि ये भी कोई बात करने की चीज है जो अब पुरानी बात हो चुकी जैसा आप सनी लियोनी को कहँगे कि वो भी अब चर्चा की बात है क्योंकि अब तो सनी लियोनियाँ भर चुकी हैं समाज में।।


आप में से बहुत से लोग इसके लोगो, इल्युमिनाटी आदि से परिचित होंगे तो जानते होंगे कि ये डीप स्टेट का हिस्सा ही है। वही डीप स्टेट जो दुनिया मे woke कल्चर का क्रुसेड छेड़े है। कोई भी जनरेशन ऐसे ही किसी बीमारी से ग्रसित नही होती। उसके लिए हर जगह अपना सिस्टम इंस्टाल किया जाता है। बिग बॉस भी उन्ही का एक प्लेटफॉर्म है।।

साभार पवन त्रिपाठी फेस बुक वॉल





मंगलवार, 30 जनवरी 2024

PGI will reveal the secret of the virus- ICMR gave a budget of Rs 3 crore 80 lakh for virology research and diagnostic lab.

 












PGI will reveal the secret of the virus


  ICMR gave a budget of Rs 3 crore 80 lakh for virology research and diagnostic lab.



Microbiologist Prof. Atul Garg has the highest number of Estramuller grants.


 


Many times you must have heard that due to fever in a particular area,


 The reason people are worried is that they are not able to find out the reason.


 Health department team took samples of the people there and went viral


 Research institutes are sent to institutes like Pune or Delhi. Now


 It will be possible to trace any unknown cause in the state.


 Virology Research at Sanjay Gandhi PGI Sanjay Gandhi PGI


 And diagnostic lab is going to be established. After the establishment of this lab


 Microbiology Department Prof. Atul Garg proposed to ICMR


 Was sent which was accepted. ICMR three crore eighty


 Lakh budget has also been released. To bring maximum budget for research


 For Prof. Garg received the President's Award of Maximus Extramural Grant


 Was also honored in. Pro. Atul told that a budget of Rs 1.5 crore has arrived and the work has started. The entire lab should be ready by next year


 Will go. After the lab is built, we will still test for the virus.


 For this, many viruses are tested including Corona, Herpes, Swine Flu.


 Virology Lab is a big laboratory including the strain (type) of the virus. After the construction of the new lab,


 Testing facility will be available at the level.


what is virus


Viruses are microscopic organisms that can infect humans and animals. they a


 Genetic information (DNA or


 A small piece of RNA. Some viruses also have an envelope


 Is. Viruses cannot develop without a host.


 


There are so many types of viruses


 Viruses have similar characteristics, such as size, shape and the


 are grouped into categories based on the type of genetic material they contain


 


-influenza virus


-human herpes virus


-Corona virus


-human papillomavirus


-enterovirus


-flavivirus


-Orthopoxvirus

वायरस का राज खोलेगा पीजीआई- वायरोलाजी लैब की हो रही स्थापना

 




पीजीआई खोलेगा वायरस का राज

  वायरोलाजी रिसर्च एवं  डायग्नोस्टिक लैब के लिए आईसीएमआर ने दिया 3 करोड़ 80 लाख का बजट

माइक्रोबायोलॉजिस्ट प्रो. अतुल गर्ग सबसे अधिक एस्ट्रामुलर ग्रांट लाने वाले 

 

कई बार आप ने सुना होगा कि किसी खास इलाके में  बुखार के

 कारण लोग परेशान है कारण का पता नहीं लग पा रहा है ऐसे में

 स्वास्थ्य विभाग की टीम वहां के लोगों के नमूने लेकर वायरल

 रिसर्च इंस्टीट्यूट पुणे या दिल्ली जैसे संस्थान में भेजे जाते है। अब

 किसी भी अनजान कारण का पता लगाना प्रदेश में संभव होगा।

 संजय गांधी पीजीआई में संजय गांधी पीजीआई में वायरोलाजी रिसर्च

 एवं  डायग्नोस्टिक लैब की स्थापना होने जा रही है। इस लैब के स्थापना के

 लिए  माइक्रोबायोलॉजी विभाग  प्रो. अतुल गर्ग ने आईसीएमआर को प्रस्ताव

 भेजा था जिसे स्वीकार कर लिया गया । आईसीएमआर ने  तीन करोड़ अस्सी

 लाख बजट भी जारी कर दिया है।  रिसर्च के लिए सबसे अधिक बजट लाने के

 लिए प्रो. गर्ग को प्रेसिडेंट एवार्ड आफ मैक्सिमस एक्ट्रामुलर ग्रांट से हाल ङी

 में  सम्मानित भी किया गया । प्रो. अतुल ने बताया कि 1.5 करोड़ का बजट आ चुका जिससे काम शुरू हो गया है । अगले साल तक पूरी लैब तैयार हो

 जाएगी।  लैब बनने के बाद वायरस की जांच भी होगी अभी भी हम लोग

 कोरोना, हरपीज , स्वाइन फ्लू सहित कई वायरस की जांच करते है इसके लिए

 वायरोलाजी लैब है नई लैब बनने के बाद वायरस का स्ट्रेन ( प्रकार) सहित बडे

 स्तर पर जांच की सुविधा उपलब्ध होगी।

क्या है वायरस

वायरस सूक्ष्म जीव हैं जो मनुष्यों, जानवरों को संक्रमित कर सकते हैं। वे एक

 सुरक्षात्मक खोल (कैप्सिड) के अंदर आनुवंशिक जानकारी (डीएनए या

 आरएनए) का एक छोटा सा टुकड़ा हैं। कुछ वायरस में एक आवरण भी होता

 है। होस्ट के बिना वायरस विकास  नहीं कर सकते।

 

इतने तरह के होते है वायरस

 वायरस को समान विशेषताओं, जैसे आकार, आकार और उनके द्वारा ले जाने

 वाली आनुवंशिक सामग्री के प्रकार के आधार पर श्रेणियों में समूहित करते हैं

 

-इन्फ्लूएंजा वायरस

-मानव हर्पीस वायरस

-कोरोना वायरस

-मानव पेपिलोमावायरस

-एंटरोवायरस

-फ्लेवीवायरस

-ऑर्थोपॉक्सवायरस

Pgi Free consultation and medicines will be provided to Hepatitis B and Hepatitis C patien

 






The treatment center under the National Viral Hepatitis Control Program (NVHCP) was inaugurated today under the aegis of the Department of Hepatology, SGPGIMS, Lucknow. Under the program, free DNA testing for Hepatitis B and RNA testing for Hepatitis C will be done. Free consultation and medicines will be provided to Hepatitis B and Hepatitis C patients. The program aims to combat hepatitis and achieve countrywide elimination of Hepatitis C by 2030. The patients willing to avail these services need to register themselves in Hepatology OPD on Monday and Friday.

        The NVHCP center inauguration was attended by Dr. Brijesh Rathore (UP-DGMH), Dean of SGPGIMS Prof. Shaleen Kumar, Medical Superintendent Prof. V.K. Paliwal, Prof. Rajan Saxena (HOD Surgical gastroenterology), Dr. Vikasendu Agarwal (Nodal Officer UP-NVHCP), Prof. Amit Goel (HOD Hepatology), Assistant Profs Hepatology Dr. Surender Singh and Dr. Ajay Mishra. The Director, SGPGI Professor R K Dhiman expressed his happiness on this initiative taken by the department and hoped that patients suffering with Hepatitis B and C will be benefitted by free investigations and treatment facilities under this progr


शुक्रवार, 26 जनवरी 2024

पीजीआई के 38 कर्मचारी और अधिकारी का हुआ सम्मान

 


पीजीआई के 38 कर्मचारी और अधिकारी का हुआ सम्मान


 संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ  में आज देश का 75वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। संस्थान के निदेशक प्रो आर के धीमन ने परंपरागत रूप से ध्वजारोहण किया और संस्थान परिवार के सदस्यों को राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढाने के लिये दृढ़ संकल्प रखने की शपथ दिलाई। 

राष्ट्रगान के पश्चात उपस्थित संकाय सदस्यों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने पिछले एक वर्ष की उपलब्धियों का लेखा जोखा प्रस्तुत किया।

इमरजैंसी मेडिसिन एवं रीनल ट्रांसप्लांट सेन्टर की प्रगति के विषय मे उन्होने कहा कि धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से इमरजेंसी बेड्स का विस्तार किया जा रहा है। EMRTC में इन्टरवेन्शनल नेफ्रोलौजी शुरू करने के लिये नेफ्रोलौजी विभाग की सराहना की।

उन्होंने एडवांस डायबिटिक सेंटर के विषय में भी जानकारी दी, जिसमें  डायबिटीज से संबंधित हर बीमारी के लिए एक ही छत के नीचे समस्त उपचार सुविधाएं होंगी। यह सेंटर फरवरी माह तक कार्य करने लगेगा।

हब और स्पोक मॉडल पर आधारित टेली आई सी यू के विषय में भी उन्होंने कहा कि पीजीआई और उत्तर प्रदेश के 6 मेडिकल कॉलेजो के बीच में 100 बेड्स का टेली ICU भी एक बड़ी उपलब्धि है, जो बहुत शीघ्र ही क्रियाशील हो जायेगा। 


उन्होने सूचित किया कि head and neck surgery व infectious diseases विभागों के सृजन की प्रक्रिया भी चल रही है। इन्हें क्रियाशील बनाने के लिए संकाय सदस्यों की भर्ती की प्रक्रियारत है। इन विभागों  के आने से बेड्स की संख्या में बढ़ोतरी होगी। इस समय संस्थान में 2273 बेड्स क्रियाशील है। 

उन्होंने संस्थान के सभी विभागाध्यक्षों से निवेदन किया कि वह "मेक इन इंडिया" कैंपेन का हिस्सा बनते हुए यहां नवाचार को बढावा दे और रोगी सेवा में तकनीक के सर्वोत्तम इस्तेमाल  हेतु  STPI (Incubation centre ) के उद्देश्य को पूरा करने में सहयोग करें।

निदेशक महोदय ने रोबोटिक सर्जरी को बढ़ाने के लिए दो रोबोट और लाने के बात कही। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही हम गामा नाइफ को भी पीजीआई में उपलब्ध करा पायेगे।

इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।

 इस अवसर पर संस्थान परिवार  के  कर्मठ सदस्यों को उनके उत्कृष्ट व उत्तम कार्य निष्पादन के लिए सम्मानित किया गया। कर्मचारी संघ के पूर्व महामंत्री धर्मेश कुमार, नर्सिंग नेता सीमा शुक्ला ने बधाई दिया।


इस अवसर पर संस्थान के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर संजय धीराज , संयुक्त निदेशक, प्रशासन, प्रोफेसर रजनीश कुमार सिंह, चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर वी के पालीवाल, एक्जक्यूटिव रजिस्ट्रार  कर्नल वरूण बाजपेयी, संकाय अध्यक्ष प्रो शालीन कुमार व अन्य संकाय सदस्य भी उपस्थित थे।



1. श्री भानु प्रताप सिंह वाहन कोषांग संविदा चालक

2. श्री विनय यादव

(संविदात्मक)

मेडिकल कॉलेज

तकनीकी

तथ्य दाखिला प्रचालक

3. श्री प्रदीप कुमार सिंह गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डाटा एंट्री ऑपरेटर

4. श्री दिनेश कुमार. वर्मा एस्टेट डिपार्टमेंट अटेंडेंट ग्रेड-I

5. श्री रमेश कुमार अपर निदेशक कार्यालय परिचारक ग्रेड-I 

6. श्री राम सुचित यादव संविदा सेल कार्यालय परिचारक ग्रेड-

7. श्री विष्णु नारायण बाल चिकित्सा गैस्ट्रोएंटरोलॉजी कार्यालय परिचारक ग्रेड- I

8. श्री मुनीश कुमार रेडियोथेरेपी सीनियर अटेंडेंट

9. श्री ओम प्रकाश निदेशक कार्यालय वरिष्ठ परिचारक ग्रेड-I

10. श्री अवधेश कुमार

गौतम

बागवानी बागवानी निरीक्षक

11. श्री अनुपम त्रिवेदी जेडी(ए) (विधि प्रकोष्ठ) कनिष्ठ प्रशासनिक

अफ़सर

12. श्री गुरु प्रसाद नर्सरी स्कूल जूनियर प्रशासनिक

अफ़सर


13. श्री विनोद त्रिवेदी क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी एवं

संधिवातीयशास्त्र

कनिष्ठ प्रशासनिक

अफ़सर


14. श्री सतीश चन्द्र नेफ्रोलॉजी कनिष्ठ प्रशासनिक

अफ़सर

15. श्री बी.पी. भुवन फाइनेंस (अनुसंधान

खाता)

कनिष्ठ लेखा अधिकारी

16. श्री एम.एस. सिद्दीकी एंडोक्राइन सर्जरी सहायक। प्रशासनिक

अफ़सर


17. श्री सुंदर लाल ईआर सहायक प्रशासनिक

अफ़सर


18. श्री श्याम बिहारी

चौधरी

इंजीनियरिंग (इलेक्ट्रिकल) सहायक प्रशासनिक

अफ़सर


19. श्री सुशील कुमार सिंह MSW संवर्ग

(एंडोक्रिनोलॉजी ओपीडी)


20. श्री महेंद्र वर्मा एनेस्थिसियोलॉजी पर्सनल

21. श्री शिव राज सिंह

परिहार

सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी निजी सचिव

22. सुश्री वंदना शर्मा आपातकालीन विभाग वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी

23. श्रीमती कलावती पाल सीवीटीएस सहायक नर्सिंग अधीक्षक

24. श्रीमती नीमा पंत कार्डियोलॉजी सहायक नर्सिंग अधीक्षक

25. श्रीमती ज्योति बाला यादव सीसीएम सहायक नर्सिंग अधीक्षक

26. श्री ऋषि नातु वर्मा यूरोलॉजी सहायक। नर्सिंग अधीक्षक.

27. सुश्री मीरा प्रकाश जनरल अस्पताल सहायक नर्सिंग अधीक्षक। 8707061287

28. सुश्री अनीता वाल्टर एंडोक्रिनोलॉजी सहायक नर्सिंग अधीक्षक

(एस/आई)


29. श्री अंजना राणा

चौधरी

प्लास्टिक सर्जरी (ओटी) उप नर्सिंग अधीक्षक


31. सुश्री शशि यादव आण्विक चिकित्सा एवं

जैव प्रौद्योगिकी

तकनीकी अधिकारी

32. श्री राम दुलार पैथोलॉजी विभाग तकनीकी अधिकारी

33. श्री राकेश कुमार निगम न्यूरोलॉजी वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी

34. श्री राकेश कुमार

श्रीवास्तव

न्यूरोसर्जरी/न्यूरो-

ओटोलॉजी)

वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी

35. श्री जीतेन्द्र कुमार

उपाध्याय

ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी

36. श्री देबाशीष

चक्रवर्ती

रेडियो डायग्नोसिस वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी

37. श्री मलया घर माइक्रोबायोलॉजी मुख्य तकनीकी अधिकारी

38. श्री उत्तम कुमार न्यूक्लियर मेडिसिन मुख्य तकनीकी अधिकारी

रविवार, 14 जनवरी 2024

प्रसिद्ध शायर मुनव्वर राना का निधन

 प्रसिद्ध शायर मुनव्वर राना का  निधन 


छू नहीें सकती मौत भी आसानी से इसको
यह बच्चा अभी माँ की दुआ ओढ़े हुए है

तो अब इस गांव से रिश्ता हमारा खत्म हो गया


फिर आंख खोल ली जाय कि सपना खत्म हो गया




मुनव्वर राणा संजय गांधी पीजीआई में किडनी की परेशानी के बाद भर्ती थे वह लंबे समय से डायलिसिस पर थे बीच में तबीयत खराब होने पर उन्हें मेदांता में भर्ती कराया गया था फिर परिजन उनको पीजीआई लेकर आए थे। इनको फेफड़ों की दिक्कत भी होने लगी सांस लेने में परेशानी होने पर  इन्हें वेंटिलेटर पर भी रखा गया था। इतवार को रात 11 बजे उनका निधन हुआ।

 राना (जन्म: 26 नवंबर 1952, रायबरेली, उत्तर प्रदेश) उर्दू भाषा के साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कविता शाहदाबा के लिये उन्हें सन् 2014 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।वे लखनऊ में रहते हैं।


भारत-पाकिस्तान बंटवारे के समय उनके बहुत से नजदीकी रिश्तेदार और पारिवारिक सदस्य देश छोड़कर पाकिस्तान चले गए। लेकिन साम्प्रदायिक तनाव के बावजूद मुनव्वर राना के पिता ने अपने देश में रहने को ही अपना कर्तव्य माना। मुनव्वर राना की शुरुआती शिक्षा-दीक्षा कलकत्ता (नया नाम कोलकाता) में हुई। राना ने ग़ज़लों के अलावा संस्मरण भी लिखे हैं। उनके लेखन की लोकप्रियता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनकी रचनाओं का ऊर्दू के अलावा अन्य भाषाओं में भी अनुवाद हुआ है।

बुधवार, 10 जनवरी 2024

पीजीआई ने खोजा लिवर फेल्योर मरीजों के पेट में पानी भरने का कारण-आंत का सूजन कम कर दिलाएंगे लिवर खराबी के मरीजों को राहत

 पीजीआई ने खोजा लिवर फेल्योर मरीजों के पेट में पानी भरने का कारण




 आंत का सूजन कम कर दिलाएंगे  लिवर खराबी के मरीजों को राहत

लैक्टोज एवं मैनीटॉल अनुपात बताएगा  कितनी गंभीर होती परेशानी


संजय गांधी पीजीआई के चिकित्सा विज्ञानियों ने लिवर फेल्योर के मरीजों गंभीरता के कम करने का रास्ता खोज लिया है। विज्ञानियों ने पता लगा लिया है कि लिवर फेल्योर की दशा में पेट में पानी भर जाता है जिसे डॉक्टरी भाषा में एसाइटिस कहते है। पेट में पानी भरने के पीछे आंत जिम्मेदार है । आंत में सूजन जा जाता है जिसके कारण आंत की पारगम्यता बढ़ जाती है जिससे आंत के बैक्टीरिया रक्त प्रवाह में चले जाते है । इसके कारण संक्रमण होता है। रक्त प्रवाह की नसे चौडी हो जाती है जिसके कारण पेट में पानी भरता है। बीमारी गंभीर हो जाती है।  विज्ञानियों ने लीवर खराबी के दो सौ मरीजों  के रक्त एवं मूत्र का नमूना लेकर एनएमआर( न्यूक्लियर मैग्नेटिक) एवं एलाइजा परीक्षण किया। मूत्र में लैक्टोज एवं मैनीटॉल का अनुपात देखा जो बढ़ा हुआ मिला । इससे आंत की पारगम्यता बढ़ जाती है। एलाइजा परीक्षण कर देखा पाया कि रक्त में साइटोकाइन ( एक तरह के खास रसायन) टीएनएफ अल्फा, आईएफएन गामा , आईएल-6 सहित कई बढे हुए मिले इससे साबित होता है कि बैक्टीरिया आंत से रक्त प्रवाह में जा कर संक्रमण करते हैं। शोध विज्ञानियों का कहना है कि इस शोध से स्पष्ट हो गया कि लिवर की परेशानी को कम करने के लिए आंत पर फोकस करना होगा। इसके लिए आंत का सूजन करने की जरूरत है। इसके लिए भी हम लोगों ने एक ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल विकसित किया जिसके जरिए सौ से अधिक मरीजों को राहत मिल चुका है। इस ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल से उन मरीजों को फायदा होता है जो लिवर प्रत्यारोपण करना की स्थिति में नहीं है। लिवर फेल्योर के बाद भी जिंदगी बिना परेशानी के कुछ समय के लिए बढ़ जाती है।

इन विज्ञानियों ने किया शोध

गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के पेट रोग विशेषज्ञ प्रो. गौरव पाण्डेय, क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी विभाग के प्रो. विकास अग्रवाल, सेंटर फार बायोमेडिकल रिसर्च के डा. दिनेश कुमार, गैस्ट्रोएनटोलजी विभाग के डा. दीपक बंसल, बीबीएयू के डा. अतुल रावत, सीबीएमआर के डा. दुर्गेश दुबे, सीबीएमआर के डा. अनुपम गुलेरिया के शोध को इंटरनेशन जर्नल  मैग्नेटिक रेजोनेंस इन केमिस्ट्री ने स्वीकार किया है। 

PGI discovered the reason of Asities in liver failure patients.

 







PGI discovered the reason  of Asities in liver failure patients


 Will reduce intestinal inflammation and provide relief to liver failure patients.


Lactose and mannitol ratio will tell how serious the problem is



Clinical and Medical  scientists of Sanjay Gandhi PGI And Centre For Bio medical Research have found a way to reduce the severity of liver failure patients. Scientists have discovered that in case of liver failure, the stomach gets filled with water, which is called ascites in medical language. The intestine is responsible for filling water in the stomach. The intestine becomes inflamed due to which the permeability of the intestine increases due to which the intestinal bacteria enter the bloodstream. This causes infection. The vessels for blood flow widen due to which the stomach fills with water. The disease becomes serious. Scientists took blood and urine samples of two hundred liver failure patients and conducted NMR (Nuclear Magnetic) and ELISA tests. The ratio of lactose and mannitol in urine was observed which was found increased. This increases intestinal permeability. By doing the ELISA test, it was found that cytokines (a type of special chemicals) including TNF alpha, IFN gamma, IL-6 were increased in the blood, which proves that the bacteria enter the bloodstream from the intestine and cause infection. Research scientists say that this research has made it clear that to reduce liver problems, focus will have to be on the intestines. This requires inflammation of the intestine. For this also, we developed a treatment protocol through which more than a hundred patients have got relief. This treatment protocol benefits patients who are not in a position to undergo liver transplantation. Even after liver failure, life increases for some time without any problems.


These scientists did research


Stomach specialist of the Department of Gastroenterology, Prof. Gaurav Pandey, Professor of Clinical Immunology Department. The research of Vikas Aggarwal, Dr. Dinesh Kumar of Center for Biomedical Research, Dr. Deepak Bansal of the Department of Gastroenterology, Dr. Atul Rawat of BBAU, Dr. Durgesh Dubey of CBMR, Dr. Anupam Guleria of CBMR has been published in the International Journal Magnetic Resonance in Chemistry. Has accepted.

बुधवार, 3 जनवरी 2024

पीजीआई में नर्सिंग स्टाफ का कार्यक्रम महिला समाज की रीढ़

  महिला समाज की रीढ़





संजय गांधी पीजीआई नर्सिंग स्टाफ एसोसिएशन ने   महिला सशक्तिकरण एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया इस आयोजन के मुख्य अतिथि प्रोफेसर आरके धीमान निदेशक एसजीपीजीआई एवं विशिष्ट अतिथि डॉ राजकुमार प्रमुख न्यूरोसर्जरी एवं इंचार्ज ट्रोमा सेंटर पी जी आई , प्रोफेसर डॉ बसंत पेडियाट्रिक सर्जरी एस जी पी जी आई एम एस, डॉक्टर प्याली भट्टाचार्य पेडियाट्रिशन एसजीपीजीआई डॉक्टर इंदु सुभाष श्रीमती श्रीमती शाइस्ता अम्मबर श्रीमती उषा टेकरी सी एन ओ मोजूद रहे।  मुख्य अतिथि महिला सशक्तिकरण पर कहा कि आज सावित्री बाई फुले के जन्मदिवस की सभी को वधाई हुए कहा कि अब महिलाएं शिक्षा के क्षेत्र में सशक्त हो रही है किसी भी एग्जाम के परिणाम को अगर हम देखते हैं तो महिलाएं आगे दिखाई देती हैं डॉक्टर प्याली भट्टाचार्य ने महिला सशक्तिकरण के कार्यक्रम में वीरांगना महारानी अवंति बाई, महारानी लक्ष्मीबाई के योगदान की चर्चा आवश्यक है इनका शक्तिरूप हमने अपनी आंखों से देखा है ।हमे श्रीमतीसावित्री बाई फुले शिक्षा क्षेत्र, श्रीमती सरोजनी नायुडू राजनीति क्षेत्र, श्रीमती किरण बेदी प्रशासन क्षेत्र, श्रीमती बाई काशीबाई गणपत नर्सिंग सेवा क्षेत्र, सुश्री मदर टेरेसा समाज सेवा क्षेत्र में इनके द्वारा दिये गए महिला सशक्तिकरण के योगदान से हमे प्रेरणा लेना है । महिलाएं इस समाज की रीड़ है इसे मजबूत करेंगे तो यह देश विकास तेजी होगा। डॉ इंदु सुभाष, श्रीमती शाइस्ता अम्मबर श्रीमती उषा टेकरी ने कहा कि देश की सरकार महिला सशक्तिकरण एवं जागरूकता पर कानून बना चुकी है अब महिलाओं के प्रति समाज में पुरुषों की सोच बदलने की आवश्यकता है एवं सभी क्षेत्रों में जैसे शिक्षा ,अच्छा पालन पोषण , राजनीतिक, प्रशासनिक ,समाज सेवा एवं सांस्कृतिक सशक्त बनाने की आवश्यकता है ।यूनियन द्वारा इस प्रोग्राम के आयोजन का उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए श्री सुजान सिंह ने कहा की अगर हमारे देश की महिला सभी क्षेत्रों में सशक्त होगी तो देश के विकास की गति तेज होगी क्योंकि महिला ही मां है और मां ही हर बच्चे की प्रथम टीचर है और एक सशक्त टीचर के द्वारा बच्चों को हर क्षेत्र की उचित शिक्षा देना शुरू होगा जिससे महिलाओं का सशक्तिकरण भी होगा , बच्चे, परिवार व देश का विकास होगा। इस विचारधारा को समाज व सरकार तक पहुंचाने का कार्य करने का उद्देश्य से आज के आयोजन को आयोजित किया गया जिसमें यूनियन के अध्यक्ष लता सचान, महामंत्री विवेक सागर , उपाध्यक्ष राजकुमार, ज्वाइंट सेक्रेटरी मनोज वर्मा एवं पूर्व अध्यक्ष अजय सिंह, कर्मचारी संघ के पूर्व महामंत्री धर्मेश कुमार  एवं समस्त यूनियन कार्यकारिणी व भारी संख्या में महिलाओं ने उत्साह के साथ उपस्थित रही।