गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026

अब बीपी-शुगर बढ़ा तो भी होगा ट्रांसप्लांट




अब बीपी-शुगर बढ़ा तो भी होगा ट्रांसप्लांट


, पीजीआई ने बढ़ाई हाई-रिस्क सर्जरी की ताकत 


ब्रेन डेड ऑर्गन डोनेशन बढ़ाने के लिए एनेस्थीसिया विशेषज्ञ आईसीयू में करेंगे काउंसलिंग 


 अमूमन सुनते थे कि बीपी बढ़ गया इसलिए ऑपरेशन नहीं हो पाया, शुगर बढ़ गई इसलिए ऑपरेशन टल गया, लेकिन अब संजय गांधी पीजीआई में ऐसा नहीं होगा। पीजीआई का ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया विभाग हाई-रिस्क मरीजों के लिए विशेष प्रोटोकॉल पर काम कर रहा है। संस्थान के ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया विशेषज्ञ प्रो. संदीप साहू, प्रो. दिव्या श्रीवास्तव और प्रो. तपस सिंह ने बताया कि ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया की पढ़ाई उत्तर प्रदेश में एसजीपीजीआई से ही शुरू हुई है। यहां से पढ़े डॉक्टर आज देश के कई बड़े केंद्रों में जाकर इस विशेषज्ञता को विकसित कर रहे हैं। बॉक्स देश में डीएम की सिर्फ 6 सीट, पीजीआई में पीडीसीसी की 4 सीट विभाग के प्रमुख प्रो संजय धीराज ने बताया कि देश में ट्रांसप्लांट सेंटर तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया विशेषज्ञ बहुत कम हैं। पूरे भारत में ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया में डीएम की केवल 6 सीटें हैं, जबकि पीडीसीसी की 4 सीटें अकेले संजय गांधी पीजीआई में हैं। ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया में सीट बढ़ाने की भी जरूरत है।


 


 फैकल्टी बढ़ी, एक दिन में कई ट्रांसप्लांट संभालने में सक्षम 



विभाग में तीन नई फैकल्टी डॉ. तन्वी भार्गव, डॉ. वैशाली अग्रवाल और डॉ. तृप्ति सिंह के आने से विभाग की ताकत बढ़ गई है। अब संस्थान एक ही दिन में मल्टी ट्रांसप्लांट संभालने में सक्षम हो गया है। प्रोफेसर संदीप साहू ने बताया कि टीम एनेस्थीसिया टीम अब कैडेवर डोनेशन बढ़ाने के लिए आईसीयू में मरीजों के परिजनों की काउंसलिंग भी करेगी। अभी हमारे यहां 90 प्रतिशत लाइव डोनेशन होता है। डॉक्टरों को पहले ही अंदाजा हो जाता है कि किस मरीज का ब्रेन डेड होने वाला है, ऐसे में पहले से काउंसलिंग करने पर परिवार डोनेशन के लिए तैयार हो सकते हैं।


  किताबों में नहीं, अनुभव से आती हैं बारीकियां


 31 अक्टूबर को सेमिनार विभाग 31 अक्टूबर को एक विशेष सेमिनार का आयोजन कर रहा है। इसमें कम हीमोग्लोबिन, कम प्लेटलेट, बढ़ा हुआ क्रिएटिनिन और कमजोर हार्ट जैसे जटिल मामलों में ट्रांसप्लांट की बारीकियां सिखाई जाएंगी। प्रो. साहू ने कहा, ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया की कई बातें किताबों में नहीं लिखी हैं, वे अनुभव से आती हैं। जब अनुभवों का आदान-प्रदान होगा, तो जटिल से जटिल सर्जरी को भी सफल बनाने में मदद मिलेगी।


 बाएँ से दाएँ - प्रो. संदीप साहू, डॉ. वैशाली अग्रवाल, प्रो. दिव्या श्रीवास्तव, प्रो. तापस कुमार सिंह, डॉ. तन्वी भार्गव, डॉ. तृप्ति सिंह फोटो स्रोत जागरण

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