बुधवार, 3 मार्च 2021

अचानक सुनाई देना बंद हो जाए तो हो जाएं सतर्क ..72 घंटे के अंदर इलाज तो वापस हो सकती है सुनने की क्षमता

 



संक्रमण के कारण अचानक जा सकती है सुनने की शक्ति

 72 घंटे के अंदर इलाज मिलने से संभव है इलाज

अचानक सुनाई न देने पर डॉक्टर से संपर्क करें

-विश्व श्रवण दिवस आज


यदि किसी को अचानक सुनाई देना कम हो जाय तो तुरंत नाक, कान व गला (ईएनटी) के डॉक्टर की सलाह लें। 72 घण्टे के भीतर उपचार मिलने से मरीज की सुनने की क्षमता पहले जैसी वापस आ सकती है। इलाज में ज्यादा देर होने पर सुनने की क्षमता प्रभावित हो भी सकती है। यह जानकारी विश्व श्रवण दिवस की पूर्व संध्या पर पीजीआई के ईएनटी सर्जन प्रो अमित केशरी ने दी। वह बताते हैं कि पीजीआई की ओपीडी में हर माह करीब चार मरीज अचानक सुनाई न देने की समस्या वाले आते हैं।

सुनने वाला हिस्सा प्रभावित होता है
प्रो. अमित केशरी बताते हैं कि वायरल संक्रमण व बुखार और चक्कर आने की वजह से दिमाग मे सुनने वाला हिस्सा प्रभावित होता है। जिसकी वजह से अचानक सुनाई देना बन्द हो जाता है। ऐसे लोगों को 72 घंटे में उपचार मिल जाना चाहिए। उपचार के तौर पर इनके कान में दवाएं, इंजेक्शन और स्टेरॉयड देते हैं। मरीजों को भर्ती करने की जरूरत नही होती है। ओपीडी में उपचार देकर ठीक किया जा सकता लेकिन ज्यादा समय होने पर मरीज को सुनने वाली मशीन का प्रयोग करना पड़ सकता है।
प्रो. अमित केशरी बताते हैं कि अमूमन उम्र बढ़ने के साथ लोगों में सुनने की क्षमता कम होती जाती है। कुछ लोगों में यह अनुवांशिक समस्या होती है। इसके अलावा जिन्हें डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, गुर्दे की गभीर बीमारी व कैंसर मरीज सतर्क रहें। 

जागरूकता कार्यक्रम आज
विश्व श्रवण दिवस पर बुधवार को पीजीआई में न्यूरो सर्जरी विभाग द्वारा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। सुनने की समस्या का निदान व कई अन्य नवीन जानकारियों पर आधारित एक पुस्तक के विमोचन किया जाएगा।

मंगलवार, 2 मार्च 2021

किडनी दुरूस्त हो गयी लेकिन दिल दे गया धोखा..हेलो .....दवा खत्म हो रही है ...जल्दी दिलवा कर भेज देना--संस्मरण दिलीप सर

 







सालों पहले की बात जब मनीष श्रीवास्तव दैनिक जागरण के मेडिकल रिपोर्टर थे उसी समय की बात है राजू मिश्रा सर ने दैनिक जागरण ज्वाइन कराने के लिए दिलीप सर के पास भेजा ..कमरे में पहुचते ही स्नेह से बैठाया ...मैने तमाम शर्ते रखी सब हां करते रहे एक शर्त यह भी थी मेरे भाई जैसे अऩिल त्रिपाठी को भी ज्वाइन कराया जाए यह भी मान गए ....विशेष कारणों मैं ज्वाइन नही कर पाया लेकिन अनिल त्रिपाठी ने ज्वाइन कर लिया ......समय बीतता रहा .....पांच साल पहले एक बार फिर जगदीश जोशी सर ने बुलाया कहा ज्वाइन कर लो ....हिन्दुस्तान में अच्छा चल रहा था ....जोशी जी कहने पर ज्वाइन कर लिया....दिलीप सर की किडनी की समस्या शुरू हो चुकी थी .....लेकिन डायलसिस की जरूरत नहीं थी फिर भी प्रो. नरायान प्रसाद ने ट्रांसप्लांट के लिए तैयारी शुरू कर दी थी जिसमें डोनर से लेकर दिलीप जी तमाम जांचे हो रही थी ...दिलीप जी पीजीआई आते लेकिन कभी किसी सहयोग के लिए नहीं कहते है ...जांच चलती रही इसी बीच डायलसिस शुरू हो गयी लेकिन पीजीआइ में रेगुलर डायलसिस संभव नहीं थी यह यहां की पालसी है....इसके लिए वह निजि अस्पताल में जाते रहते...इसी बीच ट्रांसप्लांट की पूरी तैयारी हो गयी ..तब दिलीप जी तमाम कुछ -कुछ जरूरत पर बडी सरलता से कहते .....नरायन सर तो हमेशा नजर रखते ....ट्रांसप्लांट के दौरान और बाद में हर पल जुड़ा रहा।ट्रांसप्लांट के दिन आशुतोष सर, जेके सर, राजू मिश्रा, संदीप पाण्डेय,,रूमा जी सुबह आठ बजे से पीजीआइ के ओटी के सामने सपलता की प्रार्थना कर रहे है....ट्रांसप्लांट खत्म होने के बाद ....भी यह सभी वरिष्ट लगातार .........नजर रख रहे थे........ ट्रांसप्लांट सफल रहा पीजीआइ से छुट्टी मिल गयी......दोबारा अखबार ज्वाइन कर लिया ......इसी बीच दिलीप ने अखबार छोड़ दिया....जब अखबार में नहीं रहे तो और जुड़ाव हो गया उनसे ...दवा के लिए सोएब को भेजते तो पहले ही फोन कर देते मै सीएल वर्मा , आरए यादव के सहयोग से दवा फार्मेसी से दिलवाने की कोशिश करता, जांच के सैंपेल लेकर सोएब आते सहित तमाम छोटे -छोटे सहयोग की जरूरत पड़ती थी....मैं सोचता था कि पद पर रहने पर तमाम लोग आगे-पीछे लगे रहते है .जब वह पद पर नहीं है तो मेरी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है क्योंकि उन्हे यह न लगे कि संपादक था जब तो संजय सहयोग करता था अब नहीं कर रहा है....किडनी तो दुरूस्वत हो गयी लेकिन दिल ने धोखा दे लिया....वह संकोची भी थे... .....बहुत जरूरत पर ही फोन करते ...... होले.....संजय .........देख लेना जो संभव हो ........यह हमेशा याद आता रहेगा।

रविवार, 21 फ़रवरी 2021

असली भारत रत्न तो यह है ---जो गुमनामी के अंधेरे गलियारे में ...गुम है.....

 जीवन का मतलब तो आना और जाना है....गीत लिखने वाले संतोष आऩंद जी , ..संतोष आनंद का जन्म बुलंदशहर के सिकंदराबाद में हुआ था.





असली भारत रत्न तो यह है लेकिन राजनीति और केवल खुद के बारे में सोच ने इन्हें गुमनामी के अंधेरे गलियारे में ...गुम कर दिया ......इस टीवी शो को धन्यवाद ,,,,,,,,ऐसे मिली थी बॉलीवुड में पहचान
संतोष आनंद का जन्म बुलंदशहर के सिकंदराबाद में हुआ था. उन्होंने फिल्म पूरब और पश्चिम से अपने करियर की शुरुआत की थी... शारीरिक रूप से संतोष आनंद हिन्दी फिल्मों के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित गीतकार के रूप में जाने जाते हैं। इनके पुत्र संकल्प गृह मंत्रालय में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को समाजशास्त्र और अपराध शास्त्र की शिक्षा देते थे. वे काफी समय से मानसिक रूप से परेशान चल रहे थे. उन्होंने आत्महत्या से पहले 10 पेज का सुसाइड लेटर भी लिखा था. 

संकल्प आनंद 15 अक्टूबर 2014 को अपनी पत्नी के साथ ही दिल्ली से मथुरा पहुंचे थे. दोनों ने कोसीकलां कस्बे के पास रेलवे ट्रैक पर पहुंचकर मथुरा की ओर से आने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस के सामने कूदकर जान दे दी थी. इस हादसे में उनकी बेटी की किसी तरह जान बच गई थी. ट्रेन के आगे कूदने से पहले उन्हें रेलवे के एक कर्मचारी गिरिराज सिंह ने ट्रैक के पास जाने से मना किया था. गिरिराज सिंह ने इस पूरी घटना को रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स और गर्वनमेंट रेलवे पुलिस को रिपोर्ट किया था. दोनों के पास से दो मोबाइल फोन और 65000 हजार रुपए  भी मिले थे.

27/08/19- जमशेदपुर (झारखंड) भारत पिछले दिनों जमशेद पुर झारखण्ड श्री गोविंद जी द्वारा संयोजित कार्यक्रम,आदरणीय संतोष आनंद जी ने लगभग 2 घण्टे काव्यपाठ किया।'एक प्यार का नगमा है,दिल दीवानों का डोला' और भी कई गीत, श्रोताओं ने खड़े होकर उनका अभिनंदन किया व्हील चेयर पर होने के बावजूद संतोष जी ने खड़े होकर उत्साह से श्रोताओं के प्यार को स्वीकार किया।लाचार है। इनका कोई सहारा नहीं है ......

सोमवार, 15 फ़रवरी 2021

पीजीआई के हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. आदित्य कपूर ने स्थापित किया नया नुस्खा--.हार्ट बीट को नियंत्रित रखेगा नया एनवी1.4 सोडियम चैनेल ब्लाकर

 हार्ट बीट को नियंत्रित रखेगा नया एनवी1.4 सोडियम चैनेल ब्लाकर

 


शोध पर पीजीआई के हृदयरोग विशेषज्ञ को मिला शोध पर प्रथम पुरस्कार

कई परेशानी का कारण साबित होता है अनियत्रित दिल की धड़कन

 


अनियत्रित दिल की धड़कन के कारण होने वाली परेशानी को कम करने में एनवी 1.5 सोडियम चैनेल ब्लाकर कारगर साबित है। ब्लाकर के रूप में  फ्लेसकेनाइड  रसायन कारगर साबित हो रही है।  इस परेशानी से ग्रस्त 50 मरीजों पर शोध किया तो देखा गया कि इस दवा के इस्तेमाल से मरीजों में काफी कम परेशानी हुई। यह रसायन रूहमैटिक हार्ट डिजीज जिसमें माइट्रल वाल्व में परेशानी माइट्रल स्टेनोसिस के कारणहोने वाले अनियमित दिल की धड़कन की परेशानी में कारगर साबित हुई है। इस शोध को संजय गांधी पीजीआई के हृदयरोग विशेषज्ञ प्रो. अदित्यकपूर ने सोसाइटी आफ कार्डियक एंजियोग्राफी एंड इंटरवेंशन के अधिवेशन में रखा गया। सोसाइटी इस शोध को प्रथम पुरस्कार दिया है।   प्रो. अदित्य कपूर ने बताया कि रूमैटिक हार्ट डिजीज के कारण कई बार माइट्रल वाल्व में परेशानी आ जाती है। इसके कारण कई वाल्व में स्टेनोसिस यानि संकुचन और रिसाव की परेशानी आ जाती है। इसके कारण एक तिहाई लोगों के  हृदय गति अनियंत्रित हो जातीहै। इस परेशानी को डाक्टरी भाषा में   एट्रियल फाइब्रिलेशन कहा जाता है। इस परेशानी में यह रसायन काफी कारगर साबित हो सकती है। देखा गया है कि रूमैटिक हार्ट डिजीज की परेशानी  ५-१५ वर्ष के आयु वर्ग के  १००० बच्चों में से 0.5 में हो सकती है।  हर साल लगभग ४०,०००-५०,००० नए लोगों में यह परेशानी होती है। इस परेशानी का सही इलाज न होने पर  स्ट्रोक,  गैंग्रीन, थ्रोम्बोम्बोलिज़्म परेशानी का कारण बन सकता है।

 

क्या है एट्रियल फिब्रिलेशन

दिल की अनियमित धड़कन को एरियल फाइब्रिलेशन के रूप में जाना जाता है। यह हृदय रोग और स्ट्रोक के लिए घटनाओं को बढ़ाता है। थकान, कमजोरी और चक्कर आना एक एट्रियल फिब्रिलेशन के सभी संकेत हैं। इसका इलाज करने के लिए जीवनशैली में परिवर्तन और दवाओं की आवश्यकता होती है । कार्डियोवर्जन और सर्जरी या पेसमेकर प्लेसमेंट जैसी प्रक्रियाएं होती हैं। दिल में एट्रियल फिब्रिलेशन में असामान्य कार्यशील विद्युत प्रणाली होती है।

 

एट्रियल फिब्रिलेशन के लक्षण क्या हैं?

-दिल की घबराहट

-सांस की तकलीफ

-छाती में दर्द

-कमजोरी

-चक्कर आना

-थकान          

-भ्रांति

शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2021

हार्ट फेल्योर के मामलों में एंजियोटेनसिन रिसेप्टर नेप्रीलाइसिन इनहिबिटर दे रही है राहत की सांस

 दिल हुआ मजबूत तो कम हो गयी सांस लेने में परेशानी






नई कंबीनेशन थेरेपी हार्ट फेल्योर मरीजों को देगी राहत की सांस 



हार्ट फेल्योर के मरीजों एंजियोटेनसिन रिसेप्टर नेप्रीलाइसिन इनहिबिटर साबित हो रही है कारगर

 


 

68 वर्षीय अमरावती दो कदम भी नहीं चल पा रही थी। बैठी हो या ले'टी हो सांस इतनी तेज फूलती कि लगता था, सांस थम रही है। इनके दिल की माँस पेशियां कमजोर हो गयी है जिससे दिल की पंपिंग शक्ति काफी कम हो गयी है। इस स्थिति को हार्ट फेल्योर कहती है। परेशानी बढ़ने पर परिजन संजय गांधी पीजीआइ लाए । संस्थान के हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो.सुदीप कुमार  इको कार्डयोग्राफी परीक्षण किया तो पता चला कि मांसपेशियाँ पहले से अधिक कमजोर हो गयी है। जिससे शरीर में रक्त संचार कम हो रहा था। तमाम परीक्षण के बाद प्रो.सुदीप ने पहले से चल रही  कंबीनेशन थिरेपी के साथ एंजियोटेनसिन रिसेप्टर नेप्रीलाइसिन इनहिबिटर (एआरएनआई) रसायन को जोड़ दिया। इस नए कंबीनेशन थिरेपी से परेशानी काफी हद तक कम हो गयी । अब वह काफी राहत महसूस कर रही है। प्रो.सुदीप का कहना है कि यह एआरएनआई हार्ट फेल्योर की ओर बढ़ रहे मरीजों का जीवन काफी हद तक सरल बनाने में राम बाण साबित हो रहा है। प्रो.सुदीप के मुताबिक इस   सकूबिट्रल और वैल्सैर्टैन दो रसायन का कंबीनेशन होता है जो न्यूरल हारमोनल पाथ को व्लाक करता है । इससे शरीर में रक्त संचार बढ़ जाता है। शरीर को कम पानी बनाए रखने में भी मदद करता है। इससे हार्ट फेल्योर की तरफ बढ़ रहे मरीजों में अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत होने के साथ जिंदगी पर खतरा कम हो जाता है। इस दवा के साइड इफेक्ट भी है इसलिए दवा शुरू करने से पहले और बाद में सोडियम , पैटैशियम और सीरम क्रिएटनिन का स्तर देखा जाता है। दवा शुरू करने के बाद भी इस पर लगातार नजर रखी जाती है। 


न्यूरोहारमोनल सिस्टम

  न्यूरोहोर्मोन न्यूरोएंडोक्राइन कोशिकाओं द्वारा निर्मित और स्रावित किया जाने  भी हारमोन है।  न्यूरोहोर्मोनल 'सिस्टम हृदय, गुर्दे और वाहिका में कई बदलावों को प्रेरित करते हैं जिन्हें हृदय  होमियोस्टेसिस को बनाए रखता है।  सक्रियता से रक्त वाहिकाओं में  तनाव होता है जिससे हृदय और परिसंचरण पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। न्यूरोहोर्मोनल सक्रियता को  दिल की विफलता की प्रगति में बडा कारण है।

 

क्या होता है हार्ट फेल्योर

 

 

हार्ट फेलियर का मतलब है कि आपका ह्रदय कमजोर है और आपके फेफड़ों और पूरे शरीर में खून पंप नहीं कर सकता है. सांस फूलना, थकान, और आपके पैरों, टखनों, पेट और शरीर के अन्य हिस्सों में सूजन होना इसके आम लक्षण हैं।

 

 

 

क्यों होता है हार्ट फेल्योर

- यदि हार्ट तक ऑक्सीजन पहुंचानेवाली धमनियों (कोरोनरी आर्टरीज) में किसी तरह की रुकावट पैदा हो जाती है तो हार्ट तक रक्त का प्रवाह ठीक प्रकार से नहीं हो पाता है। इसके पीछे हाई ब्लड प्रेशर, मायोकार्डिटिस(हार्ट हृदय में सूजन) हार्ट में जन्म  ही खराबी,-हृदय की धड़कन का असामान्य रहना, लिवर की बीमारी, किडनी का खराब होना, थायराइड  एचआईवी, शरीर में प्रोटीन का जमाव होना,  वायरस ए संक्रमण, फेफड़ों में रक्त के थक्के जमना, किसी दवाई के रिऐक्शन के कारण या  एलर्जी।

बुधवार, 27 जनवरी 2021

पीजीआईः सम्मानित हुए उत्कृष्ट काम करने वाले अधिकारी और कर्मचारी

 

पीजीआईः सम्मानित हुए उत्कृष्ट काम करने वाले अधिकारी और कर्मचारी

 

कोरोना अस्पताल में केवल 27 मरीज जल्दी  शुरू होगा ट्रामा सेंटर होगा नान कोविड अस्पताल 

 

संजय गांधी पीजीआई में गणतंत्र दिवस के  अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आरके धीमन ने झंडारोहण करने के बाद कहा कि संस्थान के सभी संवर्ग के लोग संस्थान के प्रगति में बराबर के भागीदार हैं । हमारा संविधान हमें कई मौलिक अधिकार प्रदान करता है। निदेशक ने कहा कि कोरोना अस्पताल में मरीजों की संख्या घट कर 27 रह गयी है जल्दी है ट्रामा सेंटर नान कोविड अस्पताल की तरह काम करेगा।  इस मौके पर संस्थान के कर्मचारियों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया सम्मान पाने वाले में यह लोग है। सुधीर सक्सेना -वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी,  रामनरेश -अटेंडेंट एनिमल हाउस ,संतोष दुबे -अटेंडेंट जनरल अस्पताल , नरेंद्र प्रसाद -यू डी ए न्यूरो सर्जरी विभाग ,  सुहेब अशरफ -प्रशासनिक अधिकारी , इग्निस लता -सिस्टर ग्रेड 2 न्यूरोलॉजी, बीना शुक्ला -सिस्टर ग्रेड 1 पोस्ट ऑफ, हेमंत वर्मा -टेक्निकल ऑफिसर माइक्रो, ईके शर्मा-वरिष्ठ टेक्निकल ऑफिसर कार्डियोलॉजी विभाग,

 विनय प्रताप सिंह -चीफ टेक्निकल ऑफीसर सीबीटीएस , संजय नारायण -सहायक लेखाकार हेमेटोलॉजी विभाग ,अंजू कपूर -पीए सीसीएम, संजय श्रीवास्तव -सीनियर इलेक्ट्रीशियन इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट ,सोना सिंह -सहायक अध्यापिका नर्सरी स्कूल , अजय कुमार तिवारी -

जूनियर रिसेप्शन ऑफिसर, सुरेश कुमार -सहायक लेखाकार वित्त विभाग, रमेश कुमार -

सुपरवाइजिंग ऑफिसर एटीसी, रिपुदमन -मैनेजर टेलीमेडिसिन , बी पी शर्मा-सेनेटरी सुपरवाइजर ,

बृजेश पाठक -ब्लड कलेक्शन सेंटर 

कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष जितेंद्र यादव महामंत्री धर्मेश कुमार, एनएसए की अध्यक्ष सीमा  शुक्ला 

कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सावित्री सिंह सहित अन्य कर्मचारी नेताओं ने सम्मान पाने वाले कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि संस्थान किया कर्मचारी अपनी सेवा से मरीजों और संस्थान की सेवाओं को गति देने में पूरी तरह ईमानदारी और समर्पण के साथ काम करते हैं इनका सम्मान से संस्थान के सभी कर्मचारियों का सम्मान बढ़ता है।

रविवार, 10 जनवरी 2021

पीजीआई दीक्षा समारोह में एवार्ड विनर के शोध---गैस्ट्राइटिस ठीक होने के बाद हो सकती है परेशानी , फेफड़ें में काम में कमी पर पेट के बल करने से बढ़ता है आँख में दबाव

 

प्रो.एसआर नायक आउट स्टैंडिंग रिसर्च इनवेंशटीगेटर –प्रो.यूसी घोषाल गैस्ट्रोइंट्रोलाजी

 

 

 

 

 गैस्ट्राइटिस में एंटीबायोटिक के इस्तेमाल पर बरते सावधानी

 

 

 एक्यूट गैस्ट्राइटिस के मरीजों में यह परेशानी दूर होने के बाद 10 से 20 फीसदी मरीजों में लंबे समय तक पेट की परेशानी हो सकती है। भारत और बंगला देश में एक्यूट गैस्ट्राइटिस की परेशानी अधिक होती है। दोनो देश ने इस विषय पर शोध किया तो देखा कि गैस्ट्राइटस होने पर तुरंत एटी बायोटिक चला दी जातीहै जिसके कारण कुछ लोगों में लंबे समय के लिए पेट की परेशानी होती है। इस लिए हल्का गैस्ट्राइटस की परेशानी होते एंटीबायोटिक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। देखा गया है कि सामान्य चिकित्सक के आलावा लोग खुद एंटीबायोटिक का इस्तेमाल कर लेते है। इस परेशानी में म्यूकोस सूजन जाती है। गैस्ट्राइटिसकी समस्या में पेट में गैस बनती है।  पेट फूल जाता है और पेट में दर्द होता है। इस विषय पर दस शोध पत्र है जिसे इंटरनेशनल स्तर पर स्वीकार किया गया है।प्रो. घोषाल के पेट की बीमारियों पर  402 शोध पत्र है। 33 एवार्ड सहित कई सम्मान इनके खाते हैं।  

 

 

 

 

 प्रो.एसएस अग्रवाल बेस्ट रिसर्च एवार्ड- डा. पी बी साई सरन सीसीएम

 

 

 आईसीयू में पेट के बल लिटाने पर सांस तो होगी ठीक लेकिन जा सकती है रोशनी

 

 

 

  आईसीयू में एक्टूट डिसट्रेस रिसपाइरेटरी सिंड्रोम(सास लेने में गंभीर परेशानी)  मरीजों कोपेट के बल लिटाने से फेफडे में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ जाता है लेकिन इसकी वजह से आखमें दबाव बढ़ जाता है जिसके कारण आख की रोशनी जा सकती है। इस लिए प्रोन स्थिति मेंरखने के साथ आँख में दबाव पर भी ध्यान देने की जरूरत है। प्रोन स्थित में साइड इफेक्ट के बारे में शोध काफी कम हुआ है। यह  सोध इन्होंने  केयर मेडिसिन डिपार्टमेंट के डॉ मोहन गुर्जर और नेत्र रोग विभाग के विशेषज्ञों के सहयोग से किया। एक शोध में बताया कि  आईसीयू की संरचना हास्पिटल एक्वायर्ड इंफेक्शन का बडा  कारक है। रोगी के आस-पास की जगह, निर्माण और उपयोग की गई परिष्करण सामग्री , फर्नीचर, और वेंटिलेशन सिस्टम पर विशेष ध्यान देकर भविष्य में संक्रमण  को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके अलावा कोविड से बचाव में हेल्थ केयर वर्कर को कैसे पीपीई किट का इस्तेमाल करना चाहिए। सुरक्षा किट के निर्माण में क्या सावधानी की जरूरत है सहित कई शोध पत्र इनके नाम है। इनके 35 शोध पत्र है। आंध्र प्रदेश के ग्रामीण परिवेश से निकले कैंसर संस्थान के सीसीएम विभाग में ज्वाइन किए है। इनकी पत्नी डा.नम्रता लोहिया संस्थान में गुर्दा रोग विशेषज्ञ है।  

 

  बेस्ट डीएम स्टुडेंट एवार्ड डा. हाफ़िज़ मुंहम्द क्लीनिकलइण्यूनोलाजी

रूमटायड अर्थराइटस दे सकता है दिल को दर्द

 

 रूमटायड अर्थराइटिस के 15 से 20 फीसदी मरीजों में दिल की बीमारी की आशंका रहती है। इस शोध के जरिए बताया कि रूमटायड अर्थराइटिस आटो इण्यूनडिजीज जिसमें शरीर के खिलाफ एंटी बाडी बन जाती है। यह एंटी बाडी शरीर के जोड़ों केअलवा दिल की रक्त वाहिकाओं को भी क्षति ग्रस्त करती है। इस लिए इस बीमारी से प्रभावित लोगों को दिल का विशेष ध्यान रखना चाहिए। समय पर फालोअप पर जाना चाहिए।इनको दिल की बीमारी से बचाने के लिए पहले से ही उपाय पर विचार करने की जरूरत है।इसके आलावा रिएक्टिव अर्थराइटस के मरीजों में परेशानी का पता लगाने के लिए सीबीएमआरके साथ मिल कर खास वायो मार्कर पर शोध किया है जिससे बीमारी का पता काफी पहले लग सकता है।  

 

 

बेस्ट एमसीएच स्टुडेंट एवार्ड- डा. वी चक्रपाणि रमैया इंडोसर्जरी

 

पांच मिनट चल जाएगा स्तन कैंसर युक्त गांठ का पता

 

 

 

  स्तन कैंसर के मरीजों में स्तन के कैंसर के निकालने के दौरान कांख में स्थित लिम्फनोड कई बार निकाला जाता है। इससे हाथ में सूजम और कमजोरी कीपरेशानी होती है। कांख में स्थित उन्ही लिम्फनोड को निकालना चाहिए जिसमें कैंसर है। इन लिम्फनोड का पता लगाने के लिए फ्लोरोसिन डाई तकनीक पर शोध किया जिसमें देखा कि गांठ के पास डाई इंजेक्ट कर विशेष प्रकाश से देखने पर जहां कैंसर सेल होता हैवह नीले रंग का चमकता है केवल उन्ही गांठ को निकाला जाता है। इस तकनीक में पांच मिनट में कैंसर युक्त गांठ का पता लग जाता है। यह तकनीक काफी सस्ती है।  इसके अलावा फियोक्रोमोसाइटोमा पर भी शोध पत्र है। आंध्र प्रदेश की रहने वाली   यह परिवार की पहली चिकित्सक है। 

गुरुवार, 7 जनवरी 2021

पीजीआई सामान्य ओपीजी की तरफ बढ़ाया कदम हर ओपीडी में देखे जाएंगे 60 मरीज


 



पीजीआई सामान्य ओपीजी की तरफ बढ़ाया कदम

 हर ओपीडी में जेब देखे जाएंगे 60 मरीज

कोरोना जाँच है जरूरी



संजय गांधी  पीजीआई  की ओ0 पी0 डी0 सेवाओ की  व्यवस्था में कुछ परिवर्तन किया है।

सप्ताह में सोमवार से शुक्रवार ओपीडी प्रातः 9.30 से अपराह्न 4:00 बजे तक और शनिवार को प्रात: 9.30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक चलेगी। 
ओ0पी0 डी0 में 20 नये रोगी और 40 पुराने रोगी देखे जायेगे। पहले 10 नए और 20 पुराने देखे जाते थे।
ओपीडी में रोगियों को कोविड की ट्रूनैट रिपोर्ट के साथ भी देखा जाएगा।
 कोविड जांच के लिए ट्रूनैट और आर टी पीसीआर का टेस्ट अपराहन 1:00 बजे तक ही किया जाएगा।
जो रोगी और उनके सहायक बिना कोरोना जांच के  लिए ओ0 पी0 डी0 पहुंच गए हैं, वे जन संपर्क पटल / स्क्रीनिंग काउंटर 2 पर जाकर  टेस्ट करा सकते हैं।
जांच रिपोर्ट आ आने पर उन्हें 1:00 बजे से 4:00 बजे तक ओपीडी में देखा सकता है।

पीजीआई कोविड अस्पताल के कर्मियों को मानदेय न मिलने से आक्रोश -करीब 600 कर्मियों का दो माह से भुगतान नही हुआ

 पीजीआई कोविड अस्पताल के कर्मियों को मानदेय न मिलने से आक्रोश


-करीब 600 कर्मियों का दो माह से भुगतान नही हुआ
-11 जनवरी को प्रशासनिक भवन का घेराव की चेतावनी

संजय गांधी 
पीजीआई के राजधानी कोविड अस्पताल में काम करने वाले आउटसोर्सिंग कर्मी दो माह से मानदेय न मिलने से आक्रोशित हैं। करीब 600 कर्मचारी हैं। जिन्हें अभी तक नवम्बर और दिसम्बर का भुगतान नही हुआ है।  मानदेय मांगने पर इन कर्मियों को संस्थान प्रशासन के अफसर नौकरी से निकालने की धमकी दे रहे हैं। खफा कर्मियों ने तीन दिन के भीतर भुगतान न होने पर सोमवार को कोविड अस्पताल में पीपीई किट पहन कर प्रदर्शन करने की धमकी दी है।

पीजीआई की मुख्य बिल्डिंग व कोविड अस्पताल में कार्यरत करीब छह सौ डाटा इंट्री ऑपरेटर, पेशेंट हेल्पर और चालक अप्रैल से अब तक कोविड वार्ड में छह से सात बार ड्यूटी कर चुके हैं। इसके बावजूद संस्थान प्रशासन इनके साथ भेदभाव कर रहा है। जब कर्मचारी मानदेय मांगने ऑउट सोर्सिंग कंपनी के प्रतिनिधि के पास जाते हैं तो यह लोग पीजीआई द्वारा बजट न देने की बात कहकर संस्थान के अफसरों के पास भेज देते हैं। उल्टा अफसर इन्हें पीजीआई का नही मानते हुए कंपनी के पास भेज देते हैं। 

राशन के लिए पैसे नही

कोविड वार्ड में 14 दिन की ड्यूटी करने वाले इन कर्मियों के घर पर राशन और कमरे का किराया देने के लिए रुपये नही हैं। कोविड वार्ड में ड्यटी की वजह से  पड़ोसी में मदद करने से कतराते हैं। एक कर्मी ने बताया कि अधिकांश कर्मी पीजीआई के आसपास  किराए के मकानों में रहते हैं। कोविड अस्पताल में 14 दिन ड्यूटी करने की वजह से  यह घर भी नही जा पा रहे हैं। मानदेय न मिलने की वजह से बच्चे व परिवार के सदस्यों के आगे खाने की समस्या गई है।
संस्थान प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी गोलमोल जवाब दे रहे हैं। भुगतान में हो रही देरी पर खुद की जिम्मेदारी से बच रहे हैं।

सोमवार, 4 जनवरी 2021

श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने जन्मदिन पर दिया आश्वासन, दूर होगी संविदा कर्मियों की समस्या

 

श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने जन्मदिन पर दिया आश्वासन, दूर होगी संविदा कर्मियों की समस्या






राजधानी समेत पूरे यूपी में स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत संविदा कर्मचारियों का लगातार शोषण हो रहा है। वेतन विसंगति के सम्बंध में संविदा कर्मचारी संघ ने श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य को ज्ञापन दिया है। जिस पर मंत्री श्री मौर्य ने जल्दी ही समस्याओं के निराकरण करवाने का आश्वासन दिया।

दरअसल, शनिवार को श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य का 66 वां जन्मदिन था। संयुक्त स्वास्थ आउटसोर्सिंग संविदा कर्मचारी संघ ने किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में श्रम मंत्री का जन्म दिवस धूमधाम से मनाया। इस मौके पर श्री मौर्य खुद केजीएमयू पहुंचे हुए थे।
इसके अलावा कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, मंत्री सूर्य प्रताप शाही, सांसद संघमित्रा मौर्य, बस्ती सदर के विधायक दयाराम चौधरी, सदस्य श्रम बोर्ड रजनीकांत मौर्य, अपर श्रमायुक्त बीके राय, डॉक्टर रामायण मौर्य, विजय यादव क्षेत्रीय अध्यक्ष सहित कई भाजपा नेता तथा कई कर्मचारी संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।
इस मौके पर केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर के सामने विशाल भंडारे तथा कंबल वितरण का भी आयोजन किया गया। भंडारे तथा कंबल वितरण के अलावा विशेष रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ। जिसमें संविदा कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया तथा 67 लोगों ने रक्तदान कर मंत्री का जन्म दिवस मनाया। प्रदेश महामंत्री सच्चिदानंद मिश्रा ने भी रक्तदान किया।
संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष रितेश मल्ल ने बताया कि भंडारे में शाम तक हजारों मरीजों के तीमारदारों ने भोजन किया।
कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष रितेश मल्ल, महामंत्री सच्चितानन्द मिश्रा, प्रदेश मीडिया प्रभारी सतीश चंद्र चौहान, उदय प्रताप, पप्पू यादव, प्रदेश मंत्री करुणेश तिवारी, केजीएमयू उपाध्यक्ष सागर सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष अजय सिंह, उदयवीर, एस एन पाठक, धर्मेंद्र सिंह आदि ने मंत्री को जन्मदिवस की बधाई दी।

गुरुवार, 31 दिसंबर 2020

.तो पीएचसी स्तर पर संभव होगी प्रोस्टेट कैंसर की जांच सीबीएमआर ने खोजा बायोमार्कर

 

...तो पीएचसी स्तर पर संभव होगी प्रोस्टेट कैंसर की जांच

 सीबीएमआर ने खोजा बायोमार्कर दक्षता जानने के लिए  संस्थानों से करार

 

प्रोस्टेट कैंसर का पता शुरूआती दौर में वह भी पीएचसी स्तर पर लगाने के लिए सेंटर आफ बायोमेडिकल रिसर्च ने रोड मैप तैयार कर लिया है। सेंटर के निदेशक डा. आलोक धावन के मुताबिक हमने प्रोस्टेट कैंसर के लिए चार बायोमार्कर का पता लगा है जिसके आधार पर इस कैंसर का पता शुरूआती दौर में लगाने के साथ कैंसर के स्टेज का भी पता लगाना  संभव है। इन बायोमार्कर का पता लगाने के लिए सेंटर ने तीन सौ अधिक मरीजों पर शोध जिसे विश्व स्तर पर मान्यता भी मिली है। इन बायोमार्कर का और अघिक मरीजों पर परीक्षण करने के लिए किंग जार्ज मेडिकल विवि, राम मनोहर लोहिया संस्थान के अलावा एम्स जोधपुर से करार किया है।  अधिक मरीजों पर शोध होगा तभी इन बायोमार्कर की सेंसटिवटी और स्पेसीफिसिटी यानि टेस्ट का सटीक है यह पता लगेगा। इसके बाद हम किट बनाने वाली कंपनी से करार करेंगे जो सरल तरीके से ऐसी किट बनाएगी जिससे पीएचसी लेवल पर जांच संभव हो सके। पीएचसी स्तर पर हिपेटाइटिस , प्रिगनेंसी सहित तमाम टेस्ट कार्ड या एग्यूलिटेशन के रूप में संभव हैं।    

 

यह परेशानी तो लें सलाह

-जलन और पेशाब में दर्द

-पेशाब करने और रोकने में कठिनाई

-रात में बार-बार पेशाब करने की इच्छा होना

-मूत्राशय के नियंत्रण में कमी

-मूत्र प्रवाह में कमी

-मूत्र में रक्त (हेमट्यूरिया)

-सीमेन में रक्त

लक्षण प्रारंभिक अवस्था में दिख सकते हैं या नहीं भी दिख सकते। अधिकांश प्रोस्टेट कैंसर का शुरुआत में पहचान करना मुश्किल है।

 

बेंच टू बेड निति पर काम करेगा सेंटर

 

प्रो.आलोक ने कहा कि यह प्रदेश का अकेला विशेष सेंटर है जो बीमारी का पता शुरूआती दौर पर  लगाने के लगातार शोध कर रहा है। तमाम शोध विश्व स्तर पर स्वीकार भी किए गए । इन शोधों का फायदा मरीजों  मिले इसके लिए बेंच टू बेड नीति पर काम शुरू किया है जिसका फायदा जल्दी मरीजों को मिलेगा।   

अब पहले पता लग जाएगा किसमें सफल होगा कॉकलियर इंपलांट- बच्चों में सुनाई देने का सटीक इलाज होगा संभव

 अब पहले पता लग जाएगा किसमें सफल होगा कॉकलियर   इंपलांट



सीबीएमआर ने स्थापित की तकनीक





अब जंम जात या किसी अन्य कारण ने सुनाई न देने की परेशानी से राहत दिलाने के लिए होने वाले कॉकलियर इंपलांट की सफलता का पता इंपलांट से पहले लगाया जा सकता है। सेंटर आफ बायोमिडकल रिसर्च(सीबीएमआर) ने ऐसी तकनीक स्थापित की है जिसमें फंक्सनल एमआरआई के जरिए दिमाग की प्लास्टीसिटी देख कर बताया जा सकता है कि इंपलांट कितना सफल होगा। इससे इंपलांट की सफलता दर काफी बढ़ जाती है। सेंटर के निदेशक प्रो.आलोक धावन के मुताबिक हम लोगों ने 50 से अधिक सुनाई न देने की क्षमता वाले बच्चों में शोध के साबित किया है कि दिमाग की प्लास्टीसिटी( लचीलापन) के आधार पर इंपलांट की सफलता का आकलन किया जा सकता है। जिन बच्चों में प्लास्टीसिटी अधिक होती है उनमें इंपलांट सफल होता है।  कॉकलियर लगने के बाद उनमें पूरी क्षमता से सुनाई देने लगता है। इस शोध के बाद हम लोगों ने रूटीन तौर पर जांच करने लगे है जिसमें बताते है कि किसमें यह सफल होगा।  संजय गांधी पीजीआइ के न्यूरो ईएनटी विभाग के प्रो.अमित केशरी के साथ मिल कर यह शोध किया गया । अब विभाग किसी भी मरीज में इंपलांट से पहले जांच करा कर सफलता का आकलन कर लेते है। विशेषज्ञों का कहना है कि  कॉकलियर इंपलांट काफी मंहगा होता है इसलिए लगने के बाद अपेक्षित परिणाम न मिले तो यह दुखद स्थित मरीज और चिकित्सक दोनों के लिए होती है। इस शोध के बाद दोनों लोगों को संतुष्टि मिलती है।

6 से 10 साल के बच्चों में भी संभव होगा इंपलांट

एक से तीन साल में बेस्ट रिजल्ट देता है लेकिन 6 साल तक करते है लेकिन 6 से 10  साल के बाद वाले बच्चों में क्यों नहीं करना है इसके लिए कोई मानक नहीं था जिससे जानने के लिए शोध किया गया किया तो पता चला कि फंक्सनल एमआरआई इस उम्र के बच्चों में कुछ हद तक इंपलांट का फैसला ले सकते हैं।  

 कैसे होता है इंप्लांट

कॉकलियर इंप्लांट उपकरण है, जिसे सर्जरी के द्वारा कान के अंदरूनी हिस्से में लगाया जाता है और जो कान के बाहर लगे उपकरण से चालित होता है। कान के पीछे कट लगाते है और मैस्टॉइड बोन (खोपड़ी की अस्थाई हड्डी का भाग) के माध्यम से छेद किया जाता है। इस छेद के माध्यम से इलेक्ट्रॉइड को कॉक्लिया में डाला जाता है। कान के पिछले हिस्से में पॉकेट को बनाया जाता है, जिसमें रिसीवर को रखा जाता है।  सर्जरी के लगभग एक महीने के बाद, बाहरी उपकरणों जैसे माइक्रोफोन, स्पीच प्रोफेसर और ट्रांसमीटर को कान के बाहर लगा दिया जाता है।

सोमवार, 28 दिसंबर 2020

खोजा एसाइटिस से राहत दिलाने के लिए नुस्खा

 

पीजीआइः खोजा एसाइटिस से राहत दिलाने के लिए नुस्खा

लिवर सिरोसिस के मरीजों को मिली राहत नुस्खे को मिली विश्व स्तर पर मान्यता  


लिवर सिरोसिस या पेट की दूसरी बीमारी के कारण पेट में पानी भरने की परेशानी(एसाइटिस) से निजात दिलाने के लिए संजय गांधी पीजीआइ ने एक नया नुस्खा खोज लिया है। इस नुस्खे से गंभीर मरीज की जिंदगी की डोर लंबी हो रही है। इस नुस्खे को जर्नल आफ क्लिनिकल एंड एक्परीमेंटल हिपैटोलाजी के अलावा अमेरिकन गैस्ट्रोइंट्रोलाजी सोसाइटी के अलावा तमाम पेट रोग विशेषज्ञों के संगठनों ने स्वीकार किया। इस नुस्खे का खोज करने वाले पेट रोग विशेषज्ञ डा. गौरव पाण्डेय ने 40 से अधिक एसाइटिस के मरीजों में शोध के किया है।  इससे मरीज की स्थित में काफी सुधार आया। विशेषज्ञों का कहना है कि पेट में पानी भरने( एसाइटिस) होने पर पानी निकाला जाता है जिसमें कई तरह की परेशानी की आशंका रहती है। नए नुस्खे में एलब्यूमिन के साथ फ्यूरोसीमाइड के खास मात्रा में मिला कर इंट्रावेनस चढाया जाता है। किस मरीज में कितना नुस्खा देना है यह स्थिति के आधार पर तय करते हैं। इस नुस्खे का कोई कुप्रभाव भी नहीं है। डा. गौरव ने लिवर  सिरोसिस में नुस्खा कारगर है

 

नए नुस्खे से बच गया 23 वर्षीय युवक का जीवन

 

यह तो साबित किया ही था हाल में ही बड़ चैरी सिंड्रोम से ग्रस्त 24 वर्षीय रजक जो क्लीनिकल इम्यूनोलाजिस्ट प्रो.विकास अग्रवाल के देख –रेख में भर्ती था । उनमें भी पेट में पानी भर गया जिसके कारण जीवन खतरे में पड़ गया था। प्रो.विकास ने डा. गौरव पाण्डेय के सहयोग से इस परेशानी से मुक्ति दिला कर उसका जीवन बचा लिया। रजक अब पूरी तरह ठीक है।    

क्या है एसाइटिस

लिवर सिरोसिस, बड चैरी सिंड्रोम सहित तमाम पेट की बीमारी में पेट की कैवटी में पानी भरने लगता है जिससे पेट फूल जाता है। कई बार स्थित गंभीर हो जाती है। लिवर, कैंसर, कंजस्टिव हार्ट फेलियर या किडनी जैसी अन्य बीमारियों की वजह से पेट (एब्डॉमिनल कैविटी) में पेल येलो या पानी की तरह तरल पदार्थ जमा होने लगता है, जिसे एसाइटिस कहते हैं। एब्डॉमिनल कैविटी और चेस्ट कैविटी डायफ्रम से अलग होती है।

 

यह होती है परेशानी

- पेट फूल जाना

-अचानक वजन कम होना

-पेट में सूजन आना

-लेटने के दौरान सांस लेने में परेशानी महसूस होना

-भूख कम लगना

-पेट में दर्द महसूस होना

-मितली और उल्टी होना

-सीने में जलन महसूस होना

क्यों होती है परेशानी

 

क्यो होता है एसाइिटस

लिवर में घाव की वजह से एसाइटिस की समस्या होती है। इससे ब्लड वेसेल्स में ब्लड का दवाब बढ़ता है। दवाब बढ़ने की वजह से एब्डॉमिनल कैविटी में तरल पदार्थ जमा होने लगता है, जिस कारण एसाइटिस की बीमारी होती है

रविवार, 13 दिसंबर 2020

आधार कार्ड की तरह होगा जीनोम कार्ड जो बताएगा कौन सी दवा होगी कारगर

 

आधार कार्ड की तरह होगा जीनोम कार्ड जो बताएगा कौन सी दवा होगी कारगर 
पीजीआइ ने किया है कई शोध संस्थान से समझौता बढ़ेगी रफ्तार


वह दिन दूर नहीं है जब हर व्यक्ति के पास आधार कार्ड की तरह जिनोमकार्ड होगा जिसके जरिए डाक्टर जीनोम के आधार पर पता लगा लेंगे कि किस मरीज में कौन सी दवा कारगर साबित होगी। इस दिशा में कई स्तर पर काम हो रहा है। इंजीनिंयरिंग और चिकित्सा विज्ञान की संयुक्त शोध के जरिए यह संभव होने  जा रहा है। सुपर कंप्यूटर के जरिए हम लोग डीएनए, आरएनए की गुत्थी सुलझा रहे है इसे जिनोम स्टडी कहते है। यह व्यक्ति का जीनोम अलग होता है। इंडियन इंस्टीट्यूट आफ इंफार्मेनशन टेक्नोलॉजी रायपुर के डा. प्रदीप सिन्हा ने संजय गांधी पीजीआइ में शोध दिवस पर आयोजित वेबीनार कम सेमिनार के मौके पर कहा कि अभी एक समान लक्षण वाले या बीमारी वाले मरीज में जो दवा प्रचलित होती है दी जाती है । इस दवा से कुछ लोगों को फायदा होता है तो कुछ लोगों को दवा से फायदा नहीं होता है। चिकित्सक फिर कारण खोज कर दूसरी दवा देता है कई बार यह दवा भी कारगर साबित नही होती है ऐसे में बीमारी बढ़ती जाती है। इस तमाम परेशानी को देखते हुए बहुत तेजी से पर्सनलाइज्ड मेडिसिन पर काम हो रहा है जिसमें व्यक्ति के जीनोम के आधार पर दवा बनेगी और मरीज को दी जाएगी। हर व्यक्ति के पास आधार कार्ड की तरह जीनोम कार्ड होगा जिसे लेकर मरीज़ डाक्टर के पास जाएगा डाक्टर रीडर में कार्ड रीड करेगा और बता देगा कौन सी दवा किस मरीज में कारगर होगी। संस्थान के पिडियाट्रिक मेडिसिन विभाग के डा.मोनिक सेन शर्मा ने सुक्षाव दिया कि लखनऊ में ही कई शोध संस्थान है जो फैकल्टी नई है उनका वहां पर कोई परिचय नहीं है इन संस्थान के साथ काम करने के लिए एक प्लेट फार्म की जरूरत है जिसके बारे में रिसर्च सेल के प्रभारी प्रो.यूसी घोषाल ने बताया कि कई संस्थान के हम लोगों शोध के लिए समझौता किया है आने वाले दिनों में जूनियर फैकल्टी को शोध के कई मार्ग खुूलेंगे। प्रो.अमित केशरी ने कहा कि संस्थान के आईआईटी कानपुर के साथ साथ काम करने के लिए संस्थान में कोर लैब की तरह लैब की जरूरत है जिस पर संस्थान प्रशासन कामकरने की बात कही। इस मौके पर रजिस्ट्रार प्रो.सोनिया नित्यांनद, डीन प्रो.एसके मिश्रा,  माइक्रोबायलोजी विभाग की प्रमुख प्रो.उज्वला घोषाल सहित अन्य संकाय सदस्यों ने शोध पर बल देते हुए कहा कि शोध के बिना इलाज की नई दिशा तय करना संभव नहीं है। 

पीजीआई में बढेगा शोध का बजट
निदेशक प्रो.आरके धीमन ने कहा कि शोध के वर्तमान बजट को तीन गुना तक बढाने के योजना पर काम शुरू कर दिया है। इंट्रामुरल शोध के लिए बजट बढने के बाद अधिक संकाय सदस्यों को शोध का मौका मिलेगा । इसके साथ जो संकाय सदस्य पीएचडी करना चाहेंगे उनके लिए शोध का मार्ग प्रसस्त किया जाएगा। 

मरीज देखने के साथ करें लैब में शोध

नेशनल मेडिकल काउंसिल के प्रमुख डा.एसके सरीन ने कहा कि चिकित्सक को हाई ब्रिड होना पड़ेगा। मरीज देखने के साथ उन्हें लैब में रिसर्च करना होगा क्योंकि दिमाग किसी का हाथ किसी का होने से शोध संभव नहीं है। संजय गांधी पीजीआईजैसे संस्थान में ही केवल चिकित्सक लैब में शोध भी कर रहे है लेकिन इनकी संख्या भी कमहै। इस लिए संकाय सदस्यों को पीएचडी करना और करने की जरूरत पूरे देश के मेडिकल संस्थानों में है।