सोमवार, 29 अक्टूबर 2018

गर्भवस्था के दौरान फिजियोथिरेपी से कम होती है 40 फीसदी सीजेरियन की आशंका



पीजीाई में क्लीनिकल स्किल अपडेट आन फिजियोथिरेपी टेक्निक्स पर सीएमई
गर्भवस्था के दौरान फिजियोथिरेपी से कम होती है 40 फीसदी सीजेरियन की आशंका
 
प्रसव के बाद नहीं बैडोल रहेगा फिजिक 



सुरक्षित प्रसव और गर्भावस्था के कारण शरीर की बनावट में बदलाव रोकने में फिजियोथिरेपी कारगर साबित हो रही है। गर्भावस्था के दौरान शरीर में तमाम रसायनिक बदलाव होते है जिसके कारण शरीर के बनावट में भी बदलाव अाता है। पेट की मांसपेशियां कमजोर हो जाती है। कमर पर दबाव बढ़ जाता है। इससे गर्भावस्था के दौरान और बाद में परेशानी होती है। इस अवस्था में फिजियोथिरेपी लेकर तमाम परेशानियों से बचा सकता है। संजय गांधी पीजीआई में क्लीनिकल स्किल अपडेट आन फिजियोथिरेपी टेक्निक पर अायोजित सीएमई में डा. सूरज कुमार ने  बताया कि गर्भावस्था के दौरा फिजियोथिरेपी लेने से सर्जरी  की आशंका 30 से 40 फीसदी तक कम हो जाती  है। प्रसव के बाद गर्भावस्था के पहले का फिजिक भी पाया जा सकता है। महिलाएं कई बार फिजिक में खराबी के कारण परेशान रहती है।शुरूआती तीन महीनो में व्यायाम से न सिर्फ गर्भवती महिला बल्कि शिशु के शरीर में भी रक्त और ऑक्सीजन का संचार बढ़ता है।  मांसपेशियों में कसाव आता है और महिला की प्रतिरोधक क्षमता व शारीरिक ऊर्जा में बढ़ोत्तरी होती है।गर्भवती महिला  कमर दर्द की तकलीफ से बच सकती है। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं का वजन बढ़जाता है जिसे फिजियोथेरेपी  को बढ़ने से रोक सकती हैं।डिलीवरी के बाद भी महिलाओं को अतिरिक्त चर्बी घटाने और वजन नियंत्रण करने में मदद मिलती है। 

फिजियोथिरेपी से 50 फीसदी बीमारी से निजात

 सीएमई का उद्घाटन अस्पताल प्रशासन विभाग के प्रमुख प्रो. राजेश हर्ष वर्धन, कार्डियक सर्जन प्रो.एसके अग्रवाल, निश्चेतना विभाग के प्रो. देवेंद्र गुप्ता  और एमएस डा.एके भट्ट, एमएस डा.एके भट्ट ने करते हुए कहा  कि फिजियोथिरेपी के जरिए 40 से 50 फीसदी परेशानी से छुटकारा मिल सकता है।  कहा कि तंत्रिका तंत्र की कमजोरी, अास्टियो अर्थराइिटस सहित कई परेशानी जिसमें दवा काम नहीं करती उसमें यह विधा काफी कारगर सबित हो रही है।  

वेंटीलेटर पर कम दिन रहेगा मरीज
डा. बृजेश त्रिपाटी, डा. संदीप शर्मा और डा. राजेंद्र कुमार ने बताया कि आईसीयू में वेंटीलेटर पर रहने वाले मरीजों में सही तरीके से फिजियोथिरेपी देकर निमोनिया, निमोनिक पैच, लंग कोलेप्स सहित तमाम परेशानियों को कम किया जा सकता है। देखा गया है कि सही तरीके से फिजियोथिरेपी देने से वेंटीलेटर पर रहने का सामय 40 फीसदी तक कम किया जा सकता है। फेफडे में संक्रमित स्राव होता है जिसे इस तकनीक से स्राव को फेफडे से निकाल कर ट्रेकिया में लाते जहां से सक्शन कर स्राव को बाहर निकाल देते है इससे फेफडे में संक्रमण की आशंका कम हो जाती है। कहा कि हर आईसीयू में फिजियोथिरेपी विशेषज्ञ की तैनाती होनी चाहिए। 


मिलता है कब्ज और सिर दर्द से छुटकारा

डा. संतोष उपाध्याय ने बताया कि फिजियोथिरेपी की भूमिका शरीर  के जो़ड़ो तक ही सिमित नहीं है। पेट आदि जहां जोड़ नहीं है उसकी फिजियोथिरेपी कर शरीर के भीतरी अंगो को मोबलाइज कर कब्ज, अपच, भूख न लगना, शरीर में दर्द और सिर दर्द की परेशानी दूर की जा सकती है। सिर दर्द के 40 फीसदी मामलों में पेट की परेशानी कारण साबित होती है। इस तकनीक को विसरल मैनुपुलेशन कहते हैं।   
 

मंगलवार, 23 अक्टूबर 2018

इंडियन सोसाइटी अाफ हाइपरटेंशन ने पीजीआई विशेषज्ञों को समर्पित किया जर्नल

इंडियन सोसाइटी अाफ हाइपरटेंशन ने पीजीआई विशेषज्ञों को समर्पित किया जर्नल

पहली बार केवल पीजीआई के  विशेषज्ञों को किया गया शामिल
उच्च रक्तचाप से निपटने के लिए दिए विशेषज्ञों ने टिप्स
जागरण संवाददाता। लखनऊ



उच्च रक्त चाप के कारण होने वाली तमाम परेशानियों और इससे निपटने की जानकारी के विस्तार के लिए इंडियन सोसाइटी अाफ हाइपरटेंशन एंड वर्ड हाइपरटेंशन लीग ने 
पहली बार अपने मेडिकल जर्नल हाइपरटेंशन को  संजय गांधी पीजीआई के विशेषज्ञों को समर्पित किया है। जर्नल में संस्थान में विशेषज्ञों के लेख को स्थान दिया गया है। एडीटोरियल टीम में संस्थान के हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. सत्येंद्र तिवारी शामिल है। जर्नल की प्रति संस्थान को निदेशक प्रो. राकेश कपूर को प्रो.तिवारी ने सौंपा। निदेशक ने कहा कि यह हमारे लिए गर्व की बात है। इंटरनेशन जर्नल केवल संस्थान के विशेषज्ञों को स्थान दिया है । इससे उत्तर भारत में उच्च रक्तचाप के कारण और निवारण की जानकारी चिकित्सा जगत के लोगों को मिलेगी। इसमें सामान्य अस्पताल  डा. प्रेरणा कपूर, हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. आदित्य कपूर, इंडोक्राइनोलाजिस्ट प्रो.सुभाष यादव, प्रो.सुशील गुप्ता,
न्यूरोलाजिस्ट  प्रो.वीके पालीवाल, प्रो.सुनील प्रधान, नेफ्रोलाजिस्ट  धर्मेंद्र भदौरिया, प्रो. मानस रंजन पटेल, प्रो.अमित गुप्ता ने अपने अनुभव बताया है। 

शहरी 20 फीसदी लोग उच्च रक्त चाप के चपेट में

विशेषज्ञों ने बताा कि 22.9 फीसदी पुरूष 23.6 फीसदी महिलाएं उच्च रक्तचाप के चपेट में हैं। शहरी क्षेत्र के लोग अधिक उच्च रक्तचाप के चपेट में देखा गया कि शहरी क्षेत्र के 20 से 25 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्र के 10 से 12 फीसदी उच्च रक्त चाप के चपेट में है। विशेषज्ञों ने बताया कि उच्च रक्च चाप नियंत्रित न रहने पर ब्रेन स्ट्रोक, किडनी की खराबी , दिल की बीमारी की आशंका बढ़ जाती है। देखा गया है कि ब्रेन स्ट्रोक का सबसे बडा कारण उच्च रक्च  चाप साबित हो रहा है।    

रविवार, 21 अक्टूबर 2018

डायबिटीज आंखों की बीमारी की पांचवीं बड़ी वजह

डायबिटीज आंखों की बीमारी की पांचवीं बड़ी वजह


पीजीआई में डायबिटिक रेटिनोपैथी पर कार्यशाला
जागरण संवाददाता।लखनऊ
डायबिटीज से देश में सात करोड़ लोग पीड़ित हैं। डायबिटीज आंखों की बीमारी की पांचवीं बड़ी वजह है। डायबिटीज के मरीजों को चाहिए कि वह साल में एक बार आंखों के पर्दे की जांच जरूर कराएं। डायबिटीज काबू नहीं की तो आंख की रोशनी (अंधता) जाने का खतरा काफी बढ़ जाता है। यह जानकारी रविवार को पीजीआई के नेत्र विभाग के वरिष्ठ प्रो विकास कनौजिया ने दी। 
आंख के पर्दे के इलाज की नई तकनीक बताई 
आल इंडिया ऑप्थॉमोलॉजिकल सोसायटी एकेडमिक एंड रिसर्च कमेटी की ओर से 'डायबिटीज की वजह से अंधता की पहचान और इलाज' विषय पर पीजीआई में सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) का आयोजन हुआ। कमेटी के कोर्स कोऑर्डिनेटर प्रो विकास कनौजिया ने बताया कि इस सीएमई में उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और छत्तीसगढ़ से सरकारी व गैर सरकारी डॉक्टर पहुंचे। इन सभी डॉक्टरों को डायबिटीज मरीज की आंख की जांच और इलाज की नई तकनीक के बारे में जागरुक किया गया। बताया गया कि डायबिटीज मरीज की आंख के पर्दे में सूजन आना, आंख के अंदर खून आ जाने से रोशनी जाने का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में डॉक्टर को सही से जांच करके तुरंत ही मरीज का बेहतर और नई तकनीक से इलाज शुरू कर देना चाहिए। विकास ने बताया कि सूजन होने पर एक-एक माह पर तीन बार आंख के अंदर इंजेक्शन लगाकर नई तकनीक से बीमारी से बचाव हो सकता है। 

60 से 70 फीसदी तक आते हैं मरीज 
पीजीआई नेत्र रोग विभाग की प्रमुख प्रो कुमुदिनी शर्मा ने बताया कि संस्थान के इंडोक्राइन विभाग से ही रोजाना डायबिटीज के 70 से अधिक मरीज आते हैं। इनमें से 60 से 70 फीसदी डायबिटीज मरीजों में आंख के पर्दे की जांच में दिक्कत मिलती है। यानी कि इन डायबिटीज मरीज की आंख की रोशनी जाने का खतरा रहता है। ऐसे में इनका तुरंत इलाज किया जाता है। दिल्ली से आए कमेटी के चेयरमैन डॉ. ललित वर्मा व महाराष्ट्र ऑप्थॉमोलॉजी के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत बावनकुले, पीजीआई के डॉ. ईश भाटिया, डॉ. हिमांशू शुक्ला, डॉ. शोभित चावला, डॉ. अमित पोरवाल, डॉ. मधु भदौरिया, डॉ. राजेश सहाय, डॉ. गौरव निगम, डॉ. शोभित कक्कड़, डॉ. उपसम गोयल, डॉ. संजीव हंसराज, डॉ. समर्थ अग्रवाल, डॉ. कमलजीत सिंह आदि प्रमुख डॉक्टरों ने अपने विचार और सुझाव साझा किए।   

ऐसे करें बचाव 
- डायबिटीज से पीड़ित लोग शुगर और ब्लड प्रेशर को बहुत ही नियंत्रित रखें। 
- आलू, चावल, फ्राइड राइस, डिब्बा बंद जूस न पिएं, खाएं। 
- नियमित रूप से व्यायाम जरूर करें, हरी घास पर नंगे पांव चलें। 

क्रिटकल केयर का हुनर प्रदेश के डाक्टरों को सिखाएगा पीजीआई

क्रिटकल केयर का  हुनर  प्रदेश के डाक्टरों को सिखाएगा पीजीआई


एक्यूट क्रटिकल केयर कोर्स का नोडल सेंटर बना पीजीआई

कम होगी आईसीयू में भर्ती की जरूरत
कुमार संजय । लखनऊ


बीमारी के कारण या इलाज के दौरान कई बार मरीज की स्थित इतनी खराब हो जाती है कि मरीज को आईसीयू में क्रिटिकल केयर की जरूरत पड़ती है। क्रिटिकल केयर के लिए रोज मरीज के तीमारदारों को 20 से 40  हजार तक खर्च करना पड़ता है। क्रिटिकल केयर की सुविधा सरकारी अस्पतालों में कम होने के कारण बेड के लिए लंबी वेटिंग रहती है। इस परेशानी को कम करने के लिए प्लान बनाया गया है कि सामान्य डाक्टर जिसमें सर्जन भी शामिल है उनको इतना ट्रेंड किया जाए कि वह क्रिटिकल केयर अपने अस्पताल  मौजूदा संसाधन के साथ उपलब्ध करा दें। इसके लिए विदेश की तर्ज पर प्रदेश में एक्टूट क्रिटिकल केयर ट्रेनिंग मेडिकल कालेज. जिला अस्पताल के डाकटर को दिया जाएगा। ट्रेनिंग के लिए इंग्लैंड, अास्ट्रेलिया लंदन के भारतीय मूल के विशेषज्ञ  पूरे कोर्स की पूर रेखा तैयार किया है। ट्रेनिंग के लिए संजय गांधी पीजीआई को नोडल सेंटर बनाया है। ट्रेनिंग की शुरूआत करते हुए प्रदेश के चालिस डाक्टरों को तीन दिन क्रिटिकल केयर का हुनर भी विशेषज्ञों ने सिखाया। विशेषज्ञों ने संस्थान के निदेश प्रो.राकेश कपूर से मुलाकात हर स्तर पर संस्थान को सहयोग देने को कहा है।  
 
भारतीय मूल के इन विदेशीयों ने चलाई मुहिम   
इंग्लैंड के प्रो. महेश निर्मल, डा. अजय शर्मा, लंदन के डा.शैलवा कुमार, आस्ट्रेलिया के डा. शांतनु भट्टाचार्य, यूके से गीता शेट्टी सभी अपने क्षेत्र के माहिर लोग है। इनका कहना है कि सभी डाक्टर चाहे वह मेडिसिन का हो या सर्जन सभी को क्रिटकल केयर अाना चाहिए इससे इलाज की सफलता दर बढ़ती है । इसके लिए हम लोगों पूरा प्रोटोकाल बनाया है जिसमें ए से लेकर जे तक ट्रिप्स है। सबसे अहम है खून, एक्स-रे जांच लास्ट स्टेप है लेकिन भारत में यह स्टेप पहले है। जांच से पहले क्या करना है इसके बारे में पूरी जानकारी दी गयी है।   

20  फीसदी को पड़ती है क्रिटिकल केयर की जरूरत

कोर्स को-आर्डीनेटर एनेस्थेसिया विभाग के प्रो.संदीप साहू ने बताया कि इलाज के लिए आने वाले कुल मरीजों में लगबघ 20 फीसदी मरीज एेसे होते है जिनको क्रिटकल केयर की जरूरत पड़ती है। अधिक बीमारी पड़ने और मौत में काफी दूरी होती है समय पर मैनेजमेंट कर इनको बचाया जा सकता है। बताया कि विदेशों में एक्टूट क्रिटकल केयर ट्रेनिंग के बाद भी प्रैक्टिस करने की अनुमति मिलती है लेकिन हमारे देश में एेसा नहीं है। इसी लक्ष्य को स्थापित करने के लिए प्रदेश के सभी डाक्टर को ट्रेनिंग देने का सिलसिला शुरू किया है। 40 लोगों को ट्रेंड किया है यह आगे दूसरे डाक्टर को ट्रेनिंग देने के लिए कोर्स का आायोजन करेंगे। हम हर स्तर पर सहयोग करेंगे।  

मंगलवार, 16 अक्टूबर 2018

आईआईएम के निदेशक गंभीर हार्ट एटैक के बाद पीजीआई में भर्ती

आईआईएम के निदेशक गंभीर हार्ट एटैक के बाद पीजीआई में भर्ती


वेंटीलेटर पर है प्रो.प्रसाद


आईआईएम के निदेशक प्रो. अजीत प्रसाद को गंभीर हार्ट एटैक के बाद संजय गांधी पीजीआई के पोस्ट अाफ आईसीयू में रिववार की भोर में 5.25 मनिट पर भर्ती किया गया। इनके परिजन रात में इलाज के रिपोर्ट के साथ रात में 12 बजे  आए थे। संस्थान के कार्डियोलाजी विभाग के प्रो. पीके गोयल ने स्थित देखने के बाद पोस्ट अाफ अाईसीयू में भर्ती करने की सलाह दी। सूत्रों के मुताबिक पोस्ट अाफ यूनिट के प्रो.एसपी अंबेश ने सारी स्थित जानने के बाद पोस्ट अाफ में रात में 1.30 मिनट पर बेड की व्यवस्था की जिसके बाद परिजन इन्हें लेकर वेंटीलेंटर एंबूलेस से पीजीआई लाए। प्रो. अंबेश के मुताबिक इनकी हालत काफी गंभीर थी हार्ट एटैक बहुत ही गंभीर था तमाम कोशिश के बाद इन्हे रिवाइव करने के साथ वेंटीलेटर पर रखने के साथ जरूररी दवाएं शुरू की गयी। प्रो.अंबेश ने बताया कि हालत में सुधार हो रहा है लेकिन अभी वह वेंटीलेटर पर ही इस स्थित के बारे में कुछ भी कहना संभव नहीं है। हम लोग पूरी कोशिश कर रहें है।  

मुख्यमंत्री ने निदेशक से कहा पीजीआई लखनऊ से दूर स्थापित करें सेटेलाइट सेंटर

मुख्यमंत्री ने निदेशक से कहा  पीजीआई लखनऊ से दूर स्थापित करें सेटेलाइट सेंटर

पीजीआई में लोकापर्ण और शिलान्यास

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने संस्थान के निदेशक प्रो.राकेश कपूर ने कहा कि वह लखनऊ तक ही समिति न रहें लखनऊ से बाहर पीजीआई का सेटेलाइट सेंटर बनाएं। इसके लिए सरकार हर स्तर पर मदद करेंगे। पीजीआई का नाम जुडने से उस सेंटर पर फैकल्टी की कमी नहीं रहेगी क्योंकि पीजीआई एक ब्रांड है जो विश्व स्तर पर धाक जमा रखा है।
जिसका नतीजा है कि मेरे पास सबसे अधिक सिफारिश पीजीआई में बेड के लिए आती है। मुख्यंमंत्री आज इमरजेंसी मेडिसिन सेंटर, किडनी ट्रांसप्लांट सेंटर का शिलान्यास करने के साथ हिमैटोलाजी विभाग और लिवर ट्रांसप्लांट सेंटर का लोकापर्ण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे संस्थान में लगबघ 550 बेड बढेगे जिससे आम जनता को राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पैसे वाले के हर जगह इलाज है लेकिन गरीबो के लिए इलाज आज भी चुनौती है जिसका सामना करने के लिए हम स्तर पर कोशिश कर रहे हैं। हम प्रदेश में 13 मेडिकल कालेज खोल रहे है । इंफ्रास्टकचर तो खडा हो जाएहा लेकिन हमारी बडी चिंता फैकल्टी है कि कहां से मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि डाक्टर मरीजों का कोटा न फिक्स करें जितना अधिक मरीज देखेंगे उतना ही अधिक उन्हे सीखने को मिलता है। हर मरीज कुछ नया सीख दे जाता है।  चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने कहा कि पीजीआई के स्थापना के लगभग तीस साल बाद अब दूसरे फेज का काम शुरू हुअा है अभी 985 बेड है जिसके लिए मारामारी मची रहती है।  राज्य चिकित्सा शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि सरकार हर स्तर पर पीजीआई को मदद कर रही है। निदेशक प्रो. राकेश कपूर ने कहा कि हम रेत पर निशान नहीं छोडना चाहते कि हवा आए निशान उड़ जाए इमरजेंसी मेडिसिन और किडनी ट्रांसप्लांट सेंटर अमित निशान होगा। इस मौके पर ग्रमीण अभियंत्रण मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह विशेष रूप से उपस्थित थे।    

धरती के भगवान बने रहना चुनौती
मुख्यमंत्री ने कहा कि लगातार सीखने की ललक और मानवीय संवेदना के कारण डाक्टर को धरती का भगवना कहा जाता है लेकिन आज इन दोनों की कमी के कारण इन्हें धरती का भगवान बनने रहने की चुनौती है। पीजीआई के डाक्टर और कर्मचारी मन लगाकर काम करते है जिसके कारण संस्थान अपने स्थापना के कम उम्र में ही काफी नाम रोशन किया है। दूसरे संस्थानों को पीजीआई से सीख लेनी चाहिए।


निदेशक ने मुख्यमंत्री से की संवर्ग पुर्नगठन की मांग

निदेशक प्रो.राकेश कपूर ने मुख्यमंत्री से मांग कि कर्मचारियों का संवर्ग पुर्नगठन लंबे समय से लंबित है जिसके लिए कर्मचारी परेशान है । कर्मचारीयों के काम कारण ही हम लोग सफल है यह खुश नहीं रहेंगे तो मन लागकर काम नहीं कर पाएंगे एेसे में मुख्मंत्री जी आफ से अनुरोध है कि इनके समस्या पर ध्यान देकर शीघ्र फैसला लिया जाए। मुख्यमंत्री को कर्मचारी नेताअों ने ज्ञापन भी दिया जिसमें सतवें वेतन अायोग के अनुसार भत्ते, 2001 की नियमावली में बदलाव, पीजीआई एम्स के अधीन करने और संवर्ग पुर्नगठन की मांग की गयी है।   


 इटावा से आए 12 वर्षीय सुजीत को नही दिया मिलने

मुख्यमंत्री  को पीजीआई आया देख 12 वर्षीय सुजीत कुमार जाटव मुख्यमंत्री से मिलने श्रुति आडीटोरियम पुंचा लेकिन सुरक्षा अधिकारियों ने नहीं मिलने दिया। सुजीत अपने भाई का इलाज कराने पीजीआई में अाया है। ग्राम पंचायत जुगौरा ग्राम बावरी पुर जिला इटावा का रहने वाले सुतीज ने  बताया कि उनके चाचा की हत्या वहां के एक नेता ने करा दी जिसकी कई जांच नहीं हो रही है । उसके बहन की भी हत्या हो गयी है पुलिस कुछ नहीं कर रही है।    

शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2018

तो अब प्रतिभा भरेगी हौसले की उडान

...तो अब प्रतिभा भरेगी हौसले की उडान

दस साल भटकने के बाद मिला जिंदगी जीने का हौसला
पीजीआई के प्रो.विकास अग्रवाल के नुस्खे से मिली राहत 
कुमार संजय । लखनऊ
कोई जहर दे दे मर जाऊं।  एेसे जीने से क्या फायदा। मत कराअों कोई दवा जो होगा देखा जाएगा।  6 महीने पहले  कौशांबी जिले के ईशु पुरारा गांव की रहने वाली  23 वर्षीया प्रतिभा यही कहा करती थी । अब जीने की चाह है। घर -परिवार के लिए कुछ करना चहती हैं। संजय गांधी पीजीआई के क्लीनिकल इम्यूनोलाजिस्ट प्रो. विकास अग्रवाल और प्रो. दुर्गा प्रसन्ना की मेहनत रंग लायी । प्रतिभा की परेशानी कम हो गयी जिससे हौसले को पंख लग गए। प्रतिभा के लिए दस कदम चलना भी संभव नहीं था। सांस फूलने  लगती लेकिन अब वह दो से तीन किमी पैदल चल सकती है। एमए की पढाई की लिए वह कालेज जा रही है। प्रतिभा ने बताया कि 2006 में उसके हाथ-पैर की ऊंगलियों में घाव हो जाता था। मवाद नहीं पड़ता लेकिन पक जाता था । इसके बाद धीरे-धीरे सांस भी फूलने लगी। इलाहाबाद में तमाम सरकारी , निजि डाक्टरो ने इलाज किया लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं। स्थिति इतनी बिगड़ जाती थी हर महीने चार से पांच दिन के लिए भर्ती होना पड़ता था। दस साल इलाज के दर-दर भटकते रहे। इसी बीच एक डाक्टर साहब ने कानपुर भेजा वहां पर भी इलाज हुअा लेकिन कोई फायदा नहीं हुअा। जनवरी 2017 में कानपुर के डाक्टर साहब ने पीजीआई भेजा जहां पर यह डाक्टर साहब बीमारी को पकड़ कर इलाज शुरू किया। इलाज के बारे में बताया कि यह उनका खोजा हुअा इलाज है सहमति हो तो इलाज का नस्खा दें। हमने हां कर दिया । इलाज शुरू हुअा इलाज के दो महीने बाद से राहत मिलने लगी। अब बिल्कुल फिट सी हो गयी हूं। 

अार्थिक तंगी के कारण गयी थी टूट
प्रतिभा ने बताया कि हम दो बहन और तीन भाई है। पिता बेरोजगार है। माता अागन बाडी कार्यकत्री है। खेती भी नहीं है एेसे में हर महीने में15 से 20 हजार खर्च करना बडा कठिन था। केवल एक भाई जो सिपाही है वहीं पूरा घर चलाता है। मुझे लगता था कि मेरे कारण पूरा घर परेशान है। सिपाही का वेतन भी कम होता है एेसे में हमारा इलाज. बाकी भाई बहनो की पढाई बडी मुश्किल से काम चल रहा है। 

नहीं था विश्व में आईएलडी विथ स्कैलोडर्मा का इलाज 

प्रो. विकास अग्रवाल के मुताबिक प्रतिभा को  फेफडे की खास तरह की बीमारी आईएलडी है। जिसका विश्व में कोई खास इलाज नहीं है। पूरे विश्व में साइक्लोफास्फोमाइड दिया जाता है लेकिन इस दवा से बीमारी बढ़ने की दर में कुछ ही कमी देखी गयी है। इस बीमारी से ग्रस्त होने पर व्यक्ति का फेफडा पांच से सात साल में काम करना बंद कर देता है जिससे मौत हो जाती है। हम लोगों ने एेसे मरीजों को एेसी खास दवा खोजी है जिससे मरीज के बीमारी के कारण होने वाली  परेशानियों में कमी देखी गयी है।  खास नुस्खे मरीज को चार से पांच फीसदी तक अाराम मिला अभी तक विश्व में एेसा कोई नुस्खा नहीं था जिसमें मरीज को अाराम मिले।  मरीज और उनके परिजन की अनुमति के बाद नए कंबीनेशन को ट्राइ किय़ा।  इस नए नुस्खे से कई लोगों को राहत मिल रही है। इस बीमारी में फेफडे में स्थित स्थित सूक्ष्म रक्त वाहिकाएं कडी हो कर बंद हो जाती है जिससे फेफडा पूरी तरह अाक्सीजन नहीं ले पाता है और मरीज के शरीर में अाक्सीजन की कमी होने लगती है। बीमारी बढने के साथ फेफडा पूरी तरह काम करना बंद कर देता है।

मंगलवार, 9 अक्टूबर 2018

पीजीआई में क्रमिक अनशन शुरू - संयुक्त मोर्चा के बैनर तले मांगो को लेकर अाक्रोशित है कर्मचारी

पीजीआई में क्रमिक अनशन शुरू

संयुक्त मोर्चा के बैनर तले मांगो को लेकर अाक्रोशित है कर्मचारी


संजय गांधी पीजीआई कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के द्वारा प्रस्तावित क्रमिक धरना सोमवार से गया है।  संयुक्त मोर्चा की महत्वपूर्ण मांगों में प्रमुख रूप से संस्थान  की प्रथम विनी मावली 2011 में संशोधन किया जाना। एम्स दिल्ली में जिस तिथि से संस्थान के कर्मचारियों को वेतन भत्ते एवं अन्य सुविधाएं अनुमन्य की जाती है उसी तिथि से  समस्त कर्मचारियों अधिकारियों एवं शैक्षणिक वर्ग के कर्मचारियों पर लागू की जाए। धरने पर बैठे    श्री एन पी श्रीवास्तव श्री राजेश कुमार शर्मा श्रीमती रेखा मिश्रा जी श्री धर्मेश कुमार जी श्री जीतेंद्र कुमार यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश शासन संस्थान की नियमावली में संशोधन नहीं करना चाहता है तो उत्तर प्रदेश शासन से अनुरोध है कि संस्थान  को केंद्र सरकार के अधीन करने हेतु अपनी स्वीकृति लिखित रूप से केंद्र सरकार को भेजने की कृपा करें। कहा कि  संस्थान के कर्मचारियों जिनको विगत 20 से 25 वर्षों से पदोन्नति का एक भी लाभ प्राप्त नहीं हुआ है ऐसे  में एम्स दिल्ली  के आधार प्रमोशन दिया जाए।  संस्थान के अन्य सम्मानित कर्मचारी भी क्रमिक धरना स्थल पर आकर अपना सहयोग प्रदान किया

पीजीआई में मंहत परमहंस दास से नहीं मिल पाए डा. प्रवीण तोगडिया



पीजीआई में मंहत परमहंस दास  से नहीं मिल पाए डा. प्रवीण तोगडिया 


ड्रिप के साथ अोरल फीड लेना किया शुरू

संजय गांधी पीजीआई के पोस्ट अाफ आईसीयू में भर्ती मंहत परमहंस दास से मिलने पहुंचे विश्व हिंदू परिषद के नेता डा. प्रवीण तोगडिया को को मंहत से नहीं मिलने दिया गया। तोगडिया ने अारोप लगाया कि शासन -प्रशासन एक डाक्टर को मरीज से नहीं मिलने दे रहा है। दोपहर लगभग 12.17 मिनट पर तोगडिया संस्थान पहुंचे । संस्थान परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पहले टाइट थी। अस्पताल परिसर में स्थित निदेशक कार्यालय प्रवेश द्वार से इन्हें अंदर निदेशक कार्यालय लाया गया जहां पर निदेशक प्रो. राकेश कपूर, इंडोक्राइनोलाजिस्ट प्रो. सुशील गुप्ता, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भरत सिंह सिंह सहित कई अधिकारियों ने इन्हें रिसीव कर कक्ष में बैठाया । बंद कमरे में पुलिस प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद थे। लगभग 12.56 पर तोगडिया सहित कई अधिकारी कमरे से बाहर निकले। तोगडिया सीधे निकासी द्वार पर बाहर निकले जहां पर उन्होने कहा कि हमें मंहत जी से नहीं मिलने दिया गया। मैं खुद कैंसर का डाक्टर हूं लेकिन डाक्टर को मरीज से नहीं मिलने दिया गया। हमने प्रार्थना की मंहत के दर्शन करने दे लेकिन नहीं करने दिया हम झगडा तो नहीं कर सकते हैं। संसद में राम मंदिर के कानून की बात करने वाले आज परमहंस जी राम मंदिर की बात करने के कारण इनके गुनहगार हो गए। इन्हे जबरन घसीट कर लाया गया। कहा कि महंत की क्रिटिकल है तो हम इन डाक्टरों से भी सीनियर है हम भी उनकी गंभीरता देख लेते। 


मंहत जी ने इलाज लेना किया शुरू

मंहत जी केवल मुंह के जरिए पानी ले रहे थे जिससे सुधार नहीं हो रहा था । देर रात निदेशक और जिला प्रसासन के लोग मंहत को काफी देर तक समझाए तब वह इलाज लेने को राजी हुए। ड्रिप के जरिए दवाएं दी जा रही है। स्थित में तेजी से सुधार हो रहा है। मंगलवार को सुबह 11 बजे के करीब निदेशक फिर मंहत  के पास गए और उन्होंने जूस पिला कर अोरल फीड शुरू कराया। 


पोस्ट अाफ आईसीयू में महंत जी अलावा 15 मरीज भर्ती है जिसमें कई लोग वेंटीलेटर पर है। प्रवीण जी आईसीयू में जाते इनके साथ लोगों की भीड़ भी जाती जिससे बाकी मरीजों में भी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता । इसके अलावा इनके वहां जाने से इनमें भी संक्रमण होने की आशंका रहती है। प्रवीण जो को मंहत जी के बारे में सारी जानकारी दी गयी वह संतुष्ट होकर गए। मंहत जी स्थित में सुधार हो रहा है.....निदेशक प्रो.राकेश कपूर

मंगलवार, 25 सितंबर 2018

एैक्लिशया कार्डिया -बिना चीरा ठीक होगी खाने की नली की चाल


पीजीआई देश का हला संस्थान जहां  स्थापित हुई पोयम तकनीक  
एैक्लिशया कार्डिया का इलाज के अब नहीं चलेगा नश्तर


संजय गांधी पीजीआई देश का पहला संस्थान हो गया है जहां बिना नश्तर चलाए इंडोस्कोपिक तकनीक से एकैल्शिया कार्डिया का इलाज संभव हो गया है। संस्थान के गैस्ट्रोइट्रोलाजी विभाग के प्रो. प्रवीर राय ने एकैल्शिया  कार्डिया के इलाज के लिए पर अोलर इंडोस्कोपिक मायोटमी( पोयम) तकनीक स्थापित की है। इस तकनीक के जरिए पांच  मरीजों को राहत देने के बाद प्रो. राय ने बताया कि  इस बीमारी के इलाज के लिए स्फिंटर का डायलटेशन( वैलूनिंग) किया जाता है लेकिन देखा गया कि मरीज को थोडे दिन तो राहत  मिलती है लेकिन 40 फीसदी मरीजों में दोबारा परेशानी होने लगती है। इस बीमारी के इलाज के लिए हैलेस मायोटामी सर्जरी की जाती  है जिसमें अोपेन या लेप्रोस्कोपिक तकनीक का इस्तेमाल सर्जन करते है। सर्जरी में चीरा लगने के साथ ही अस्पताल में रूकने का समय बढ जाता है ।  इलाज का खर्च भी अधिक है। सरजरी से इलाज में 1.5 लाख तक का खर्च आाता है। इस बीमारी से हर महीने संस्थान की अोपीडी में 10  से 12 मरीज अाते हैं।  

क्या है पोयम तकनीक    
 पोयम तकनीक में हम मुंह के जरिए इंडोस्कोप से खाने की नली में पहुंच कर म्यूकोसा से सब म्यूकोसा में पहुंच कर जगह बनाते है जिससे पूरी मांसपेशी नजर अाती है जिस पर चीरा लगा देते है। इसके साथ स्फिंटर पर चीरा लगा देते है जिससे खानी के नली की चाल काफी हद तक ठीक हो जाती है और स्फिंटर खुलने लगता है। इस तकनीक की सफलता दर 85 फीसदी तक है।    


क्या है एकैल्शिया  कार्डिया
एक्लेसिस कार्डिया की परेशानी में खानी ननली की मांस पेशियों की चाल गड़बड़ हो जाती है । खाने की नली और आमाशय को जोड़ने वाले स्थान पर लगा स्फिंटर समय से नहीं खुलता है जिसके कारण खाना और पानी पेट में नहीं जा पाता है। खाते ही उल्टी की परेशानी होती है। खानी की नली फूल जाती है। मरीज के वजन कम हो जाता है।   


सोमवार, 24 सितंबर 2018

पीजीआई बना देश का पहला संस्थान जिसका शोध बन रहा है नजीर

पीजीआई बना देश का पहला संस्थान जिसका शोध बन रहा है नजीर

दूसरे नंबर एम्स दिल्ली जिसके शोध बन रहे है नजीर

जितना अधिक साइटेशन उतनी अधिक गुणवत्ता


संजय गांधी पीजीआई इलाज की गुणव्ता के मामले में देश के बडे संस्थानों से बराबरी के बाद  शोधों की गुणव्ता के मामले में देश का पहला संस्थान बन गया है। शोध को  देश विदेश शोध वैज्ञानिक संस्थान के शोध को नजीर( साइटेशऩ) के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।  संस्थान के एक शोध पत्र को औसतन 12.2 साइटेशन मिला है जबकि एम्स दिल्ली के एक  शोध पत्र को औसतन 10.4 साइटेशन मिला है। इस तथ्य का जर्नल अफ एसोसिएशन अफ फिजिशियन आफ इंडिया( जापी) ने देश के दस बडे संस्थान में बीते साले में राष्ट्रीय , अंर्तराष्ट्रीय शोध पत्रों के साइटेशन का विश्लेषण करने के बाद किया है। शोध पत्रों के संख्या मामले में पीजीआई लखनऊ चौथे स्थान पर है। पहले स्थान पर एम्स दिल्ली है। दूसरे स्थान पर पीजीआई चंडीगढ़ है। तीसरे स्थान पर क्रिश्चियन मेडिकल कालेज वेल्लूर है। यह संस्थान पीजीआई लखनऊ के स्थापना से काफी पहले है स्थापित है जिसके कारण शोध पत्रों की संख्या अधिक है। पीजीआई लखनऊ से 6 हजार आठ सौ 74 शोध हुए है जिसे 83627 लोगों को बतौर रिफरेंस( साइटेशन ) इस्तेमाल किया।  एम्स दिल्ली से 29394 शोध हुए है जिसे 304929 शोध वैज्ञानिकों ने अपने शोध में बतौर रिफरेंस रखा है। इस तरह एक पेपर साइटेशन की दर 10.4 हुई जबकि पीजीआई लखनऊ की एक शोध का साइटेशन दर 12.2 है। संस्थान के संकाय सदस्य कहते है एेसा तब है जब हम लोग मरीजों को पूरा समय देने के साथ ही अतिरिक्त समय निकाल कर शोध के लिए समय देते हैं। 

शुरूअती पांच साल में शोध के मामले में उम्र के हिसाब से पीजीआई नंबर वन
एम्स दिल्ली ने 1950 में काम करना शुरू किया । शुरूअती पांच साल में केवल एक शोध हुआ। पीजीआई चंडीगढ़ 1963 में काम करना शुरू किया । शुरूआती पांच साल में 20 शोध। क्रिश्चियन मेडिकल कालेज वेल्लूर 1886 में काम करना शुरू किया शुरूअती पांच साल में कोई शोध नहीं। पीजीआई लखनऊ 1986 में काम करना शुरू किया शुरूआती पांच साल में 37 शोध हुआ। जिपमर पाडीचेरी 1966 में काम करना शुरू किया शुरूअती पांच  साल में 40 शोध । सबसे कम उम्र के पीजीआई लखनऊ ने शरूआती पांच साल में सबसे अधिक शोध किया।



किसी भी शोध को दुनिया के सामने शोध पत्र के जरिए रखा जाता है। शोध पत्र को नेशनल , इंटरनेशन मेडिकल जर्नल को भेजा जाता है जिसकी कमेटी कई मानकों पर जांच कर उसे स्वीकार करती है। किसी भी शोध पत्र को दूसरे जितने अधिक शोध वैज्ञानिक अपने शोध में उसे बतौर रिफरेंस शामिल करते है उतना ही शोध की महत्व का पता लगता है। हमारे संस्थान के शोध पत्रों का साइटेशन देश के टाप 4 में से नंबर वन है। यह संस्थान के लिए गर्व का विषय है जिससे हमारे संकाय सदस्यों ने हासिल किया है....निदशक प्रो.राकेश कपूर

शुक्रवार, 21 सितंबर 2018

बिना जरूरत लगाएं जाते है 70 फीसदी इंजेक्शन




बिना जरूरत लगाएं जाते है 70 फीसदी इंजेक्शन


विश्व स्वास्थ्य संगठन और पीजीआई सुरक्षित इंजेक्शन के लिए चलाएंगा जागरूकता अभियान 



इलाज के लिए 70 फीसदी इंजेक्शन बिना जरूरत के लगाए जाते है । 50 फीसदी इंजेक्शन असुरक्षित होते हैं। जिसके कारण मरीज को दर्द सहना पडता है ।  संक्रमण का खतरा बढ जाता है। इस दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह खुलास संजय गांधी पीजीआई के गैस्ट्रो इंट्रोलाजी विभाग के प्रो.राकेश अग्रवाल, विश्व स्वास्थ्य संगठन के डा. चंद्रकांत लहरिया, परिवार स्वास्थ्य कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के डा. राजेश और इनक्लेन के डा. राकेश एन पिल्ई ने संस्थान में इजेक्शन सेफ्टी पर अायोजित कार्यशाला में देते हुए कहा कि इलाज के 90 फीसदी दवाएं इजेक्शन से दिया जा रहा है जिसमें 70 फीसदी में इजेक्शन की जरूरत नहीं होती है। किसी भी बीमारी के इलाज के लिए पहले खाने वाली दवाअों के जरिए ही इलाज करना चाहिए लेकिन डाक्टर और मरीज में इंजेक्शन से जल्दी ठीक होने का विश्वास इंजेक्शन प्रैक्टिस को बढावा दे रहा है। प्रो. राकेश अग्रवाल ने कहा कि असुरिक्षत इजेक्शन के कारण हर साल विश्व में 80 से 160  लाख लोग हिपैटाइिटस बी वायरस, 23 से 47 लाख लोग हिपैटाइिटस सी वायरस से संक्रमित होते है। सुरक्षित इंजेक्शन प्रैक्टिस और बिना जरूरत इंजेक्शन के इस्तेमाल को कम कर इस दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।  विश्व स्वास्थ्य संगठन और पीजीआई ने मिल कर सुरक्षित इजेक्शन प्रैक्टिस को बढावा देने के लिए कई वर्कशाप का अायोजन करेगा।  

एेसे करें इजेक्शन का इस्तेमाल 

- डिस्पोजेबिल सिरिंज के पैकिंग चेक करें
- पैकिंग खोलने के बाद तुरंत इस्तेमाल करें
- पैकिंग की एक्सपाइरी डेट चेक करें
- इजेक्शन लगाने से पहले जहां लगाना है वहां त्वचा को साफ करें
- हाथ धोने के बाद दस्ताना लगा कर ही इंजेक्शन लगाएं
- किसी दवा की एक सीसी को कई मरीज को इंजेक्शन देना है तो हर बार नई सिरिंज और निडिल का इस्तेमाल करें
-इस्तेमाल सिरिंज और निडिल को सही जगह पर नष्ट करें

गुरुवार, 13 सितंबर 2018

पीजीआई में शुरू होगा अस्पताल प्रबंधन में मास्टर डिग्री


पीजीआई में शुरू होगा अस्पताल प्रबंधन में मास्टर डिग्री

अस्पताल प्रबंधन पाठयक्रम का होगा इंटरनेशनल स्टैंर्ड, बढेगी सीटों की संख्या

अस्पताल प्रबंधन विभाग के प्रमुख बने प्रो.राजेश हर्षवर्धन ने दी योजनाअों के बारे में जानकारी



संजय गांधी पीजीआई के अस्पताल प्रबंधन विभाग के प्रमुख का कार्यभार संभालने वाले प्रो.राजेश हर्षवर्धन ने अस्पताल प्रबंधन में मास्टर डिग्री पाठ्क्रम शुरू करने के साथ ही 
चल रहे पाठ्यक्रम को इंटरनेशनल स्तर का बनाने के योजना पर काम शुरू कर दिया है।  कार्य भार संभालने के बाद विशेष बातचीत में प्रो. हर्ष वर्धन ने कहा कि अस्पताल में इलाज की गुणवत्ता में बढोत्तरी और संसाधन का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने के उद्देश्य से अस्पताल प्रबंधक तैयार किए जा रहे है। हमारा संस्थान पूर्ण कालिक , अल्पकालिक और अति अल्पकालिक मिला कर कुल लगभग 90 अस्पताल प्रबंधक तैयार कर रहा है । इस संख्या को दो सौ तक करने की योजना पर काम करूंगा। कहा कि अस्ताल प्रबंधक की भूमिका को नए मेडिकल साइंस में स्वीकार किया गया । यह प्रबंधक वित्त, सामग्री, मानव संसाधन सहित अन्य का बेहतर इस्तेमाल की तकनीक जानते है। इसे एवीडेंस बेस्ट मैनेजमेंट कहते है। इससे अस्पताल की कार्य क्षमता में काफी सुधार होता है। कहा कि अस्पताल प्रबंधन पाठ्क्रम की गुणवत्ता बढाने के स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम शुरू करेंगे जिसके तहत यहां के छात्र देश के दूसरे संस्थान में जाकर वहां की कार्यप्रणाली का अध्ययन करेंगे। दूसरे संस्थान के छात्र हमारे संस्थान में आएंगे। आगे विदेश के संस्थानों से भी करार होगा जिससे पाठक्रम का स्तर इंटरनेशनल स्तर का होगा। इससेे यहां  के छात्रों को विदेश में भी मौका मिलेगा। 

इग्नू का स्टडी सेंटर बना पीजीआई
प्रो. हर्ष वर्धन ने बताया कि इंदिरा गांधी अोपेन यूनिवर्सटी डिप्लोमा इन हास्पिटल एंड हेल्थ मैनेजमेंट करा रहा है जिसके लिए संस्थान के विभाग  को स्टडी सेंटर तय किया है। इसके अलावा भारत सरकार ने वेलनेस सेंटर के लिए कम्युनिटि हेल्थ नर्सेज की ट्रेनिग की लिए भी विभाग को नामित किया है। इसके तहत सरकार द्वारा नामित 60 नर्सेज को 6 महीने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह नर्सज लोगों को स्वस्थ्य रहने में सहयोग करेंगी। 


बुधवार, 12 सितंबर 2018

पीजीआई - एक छत की नीचे होगी लिवर की सभी तरह की सर्जरी-प्रो.राकेश कपूर

एक छत की नीचे होगी लिवर की सभी तरह की सर्जरी
हिपैटोबिलेरी एंड लिवर ट्रासप्लांट सेंटर के नाम ही मिला है 40  करोड़
बढ़ जाएगी 80 फीसदी हिपैटोबिलेरी सर्जरी की सफलता दर

संजय गांधी पीजीआई के  हिपैटोबिलेरी एंड लिवर ट्रांसप्लांट सेंटर को लेकर चल रहे मनमुटाव को खत्म करने के लिए संस्थान प्रशासन ने आदेश जारी कर दोनों पछों के लिए बीच का रास्ता निकाला है। दावा किया कि हिपैटोबिलेरी लिवर ट्रांसप्लांट के साथ जुडने पर  ( लिवर से जुडी बीमारी) की सर्जरी की सफलता दर 70 से 80 फीसदी तक बढ़ जाएगी। सफलता दर बढाने के लिए हिपैटोबिलेरी एंड लिवर ट्रांसप्लांट सेंटर स्टेट अाफ अार्ट  सुविधाएं स्थापित की जा रही है। संस्थान के निदेशक प्रो. राकेश कपूर ने बताया कि कोलिडो स्कोप जैसी तमाम अत्य़ाधुनिक उपकरणों से सेंटर को लैस किया जा रहा है जिससे लिवर के अास-पास नलिकाअों का पता लगाना अासान हो जाएगा। इसके साथ गैस्ट्रो सर्जरी में वेटिंग भी कम होगी। सेंटर से पांच माडयूलर अोटी है जिससे सर्जरी के लिए अोटी की कमी कम होगी। प्रो. कपूर ने बताया कि एक छत के नीचे बच्चों और बडे में लिवर की सभी तरह की बीमारी का इलाज संभव होगा। लिवर ट्रांसप्लांट  के पहले मरीज को इसके लिए तैयार करना पड़ता है यह सारी सुविधा होगी।  हिपैटोबिलेरी और लिवर ट्रांसप्लांट को एक साथ होने पर कुछ लोगों ने एतराज जताया जिसमें गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के कई सर्जन ने
कहा था कि इससे हिपैटोबिलेरी सर्जरी बंद हो जाएगी । गैस्ट्रो सर्जरी में 70 फीसदी सर्जरी हिपैटोबिलेरी की होती है। हम लोगों के पास काम ही नहीं रहेगा।  यह फैसला शासन ने लिया है सरकार ने 40 करोड़ रूपया जो दिया है इसी सेंटर के नाम दिया है। हमारे पहले के निदेशक ने हिपैटोबिलेरी एंड लिवर ट्रांसप्लांट सेंटर के नाम से ही पत्रचार शासन को किया । इसमें कोई नुकसान भी नहीं है। कहा कि 110 करोड़ से सेंटर बना है जिसका उपयोग होना चाहिए। जब लिवर ट्रांसप्लांट पूरी तरह शुरू हो जाएगा तो वैसे भी हिपैटोबिलेरी सर्जरी कम हो जाएगी।  

नहीं खत्म होगी गैस्ट्रो सर्जरी की सुविधाएं
प्रो. कपूर ने कहा कि गैस्ट्रो सर्जरी की अोपीडी, वार्ड, अोटी पहले की तरह रहेगी। सेंटर में केवल लिवर ट्रांसप्लांट की अोपीडी होगी। गैस्ट्रो सर्जन चाहे तो पहले के अोटी में सर्जरी करें नहीं तो नए सेंटर में काम करें। किसी के लिए किसी भी तरह की बाध्यता नहीं है। 

शुक्रवार, 7 सितंबर 2018

पीजीआई संविदा कर्मचारी संघ ने राज्यपाल से मिल कर मांगा समान कार्य समान वेतन

पीजीआई संविदा कर्मचारी संघ ने राज्यपाल से मिल कर मांगा समान कार्य समान वेतन

मुख्यमंत्री के निर्देश पर बनी समिति दे उचित वेतन


संजय गांधी पीजीआई के संविदा कर्मचारियों का प्रतिनिध मंडल राज्यपाल श्री राम नाइक से मुलाकात कर न्याय गुहार लगाई। प्रतिऩिध मंडल में शामिल महामंत्री रौगव यादव, उपाध्यक्ष दिलपी मौर्य , पदाधिकारी सलमान खान, सोनी शुक्ला ने शुक्रवार को दोपहर बाद मुलाकात कर राज्यपाल को मांग पत्र सौंप कर कहा कि सरकार समान कार्य समान वेतन का सिद्धांत लागू करे।बताया कि  नए केंद्रीय मजदूरी अधिऩियम के तहत वेतन देने की मांग की है। इस अधिनियम के तहत कुशल, अर्ध कुशल और अकुशल वर्ग में बांट कर अलग -अलग वेतन दिया जाता है लेकिन संस्थान  में एेसा नहीं है। बाताया कि वेतन के लिए एक समिति का गठन चिकित्सा शिक्षा विभाग ने किया है जिसमें वेतन तय किया जाना है । राज्यपाल से कहा कि समिति को निर्देशित करें कि वह उचित वेतन तय करें। संविदा कर्मचारियों के इलाज के लिए ईएसआई यूनिट संस्थान परिसर में स्थापित कराया जाए। किसी भी संविदा कर्मचारी को संस्थान में इलाज की सुविधा नहीं है। संस्थान में नियमित भर्ती होने पर बिना शर्त पहले इनका समायोजन किया जाए क्योंकि हम लोग लंबे समय से यहां सेवा दे रहे है। हम लोगों के कार्य से मरीजों का हित हो रहा है इसलिए सीधे समायोजन किया जाए। संविदा पर तैनात महिला कर्मचारियों को प्रसूति अवकाश के साथ दूसरे कर्मचारियों को अाकस्मिक अवकाश दिया जाए।  संविदा कर्मचारियों के मांग पर सहमति जताते हुए कहा कि  संविदा पर कई सालों से काम कर रहे है अब इनकी उम्र भी खुली भर्ती के लायक नहीं रह गयी है।  एेसे में समायोजन न होने पर इन लोगों को भविष्य़ संकट में अा जाएगा।  इस लिए बिना शर्त इनका समायोजन पदों पर किया जाए। साथ ही सेवा सुरक्षा प्रदान की जाए।

सत्ता के गलियारे में कैद में पीजीआई कर्मचारियों का भविष्य--संविदा पर तैनात नर्सेज को किया जाए समायोजित

सत्ता के गलियारे में कैद में पीजीआई कर्मचारियों का भविष्य
दो साल से चल रही है संवर्ग पुर्नगठन प्रक्रिया
कर्मचारियों ने दी आंदोलन की चेतावनी 




संजय गांधी पीजीआई के 20 से अधिक संवर्ग के कर्मचारियों का पुर्नगठन प्रक्रिया दो साल से चल रही है। पूरा खाका संस्थान की वेव साइट पर भी डाल दिया। इसके बाद भी 6 महीने से अधिक समय बाद इसे लागू नहीं किया किया गया जिससे संस्थान के कर्मचारियों में रोष है। कर्मचारी महासंघ(एस) की अध्यक्ष सावित्री सिंह ने संस्थान प्रशासन को पत्र लिख कर कहा है कि एक महीने के अंदर यदि इसे लागू नहीं किया जाता है तो हम लोग शांति पूर्ण अंदोलन के बाध्य होंगे। हम लोग मरीजों के हित मे कार्य बहिष्कार जैसे आंदोलन नहीं करना चाहते है लेकिन धैर्य की एक सीमा होती है। बताया जा रहा है कि संस्थान प्रशासन ने लगभग सभी संवर्ग का पुर्नगठन कर लिया है जिस पर शासन की अनुमति लेनी है । इस काम में 6 महीने से अधिक का समय लग चुका है। संस्थान निदेशक प्रो.राकेश कपूर ने कैडर पुर्नगठन को प्राथमिकता के आधार पर शुरू कराया था जिसे पूरा भी किया गया लेकिन सत्ता के गलियारे में फाइल घूम रहीं है जिससे कर्मचारियों का भविष्य कैद हो गया है। इसके अलावा संस्थान की नियमावली 2011 में बदलाव की मांग की है।
संविदा पर तैनात नर्सेज को किया जाए समायोजित  


इंटक( इंडियन ट्रेड यूनियन कांग्रेस)  ने पीजाई में परमानेंट पदों पर संविदा पर तैनात नर्सेज  को समायोजित करने की मांग की है। इंटक के महिला शाखा की जिला अध्यक्ष सावित्री सिंह ने संस्थान प्रशासन को पत्र लिख कहा है कि संस्थान में संविदा पर 250 नर्सेज काम कर रही है। अभी संस्थान में 450 नर्सेज की परमानेंट जगह निकली है इन्हें पहले समायोजित कर बाकी पदों पर चयन किया जाए। कहा कि संविदा पर तैनात नर्सेज सलेक्शन कमेटी के जरिए आयी है इसलिए दोबारा चयन प्रक्रिया में सामिल करने का कोई मतलब नहीं है। पहले से काम कर रही नर्सेज संस्थान के वर्क कल्चर में ढल चुकी है और बेहतर काम रही है। संस्थान प्रशासन ने वादा किया था  कि नियमित नियुक्ति में संविदा पर काम कर रहे लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी।  इसी तरह बाकी पदों पर भी समायोजन किया जाए।

बुधवार, 5 सितंबर 2018

40 फीसदी किशोर हो गए है स्मार्ट फोन के लती -------स्मार्ट फोन के लत के कारण प्रभावित हो रही जीवन

40 फीसदी किशोर हो गए है स्मार्ट फोन के लती

स्मार्ट फोन के लत के कारण प्रभावित हो रही जीवन


स्मार्ट फोन मानसिक और शारीरिक बीमारी का बन रहा है कारण



आप चाहते कि आप के बेटा और बेटी पढ़ाई करे और स्वस्थ्य रहे तो उन्हें स्मार्ट फोन से दूर रखे और रहने की सलाह दें। विशेषज्ञों ने साबित किया है कि किशोर (10 से 19 साल) फोन के लती होकर अपनी क्षमता कम करने के साथ ही मानसिक एवं शारीरिक परेशानी के शिकार हो रहे हैं। बुधवार को राजधानी में एक लड़के ने तो अपनी जान दे दी। कई लड़के मा-पिता से स्मार्ट फोन के लिए झगड़ उठते हैं।  इटरनेशनल जर्नल आफ प्रिवेटिंव मेडिसिन के मुताबिक विशेषज्ञों ने 1304 युवाओं और युवतियों पर  शोध  किया है। यह शोध 10 से 19 साल की आयु वर्ग के लोगों पर हुआ है। जर्नल में शोधकर्ता डा.संजीव दवे और डा. अनुराधा दूबे ने बताया है कि अब तक हुए 45 रिसर्च को शामिल किया है जिसमें कुल 1304 युवा शामिल हुए थे। विशेषज्ञों ने सभी शोधों का विश्लेषण किया तो पता चला कि 39 से 44 फीसदी युवा स्मार्ट फोन के लती हो गए है जिसके कारण इनकी खुद क्षमता में कमी हो रही है। पढ़ाई की तरफ ध्यान केंद्रित नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा मानसिक बीमारी के चपेट में आ रहे हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि लागातार स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करने के कारण टंडन(मांस पेशियों का गुच्छा)इंजरी, कार्पल टनल सिंड्रोम, कंप्यूटर विजन सिंड्रोम , विजन में कमी जैसी कई परेशानियों के शिकार हो रहे हैं। संजय गांधी पीजीआई के तंत्रिका रोग विशेषज्ञ प्रो.संजीव झा कहते है कि बार-बार अंगूठे पर बल देने से उसके जोड़ में परेशानी आती है जिससे पेन तक पकड़ने में परेशानी होती है। इसके अलावा आंख की रोशनी प्रभावित होती है। 

129 फीसदी की दर से बढ़ रहा है स्मार्ट फोन

जर्नल में विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में 15.6 फीसदी लोग स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करते है हर साल भारत में 129 पीसदी की दर से स्मार्ट फोन का इस्तेमाल बढ़ रहा है जो चीन से भी अधिक है वहां पर हर साल 109 फीसदी की दर से स्मार्ट फोन इस्तेमाल कर्ता बढ़ रहे हैं। बताया है कि हर 6.3 मिनट बाद हाम लोग फोन को चेक करते है इससे साबित होता है कि हम लोग फोन के लती हो रहे हैं। 

स्मार्ट फोन इस्तेमाल करने वाले लोग

आयु वर्ग                               प्रतिशत

11 से 24                                  72

25 से 34                             . 62

35 से 44                            56

45 से 54                          39

55 से 64                           30

65 से अधिक                          38


पुरूष                             53

महिला                      47

फोन का इस्तेमाल टेक्स मैसेज के लिए                -92 फीसदी

इंटरनेट ब्राउसिंग स्मार्ट फोन से                           -84 पीसदी लोग