बुधवार, 9 सितंबर 2026

डॉक्टरों का आधा काम होगा कम अब मरीज से बात करेगा डॉक्टर और रिपोर्ट लिखेगी एआई

 




डॉक्टरों का आधा काम होगा कम


अब मरीज से बात करेगा डॉक्टर और रिपोर्ट लिखेगी एआई


लखनऊ। हॉस्पिटल में बहुत जल्द एक बड़ा बदलाव आने वाला है। आने वाले समय में डॉक्टर मरीज से बात करेगा और पीछे-पीछे उसकी पूरी रिपोर्ट एआई लिख देगी। सुनने में फिल्म जैसा लगता है, पर विदेशों में ये ट्रायल शुरू हो चुका है और उम्मीद है कि भारत में भी ये थीम बहुत जल्द देखने को मिल सकती है।


दरअसल माइक्रोसॉफ्ट के ड्रैगन कोपायलट नाम के नए जेनरेटिव एआई मॉडल ने अमेरिका में डॉक्टरों का लिखने-पढ़ने वाला पचास परसेंट तक काम कम करके दिखाया है।


ये कैसे काम करेगा? इसे एम्बिएंट लिसनिंग टेक्नोलॉजी कहते हैं। जब डॉक्टर और मरीज कमरे में बात करेंगे, तो ये एआई चुपचाप सब सुनेगी और खुद ही उसका डॉक्यूमेंटेशन तैयार कर देगी। डॉक्टर को बार-बार कंप्यूटर की तरफ देखकर टाइप नहीं करना पड़ेगा। उसका पूरा ध्यान सिर्फ मरीज पर रहेगा। इसीलिए अब कहा जा रहा है कि आने वाले समय में एआई सिर्फ एक टूल नहीं, बल्कि डॉक्टर का क्लिनिकल कोलैबोरेटर यानी सच्चा साथी बन सकती है।


इस आने वाले बदलाव पर रोशनी डाल रही हैं क्लिनिकल एआई एक्सपर्ट मानसी गोयल**। मानसी अमेरिका की कंपनी **लुसेम हेल्थ में डेटा साइंटिस्ट के तौर पर काम करती हैं। वे करोड़ों मरीजों के ईएचआर डेटा पर काम करके ऐसी एआई बना रही हैं जो दिल की धड़कन की गड़बड़ी, लिवर की बीमारी और टाइप वन डायबिटीज को शुरू में ही पकड़ ले।


मानसी कहती हैं पहले वाली एआई सिर्फ एक सवाल पूछती थी - "क्या इस एक्स-रे में निमोनिया है?"। लेकिन आने वाली नई एआई रीजनिंग करेगी। वो मरीज की पांच साल पुरानी हिस्ट्री, लैब रिपोर्ट और दवाओं को एक साथ जोड़कर बताएगी कि असली बीमारी क्या हो सकती है।


लेकिन मानसी एक चेतावनी भी देती हैं कि भारत जैसे देश में जब ये टेक्नोलॉजी आएगी भी, तो भी एआई हर जगह डॉक्टर की जगह नहीं ले पाएगी। जब मरीज को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के बारे में बताना हो, तो वहां मशीन नहीं, इंसान का दिल चाहिए।


इसलिए भविष्य में छोटे और लो-रिस्क काम जैसे फॉर्म भरना एआई कर सकती है, पर दवा की डोज बदलना और इमरजेंसी में फैसला लेना जैसे हाई-रिस्क काम में आज भी और कल भी डॉक्टर की देखरेख ही आखिरी होगी।

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