सोमवार, 7 सितंबर 2026

SGPGI में पहली बार: बिना ऑपरेशन के माइक्रोवेव से पिघलाया पैराथायरॉइड ट्यूमर

 



 SGPGI में पहली बार: बिना ऑपरेशन के माइक्रोवेव से पिघलाया पैराथायरॉइड ट्यूमर


लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई ने बिना चीर-फाड़ के इलाज के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल की है। संस्थान के डॉक्टरों ने 60 साल के एक बुजुर्ग मरीज के गले में बनी पैराथायरॉइड ग्रंथि की गांठ को बिना ऑपरेशन के सिर्फ माइक्रोवेव तकनीक से खत्म कर दिया। इस तरह का अत्याधुनिक इलाज SGPGI में पहली बार किया गया है।


बताया गया कि बुजुर्ग मरीज लंबे समय से परेशान थे। उनके खून में कैल्शियम का लेवल लगातार बढ़ा हुआ आ रहा था। इसकी वजह से कमजोरी और दूसरी दिक्कतें हो रही थीं। SGPGI में जब उनकी गहन जांच की गई तो पता चला कि उन्हें प्राइमरी हाइपर पैराथायरॉइडिज्म है। इसका कारण गले में बाईं तरफ नीचे वाली पैराथायरॉइड ग्रंथि में बना ट्यूमर यानी लेफ्ट इंफीरियर पैराथायरॉइड एडेनोमा था।


आमतौर पर ऐसे मामलों में गर्दन में चीरा लगाकर ऑपरेशन करके गांठ को निकाला जाता है और मरीज को बेहोश करना पड़ता है। लेकिन डॉक्टरों ने तय किया कि इस मरीज का इलाज बिना चीरे वाली तकनीक से किया जाएगा। इसके लिए इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विभाग की टीम ने अल्ट्रासाउंड गाइडेड माइक्रोवेव एब्लेशन का सहारा लिया।


इस प्रक्रिया में डॉक्टरों ने अल्ट्रासाउंड मशीन से देखते हुए एक बेहद पतली सुई गांठ तक पहुंचाई और माइक्रोवेव तरंगों से उसे अंदर ही जला दिया। पूरी प्रक्रिया लोकल एनेस्थीसिया में की गई। मरीज को जनरल एनेस्थीसिया देने की जरूरत नहीं पड़ी। सबसे बड़ी बात यह रही कि शरीर पर न तो कोई चीरा लगा और न ही कोई निशान पड़ा। प्रक्रिया के बाद मरीज की हालत पूरी तरह सामान्य रही और महज 8 घंटे के अंदर ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।


यह जटिल प्रक्रिया प्रो. सबरेत्नम एम, प्रो. रजनीकांत, डॉ. मिथुन राम, डॉ. मिथलेश वांचू, डॉ. मीनाक्षी सुहालका, डॉ. फिरदौस, डॉ. शिखर अग्रवाल, डॉ. सईदुर रहमान और नर्सिंग ऑफिसर श्रीमती कौशल की संयुक्त टीम ने की। वहीं एंडोक्राइन विभाग के डॉ. अंबिका टंडन और डॉ. अमन बंसल ने मरीज के हार्मोन से जुड़े मूल्यांकन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


SGPGI के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर के धीमन ने इस सफलता पर पूरी टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि बताती है कि सही मरीजों में यह बिना चीरे वाली तकनीक कितनी कारगर है।

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