मंगलवार, 1 सितंबर 2026

तीन साल के बच्चे के खून से निकाला जानलेवा कोलेस्ट्रॉल

 



तीन साल के बच्चे के खून से निकाला जानलेवा कोलेस्ट्रॉल


पीजीआई में हुआ देश का पहला मामला, इतनी कम उम्र में प्लाज्मा एक्सचेंज से एचओएफएच का इलाज


854 मिलीग्राम/डेसीलीटर था कोलेस्ट्रॉल, 20 सप्ताह तक हर सप्ताह प्लाज्मा एक्सचेंज से मिली राहत






संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसजीपीजीआइ) के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग में दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित तीन साल के बच्चे का सफल इलाज किया गया है। बच्चे के खून में कोलेस्ट्रॉल का स्तर 854 मिलीग्राम/डेसीलीटर तक पहुंच गया था। दवाओं से पर्याप्त फायदा नहीं होने पर विशेषज्ञों ने प्लाज्मा एक्सचेंज के जरिए खून से अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल निकालने का फैसला किया। बच्चे में होमोजाइगस फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया (एचओएफएच) की पुष्टि हुई थी।

मेडिकल जेनेटिक्स विभाग में बीमारी की पहचान के बाद बच्चे को ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग भेजा गया। विशेषज्ञों ने बच्चे की कम उम्र और वजन को ध्यान में रखते हुए विशेष प्लाज्मा एक्सचेंज की योजना तैयार की। करीब 20 सप्ताह तक हर सप्ताह यह प्रक्रिया की गई। प्रत्येक प्रक्रिया के बाद कोलेस्ट्रॉल के स्तर में औसतन करीब 70 प्रतिशत तक कमी आई।

प्लाज्मा एक्सचेंज के दौरान मशीन की मदद से कोलेस्ट्रॉल से प्रभावित प्लाज्मा को अलग किया गया और उसकी जगह उपयुक्त द्रव दिया गया। इसके बाद बच्चे की बाकी रक्त कोशिकाओं को शरीर में वापस पहुंचाया गया। सभी प्रक्रियाओं को बच्चे ने अच्छी तरह सहन किया और कोई बड़ी जटिलता नहीं हुई। इलाज के दौरान त्वचा पर जमा कोलेस्ट्रॉल में भी कमी देखी गई।

परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए कुछ प्रक्रियाएं निःशुल्क भी की गईं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह देश का पहला मामला है, जिसमें इतनी कम उम्र के बच्चे में एचओएफएच के प्रबंधन के लिए प्लाज्मा एक्सचेंज तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमान ने पूरी टीम को बधाई दी।

क्या है एचओएफएच

होमोजाइगस फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया (एचओएफएच) एक बेहद दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है, जो करीब पांच लाख लोगों में किसी एक को होती है। इसमें शरीर खून से खराब कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल (लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन) को प्रभावी ढंग से बाहर नहीं निकाल पाता। इससे कम उम्र में ही त्वचा, रक्त वाहिकाओं और अन्य ऊतकों में कोलेस्ट्रॉल जमा होने लगता है। ऐसे मरीजों में हृदय की धमनियों में रुकावट, हृदय के वाल्व में बीमारी और कम उम्र में हार्ट अटैक का खतरा काफी बढ़ जाता है।

इलाज करने वाली टीम

ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग: डा. भरत सिंह, प्रो. प्रीति एल्हेंस (विभागाध्यक्ष), प्रो. अनुपम वर्मा और डा. अजय जोसेफ

मेडिकल जेनेटिक्स विभाग: डा. अमिता मोइरांगथेम

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