सोमवार, 14 सितंबर 2026

1.2 लीटर मवाद से भरा सीना और पूरी तरह बैठा फेफड़ा पीजीआइ में जटिल सर्जरी कर बचा ली जान

 



1.2 लीटर मवाद से भरा सीना और पूरी तरह बैठा फेफड़ा पीजीआइ में जटिल सर्जरी कर बचा ली जान

 सड़क हादसे के बाद सीने में जमा हुआ था 1.2 लीटर गाढ़ा मवाद, सिंगल-लंग वेंटिलेशन पर रखकर हुई हाई-रिस्क सर्जरी


 लखनऊ 


सीने में 1.2 लीटर गाढ़ा मवाद, फेफड़ा पूरी तरह पिचक कर ध्वस्त और ऊपर से दिल, शुगर और बीपी का पुराना मरीज... ऐसी हालत में ज्यादातर जगहों पर उम्मीद ही छोड़ दी जाती है लेकिन  संजय गांधी पीजीआइ के  एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने  दूरबीन विधि वैट्स सर्जरी से 50 वर्षीय मरीज को बचा लिया ।


सोनभद्र के रहने वाले मेवालाल (50 वर्ष) किसान हैं और मेडिकल स्टोर चलाते हैं। 8 अप्रैल 2026 की रात बाइक-कार की टक्कर में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। जिला अस्पताल में शुरूआती इलाज तो हुआ, लेकिन सांस की दिक्कत बढ़ती गई। हालत बिगड़ने पर उन्हें  एपेक्स ट्रॉमा सेंटर लाया गया।


जांच में पता चला कि छाती के अंदर करीब 1.2 लीटर गाढ़ा मवाद भर चुका था, जिसे पायोथोरेक्स कहते हैं। फेफड़े के ऊपर मोटी झिल्ली की परत जम गई थी और फेफड़ा पूरी तरह दब कर काम करना बंद कर चुका था। चुनौती और बड़ी थी, क्योंकि मेवालाल पहले से हाई-बीपी, डायबिटीज के मरीज हैं और 2023 में दिल की नस में स्टेंट भी पड़ चुका है।


ऐसी नाजुक हालत में ऑपरेशन करना बेहद जोखिम भरा था। सर्जरी के दौरान मरीज को सिंगल-लंग वेंटिलेशन पर रखना पड़ा, यानी एक फेफड़े से ही सांस चलानी पड़ी। इसके बावजूद ट्रॉमा सर्जरी टीम ने वैट्स तकनीक से बिना बड़ा चीरा लगाए, कैमरे की मदद से छाती से सारा मवाद निकाला और फेफड़े को जकड़े हुए मोटी पील को हटाकर डी-कॉर्टिकेशन किया। इससे दबा हुआ फेफड़ा फिर से फूल सका।


ऑपरेशन के बाद दो दिन तक मरीज को आईसीयू में रखा गया। सुधार होने पर वार्ड में शिफ्ट किया गया।  14 सितंबर को पूरी तरह स्वस्थ हालत में उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। निदेशक प्रोफेसर आरके धीमान ने टीम को बधाई दी। 


क्या है वैट्स तकनीक


वैट्स का पूरा नाम है वीडियो-असिस्टेड थोरैकोस्कोपिक सर्जरी।

इसमें छाती को बड़ा चीरने की जरूरत नहीं पड़ती। 2-3 छोटे छेद करके कैमरा और खास उपकरण अंदर डाले जाते हैं। मॉनिटर पर देखकर अंदर की सफाई और ऑपरेशन करते हैं।  दर्द कम होता है, इंफेक्शन का खतरा कम रहता है और मरीज जल्दी ठीक होता  है।


सर्जरी टीम


ट्रॉमा सर्जरी विभाग

• एपेक्स ट्रॉमा सेंटर, एडिशनल चीफ ट्रॉमा सर्जरी- डा. अमित कुमार सिंह ,  सीनियर रेजिडेंट ट्रॉमा सर्जरी,- डा. आदित्य सिंह , सीनियर रेजिडेंट

ट्रॉमा सर्जरी,- डा. वरुण गुप्ता

 

एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर विभाग

• एनेस्थीसिया विभाग, एडिशनल प्रोफेसर - डा. गणपत • एनेस्थीसिया विभाग, एडिशनल प्रोफेसर - डा. रफात शमीम

जूनियर डा. एनेस्थीसिया — डा. आकांक्षा

सीनियर रेजिडेंट, एनेस्थीसिया — डा. सारिया

ओटी स्टाफ — राहुल

 नर्सिंग ऑफिसर ओटी —  इरिन

ओटी तकनीशियन — अमित यादव

ओटी तकनीशियन — गौरव

आईसीयू स्टाफ — देवांशी

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