सोमवार, 16 फ़रवरी 2026

हर दूसरा पुरुष हाइपरटेंशन का शिकार

 






उत्तर प्रदेश में हाई ब्लड प्रेशर का अलार्म: 2173 मरीजों की स्टडी में हर दूसरा पुरुष हाइपरटेंशन का शिकार

BEAT-HTN India रिपोर्ट में हुआ खुलासा


उत्तर प्रदेश में हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) अब गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप लेता जा रहा है। BEAT-HTN India नामक राष्ट्रव्यापी अध्ययन में उत्तर प्रदेश के 2173 वयस्क मरीजों के आंकड़ों ने चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है।

स्टडी के अनुसार प्रदेश में 51 प्रतिशत पुरुष और 28 प्रतिशत महिलाएं हाइपरटेंशन से पीड़ित पाई गईं, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि उत्तर प्रदेश में हाइपरटेंशन अब केवल उम्र से जुड़ी बीमारी नहीं रह गई, बल्कि यह जीवनशैली और मेटाबॉलिक गड़बड़ी से सीधे तौर पर जुड़ चुकी है।



उत्तर प्रदेश हाई-रिस्क जोन

में है 

 सर्वे ने उत्तर प्रदेश के लिए यह साफ संदेश दिया है कि अब समय आ गया है जब हाइपरटेंशन को सिर्फ बीपी की बीमारी नहीं, बल्कि पूरे कार्डियो-मेटाबॉलिक संकट के रूप में देखा जाए।  सर्वे को कार्डियोलोजी रिसर्च  ने स्वीकार किया है। 



संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS), लखनऊ प्रो रूपाली खन्ना, प्रो सत्येंद्र तिवारी और प्रमुख प्रो आदित्य कपूर

एम एल एन मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज (इलाहाबाद) डॉ सरिता बजाज

जसवंत राय स्पेशलिटी हॉस्पिटल, मेरठ के  डॉ राजीव अग्रवाल 

शामिल रहे।

इन संस्थानों के माध्यम से शहरी, अर्ध-शहरी और इलाज के लिए आने वाले हाई-रिस्क मरीजों का डेटा एकत्र किया गया।


विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर प्रदेश के आंकड़े देश के अन्य राज्यों की तुलना में अधिक चिंताजनक हैं।



पुरुषों में 51% हाइपरटेंशन क्यों

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पुरुषों में हाइपरटेंशन की अधिकता के पीछे कई कारण हैं—

तंबाकू और शराब का अधिक सेवन

शारीरिक श्रम में कमी

पेट के आसपास मोटापा

कामकाजी तनाव

अनियमित दिनचर्या और नींद की कमी

वहीं महिलाओं में नियमित जांच कम होने के कारण वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है।

डायबिटीज और तेज हृदयगति ने बढ़ाई चिंता

स्टडी में यह भी सामने आया कि हाइपरटेंशन से पीड़ित लोगों में बड़ी संख्या को डायबिटीज भी है।

इसके साथ ही औसत रेस्टिंग हार्ट रेट 80 बीट प्रति मिनट से अधिक पाई गई।

विशेष रूप से:

डायबिटीज वाले हाइपरटेंसिव मरीजों में हृदयगति सबसे अधिक रही

विशेषज्ञों के मुताबिक यह स्थिति सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम की अत्यधिक सक्रियता को दर्शाती है, जो भविष्य में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकती है।

विशेषज्ञों की चेतावनी

प्रोफेसर रूपाली खन्ना के मुताबिक

“उत्तर प्रदेश में हाइपरटेंशन अब साइलेंट किलर नहीं रहा। तेज हृदयगति यह संकेत देती है कि मरीजों में अंदरूनी स्तर पर गंभीर मेटाबॉलिक और ऑटोनॉमिक गड़बड़ी चल रही है।”


“अब केवल ब्लड प्रेशर नियंत्रित करना पर्याप्त नहीं होगा। शुगर, वजन, जीवनशैली और हार्ट रेट—सभी पर एक साथ काम करना जरूरी है।”




 उत्तर प्रदेश हाई-रिस्क जोन

2173 मरीजों पर आधारित यह डेटा स्पष्ट करता है कि—

उत्तर प्रदेश हाइपरटेंशन के हाई-रिस्क ज़ोन में पहुंच चुका है

पुरुषों में स्थिति खतरे की घंटी है

महिलाओं में बीमारी छिपी हुई है

समग्र और राज्य-विशेष स्वास्थ्य रणनीति की तत्काल जरूरत ह

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