शनिवार, 21 फ़रवरी 2026

पीजीआई मैटरनल एंड रिप्रोडक्टिव हेल्थ विभाग का 17वां स्थापना दिवस



 





पीजीआई मैटरनल एंड रिप्रोडक्टिव हेल्थ विभाग का 17वां स्थापना दिवस

गर्भ में ही होगी गंभीर जन्मजात बीमारियों की सर्जरी, शिशुओं को मिलेगा नया जीवन

लखनऊ। मातृ एवं शिशु चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ी पहल करते हुए संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान  के मैटरनल एंड रिप्रोडक्टिव हेल्थ (एमआरएच) विभाग ने गर्भ में ही गंभीर जन्मजात बीमारियों से ग्रस्त शिशुओं की सर्जरी शुरू करने की घोषणा की है। विभाग के 17वें स्थापना दिवस समारोह में बताया गया कि न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट जैसी बीमारियों से पीड़ित उन गर्भस्थ शिशुओं की फीटल सर्जरी की जाएगी, जिनके मस्तिष्क में अभी कोई संरचनात्मक विकृति नहीं आई है।

विभागाध्यक्ष प्रो. मंदाकिनी प्रधान, प्रोफेसर नीता सिंह प्रोफेसर इंदु लता साहू प्रोफेसर अमृता गुप्ता प्रोफेसर संगीता यादव सहित विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों ने बताया कि हर महीने दो से तीन गर्भवती महिलाएं इस गंभीर समस्या के साथ पीजीआई पहुंचती हैं। अब तक शिशु के जन्म के बाद सर्जरी करनी पड़ती थी, जिससे कई बार स्थायी विकलांगता और अन्य जटिलताएं हो जाती थीं। गर्भ में ही सर्जरी से इन जोखिमों को कम किया जा सकेगा। इसके साथ ही पोस्टिरियर यूरेथ्रल वाल्व से ग्रस्त गर्भस्थ शिशुओं का इलाज और जुड़वां गर्भावस्था की गंभीर समस्या ट्विन-टू-ट्विन ट्रांसफ्यूजन सिंड्रोम का उपचार भी लेजर तकनीक से किया जाएगा। एक वर्ष के भीतर ये सभी सुविधाएं पूरी तरह शुरू हो जाएंगी और पीजीआई उत्तर भारत का तीसरा बड़ा फीटल सर्जरी केंद्र बनेगा।


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इसी अवसर पर गर्भवती महिलाओं के लिए एस जी पी जी आइ मेटरनिटी केयर एप्लीकेशन लॉन्च किया गया। इस ऐप के जरिए महिलाओं को घर बैठे विशेषज्ञ परामर्श और नियमित डिजिटल फॉलो-अप मिलेगा। पीजीआई आने पर महिला के मोबाइल में ऐप डाउनलोड कर दिया जाता है, जिसमें वजन, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, थायराइड जैसी जांच रिपोर्ट अपलोड की जा सकती हैं।   हाई-रिस्क प्रेगनेंसी में बार-बार अस्पताल आने की जरूरत कम होगी और मां व शिशु दोनों की बेहतर निगरानी संभव होगी।  डेनमार्क की मिनिस्ट्री से अन्या, एप बनाने वाली कंपनी के सीईओ खुशबू वर्मा निदेशक प्रोफेसर आरके धीमान, अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा अमित कुमार घोष ने ऐप को लांच किया।

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