शनिवार, 21 फ़रवरी 2026

: पेट-स्कैन से जांची गई दिल की मांसपेशियों की ‘वायबिलिटी’, एंजियोप्लास्टी के बाद लौटी मरीज की मुस्कान

 

: पेट-स्कैन से जांची गई दिल की मांसपेशियों की ‘वायबिलिटी’, एंजियोप्लास्टी के बाद लौटी मरीज की मुस्कान


कुमार संजय


लखनऊ। रायपुर के 51 वर्षीय दुष्यंत के लिए बीता सप्ताह जिंदगी का सबसे कठिन दौर साबित हुआ, लेकिन विशेषज्ञों की सतर्कता और आधुनिक जांच तकनीक ने उन्हें नई जिंदगी दे दी।


 


दुष्यंत को पिछले सप्ताह अचानक उल्टी और बाएं हाथ में दर्द की शिकायत हुई। उल्टी के बाद दर्द कुछ समय तक बना रहा, लेकिन रात में आराम मिलने पर उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अगले दिन शाम को बुखार आने पर वे स्थानीय चिकित्सक के पास पहुंचे। प्रारंभिक जांच में हृदयाघात (हार्ट अटैक) की आशंका जताई गई। आवश्यक परीक्षणों के बाद पुष्टि हुई कि उन्हें हार्ट अटैक पड़ा था।


 


परिजन तुरंत उन्हें संजय गांधी पीजीआई ले गए, जहां हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. नवीन गर्ग की देखरेख में भर्ती किया गया। एंजियोग्राफी में हृदय की रक्त वाहिकाओं में अवरोध की पुष्टि हुई, लेकिन साथ ही यह भी सामने आया कि हृदय की मांसपेशियां (मायोकार्डियम) पर्याप्त रूप से कार्य नहीं कर रहीं। ऐसी स्थिति में सीधे एंजियोप्लास्टी करने से लाभ संदिग्ध था।


 


वायबिलिटी टेस्ट से बदली दिशा


 


प्रो. गर्ग ने सलाह दी कि पहले यह जांचा जाए कि हृदय की मांसपेशियों में जीवन शक्ति (मायोक्रडियल वाइबिलिटी) शेष है या नहीं। यदि मांसपेशियां जीवित हैं और रक्त प्रवाह बहाल करने से लाभ संभव है, तभी एंजियोप्लास्टी की जाए।


 


इसके लिए मरीज को संस्थान के न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में भेजा गया, जहां विभागाध्यक्ष प्रो. पी.के. प्रधान की निगरानी में पीईटी-स्कैन आधारित एफडीजी जांच की गई। दो दिनों तक अलग-अलग परीक्षणों के बाद तीसरे दिन रिपोर्ट में पाया गया कि हृदय की प्रभावित मांसपेशियों में पर्याप्त वायबिलिटी मौजूद है।


 


एंजियोप्लास्टी से सामान्य हुआ रक्त प्रवाह


 


रिपोर्ट के आधार पर प्रो. नवीन गर्ग ने एंजियोप्लास्टी कर अवरुद्ध धमनी को खोला और हृदय में रक्त प्रवाह सामान्य किया। उपचार सफल रहा और कुछ ही दिनों में मरीज की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। मंगलवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।


 


विशेषज्ञों की सलाह


 


प्रो. नवीन गर्ग ने बताया कि हार्ट अटैक अक्सर बिना पूर्व चेतावनी के होता है। कई मामलों में मरीज इसे गैस या सामान्य असुविधा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। बाएं हाथ में दर्द, उल्टी, सीने में दबाव या बेचैनी जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर इलाज मिलने से जान बचाई जा सकती है।


 


तकनीक ने दिया जीवनदान


 


इस मामले में एफडीजी पीईटी-स्कैन द्वारा हृदय की मांसपेशियों की वायबिलिटी का आकलन निर्णायक साबित हुआ। यह तकनीक बताती है कि अवरुद्ध रक्त प्रवाह के बावजूद कौन-सी मांसपेशियां अभी जीवित हैं और उपचार से लाभान्वित हो सकती हैं।


 


आधुनिक चिकित्सा तकनीक और विभागों के समन्वित प्रयास ने दुष्यंत को नई जिंदगी और उनके परिवार को राहत की मुस्कान दी।

: हार्ट अटैक (हृदयाघात) के मामलों में एक बड़ा हिस्सा ऐसा होता है जिसमें व्यक्ति को समय पर पता ही नहीं चलता। इसे “साइलेंट हार्ट अटैक” कहा जाता है। चिकित्सकीय अध्ययनों के अनुसार लगभग 20% से 40% लोगों में हार्ट अटैक के समय स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, खासकर बुज़ुर्गों, डायबिटीज़ (शुगर) के मरीजों और महिलाओं में। समय पर इलाज न होने से हृदय की मांसपेशियां खराब हो जाती हैं, जिससे हार्ट फेल्योर का खतरा बढ़ जाता है।

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