बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

हिम्मत ना हारे कैंसर पर मिलेगी विजय

 





पीजीआई में कैंसर जागरूकता कार्यक्रम ‘कैंसर विजयी’ का संदेश

हिम्मत न हारें, कैंसर पर विजय संभव

 

लक्षण दिखते ही तुरंत लें चिकित्सकीय सलाह, फॉलो-अप ज़रूरी

 



 

साल 2002 में गले में हल्की गांठ महसूस हुई, लेकिन इसे नज़रअंदाज़ कर दिया गया। धीरे-धीरे परेशानी बढ़ती गई। वर्ष 2014 में सांस लेने में दिक्कत होने लगी और गले में सूजन स्पष्ट दिखने लगी। इसके बाद संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के इंडोक्राइन सर्जन प्रो. ज्ञान चंद से परामर्श लिया गया। जांच के बाद पता चला कि यह थायरॉयड कैंसर का एक दुर्लभ प्रकार है।

 

कैंसर का नाम सुनते ही गहरा आघात लगा, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। प्रो. ज्ञान चंद ने सर्जरी कर लगभग 300 ग्राम की गांठ को निकाला। यह गांठ अंदर की ओर दबाव बना रही थी, जिससे सांस लेने में कठिनाई हो रही थी। सर्जरी के बाद रेडियो आयोडीन थेरेपी और कीमोथेरेपी दी गई, जिससे जीवन फिर से सामान्य हो गया।

 

थायरॉयड कैंसर को मात देने वाली रूमा रेखा वाल्टर बुधवार को एसजीपीजीआई में कैंसर जागरूकता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अपने अनुभव साझा करने पहुंचीं। उन्होंने कहा कि कैंसर से डरने की नहीं, बल्कि हिम्मत से लड़ने की ज़रूरत है। गले या स्तन में किसी भी प्रकार की गांठ दिखे तो लापरवाही न करें और तुरंत जांच कराएं।

 

इसी कार्यक्रम में स्तन कैंसर से उबर चुकीं ललिता सिंह ने बताया कि जब स्तन में गांठ महसूस हुई तो जांच में कैंसर की पुष्टि हुई। प्रो. ज्ञान चंद द्वारा सर्जरी और दवा से उपचार के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और सामान्य जीवन जी रही हैं।

 

वहीं, 61 वर्षीय हेमंत कुमार ने बताया कि वर्ष 1997 में गले में गांठ हुई थी। बाहर सर्जरी कराई और कुछ समय दवा ली, लेकिन उपचार अधूरा छोड़ देने से दोबारा गांठ हो गई। इसके बाद पीजीआई में पुनः सर्जरी हुई और अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्होंने सलाह दी कि नियमित जांच कराते रहें और दवा बीच में न छोड़ें।

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