सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

अल्ट्रासाउंड-गाइडेड एनेस्थीसिया से सर्जरी अधिक सुरक्षित दर्द और रिकवरी समय में कमी

 


अल्ट्रासाउंड-गाइडेड एनेस्थीसिया से सर्जरी अधिक सुरक्षित, दर्द और रिकवरी समय में कमी



अल्ट्रासाउंड-गाइडेड एनेस्थीसिया से सर्जरी अधिक सुरक्षित

दर्द और रिकवरी समय में कमी



 पीजीआई में एस-क्राफ्ट 2026 कार्यशाला, देशभर से 100 से अधिक एनेस्थीसिया विशेषज्ञ हुए शामिल 



लखनऊ। सर्जरी के दौरान नसों को सटीक रूप से पहचान कर अल्ट्रासाउंड-गाइडेड रीजनल एनेस्थीसिया तकनीक अब मरीजों के लिए अधिक सुरक्षित, कम दर्द वाली और तेजी से स्वस्थ होने में सहायक साबित हो रही है। इसी आधुनिक तकनीक के प्रशिक्षण और विस्तार के उद्देश्य से संजय गांधी पीजीआई में एस-क्राफ्ट 2026 – एस-क्राफ्ट ( सोनोग्राफी नियंत्रित क्षेत्रीय एनेस्थीसिया एवं फैशियल प्लेन तकनीक) पर सीएमई और वर्कशॉप का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों से आए 100 से अधिक एनेस्थीसियोलॉजिस्ट शामिल हुए, जबकि लगभग 20 अनुभवी फैकल्टी सदस्यों ने नवीन तकनीकों, सुरक्षा मानकों और क्लीनिकल एप्लीकेशन पर व्याख्यान दिए। एनेस्थीसियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. संजय धीरज के मार्गदर्शन में आयोजित हुई। आयोजन सचिव डॉ. प्रतीक सिंह बैस के नेतृत्व में विभागीय टीम ने कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराया। उद्घाटन सत्र में पद्मश्री प्रो. आर.के. धीमान, निदेशक ने कहा कि हाई-एंड अल्ट्रासाउंड मशीन के उपयोग से एनेस्थीसिया अधिक सटीक होता है, जिससे पेशेंट सेफ्टी और उपचार परिणाम बेहतर होते हैं। डीन प्रो. शलीन कुमार ने बताया कि सर्जरी स्थान के आसपास दिए जाने वाले नसों को ब्लॉक करने से दर्द कम होता है और रिकवरी टाइम घटता है। प्रो. संजय धीरज ने बताया कि अल्ट्रासाउंड-गाइडेड नर्व ब्लॉक्स से शरीर की स्ट्रेस रिस्पॉन्स कम होती है और मरीज में अर्ली एम्बुलेशन (जल्दी चलना-फिरना) संभव हो पाता है। यह तकनीक पोस्टग्रेजुएट स्टूडेंट्स को नवीनतम तकनीक सीखने में भी मदद करती है। इस अवसर पर एनेस्थीसिया टीम द्वारा तैयार बेडसाइड रेफरेंस एटलस का विमोचन किया गया, जो अल्ट्रासाउंड-गाइडेड रीजनल एनेस्थीसिया पर आधारित है। इसके लेखक डॉ. वंश, डॉ. प्रतीक, डॉ. सुरुचि, डॉ. गणपत और डॉ. राफत हैं। एपेक्स ट्रामा सेंटर के प्रमुख एवं न्यूरो सर्जन प्रोफेसर अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि सर्जरी की सफलता में एनेस्थीसिया की अहम भूमिका है। कार्यशाला में डिडैक्टिक लेक्चर लाइव डेमोंस्ट्रेशन, हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग और केस-बेस्ड डिस्कशन ने प्रतिभागियों को विशेष रूप से आकर्षित किया। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम की शैक्षणिक गुणवत्ता और विशेषज्ञों से सीधे संवाद के अवसर की सराहना करते हुए इसे रोगी सुरक्षा और बेहतर क्लीनिकल आउटकम (चिकित्सकीय परिणाम) की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

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