शनिवार, 21 फ़रवरी 2026

डेक एक्सपर्ट ए आइ को मिला ‘मोस्ट इनोवेटिव’ अवॉर्ड

 








इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में पीजीआई और –डेक्ट्रोसेल द्वारा विकसित

डेक एक्सपर्ट ए आइ को मिला

‘मोस्ट इनोवेटिव’ अवॉर्ड


देश में स्वास्थ्य तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान और डेक्ट्रोसेल हेल्थकेयर की संयुक्त पहल को इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में ‘मोस्ट इनोवेटिव’ श्रेणी का पुरस्कार मिला। यह सम्मान एआई आधारित फेफड़ा जांच समाधान डेक एक्सपर्ट के लिए दिया गया, जो एक्स-रे के माध्यम से टीबी सहित श्वसन रोगों की त्वरित पहचान करता है और ग्रामीण व टियर-2 क्षेत्रों में रेडियोलॉजिस्ट की कमी की बड़ी समस्या का समाधान प्रस्तुत करता है।

पलमोनरी मेडिसिन भाग के प्रमुख प्रो. आलोक नाथ के नेतृत्व और रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता के सहयोग से इस मजबूत एआई मॉडल का अध्ययन किया गया। पलमोनरी टीबी के रेडियोलॉजिकल निदान पर आधारित यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल नेचर साइंटिफिक रिपोर्ट्स  में प्रकाशित हुआ, जिसमें थूक यह ए आई मॉडल जेन एक्सपर्ट (गोल्ड स्टैंडर्ड) की तुलना में 95 प्रतिशत सटीकता दर्शाई गई।

इस अध्ययन के सह-लेखकों में डॉ. आलोक नाथ, डॉ. जिया हाशिम (पल्मोनरी मेडिसिन), डॉ. जफर नेयाज़ (रेडियोडायग्नोसिस), डॉ. ऋचा मिश्रा (माइक्रोबायोलॉजी), डॉ. अंकित शुक्ला (यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड; ड्यूक मेडिकल स्कूल, एनयूएस सिंगापुर; संस्थापक—डेक्ट्रोसेल), डॉ. सौम्या शुक्ला (पीजीए सह-संस्थापक—डेक्ट्रोसेल) और निखिल मिश्रा (सी टी ओ—डेक्ट्रोसेल; भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर) शामिल रहे। पीजीआई ने आवश्यक क्लिनिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर और डेटा एथिक्स फ्रेमवर्क उपलब्ध कराया, जिससे कम-बैंडविड्थ पर काम करने वाला उच्च-सटीकता एआई टूल विकसित हो सका।

नीति और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

स्वास्थ्य प्रशासकों और नीति निर्माताओं के लिए यह मॉडल सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में एक व्यावहारिक रास्ता दिखाता है।

25 राज्यों में हो इस मॉडल का हो रहा है प्रयोग


यह एआई फिलहाल छह राज्यों—महाराष्ट्र, तमिलनाडु, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश—के 25 केंद्रों पर सक्रिय है, जहां विशेषज्ञों की अनुपलब्धता के बावजूद तुरंत एक्स-रे स्क्रीनिंग संभव हो पाती है।

डिजिटल और नॉन-डिजिटल  दोनों प्रकार की इमेज प्रोसेस करने की क्षमता के कारण महंगे पैकर सिस्टम की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे संसाधन-सीमित जिलों में लागत घटती है। यह टूल फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स के लिए फोर्स मल्टीप्लायर की तरह काम करता है और तृतीयक संस्थानों पर निदान का बोझ कम करता है।

नेतृत्व की प्रतिक्रिया और आगे की योजना

संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर.के. धवन ने कहा, “यह पुरस्कार पी जी आई की उस प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है, जिसके तहत प्रयोगशाला में विकसित नवाचारों को देश के अंतिम छोर तक पहुंचाया जाता है।”

डेक्ट्रोसेल अब इस एआई फ्रेमवर्क को सी टी और एम आर आई मॉड्यूल तक विस्तारित करने पर काम कर रहा है।


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