शोध: हठ योग से गर्भधारण न कर पाने की परेशानी में 41% तक राहत, तनाव और अवसाद घटा
। लखनऊ
गर्भधारण न कर पाने की परेशानी का इलाज करा रही महिलाओं के लिए अच्छी खबर है। हठ योग के नियमित अभ्यास से तनाव, चिंता और अवसाद में 41 प्रतिशत तक कमी आई है, जिससे गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है। यह शोध संजय गांधी पीजीआइ में किया गया है। शोध को हाल में दिल्ली में आयोजित टीएनआई द्वारा आयोजित 7वीं कॉमनवेल्थ नर्सेज एंड मिडवाइव्स फेडरेशन कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत किया गया है
शोध इनफर्टिलिटी ओपीडी, संजय गांधी पीजीआइ में इलाज करा रही महिलाओं पर किया गया। शोध में विशेष स्केल से महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य का स्तर मापा गया और फिर 2 सप्ताह तक रोज 60 मिनट तक हठ योग के आसन, प्राणायाम और ध्यान कराया गया।
क्या असर दिखा -
योग के बाद चिंता में 41.3 फीसदी अवसाद में 35.3 फीसदी और तनाव में 30.3 फीसदी की कमी आई।
मैटरनल एंड रिप्रोडक्टिव हेल्थ डिपार्टमेंट की - प्रो. डॉ. इंदुलता साहू ने कहा, "गर्भधारण न कर पाने की परेशानी के इलाज में तनाव और डिप्रेशन सबसे बड़ी रुकावट खड़ी करता है। तनाव बढ़ने पर कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जिससे अंडा बनने की प्रक्रिया बिगड़ती है और भ्रूण के गर्भाशय में टिकने में दिक्कत आती है। कई महिलाएं डिप्रेशन के कारण इलाज बीच में ही छोड़ देती हैं। जब तनाव और अवसाद दूर होता है तो हार्मोन संतुलित होते हैं और गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है।"
शोधकर्ता टीम
ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिकल नर्सिंग, कॉलेज ऑफ नर्सिंग की
टीचिंग फैकल्टी / मुख्य भूमिका सिंह , कॉलेज ऑफ नर्सिंग, प्रिंसिपल
डॉ. राधा के,
ट्यूटर / सह-शोधकर्ता
एलिस जोसेफ, मैटरनल एंड रिप्रोडक्टिव हेल्थ डिपार्टमेंट,
कंसल्टेंट प्रो. अमृत गुप्ता,
कंसल्टेंट प्रो. डॉ. इंदुलता साहू
,कॉलेज ऑफ नर्सिंग,
बी.एससी. नर्सिंग छात्र
आकाश भारती, मुसाफिर अली, युक्ता यादव
हठ योग प्रक्रिया - 60 मिनट:
1. तैयारी (5 मि.): खाली पेट, शांत जगह। 2. आसन (30 मि.): तितली आसन, भुजंगासन, सेतुबंधासन, विपरीत करणी। 3. प्राणायाम (15 मि.): अनुलोम-विलोम, भ्रामरी। 4. ध्यान (10 मि.): आँख बंद, सांस पर ध्यान।

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