गुरुवार, 24 सितंबर 2026

चेहरे के बरसों पुराने दर्द से तड़प रही दो महिलाओं को पीजीआइ में राहत


 चेहरे के बरसों पुराने दर्द से तड़प रही दो महिलाओं को पीजीआइ  में राहत


 बिना बड़ी सर्जरी के हुआ इलाज


 दर्द का कारण ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया नहीं, बल्कि गर्दन में दबी नस निकला



लखनऊ


केस-1 : रायबरेली की कमला देवी, 45 साल

कमला देवी पिछले कई सालों से चेहरे के एक तरफ बिजली जैसा तेज दर्द झेल रही थीं। दर्द इतना तेज कि खाना-पीना, बोलना और रोजमर्रा के काम तक मुश्किल हो गए थे। कई बड़े अस्पतालों में दिखा चुकी थीं, हर जगह ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया बताकर दवाइयां दी गईं, एक बार सर्जरी भी करवाई, पर कुछ महीनों बाद दर्द फिर लौट आया। जब वे संजय गांधी पीजीआई के  पेन क्लिनिक पहुंचीं तो जांच में सामने आया कि उनका दर्द ट्राइजेमिनल नहीं है। असल में उनकी गर्दन में एक नस दबी हुई थी, जो चेहरे की नसों को लगातार सिग्नल भेज रही थी। यहां नाक के पीछे स्थित स्फीनोपैलेटाइन गैंग्लियन पर पल्स्ड रेडियोफ्रीक्वेंसी दी गई, जिससे उन्हें लंबे समय तक राहत मिली।


केस-2 : अयोध्या की गीता पांडे, 51 साल

दूसरा मामला अयोध्या की गीता पांडे का है। उन्हें कान, जबड़े और कनपटी के आसपास एक तरफ लगातार दर्द रहता था, जो ठंडी हवा लगने, हल्का सा छूने या कुछ चबाने से बढ़ जाता था। उन्हें भी ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया का इलाज दिया गया था, पर स्थायी फायदा नहीं हुआ। जांच पर पता चला कि उन्हें ऑरिकुलोटेम्पोरल न्यूराल्जिया है, यानी कान के पास वाली नस में दर्द का कारण है और इसकी जड़ गर्दन में दबी उसी नस से जुड़ी है। यहां कान के सामने वाली ऑरिकुलोटेम्पोरल नस पर रेडियोफ्रीक्वेंसी प्रक्रिया की गई, जिसके बाद वे सामान्य जीवन में लौट चुकी हैं।


कैसे हुआ इलाज

दोनों मरीजों का इलाज एक ही सिद्धांत पर दो चरणों में किया गया।

चरण-1 : अल्ट्रासाउंड गाइडेड हाइड्रो-डिसेक्शन - अल्ट्रासाउंड पर देखते हुए गर्दन में दबी नस के चारों तरफ पतली सुई से दवा का घोल डालकर नस को मांसपेशी की चिपकन से मुक्त किया गया। इसमें कोई चीरा-टांका नहीं लगता।

चरण-2 : रेडियोफ्रीक्वेंसी थेरेपी - गर्दन की नस मुक्त होने के बाद चेहरे में दर्द पहुंचा रही मुख्य नस को पल्स्ड रेडियोफ्रीक्वेंसी से शांत किया गया। यह तकनीक नस को काटती-जलाती नहीं, बल्कि नियंत्रित तरंगों से उसकी अति-सक्रियता को कम करती है। यह 15-20 मिनट की प्रक्रिया है और मरीज उसी दिन घर जा सकता है।


पेन क्लीनिक के प्रो सुजीत गौतम ने कहा कि अगर चेहरे का दर्द इलाज के बावजूद ठीक नहीं हो रहा है तो निराश न हों, एक बार विशेषज्ञ पेन क्लिनिक में दोबारा जांच जरूर कराएं।


कब और कहां संपर्क करें -

स्थान: पेन क्लिनिक, डी ब्लॉक, नवीन ओपीडी, कमरा नंबर 31 और 32।  सोमवार से शुक्रवार सुबह 9 से शाम 5 बजे तक, शनिवार सुबह 9 से दोपहर 1 बजे तक

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