रेयर डिजीज से ग्रस्त युवती में आंत से बनाई नई पेशाब की थैली
टीबी के कारण वेजाइना और मूत्राशय आपस में जुड़ गए थे, ठहर गई थी जिंदगी
कुमार संजय । लखनऊ
संजय गांधी पीजीआइ के यूरोलॉजी विभाग के प्रो संजय सुरेका ने रेयर डिजीज से ग्रस्त युवती को रोबोटिक सर्जरी के जरिए बीमारी से मुक्ति दिलाने के लिए बडी आंत से नया मूत्राशय बनाने के साथ दूसरी परेशानी को भी दूर किया। बिहार के बेगूसराय की रहने वाली 20 वर्षीय अर्पिता पिछले छह साल से ऐसी बीमारी से जूझ रही थी, जिसमें पेशाब लगातार लीक होता रहता था। शरीर से बदबू, हर वक्त कपड़े गीले और समाज से दूरी। जांच में वजह निकली- ट्यूबरक्यूलर वेसिकोवेजाइनल फिस्टुला विद थिम्बल ब्लैडर।
क्या है यह बीमारी और कितनी खतरनाक है
वीवीएफ में पेशाब की थैली और वेजाइना का रास्ता आपस में जुड़ जाता है। आमतौर पर यह समस्या 30 से 40 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में बच्चेदानी निकालने या सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान चूक से होती है।
लेकिन अर्पिता को हुई बीमारी दुनिया में सबसे रेयर है। उसे टीबी के कारण वीवीएफ के साथ थिम्बल ब्लैडर हो गया, यानी थैली सिकुड़ कर छोटी हो गई। मेडिकल साहित्य में इसके गिने-चुने केस ही दर्ज हैं। प्रो. संजय सुरेका के अनुसार पीजीआइ में मेरे 15 साल में यह पहला केस है।
इसका सबसे बड़ा खतरा यह है कि समय पर इलाज न हो तो पेशाब किडनी में वापस जाने लगता है और किडनी फेल होने का खतरा रहता है।
6 साल, 4 अस्पताल और फिर पीजीआई ने दिया जीवनदान
पिता किशोर सिन्हा ने बताया कि 2020 में बेटी को यूटीआई हुआ। उसके बाद पेशाब का फ्लो कम हो गया और बार -बार पेशाब करने जाना पड़ता था । बिहार में दो जगह दिखाया, फिर दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल गए, जहां कैथेटर डालकर निकाल दिया गया कहा गया कि ठीक हो जाएगा लेकिन आराम नहीं मिला। फिर पटना में आईजीआईएमएस में दिखाया, पर कोई फायदा नहीं हुआ।
रिश्तेदारों की सलाह पर 2024 में वे एसजीपीजीआई की यूरोलॉजी ओपीडी में आए। प्रो. संजय सुरेखा ने टीबी की जांच कराई तो राज खुला। किडनी की टीबी धीरे-धीरे ब्लैडर तक पहुंच गई थी।
रोबोटिक सर्जरी से बनाई नई थैली
पहले छह महीने टीबी की दवा देकर इंफेक्शन खत्म किया गया। अप्रैल में रोबोटिक सर्जरी कर जुड़े हुए हिस्से को अलग किया गया और सिकुड़ी हुई थैली को आंत से टुकड़ा लेकर नया मूत्राशय बनाया गया।विभागाध्यक्ष प्रो. एमएस अंसारी ने कहा कि यदि लगातार लीकेज की समस्या है और कोई कारण नहीं मिल रहा तो टीबी की जांच जरूर करानी चाहिए। फॉलो अप के लिए ओपीडी में आई अर्पिता के चेहरे पर मुस्कान थी। बोली, अब मैं अपनी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर पाऊंगी।

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