पीजीआइ हाई-रिस्क सर्जरी का सफल ऑपरेशन, कई अस्पतालों ने किया था मना
82 फीसदी ऑक्सीजन सैचुरेशन वाली महिला के जांघ की हड्डी का फ्रैक्चर जोड़ा
20 फीसदी थी मौत की आशंका
अल्ट्रासाउंड-गाइडेड कंटीन्यूअस स्पाइनल एनेस्थीसिया तकनीक से बचाई जान
लखनऊ
संजय गांधी पीजीआइ के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में ऑर्थोपेडिक्स विभाग ने हाई-रिस्क केस में बड़ी सफलता हासिल की। टीम ने 42 वर्षीय महिला के दाहिने पैर की जांघ की हड्डी के फ्रैक्चर का सफल ऑपरेशन किया।
मरीज सिस्टिक ब्रोंकिएक्टेसिस और गंभीर पल्मोनरी हाइपरटेंशन से पीड़ित है। 20 दिन पहले हादसे में हड्डी टूटी थी। फेफड़े और हृदय की स्थिति के कारण कई अस्पतालों ने सर्जरी से मना कर संजय गांधी पीजीआइ रेफर किया था। एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती पर ऑक्सीजन सैचुरेशन 82 फीसदी, जबकि सामान्य 98-100 फीसदी होता है।
ऑर्थोपेडिक्स, एनेस्थीसिया, कार्डियोलॉजी और पल्मोनोलॉजी की टीम ने मल्टीडिसिप्लिनरी अप्रोच से मरीज को ऑप्टिमाइज किया। इसे हाई-रिस्क माना गया, जिसमें 20 फीसदी पेरी-ऑपरेटिव मृत्यु का जोखिम था।
ऐसे केस में जनरल और पारंपरिक स्पाइनल एनेस्थीसिया जोखिम भरे होते हैं। एनेस्थीसिया टीम ने अल्ट्रासाऊंड गाइडेड- कंटीन्यूअस स्पाइनल एनेस्थीसिया तकनीक अपनाई, जिसमें माइक्रो-कैथेटर से दवा छोटी-छोटी डोज में बार-बार दी गई, जिससे हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव नहीं हुआ।
फ्रैक्चर मिनिमली इनवेसिव तकनीक से जोड़ा गया, जिसमें कम रक्तस्राव और छोटे चीरे लगे। ओटी और पोस्ट-ऑपरेटिव आईसीयू में एडवांस मॉनिटरिंग की गई, जहां मरीज एक दिन रही। दूसरे दिन से चलने और फिजियोथेरेपी शुरू की गई। 6 दिन बाद मरीज स्वस्थ है और डिस्चार्ज हो रही है।
टीम: ऑर्थोपेडिक्स- प्रो. पुलक शर्मा, डॉ. फुरकान उल हक, डा. अवनीश मिश्रा, डा. विकास जायसवाल। एनेस्थीसिया- डा. वंश प्रिया, डा. दीक्षा रानी, डा. मणि दुबे। कार्डियोलॉजी- प्रो. आदित्य कपूर। पल्मोनरी- प्रो. आलोक नाथ। नर्सिंग ऑफिसर - अनीता सिंह, दीपिका, पूनम, रीता।

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