सेप्सिस एक मेडिकल इमरजेंसी, हर मिनट की देरी बढ़ा सकती है खतरा:
डॉक्टर्स डे पर विशेषज्ञों का संदेश—समय पर पहचान और उपचार से बचाई जा सकती हैं हजारों जानें
लखनऊ। हर वर्ष लाखों लोग सेप्सिस के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। यह केवल एक सामान्य संक्रमण नहीं, बल्कि संक्रमण के प्रति शरीर की अनियंत्रित प्रतिक्रिया है, जो कुछ ही घंटों में शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकती है। समय पर पहचान और उपचार न मिलने पर रोगी सेप्टिक शॉक में जा सकता है और मृत्यु का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
डॉक्टर्स डे के अवसर पर संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई), लखनऊ के आपातकालीन चिकित्सा विभाग के विशेषज्ञों ने बताया कि सेप्सिस के उपचार में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका समय की होती है। चिकित्सा विज्ञान में शुरुआती एक घंटे को "गोल्डन ऑवर" माना जाता है। यदि इस दौरान रोग की पहचान कर आवश्यक जांच, उचित एंटीबायोटिक, तरल उपचार (फ्लूड रिससिटेशन) तथा जरूरत पड़ने पर वासोप्रेसर शुरू कर दिए जाएं, तो रोगी के बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों ने बताया कि एसजीपीजीआई के आपातकालीन चिकित्सा विभाग में सेप्सिस की शीघ्र पहचान और उपचार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। गंभीर मरीजों का व्यवस्थित क्लिनिकल आकलन किया जाता है। संक्रमण की आशंका होने पर तुरंत रक्त जांच, ब्लड कल्चर, सीरम लैक्टेट, अंगों की कार्यक्षमता का मूल्यांकन तथा आवश्यकतानुसार इमेजिंग कराई जाती है। इसके आधार पर अंतरराष्ट्रीय उपचार मानकों के अनुरूप समयबद्ध एंटीबायोटिक, तरल उपचार और अन्य जीवनरक्षक उपाय शुरू किए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि संस्थान का उद्देश्य केवल मरीज की जान बचाना ही नहीं, बल्कि संक्रमण के वास्तविक कारण की पहचान, विवेकपूर्ण एंटीबायोटिक उपयोग तथा बहु-विषयक (मल्टीडिसिप्लिनरी) उपचार के माध्यम से बेहतर परिणाम सुनिश्चित करना भी है। इसके लिए आपातकालीन चिकित्सा, क्रिटिकल केयर, माइक्रोबायोलॉजी, संक्रामक रोग विशेषज्ञ और अन्य विभाग मिलकर समन्वित रूप से कार्य करते हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि भारत जैसे देश में डेंगू, स्क्रब टायफस, लेप्टोस्पायरोसिस, मलेरिया और अन्य उष्णकटिबंधीय संक्रमण भी सेप्सिस का कारण बन सकते हैं। इसलिए बुखार को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, खासकर जब उसके साथ तेज सांस चलना, भ्रम की स्थिति, अत्यधिक कमजोरी, रक्तचाप कम होना या पेशाब कम आना जैसे लक्षण दिखाई दें। ऐसे मामलों में तुरंत अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।
डॉक्टर्स डे के अवसर पर एसजीपीजीआई ने उन सभी चिकित्सकों, नर्सों, पैरामेडिकल कर्मियों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति सम्मान व्यक्त किया, जो दिन-रात आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों का उपचार करते हुए हर मिनट जीवन बचाने का प्रयास करते हैं।
संदेश: "सेप्सिस एक मेडिकल इमरजेंसी है। जल्दी पहचान, जल्दी उपचार और टीमवर्क ही जीवन बचाने की सबसे प्रभावी कुंजी है।"

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