मंगलवार, 16 जून 2026

फेफड़ों का संक्रमण बिगाड़ सकता है शरीर की चाल

 

फेफड़ों का संक्रमण बिगाड़ सकता है शरीर की चाल


  समय पर इलाज से 83 फीसदी मरीज हुए ठीक


 संक्रमण के बाद दिमाग और नसों पर भी पड़ सकता है असर


कुमार संजय

 आमतौर पर फेफड़ों के संक्रमण का कारण माना जाने वाला माइकोप्लाज्मा निमोनिए कुछ मामलों में दिमाग और तंत्रिका तंत्र को भी प्रभावित कर सकता है। इससे मरीज का चलना-फिरना डगमगा सकता है, शरीर में अचानक झटके आ सकते हैं और आंखों की हरकतें भी असामान्य हो सकती हैं। अच्छी बात यह है कि समय रहते बीमारी की पहचान और सही इलाज मिलने पर अधिकांश मरीज पूरी तरह या लगभग पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। यह नई जानकारी  अंतरराष्ट्रीय शोधों के समीक्षा अध्ययन में सामने आयी  है। इस समीक्षा अध्ययन को मूवमेंट डिश ऑर्डर क्लिनिकल प्रैक्टिस मेडिकल जर्नल ने स्वीकार किया है। 

रिपोर्ट के मुताबिक शोधकर्ताओं ने दुनिया भर में हुए 42 मरीजों के मामलों का विश्लेषण किया। इनमें करीब 69 फीसदी मरीजों में दिमाग और नसों से जुड़ी परेशानी शुरू होने से पहले सर्दी, खांसी या फेफड़ों के संक्रमण के लक्षण मिले। सबसे अधिक मरीजों में सेरिबेलर एटैक्सिया पाया गया। इस स्थिति में व्यक्ति का संतुलन बिगड़ जाता है और चलने-फिरने में परेशानी होती है। वहीं करीब 26 फीसदी मरीजों में ऑप्सोक्लोनस-मायोक्लोनस-एटैक्सिया सिंड्रोम पाया गया, जिसमें आंखें तेजी से अनियंत्रित रूप से घूमती हैं, शरीर में झटके आते हैं और चलने में दिक्कत होती है।



संक्रमण के बाद शरीर की प्रतिक्रिया बनती है वजह



 अधिकतर मामलों में परेशानी सीधे संक्रमण से नहीं, बल्कि संक्रमण के बाद शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की असामान्य प्रतिक्रिया के कारण होती है। कई मरीजों की जांच रिपोर्ट सामान्य मिली, जबकि कुछ में दिमाग के संतुलन नियंत्रित करने वाले हिस्से में बदलाव देखे गए।


सही समय पर इलाज मिले तो ठीक होने की संभावना ज्यादा



करीब 36 फीसदी मरीजों का इलाज केवल एंटीबायोटिक दवाओं से किया गया, जबकि 45 फीसदी मरीजों को एंटीबायोटिक के साथ प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करने वाली दवाएं भी दी गईं। अध्ययन में पाया गया कि 83.4 फीसदी मरीज पूरी तरह या लगभग पूरी तरह स्वस्थ हो गए।


सलाह


संजय गांधी पीजीआइ के तंत्रिका तंत्र रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर विमल कुमार पालीवाल का कहना है कि इस तरह के मामले हम लोगों के पास आते हैं। फेफड़ों के संक्रमण के बाद किसी व्यक्ति को अचानक चलने में लड़खड़ाहट, संतुलन बिगड़ने, शरीर में झटके आने या आंखों की असामान्य हरकत जैसी समस्याएं हों तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और इलाज से मरीज को गंभीर दिक्कतों से बचाया जा सकता है।


प्रमुख बातें

-42 मरीजों के मामलों का किया गया विश्लेषण

-69 फीसदी मरीजों में पहले फेफड़ों का संक्रमण मिला

-सबसे ज्यादा मामले सेरिबेलर एटैक्सिया के पाए गए

-83.4 फीसदी मरीज पूरी तरह या लगभग पूरी तरह स्वस्थ हुए


इन्होंने किया अध्ययन


अध्ययन में इरा लखनऊ मेडिकल कॉलेज के  तंत्रिका तंत्र विशेषज्ञ डा. रविंद्र कुमार गर्ग, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की तंत्रिका तंत्र विशेषज्ञ  डा. श्वेता पांडेय, एम्स रायबरेली की  प्रो. अमिता जैन, डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की मेडिसिन विभाग की डा. ऋतु करौली, संजय गांधी पीजीआइ के तंत्रिका तंत्र विशषज्ञ प्रो. विमल कुमार पालीवाल और टीएस मिश्रा मेडिकल कॉलेज के पलमोनरी मेडिसिन के डा. संजय सिंघल शामिल रहे।

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