एंडोमेट्रियल कैंसर की समय पर पहचान से बच सकती है जान, कल्याण सिंह कैंसर संस्थान में वैज्ञानिक बैठक आयोजित
लखनऊ। जून माह को एंडोमेट्रियल कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। इसी क्रम में कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान के गायनेकोलॉजिक ऑन्कोलॉजी विभाग द्वारा "एडवांसिंग अवेयरनेस, अर्ली डायग्नोसिस एंड प्रिसीजन ट्रीटमेंट इन एंडोमेट्रियल कैंसर" विषय पर वैज्ञानिक अपडेट बैठक आयोजित की गई। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे एंडोमेट्रियल कैंसर के प्रति जागरूकता, समय पर पहचान और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रो. सबूही कुरैशी ने की। कार्यक्रम के सह-अध्यक्ष रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. शरद सिंह रहे। विशेषज्ञ व्याख्यान डॉ. रूमिता सिंह, डॉ. सौम्या गुप्ता और डॉ. अभिषेक तिवारी ने दिए। उन्होंने बताया कि एंडोमेट्रियल कैंसर गर्भाशय की अंदरूनी परत (एंडोमेट्रियम) में होने वाला कैंसर है और यह महिलाओं में पाया जाने वाला सबसे सामान्य स्त्री-रोग संबंधी कैंसरों में से एक है।
विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में हर वर्ष हजारों महिलाओं में एंडोमेट्रियल कैंसर के नए मामले सामने आते हैं। बदलती जीवनशैली, मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हार्मोनल असंतुलन, देर से रजोनिवृत्ति और बढ़ती उम्र इसके प्रमुख जोखिम कारक हैं। यदि बीमारी शुरुआती चरण में पकड़ में आ जाए तो अधिकांश मरीजों का सफल इलाज संभव है, लेकिन देर होने पर कैंसर गर्भाशय से बाहर फैल सकता है और उपचार अधिक जटिल हो जाता है।
बैठक में बताया गया कि रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के बाद होने वाला किसी भी प्रकार का रक्तस्राव एंडोमेट्रियल कैंसर का सबसे महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत हो सकता है। इसके अलावा मासिक धर्म के बीच असामान्य रक्तस्राव, लंबे समय तक अत्यधिक ब्लीडिंग, श्रोणि (पेल्विक) में लगातार दर्द या पानी जैसा असामान्य स्राव भी जांच की जरूरत का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
विशेषज्ञों ने कहा कि आज आधुनिक जांच तकनीकों, मॉलिक्यूलर प्रोफाइलिंग, न्यूनतम चीरे वाली सर्जरी, टार्गेटेड थेरेपी और प्रिसीजन मेडिसिन की मदद से मरीजों को उनकी बीमारी के अनुरूप व्यक्तिगत उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे उपचार के परिणाम पहले की तुलना में अधिक बेहतर हुए हैं।
कार्यक्रम के अंत में विशेषज्ञों ने महिलाओं से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने, असामान्य लक्षणों को गंभीरता से लेने और जागरूक रहने की अपील करते हुए कहा कि "अर्ली डिटेक्शन सेव्स लाइव्स" अर्थात समय पर पहचान ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है।

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