रविवार, 6 अगस्त 2023

गर्भावस्था के दौरान बढ़ सका है रक्तचाप , गर्भस्थ शिशु के लिए हो सकता है खतरनाक

 

गर्भावस्था के दौरान उन महिलाओं में भी रक्तचाप बढ़ सकता है, जिन्हें उच्च रक्तचाप का कोई पूर्व इतिहास नहीं है, जिससे यह मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम भरा हो जाता है. डॉक्टरों ने रक्तचाप की नियमित निगरानी पर जोर दिया है. गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप मां और बच्चे, दोनों के लिए हानिकारक होता है. गर्भावस्था के दौरान, डॉक्टर गर्भावस्था-प्रेरित उच्च रक्तचाप( प्रिगनेंसी इंड्यूज्ड हाइपरटेंशन)  को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत करते हैं गर्भावधि उच्च रक्तचाप, प्री-एक्लम्पसिया और एक्लम्पसिया

संजय गांधी पीजीआई के एम आर एच विभाग की स्त्री रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर इंदु लता साहू के मुताबिक 'गर्भावस्था-प्रेरित उच्च रक्तचाप (पीआईएच) एक ऐसी स्थिति है जो तब होती है, जब एक महिला गर्भावस्था के 20 सप्ताह तक पहुंचने के बाद उच्च रक्तचाप विकसित करती है, भले ही उसे पहले सामान्य रक्तचाप रहा हो। 'स्वस्थ गर्भावस्था सुनिश्चित करने के लिए गर्भवती महिलाओं के लिए नियमित रूप से अपने रक्तचाप की निगरानी करना और उचित चिकित्सा देखभाल लेना महत्वपूर्ण है। ऐसा करने से वे गर्भावस्था से प्रेरित उच्च रक्तचाप से जुड़ी जटिलताओं को प्रभावी ढंग से प्रबंधित और रोक सकती हैं.।  पीआईएच या प्रेगनेंसी इंड्यूस्ड हाइपरटेंशन बढ़ रहा है, और वे महत्वपूर्ण तरीके से मातृ और प्रसवकालीन रुग्णता और मृत्यु दर में योगदान करते हैं.  पीआईएच के जोखिम कारकों के ज्ञान और समय पर मूल्यांकन - शीघ्र पता लगाना, सावधानीपूर्वक निगरानी और उपचार - के महत्व पर जोर दिया गया।

 आशियाना मेटरनिटी सेंटर की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मेनका सिंह के मुताबिक, 'उच्च रक्तचाप से हृदय विफलता, मां की थ्रोम्बोटिक घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है. यह गुर्दे और यकृत के कार्य को भी प्रभावित कर सकता है। यह स्थिति समय से पहले बच्चे को जन्म देने एनआईसीयू देखभाल की जरूरत और समय से पहले होने वाली अन्य जटिलताओं के जोखिम को बढ़ा सकती है।, उच्च रक्तचाप के कारण भ्रूण का विकास भी सीमित हो सकता है, जिससे जन्म के समय वजन कम हो सकता है और संभावित विकास संबंधी समस्याएं हो सकती हैं और गंभीर मामलों में उच्च रक्तचाप के कारण प्लेसेंटा समय से पहले गर्भाशय की दीवार से अलग हो सकता है, जो मां और बच्चे दोनों के लिए जीवन के लिए खतरा हो सकता है। 'गर्भावस्था से संबंधित उच्च रक्तचाप (उच्च रक्तचाप) के लिए करीबी निगरानी की जरूरत होती है। यह अक्सर गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के बाद प्रकट होता है। इसमें अन्य अंगों को नुकसान पहुंचाने की क्षमता होती है, और यह महिला और भ्रूण दोनों के लिए जोखिम भरा होता है। इस स्थिति को रोका जा सकता है और इलाज किया जा सकता है। गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप को प्रबंधित करने के लिए गर्भवती माताओं के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे नियमित प्रसवपूर्व जांच में शामिल हों, बताई गई दवाएं लें और गर्भकालीन उच्च रक्तचाप से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए जीवनशैली में आवश्यक बदलाव करे। नियमित अंतराल पर या डॉक्टर की सलाह के अनुसार, अपने बीपी रीडिंग को देखना हमेशा अच्छा होता है।  संतुलित और पौष्टिक आहार का सेवन करें. माताओं को नियमित अंतराल पर पौष्टिक भोजन करना चाहिए और यदि आवश्यक हो तो भोजन योजना में सहायता लें, अपने स्वास्थ्य आहार विशेषज्ञ से परामर्श लें। संजय गांधी पीजीआई की पोषण विशेषज्ञ डा. निरूपमा सिंह कहती है कि  नमक कम मात्रा में ले। नमकीन भोजन आपके रक्तचाप के लिए अच्छा नहीं है, क्योंकि यह न केवल आपके रक्तचाप को बढ़ा सकता है, बल्कि बाद में पैरों में सूजन भी पैदा कर सकता है, जो आपकी गर्भावस्था के आखिरी महीनों के दौरान आम है. नमक का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए।


आजमगढ़ की घटना के विरोध में आठ अगस्त को बंद रहेंगे राजधानी और यूपी के सभी स्कूल

 


आजमगढ़ की घटना के विरोध में आठ अगस्त को बंद रहेंगे राजधानी और यूपी के सभी स्कूल

Dear Parents,

The Collegiate will remain closed on 8th August 2023, in protest of the arrest of the Principal and teacher of the Azamgarh Children's Girl School without any inquiry or investigation. 

 




प्रदेश के आजमगढ़ जिले में चिल्ड्रन गर्ल्स स्कूल की 11वीं की छात्रा द्वारा स्कूल परिसर की इसी बिल्डिंग से कूदकर आत्महत्या करने के मामले में उस स्कूल के प्रधानाचार्य शिक्षक की गिरफ्तारी के विरोध में प्रदेश के सभी स्कूल प्रबंधक एकजुट हो गए हैं. इस घटना के विरोध में प्रदेश के सभी प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने आठ अगस्त मंगलवार को सभी विद्यालयों को बंद करने का निर्णय लिया है. राजधानी लखनऊ के अनएडेड स्कूल एसोसिएशन की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि आजमगढ़ चिल्ड्रंस गर्ल्स स्कूल में हुई घटना एवं विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं शिक्षक की हुई गिरफ्तारी के विरोध में आठ अगस्त 2023 उत्तर प्रदेश के समस्त निजी विद्यालय (सीबीएसई आईसीएसई अथवा यूपी बोर्ड या अन्य किसी भी बोर्ड) के हो बंद रहेंगे

: अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि विद्यालयों के द्वारा यह संकेतिक विरोध इसलिए किया जा रहा है कि जिससे उस प्रकरण की सही जांच की जाए और यदि संबंधित व्यक्ति को दोषी पाया जाता है. तो अवश्य कार्यवाही की जाए और सख्त से सख्त सजा दी जाए. छात्रा के गलत कदम उठाने पर वह भी जबकि मोबाइल फोन छात्रा के पास से पकड़ा गया. यह फोन विद्यालय ने नहीं दिया, बल्कि अभिभावकों के द्वारा दिया गया है. आज अभिभावक कोई भी बात सुनने को तैयार नहीं होते हैं. छोटी-छोटी सी बात पर एफआईआर की धमकी देते हैं. ऐसे में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने इसी कारण से शिक्षक शिक्षिकाओं को सम्मान देना बंद कर दिया है.  इस संबंध में संगठन से जुड़े सभी स्कूल प्रबंधकों और प्रधानाचार्य की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया है

 आज हर प्राइवेट स्कूल के प्रत्येक शिक्षक बच्चों को कुछ भी कहने में डरता है, क्योंकि उसे यह लगता है कि कहीं उसके खिलाफ कोई कार्रवाई न हो जाए. निजी विद्यालय के प्रधानाचार्य कार्य करने से बच रहे हैं, क्योंकि जब इस तरह की गलती करने पर बच्चों को कुछ कहा जाएगा. तो वह कोई भी गलत कदम उठा लेंगे और जिसका पूरा दोष विद्यालय प्रबंधतंत्र या प्रधानाचार्य या शिक्षक के ऊपर आ जाएगा. इसी प्रकार की अनेक घटनाएं पूर्व में भी होती रही हैं. जिसमें संपूर्ण दोषारोपण विद्यालय को देते हुए इस प्रकार की कार्रवाई होती रही है. जो कि अब स्वीकार नहीं है. इस मसले पर प्रदेश के सभी एसोसिएशन के पदाधिकारीगण ने एकमत से निर्णय लिया है कि उत्तर प्रदेश के समस्त निजी विद्यालय आठ अगस्त को बं


शनिवार, 5 अगस्त 2023

बिखर रहा है सामाजिक ताना-बाना कई घर टूटने के कगार पर तो कई घर गए टूट

बिखर रहा है सामाजिक ताना-बाना कई घर टूटने के कगार पर तो कई घर गए टूट

शादी के बाद लड़कियां लड़कों के परिवार पर हो रही हैं हावी







 सुरेश की शादी अभी हाल में ही नमिता से हुई।  नमिता के बारे में सुरेश पहले से जानते थे।  दोनों साथ जीने और मरने की कसमें खाते थे । कई बार ऐसा भी हुआ सुरेश की शादी करने की स्थिति नहीं थी तो नमिता ने कहा कि हम जान दे देंगे लेकिन आपके बिना रह नहीं पाएंगे।  सुरेश ने अपने घर के लोगों से बात किया घर वाले बेटे की खुशी में तैयार हो गए नमिता भी किसी तरह से अपने पिता को किसी के माध्यम से इस शादी के लिए भेजा कहने का मतलब यह है इसको अरेंज मैरिज समाज में साबित करके शादी हो गई , लेकिन शादी के बाद की बातें तो अलग है । वह सुरेश पर डोमिनेंट होने की कोशिश करने लगी, सुरेश नरम दिल का लड़का था और वह हर बात मानता गया।  शादी भी हो गई नमिता घर भी आ गई ।  हर बात पर सुरेश को टोकती है कहां जा रहे हैं ,कब आएंगे, सब दिखाइए । सुरेश का टूरिंग जॉब है उसे दिन भर में कई लोगों से मिलना होता है कई बार ऐसा नहीं कर पाता है तो घर आने के बाद नमिता उसे मानसिक रूप प्रताड़ित करती है । गालियां देती है।    आत्महत्या की धमकी देती है ऐसे में सुरेश भी कई बार प्रतिक्रिया देता है ऐसा केवल सुरेश और नमिता के साथ ही नहीं है आजकल देखने को मिल रहा है कि सामाजिक रिश्तो की मर्यादा ही खत्म होती जा रही है लड़कियां पति पर हावी हो रही है सास ससुर को बर्दाश्त नहीं कर पाती हैं । वह नहीं चाहती हैं हमारे दोनों के बीच तीसरा कोई रहे और पति जहां भी रहे हमको अपने साथ रखें जहां ऐसा नहीं हो पा रहा है वहां पर घरों में तनाव का माहौल है। 

ऐसे ही राजेश और रितिक की शादी दोनों परिवार के मर्जी से हुई यह पूरी तरह से अरेंज मैरिज थी।  शादी के बाद रितिका जब राजेश के घर आई 1 महीने तो वह किसी तरह रही लेकिन 20 कमियां निकाल कर वह अकेले ही राजेश का घर छोड़ कर अपने घर चली गई।  अब ना वह राजेश को तलाक दे रही है और साथ रहने  को तैयार है रितिका का तो पता नहीं लेकिन राजेश का पूरा परिवार इस सदमे दिल के मरीज हो गए हार्ट अटैक पड़ गया इलाज करा करके किसी तरह से जीवन बचाया गया। संजय गांधी पीजीआई के समाजशास्त्री रमेश कुमार जी कहते हैं रिश्ते त्याग से चलते हैं और यह दोनों तरफ होना चाहिए लेकिन आजकल के लड़कियों में त्याग नहीं है और लड़के भी त्याग नहीं करना चाहते हैं।  शादी के बाद तमाम कानून के नाते लड़का पक्ष तमाम चीजों को चाहता रहता है और यही आगे चलकर लड़का पक्ष के लिए घातक साबित होता है।


 समाजशास्त्री रमेश कुमार जी कहते हैं सामाजिक ताना-बाना बिखर रहा है वह कहते हैं कि कई तरह की लड़किया होती है

पहले ‘टाइप’ की लड़कियां होती हैं बार्बी डॉल टाइप, सजी धजी, मेकअप में लुती पुती और ब्रैंडेड कपड़े पहनने वाली। ऐसी बार्बी डॉल ‘टाइप’ की लड़कियों से लड़के दूर रहें नहीं तो ये लड़कियां कुछ दिन में उनका जीना दूभर कर देंगी। आप उन्हें झेल नहीं पाओगे।



 दूसरे ‘टाइप’ की लड़कियों से  लड़कों को बचना है। ये ऐसी लड़कियां जो बहुत इनसिक्योर यानी असुरक्षित होती हैं अपने रिलेशनशिप को लेकर।    वजह यह है कि ये लड़कियां हर वक्त अटेंशन पाने के लिए रोना धोना मचाए रहती हैं, लड़के को किसी और लड़की के साथ बात करते देख परेशान होती हैं और फिर अपने बॉयफ्रेंड का दिमाग खा जाती हैं।  इन लड़कियों को अपनी तारीफ सुनना बहुत पसंद होता है। वे सिर्फ इसलिए रोती धोती रहती हैं ताकि आप उनको नए नए कॉम्प्लिमेंट्स देकर उनकी तारीफ ही करते रहो। तो अगर आपको ऐसा करने में कोई गुरेज नहीं है तो पुराने हिंदी गाने सुन लो और उसमें से तारीफों के पुल वाले कॉम्प्लिमेंट्स रट लो और ऐसी लड़कियों के साथ की हिम्मत जुटाओ वरना जहां तक हो सके अवॉइड ही करो अगर आपको चैन से जीना है।

शुक्रवार, 4 अगस्त 2023

Relationship found between diabetes and fatty liver disease

 Relationship found between diabetes and fatty liver disease



For the first time research on fatty liver disease was done in people of 14 states of the country including Uttar Pradesh


 

There is a relation between fatty liver disease and obesity, but it has been seen that there is also a relation between fatty liver disease and diabetes. The problem of fatty liver disease has also been seen in people of normal body weight. The problem of fatty liver disease has been seen in 41.88 percent of diabetics with normal BMI (body mass index). This fact has recently been revealed in research by the Journal of Physicians of India. Research was done on the topic Assessment of prevalence and associated risk factors of NFLD in people living with diabetes in India. This is the first study in which research has been done on the problem of fatty liver disease in more than one lakh 71 thousand people suffering from diabetes from 14 states of the country including Uttar Pradesh. Sanjay Gandhi PGI's Gastroenterologist Prof. Gaurav Pandey says that there is a possibility of all kinds of problems in people suffering from diabetes. This research has revealed that fatty liver disease can be a problem, so there is a need to pay attention to it. The possibility of this problem is especially high in those in whom sugar is not controlled for a long time. According to the research report, the problem of fatty liver disease is more in men with diabetes than in women. Dr. Anil Gangwar, Pet Specialist of King George's Medical University, says that liver test is also necessary in diabetes patients. Fatty liver is detected by ultrasound.




Fatty liver disease in people with diabetes


 


Total State-14


Number of people suffering from diabetes-171996


Age group involved in the research – 18 to 66


Suffering from fatty liver disease – 44.48 percent


Men with fatty liver disease – 58.36 percent


Women with fatty liver disease – 36.341 percent


Fatty liver disease-affected ASU class 18 to 40- 58.35 percent


40 to 60 – 54.92 percent


Over 60 – 39.62 percent


BMI normal - 41.88 percent


Obese - 53.09 percent


Obesity victims - 49.03 percent


High blood pressure - 49.30 percent


Elevated triglyceride - 56.99 percent

डायबिटीज और फैटी लिवर डिजीज के बीच में मिला रिश्ता

 डायबिटीज और फैटी लिवर डिजीज के बीच में मिला रिश्ता



पहली बार उत्तर प्रदेश सहित देश के 14 राज्य के लोगों में फैटी लिवर डिजीज पर हुआ शोध

 

 

फैटी लिवर डिजीज और मोटापे का रिश्ता तो है लेकिन देखा गया है डायबिटीज से भी फैटी लिवर डिजीज का रिश्ता है। सामान्य शरीर भार के  लोगों में भी फैटी लिवर डिजीज की परेशानी देखी गयी है। सामान्य बीएमआई( बॉडी मास इंडेक्स) वाले डायबिटीज ग्रस्त 41.88 फीसदी में फैटी लिवर डिजीज की परेशानी देखने को मिली है। इस तथ्य का खुलासा हाल में ही जर्नल ऑफ फिजिशियन आफ इंडिया ने शोध में किया है। एसेसमेंट आफ प्रिवलेंश एंड एसोसिएसिटेड रिस्क फैक्टर आफ एनएफएलडी इन पीपल लिविंग विथ डायबिटीज इन इंडिया विषय को लेकर शोध किया गया।  यह पहली स्टडी है जिसमें उत्तर प्रदेश सहित देश के 14 राज्यों से एक लाख 71 हजार से अधिक डायबिटीज ग्रस्त में लोगों में फैटी लिवर डिजीज की परेशानी पर शोध किया गया है। संजय गांधी पीजीआई के गैस्ट्रोइंटेरोलाजिस्ट प्रो. गौरव पाण्डेय कहते है कि डायबिटीज ग्रस्त लोगों में तमाम तरह की परेशानी की आशंका रहती है। इस शोध के पता चला है कि फैटी लिवर डिजीज की परेशानी हो सकती है इसलिए इनमें इस पर ध्यान देने की जरूरत है। इस परेशानी की आशंका खास तौर पर इनमें अधिक है जिनमें शुगर लंबे समय से नियंत्रित नहीं रहता है। शोध रिपोर्ट के मुताबिक डायबिटीज ग्रस्त पुरूषों में फैटी लिवर डिजीज की परेशानी महिलाओं से अधिक होती है। किंग जार्ज मेडिकल विवि के पैट रोग विशेषज्ञ डा. अनिल गंगवार कहते है कि लिवर की जांच भी डायबिटीज मरीजों में जरूरी है। फैटी लिवर का पता अल्ट्रासाउंड ले लग जाता है।  


डायबिटीज ग्रस्त लोगों में फैटी लिवर डिजीज

 

कुल राज्य-14

डायबिटीज ग्रस्त लोगों की संख्या-171996

शोध में शामिल आयु वर्ग- 18 से 66

फैटी लिवर डिजीज से ग्रस्त- 44.48 फीसदी

फैटी लिवर डिजीज ग्रस्त पुरुष- 58.36 फीसदी

फैटी लिवर डिजीज ग्रस्त महिला- 36.341 फीसदी

फैटी लिवर डिजीज ग्रस्त आसु वर्ग 18 से 40- 58.35 फीसदी

40 से 60- 54.92 फीसदी

60 से अधिक- 39.62 फीसदी

बीएमआई सामान्य- 41.88 फीसदी

मोटे- 53.09 फीसदी

मोटापे के शिकार- 49.03 फीसदी

उच्च रक्तचाप- 49.30 फीसदी

बढा हुआ ट्राइग्लिसराइड- 56.99 फीसदी

बुधवार, 2 अगस्त 2023

अंगदान से मिल सकती है किसी को जिंदगी और जिंदा रह सकता है आपका

 अंगदान के लिए प्रतिज्ञा अभियान आज



उत्तर प्रदेश राज्य के लिए प्रासंगिक शासनादेश के तहत यूपी में मानव अंगों और ऊतकों को हटाने, भंडारण और प्रत्यारोपण की प्रणाली को औपचारिक बनाने के लिए राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण कार्यक्रम के अंतर्गत  (एनओटीपी) राज्य अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (SOTTO UP) की स्थापना, अस्पताल प्रशासन विभाग के तत्वावधान में संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, लखनऊ में की गई थी।  के प्रमुख प्रोफेसर राजेश हर्षवर्धन ने बताया कि


अंग और ऊतक दान के क्षेत्र में चिकित्सा विज्ञान में निरंतर प्रगति के साथ अब यह स्थापित हो गया है कि एक व्यक्ति के अंगदान से 8 लोगों की जान बच सकती है और ऊतक दान से लगभग 75 व्यक्तियों के जीवन में सुधार होता है। इसके साथ ही अंग दाताओं की कमी के कारण प्रत्यारोपण की आवश्यकता वाले रोगियों की प्रतीक्षा सूची में भी वृद्धि हुई है।

भारत में प्रत्यारोपण की आवश्यकता वाले रोगियों और उपलब्ध अंगों के बीच एक बड़ा अंतर है। एक अनुमान के अनुसार भारत में प्रति वर्ष लगभग 2 लाख मरीज़ों की लिवर फेल्योर या लिवर कैंसर से मृत्यु हो जाती है, जिनमें से लगभग 10-15% को समय  रहते लिवर प्रत्यारोपण से बचाया जा सकता था। भारत में वार्षिक रूप से लगभग 25-30 हजार लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है, लेकिन केवल 1,500 प्रत्यारोपण ही हो पा रहे है। 

इसी प्रकार, भारत में प्रतिवर्ष लगभग 500,000 व्यक्ति  हार्ट फ़ेल  से पीड़ित होते हैं, लेकिन हर वर्ष केवल 10-15 हृदय प्रत्यारोपण ही किए जाते हैं। 

पूरे भारत में लोगों को किडनी, लिवर, हृदय, कॉर्निया और फेफड़े के प्रत्यारोपण की अत्यधिक आवश्यकता है।

राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) के राष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार 1995 के बाद से, केवल 2,546 लोगों ने अपनी मृत्यु के बाद अपने अंगों को दान करने का विकल्प चुना, जबकि 34,094 लोगों ने जीवित रहते हुए अपने अंगों को दान करने का विकल्प चुना। 

सन 2015 से उत्तर प्रदेश राज्य में अंगदान का परिदृश्य 32 मृत दाताओं और 1,876 जीवित दाताओं का है।


SOTTO - UP को पूरे राज्य में अंग दाता पूल को बढ़ाने हेतु  इस दिशा में जागरूकता सेमिनार और प्रतिज्ञा अभियान आयोजित करने का आदेश दिया गया है।


उक्त संदर्भ में, 3 अगस्त, 2023 को 13वें भारतीय अंगदान दिवस के अवसर पर SOTTO UP, लखनऊ विश्वविद्यालय में अंग एवं ऊतक दान के लिए जागरूता कार्यक्रम एवं प्रतिज्ञा अभियान आयोजित कर रहा है।

 


 

मंगलवार, 1 अगस्त 2023

ऐसी होती है बेटियां,,,,

 


ऐसी होती है बेटियां,,,,


लड़कियों के एक विद्यालय में आई नई अध्यापिका बहुत खूबसूरत थी, बस उम्र थोड़ी अधिक हो रही थी लेकिन उसने अभी तक शादी नहीं की थी...


सभी छात्राएं उसे देखकर तरह तरह के अनुमान लगाया करती थीं। एक दिन किसी कार्यक्रम के दौरान जब छात्राएं उसके इर्द-गिर्द खड़ी थीं तो एक छात्रा ने बातों बातों में ही उससे पूछ लिया कि मैडम आपने अभी तक शादी क्यों नहीं की...?


अध्यापिका ने कहा- "पहले एक कहानी सुनाती हूं। एक महिला को बेटे होने की  लालच में लगातार पांच बेटियां ही पैदा होती रहीं। जब छठवीं बार वह गर्भवती हुई तो पति ने उसको धमकी दी कि अगर इस बार भी बेटी हुई तो उस बेटी को बाहर किसी सड़क या चौक पर फेंक आऊंगा। महिला अकेले में रोती हुई भगवान से प्रार्थना करने लगी, क्योंकि यह उसके वश की बात नहीं थी कि अपनी इच्छानुसार बेटा पैदा कर देती। इस बार भी बेटी ही पैदा हुई। पति ने नवजात बेटी को उठाया और रात के अंधेरे में शहर के बीचों-बीच चौक पर रख आया। मां पूरी रात उस नन्हीं सी जान के लिए रो रोकर दुआ करती रही। दूसरे दिन सुबह पिता जब चौक पर बेटी को देखने पहुंचा तो देखा कि बच्ची वहीं पड़ी है। उसे जीवित रखने के लिए बाप बेटी को वापस घर लाया लेकिन दूसरी रात फिर बेटी को उसी चौक पर रख आया। रोज़​ यही होता रहा। हर बार पिता उस नवजात बेटी को बाहर रख आता और जब कोई उसे लेकर नहीं जाता तो मजबूरन वापस उठा लाता। यहां तक कि उसका पिता एक दिन थक गया और भगवान की इच्छा समझकर शांत हो गया। फिर एक वर्ष बाद मां जब फिर से गर्भवती हुई तो इस बार उनको बेटा हुआ। लेकिन कुछ ही दिन बाद ही छह बेटियों में से एक बेटी की मौत हो गई, यहां तक कि माँ पांच बार गर्भवती हुई और हर बार बेटे ही हुए। लेकिन हर बार उसकी बेटियों में से एक बेटी इस दुनियां से चली जाती।" 


अध्यापिका की आंखों से आंसू गिरने लगे थे। उसने आंसू पोंछकर आगे कहना शुरु किया।


"अब सिर्फ एक ही बेटी ज़िंदा बची थी और वह वही बेटी थी, जिससे बाप जान छुड़ाना चाह रहा था। एक दिन अचानक मां भी इस दुनियां से चली गई। इधर पांच बेटे और एक बेटी सब धीरे धीरे बड़े हो गए।"


अध्यापक ने फिर कहा- "पता है वह बेटी जो ज़िंदा बची रही, मैं ही हूं। मैंने अभी तक शादी इसलिए नहीं की, कि मेरे पिता अब इतने बूढ़े हो गए हैं कि अपने हाथ से खाना भी नहीं खा सकते और अब घर में और कोई नहीं है जो उनकी सेवा कर सकें। बस मैं ही उनकी सेवा और देखभाल किया करती हूं। जिन बेटों के लिए पिताजी परेशान थे, वो पांच बेटे अपनी अपनी पत्नियों और बच्चों के साथ अलग रहते हैं। बस कभी-कभी आकर पिता का हालचाल पूछ जाते हैं।"


वह थोड़ा मुस्कराई। फिर बोली -


"मेरे पिताजी अब हर दिन शर्मिंदगी के साथ रो-रो कर मुझ से कहा करते हैं, मेरी प्यारी बेटी जो कुछ मैंने बचपन में तेरे साथ किया उसके लिए मुझे माफ कर देना।"


 दोस्तों, बेटी की बाप से मुहब्बत के बारे में एक प्यारा सा किस्सा यह भी है कि एक पिता बेटे के साथ खेल रहा था।  बेटे का हौंसला बढ़ाने के लिए वह जान बूझ कर हार जा रहा था। दूर बैठी बेटी बाप की हार बर्दाश्त ना कर सकी और बाप के साथ लिपटकर रोते हुए बोली- "पापा ! आप मेरे साथ खेलिए, ताकि मैं आपकी जीत के लिए हार सकूँ।"



लोहिया संस्थान की निदेशक प्रोफेसर सोनिया बनी मेडिकल विश्वविद्यालय की वी सी

 

लोहिया संस्थान की निदेशक प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद को किंग जॉर्ज मेडिकल विश्वविद्यालय का कुलपति बनाया गया है राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने इस आशय का आदेश जारी कर दिया है उनका कार्यकाल 3 साल के लिए होगा

कैंसर से देश में हो रही लाखों मौत, अभी नहीं चेते, तो आने वाला वक्त होने वाला है भयावह

  कैंसर से देश में हो रही लाखों मौत, अभी नहीं चेते, तो आने वाला वक्त होने वाला है भयावह  




रवि प्रकाश
लेखक, कैंसर सर्वाइवर हैं और खुद लंग कैंसर के चौथे स्टेज से गुजर रहे हैं.) साभार प्रभात खबर 

 अमेरिकन कैंसर सोसायटी के प्रतिष्ठित जर्नल ग्लोबल आंकोलाजी में प्रकाशित एक आंकड़े के मुताबिक साल 2000 से 2019 के बीच भारत में कैंसर से 1 करोड़ 28 लाख से भी अधिक लोगों की मौत हुई है. वहीं, भारत सरकार के नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (एनसीआरपी) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2020 से 2022 के बीच देश में कुल 23 लाख 67 हजार 990 लोगों की मौत की वजह कैंसर बनी. मतलब, हमारे देश में पिछले 22 सालों के दौरान डेढ़ करोड़ से भी अधिक लोग सिर्फ कैंसर की वजह से मर गये. यह वह आंकड़ा है, जो या तो सरकार ने खुद जारी किया या फिर इसका आधार सरकार द्वारा जारी रिपोर्टें बनी. 

इसके बावजूद भारत की सरकार के पास कैंसर को अधिसूचित बीमारी घोषित करने की संसदीय समिति की सिफारिशों वाली फाइल पिछले 10 महीने से पेंडिंग पड़ी है. आखिर क्यों, इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है और न किसी की इसमें दिलचस्पी दिखायी देती है. हमारे देश के राजनेता जाति-धर्म की सियासत में व्यस्त हैं. ब्यूरोक्रेसी का बहुमत उनकी चाटुकारिता कर रिटायरमेंट के बाद के रेवड़ियां फिक्स करने की कोशिशें कर रहा है और अपना मीडिया किसी सीमा या अंजू के नाचने-खांसने की रिपोर्टें कर व्यूज, लाइक्स और टीआरपी बटोरने में लगा है.

लेकिन, मौत के ये आंकड़े डरा रहे हैं. चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे हैं कि अगर अभी नहीं चेते, तो आने वाला वक्त भयावह होने वाला है. एक अगस्त को पूरी दुनिया विश्व लंग कैंसर दिवस मनाती है. ताकि फेफड़ों के कैंसर के प्रति लोगों को जागरूक किया जा सके. मुझे अंतिम स्टेज का लंग कैंसर है और मैं नान स्मोकर हूं।  भारत में उपलब्ध दवाईयां और चिकित्सीय सुविधाएं बहुत जतन के बाद भी किसी  5-6 साल से ज्यादा वक्त तक जिंदा नहीं रख पाएंगी।  अगर परिस्थितियां खराब रहीं और  थेरेपी ने बेहतर रेस्पांस नहीं किया, तो मेरी मौत कभी भी हो जाएगी।  फिर वे 5-6 साल वाले जीवन के अनुमान बेमानी साबित हो जाएंगे।  

 वह मंजिल है मौत,   डर इस बात का है कि मरने के बाद इन आंकड़ों का एक नंबर मात्र रह जाऊंगा। कैंसर को अधिसूचित बीमारियों की सूची में डालने की जरूरत है। कैंसर के हर मरीज की ट्रैकिंग हो. उसे दवाईयां मिलें. इलाज मिले। सरकार कैंसर को लेकर गठित की गई प्रो रामगोपाल यादव की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति की सिफारिशें जल्दी मान लेगी.

 अंतिम स्टेज के कैंसर मरीजों की टारगेटेट थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी की अधिकांश दवाएं लाखों की कीमत वाली हैं. किसी-किसी दवा की पूरे साल की कीमत एक करोड़ से भी अधिक है. भारत की प्रति व्यक्ति आय के मद्दनेजर क्या आम भारतीय इन दवाईयों को खरीद सकता है. आंकड़े कहते हैं-नहीं. देश के प्रसिद्ध टाटा मेमोरियल हास्पिटल, मुंबई के डाक्टरों के एक शोध आलेख के मुताबिक ऐसी दवाओं को 2 फीसदी से भी कम मरीज अफोर्ड कर पा रहे हैं. 

 भारत की सिर्फ 10 फीसदी आबादी ने हेल्थ इंश्योरेंस ले रखा है. इनमें से भी अधिकतर का औसतन कवरेज सिर्फ 4 लाख है. सोचिएगा जरूर कि अगर आपका स्वास्थ्य बीमा पूरे साल में आपको सिर्फ 4 लाख रुपये का कवरेज देता हो, तो महीने के 5, 10 या 15 लाख की दवा आप कैसे खरीद पाएंगे. फिर क्या होगा. आपके सामने अच्छे डाक्टर होंगे, दवाईयां होंगी लेकिन पार्याप्त पैसे नहीं रहने के कारण आप उनका उपयोग नहीं कर पाएंगे. अंततः उचित इलाज के अभाव में मर जाएंगे.

अब थोड़ी चर्चा आयुष्मान योजना की. यह 5 लाख रुपये का कवरेज देता है लेकिन क्या इसमें कैंसर की टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी की दवाएं शामिल हैं. सरकार को चाहिए कि वह अखबारों में विज्ञापन देकर बताए कि कैंसर के इलाज की कौन-कौन सी दवा उनकी इस योजना के तहत मिल सकती है. फैक्ट यह है कि टारगेटेड और इम्यूनोथेरेपी तो छोड़िए, कीमोथेरेपी की भी कुछ दवाओं की कवरेज आयुष्मान योजना के तहत नहीं है. सभी सरकारी अस्पतालों में कैंसर के विशेषज्ञ डाक्टर तक नहीं हैं. हम जी-20 की मेजबानी का जश्न मना रहे हैं और नयी दवाओं के इस्तेमाल के मामले में हम इन्हीं जी-20 देशों में नीचे से तीसरे अर्थात 18 वें नंबर (ग्लोबल एक्सेस टू न्यू मेडिसीन रिपोर्ट के मुताबिक) पर हैं. इस सूची में भारत से पीछे सिर्फ दक्षिण अफ्रिका और इंडोनेशिया हैं.

क्या यह वक्त नहीं है कैंसर पर सोचने का. इस पर ज्यादा काम करने का. आने वाला साल संसदीय चुनावों का है. मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी इसपर सोचेंगे. कैंसर भारत में अधिसूचित बीमारियों की लिस्ट में शामिल होगा और सरकार इसके हर मरीज के मुकम्मल इलाज के इंतजामात करेगी. वैसे भी वहीं देश दुनिया का सिरमौर हो सकता है, जो अपने हर नागरिक को रोटी, कपड़ा, मकान और इलाज की गारंटी दे सके.

(लेखक, कैंसर सर्वाइवर हैं और खुद लंग कैंसर के चौथे स्टेज से गुजर रहे हैं.) साभार प्रभात खबर 

सोमवार, 31 जुलाई 2023

पीजीआई मरीजों को लिफ्ट देने वाले अवधेश दुबे के स्वागत में उमड़ पड़ी पूरी कालोनी

 पीजीआई मरीजों को लिफ्ट देने वाले  अवधेश दुबे के स्वागत में उमड़ पड़ी पूरी कालोनी





अक्सर  कालोनियों में देखा गया है कि  लोग अपने अगल- बगल में रहने वाले के बारे में कई बार जानते तक नहीं है,,,, ऐसे में पूरी कालोनी किसी के स्वागत के लिए उमड़ पडे यह साबित करता है वह व्यक्ति कितना सामाजिक और मददगार होगा सेवा के अंतिम दिन घर पहुंचने पर,,, देख पूरी कॉलोनी के लोग हुए भावुक।  सम्मान में लोगों ने ढोल मजीरा के साथ साथ कॉलोनी के लोगों ने स्वागत के साथ ही ........ पार्क में रामायण का आयोजन भी किया। 


संजय गांधी पीजीआई विद्युत अभियंत्रण में लिफ्ट ऑपरेटर से सेवानिवृत्त अवधेश दुबे के लिए सोमवार का दिन एक मिसाल से कम नहीं था जहां एक तरफ अधिकांश अस्पतालों में  आए दिन तीमारदारों व मरीजों को परे शानी की हालत में कर्मचारियों की बीच झगड़ा मारपीट,  जैसी कई बातें सुनने को आती है वहीं पीजीआई में सोमवार को लिफ्ट ऑपरेटर से सेवानिवृत्त होने के दिन अवधेश दुबे के काम की प्रशंसा अधिकारी व कर्मचारियों ने पीजीआई कैंपस में तो की ही गई साथ साथ  उनके निवास स्थित साउथ सिटी कालोनी  वासियों ने भी की। लोगो के लिए अवधेश दुबे मदद करने वाले एक मसीहा से कम नहीं दिखाई दिए जैसे ही उनकी विदाई का समय लोगों को मालूम चला तो कॉलोनी के वृद्ध लोगो के साथ पुरुष, बच्चे महिलाएं अपने को रोक नहीं पाए ढोल मजीरे लेकर साउथ सिटी कॉलोनी में इकट्ठा हो गए जैसे ही दिनेश  वहां आए लोगो ने भावुक होकर स्वागत करते हुए  फूलों की माला पहनाई और उन्हें बधाई दी।

रामायण का किया आयोजन

साउथ सिटी रत्नाकर खंड के लोगों ने अवधेश दुबे के पीजीआई से सेवानिवृत्त होने को लेकर घर के बाहर बने एक मंदिर में रामायण पाठ का आयोजन किया जैसे ही अवधेश कुमार वहां पहुंचे तो वह भी लोगो का प्यार देख भावुक हो उठे और कॉलोनी के बड़े बूढ़ों सहित अपने मित्रों को गले लगा कर उनके इस सम्मान का आभार प्रकट किया।



उखड़ती सांस की डोर से कई लोगों कि मदद कर दिया था जीवनदन।

भले ही अवधेश दुबे पीजीआई में एक लिफ्ट आपरेटर के रूप में कार्य करते थे लेकिन उनकी सोच एक अलग थी वह किसी भी मरीज व तीमारदार की मदद करने के लिए तुरंत आ जाते थे आगर कहीं से भी फोन आता था तो वह तुरंत मदद कर उसे वहां इलाज करवाते थे । कॉलोनी में रहने वाले उनके मित्र नुरुल हुदा ने बताया कि हमारे रिश्तेदार हलीमून काफी बीमार पड़ गए मैंने हर जगह प्रयास किया लेकिन कहीं एडमिट नहीं हो पाया फिर मैंने अवधेश जी से कहा तो उन्होंने पीजीआई में इलाज अब  पूरी तरह स्वस्थ है। कलावती ,सामिया, दिनेश कुमार सहित दर्जनों लोगों को अपने कार्यकाल में उन्होंने मुसीबत की घड़ी में इलाज कराया।

आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन संबंधी रिपोर्ट लागू करने उप मुख्यमंत्री से मिल कर ज्ञापन ज्ञापन

 


आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन संबंधी रिपोर्ट लागू करने   उप मुख्यमंत्री से मिल कर ज्ञापन ज्ञापन

 

किंग जार्ज मेडिकल विवि, संजय गांधी पीजीआई ,  लोहिया संस्थान और कैंसर संस्थान में सेवा दे रहे है आउट सोर्स कर्मचारियों के  वेतन निर्धारण की मांग उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से संयुक्त आउट सोर्स –संविदा कर्मचारी संघ ने किया है। महामंत्री सचितानंद मिश्रा ने बताया कि उप मुख्यमंत्री के निर्देश पर वेतन निर्धारण समिति का गठन महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा के अध्यक्षता में किया गया था । समिति ने रिपोर्ट शासन को भेज दिया है। मांग किया है कि उक्त रिपोर्ट को लागू किय़ा जाए जिससे इन 20 हजार कर्मचारियों का जीवन यापन संभव हो सके।  संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने आउट सोर्स कर्मचारियों के लिए निति के आलावा कार्य के अनुसार वेतन का निर्देश भी दिया है जिसे लागू किया जाए। कहा था कि न्यूनतम वेतन क्यों कार्य के अनुसार वेतन होना चाहिए। हम लोग नियमित कर्मचारियों के बराबर काम करते है लेकिन वेतन दसवां हिस्सा मिलता है। 

रविवार, 30 जुलाई 2023

ब्रेन डेड व्यक्ति ने दो मरीजों को दिया नया जीवन

 ब्रेन डेड व्यक्ति ने दो मरीजों को दिया नया जीवन




-ग्रीन कॉरिडोर बनाकर पीजीआई भेजा गया गुर्दा
 -पीजीआई और अपोलो मेडिक्स में एक-एक मरीजों को किया गया गुर्दा प्रत्यारोपणत



ब्रेन डेड घोषित व्यक्ति ने जिंदगी की जंग लड़ रहे दो मरीजों को नया जीवन दिया है। महिला के परिजनों की सहमति पर पीजीआई और अपोलो मेडिक्स में एक-एक मरीज को गुर्दा प्रत्यारोपित किया गया। डॉक्टरों का दावा है कि प्रत्यारोपण के बाद दोनों मरीज ठीक हैं। शनिवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे अपोलो मेडिक्स से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर पुलिस को निगरानी में एम्बुलेंस से डॉक्टरों को मौजूदगी में गुर्दा पीजीआई भेजा गया। एम्बुलेंस को अपोलो मेडिक्स से पीजीआई की करीब 10 किमी की दूरी तय करने में करीब नौ मिनट लगे। 
पीजीआई के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. नारायण प्रसाद ने बताया कि शनिवार को अपोलो मेडिक्स हॉस्पिटल में ब्रेनडेड व्यक्ति की जानकारी होने पर आनन फानन गुर्दा प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में शामिल मरीजों को बुलाया गया। उनकी जांचें करायी। इसमें रायबरेली की 61 वर्षीय महिला मरीज का गुर्दा उससे मेल खाया। संस्थान के यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. एमएस अंसारी और डॉ. संजय सुरेखा व नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. नारायण प्रसाद व उनकी टीम के निर्देशन में मरीज का सफल गुर्दा प्रत्यारोपण किया गया। क्रॉनिक किडनी डिजीज से पीड़ित मरीज का पीजीआई में लम्बे समय से इलाज चल रहा था। डॉ. नारायण प्रसाद ने बताया कि एक गुर्दा अपोलो मेडिक्स में एक मरीज को प्रतयारोपित किया गया। 61 वर्षीय व्यक्ति के हादसे में घायल होने पर दो दिन पहले ओपोलो मेडिक्स अस्पताल में गंभीर अवस्था में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार देर रात व्यक्ति को ब्रेन डेड घोषित किया गया। परिवार की सहमति पर अंगदान का निर्णय लिया गया। पीजीआई स्थित स्टेट आर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (सोटो) की सहमति पर ब्रेन डेड व्यक्ति का गुर्दा ग्रीन कॉरिडोर बनाकर पीजीआई भेजा गया।


पीजीआई के अस्पताल प्रशासन विभाग के प्रमुख व स्टेट आर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (सोटो) के नोडल अफसर डॉ. राजेश हर्षवर्षन ने बताया कि 60 वर्षीय पति के ब्रेन बेड होने पत्नी ने अंगदान दी सहमति दी। इसके बाद गुर्दा प्रत्यारोपण का निर्णय लिया गया। ब्रेन डेड व्यक्ति का एक गुर्दा ग्रीन कॉरिडोर बनाकर पीजीआई भेजा गया। जबकि दूसरे गुर्दे का प्रत्यारोपण अपोलो में किया गया।

आउट सोर्स कर्मचारियों के वेतन वृद्धि की रिपोर्ट सैंपने के बाद भी कोई आदेश नहीं

 आउट सोर्स कर्मचारियों के वेतन वृद्धि की रिपोर्ट पर कोई आदेश नहीं



   मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान संविदा कर्मचारी संघ का एक प्रतिनिधिमंडल कर्मचारियों के वेतन बढ़ोत्तरी तथा अन्य समस्याओं के संबंध में आज केंद्रीय राज्य मंत्री मा. कौशल किशोर जी से मुलाकात की । महामंत्री सच्चिता नन्द ने माननीय मंत्री जी को अवगत कराया कि महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने वेतन निर्धारण करके शासन को भेज दिया है मगर शासन से अभी तक आदेश जारी नहीं हुआ । जिस कारण से कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है कर्मचारियों का वेतन पिछले 8 वर्ष से नही बढ़ा है ।प्रदेश के उच्च चिकित्सा संस्थान में कर्मचारियों की उपेक्षा हो रही है। मा मंत्री जी ने प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा को वेतन बढ़ोत्तरी करवाने के निर्देश जारी किए है मा मंत्री जी ने कहा की स्वास्थ्यकर्मियों को उनका हक मिलना चाहिए मैं सभी संविदा कर्मियों के साथ हूं । सभी प्रतिनिधि मंडल ने मा मंत्री जी का आभार व्यक्त किया । प्रतिनिधि मंडल में अध्यक्ष विकास तिवारी , मंत्री नीरज यादव प्रवक्ता लवकेश तिवारी त्रिभुवन यादव जी, मनीष वर्मा , हिमांशु शुक्ला मौजूद रहे । कर्मचारियों उम्मीद है कि अब शासन जल्द आदेश जारी करेगा ।


गुरुवार, 27 जुलाई 2023

hidden hepatitis virus can damage the liver , It is possible to save the liver by taking timely treatment

 Why take the risk of hepatitis B , vaccine avilabule for hepatitis B




hidden hepatitis virus can damage the liver

It is possible to save the liver by taking timely treatment

Awareness Program on World Hepatitis Awareness Day



On the occasion of World Hepatitis Awareness Day (July 28), an awareness program was organized by the Department of Gastroenterology, Sanjay Gandhi. On this occasion, Head of the Department, Prof. UC Ghoshal, Prof. Gaurav Pandey and Dr. Akash Mathur told that there is a need to be aware of the infection of this virus. Vaccines exist for hepatitis A and B while there is no vaccine for hepatitis C. To avoid all three viruses, you should get hepatitis test done from time to time. Don't ignore any symptoms. If you are hepatitis positive, then you should take complete treatment for it. Experts pointed out that there are 40 million people infected with Hepatitis B and about 12 million people infected with Hepatitis C in India. More than 90 percent of people with hepatitis B and C do not know they are infected because symptoms appear at a very late stage of the disease. The virus can silently damage the liver for years without any symptoms. Infections that are not diagnosed, monitored and treated in time can lead to severe life-threatening liver disease. The Indian government also joined the effort and launched the National Viral Hepatitis Control Program last year. Medical Social Service Officer Ramesh Kumar told that people suffering from this problem are called for follow up after every 6 months. Must always be on follow up. Senior technical officer TS Negi said that fibroscan detects the condition of the liver.

it can be annoying


-Fever

-Tiredness

- loss of appetite

- Nausea

-Vomit

-stomach ache

-dark urine

- light colored stools

- joint pain

-Jaundice


हेपेटाइटिस बी का टीका तो क्यों लें रिस्क छिपा हेपेटाइटिस वायरस लिवर को कर सकता है खोखला

 



हेपेटाइटिस बी का टीका तो क्यों लें रिस्क

छिपा हेपेटाइटिस वायरस लिवर को कर सकता है खोखला

समय पर इलाज लेने से लीवर को बचाना संभव

विश्व हेपेटाइटिस जागरूकता दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम



विश्व हेपेटाइटिस जागरूकता दिवस( 28 जुलाई) के मौके पर संजय गांधी के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग द्वारा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर विभाग के प्रमुख प्रो. यूसी घोषाल, प्रो, गौरव पाण्डेय और डा. आकाश माथुर ने बताया कि इस वायरस के संक्रमण से सजग रहने की जरूरत है। हेपेटाइटिस ए और बी के लिए वैक्सीन मौजूद है जबकि हेपेटाइटिस सी के लिए कोई वैक्सीन नहीं है। तीनों ही वायरस से बचने के लिए आपको समय-समय हेपेटाइटिस का टेस्ट कराना चाहिए। किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें। अगर आप हेपेटाइटिस पॉजिटिव हैं, तो आपको इसका पूरा इलाज कराना चाहिए। विशेषज्ञों ने बताया कि  भारत में हेपेटाइटिस बी से संक्रमित 4 करोड़ लोग और हेपेटाइटिस सी से संक्रमित लगभग 1.2 करोड़ लोग हैं। , हेपेटाइटिस बी और सी से पीड़ित 90 फीसदी से अधिक लोगों को पता नहीं है कि वे संक्रमित हैं क्योंकि लक्षण रोग के बहुत बाद के चरण में दिखाई देते हैं। वायरस बिना किसी लक्षण के वर्षों तक यकृत को चुपचाप क्षति पहुंचा सकता है। समय पर संक्रमण का निदान, निगरानी और उपचार नहीं किया जाता है, गंभीर जानलेवा जिगर की बीमारी हो सकती है।  भारत सरकार भी इस प्रयास में शामिल हुई और पिछले साल  राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया।  मेडिकल सोशल सर्विस ऑफिसर रमेश कुमार ने बताया कि इस परेशानी से ग्रस्त लोगों को हर 6 माह बाद फालोअप के लिए बुलाते है।  फालोअप पर हमेशा रहना चाहिए । वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी टीएस नेगी ने बताया कि फाइब्रोस्कैन से लिवर की स्थिति का पता लगता है।   इंग्लैंड से भारत शोध करने आई सुश्री एरिका ने भी इस गोष्ठी में भाग लिया तथा मरीज़ों से संवाद किया । इस अवसर पर डॉ. अंकुर यादव एवं डॉ. पीयूष मिश्रा भी उपस्थित रहे।

यह हो सकती है  परेशान

 

-बुखार

-थकान

-भूख न लगना

-मतली

-उल्टी

-पेट में दर्द

-गहरे रंग का पेशाब

-हल्के रंग का मल

-जोड़ों का दर्द

-पीलिया


हेपेटाइटिस बी साइलेंट किलर है, बचाव के लिए जरूर कराएं वैक्सीनेशन
-विश्व हेपेटाइटिस जागरूकता दिवस
-गैस्ट्रोइंट्रोलाजी विभाग के प्रमुख प्रो. यूसी घोषाल ने कहा, हेपेटाइटिस वायरस लिवर को कर सकता है खराब
-समय पर जांच और इलाज जरूरी, हेपेटाइटिस ए व बी से बचाव के लिए कराएं वैक्सीनेशन

 हेपेटाइटिस ए और बी साइलेंट किलर की तरह लिवर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। कई बार तो मरीज की हालत बिगड़ने पर ही इस बीमारी का पता चलता है। वैसे तो हेपेटाइटिस के अधिकांश मामले खून की जांच के दौरान या किसी अन्य समस्या की जांच कराने पर सामने आते हैं। इसलिए इस बीमारी को लेकर सतर्कता बहुत जरूरी है। गुरुवार को ये जानकारी विश्व हेपेटाइटिस जागरूकता दिवस के मौके पर एसजीपीजीआइ में आयोजित कार्यक्रम में गैस्ट्रोइंट्रोलाजी विभाग के प्रमुख प्रो. यूसी घोषाल ने दी। उन्होंने कहा, दोनों संक्रमण से बचने के लिए जागरूकता और टीकाकरण बेहद जरूरी है।

समय पर जांचें कराएं
प्रो. घोषाल ने बताया कि इसका संक्रमण लिवर को खराब कर देता है। हेपेटाइटिस ए और बी के लिए तो वैक्सीन मौजूद है, लेकिन हेपेटाइटिस सी का कोई टीका नहीं आया है। तीनों ही वायरस से बचने के लिए आपको समय-समय हेपेटाइटिस का टेस्ट कराना चाहिए। किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें। किसी मरीज को अपनी मर्जी से दवा बंद नहीं करना चाहिए बल्कि, इस संक्रमण को खत्म करने के लिए पूरा इलाज जरूरी है। उन्होंने कहा, भारत में हेपेटाइटिस बी के चार करोड़ और हेपेटाइटिस सी के एक करोड़ से ज्यादा मरीज हैं। खास बात यह है कि हेपेटाइटिस बी और सी के 90 प्रतिशत मरीजों को पता ही नहीं चल पाता कि ‌वे इस खतरनाक बीमारी की चपेट में हैं। दरअसल, यह वायरस बिना किसी लक्षण धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचाता है।

बाहर के खाने से करें परहेज
विभाग के डा. गौरव पांडेय के मुताबिक, अगर समय पर इस बीमारी का पता न चले तो मरीज की जान को खतरा हो सकता है। फास्ट फूड का इस्तेमाल करने से बचें और साफ पानी पीएं। खासकर, बारिश के मौसम में बाहर के खाने से परहेज करें। इससे संक्रमण का खतरा होता है। मेडिकल सोशल सर्विस आफिसर रमेश कुमार ने बताया कि भारत सरकार ने पिछले साल राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया। इस बीमारी की मरीज को प्रत्येक छह माह बाद बुलाया जाता है। वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी टीएस नेगी ने बताया कि फाइब्रोस्कैन से लिवर की स्थिति का पता लगता है। वहीं, डा. आकाश माथुर का कहना है कि इसे काला पीलिया भी कहा जाता है। हेपेटाइटिस के कुछ लक्षण जैसे भूख कम होना, थोड़ा काम करने पर ही थकान महसूस होना, आंखो में पीलापन, त्वचा में भी पीलापन आदि हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सीय परामर्श लेना जरूरी है। इस मौके पर वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी टीएस नेगी समेत नर्सिंग स्टाफ भी मौजूद रहा।

ये हैं प्रमुख लक्षण
-बुखार
-थकान
-भूख न लगना
-मतली
-उल्टी
-पेट में दर्द
-गहरे रंग का पेशाब
-हल्के रंग का मल
-जोड़ों का दर्द

-पीलिया

 उत्तर भारत से अकेले पीजीआई का नाम है। दो अन्य प्रयोगशाला हेपेटाइटिस बी साइलेंट किलर है, बचाव के लिए जरूर कराएं वैक्सीनेशन

-विश्व हेपेटाइटिस जागरूकता दिवस

-गैस्ट्रोइंट्रोलाजी विभाग के प्रमुख प्रो. यूसी घोषाल ने कहा, हेपेटाइटिस वायरस लिवर को कर सकता है खराब

-समय पर जांच और इलाज जरूरी, हेपेटाइटिस ए व बी से बचाव के लिए कराएं वैक्सीनेशन


जागरण संवाददाता, लखनऊः हेपेटाइटिस ए और बी साइलेंट किलर की तरह लिवर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। कई बार तो मरीज की हालत बिगड़ने पर ही इस बीमारी का पता चलता है। वैसे तो हेपेटाइटिस के अधिकांश मामले खून की जांच के दौरान या किसी अन्य समस्या की जांच कराने पर सामने आते हैं। इसलिए इस बीमारी को लेकर सतर्कता बहुत जरूरी है। गुरुवार को ये जानकारी विश्व हेपेटाइटिस जागरूकता दिवस के मौके पर एसजीपीजीआइ में आयोजित कार्यक्रम में गैस्ट्रोइंट्रोलाजी विभाग के प्रमुख प्रो. यूसी घोषाल ने दी। उन्होंने कहा, दोनों संक्रमण से बचने के लिए जागरूकता और टीकाकरण बेहद जरूरी है।


समय पर जांचें कराएं

प्रो. घोषाल ने बताया कि इसका संक्रमण लिवर को खराब कर देता है। हेपेटाइटिस ए और बी के लिए तो वैक्सीन मौजूद है, लेकिन हेपेटाइटिस सी का कोई टीका नहीं आया है। तीनों ही वायरस से बचने के लिए आपको समय-समय हेपेटाइटिस का टेस्ट कराना चाहिए। किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें। किसी मरीज को अपनी मर्जी से दवा बंद नहीं करना चाहिए बल्कि, इस संक्रमण को खत्म करने के लिए पूरा इलाज जरूरी है। उन्होंने कहा, भारत में हेपेटाइटिस बी के चार करोड़ और हेपेटाइटिस सी के एक करोड़ से ज्यादा मरीज हैं। खास बात यह है कि हेपेटाइटिस बी और सी के 90 प्रतिशत मरीजों को पता ही नहीं चल पाता कि ‌वे इस खतरनाक बीमारी की चपेट में हैं। दरअसल, यह वायरस बिना किसी लक्षण धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचाता है।


बाहर के खाने से करें परहेज

विभाग के डा. गौरव पांडेय के मुताबिक, अगर समय पर इस बीमारी का पता न चले तो मरीज की जान को खतरा हो सकता है। फास्ट फूड का इस्तेमाल करने से बचें और साफ पानी पीएं। खासकर, बारिश के मौसम में बाहर के खाने से परहेज करें। इससे संक्रमण का खतरा होता है। मेडिकल सोशल सर्विस आफिसर रमेश कुमार ने बताया कि भारत सरकार ने पिछले साल राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया। इस बीमारी की मरीज को प्रत्येक छह माह बाद बुलाया जाता है। वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी टीएस नेगी ने बताया कि फाइब्रोस्कैन से लिवर की स्थिति का पता लगता है। वहीं, डा. आकाश माथुर का कहना है कि इसे काला पीलिया भी कहा जाता है। हेपेटाइटिस के कुछ लक्षण जैसे भूख कम होना, थोड़ा काम करने पर ही थकान महसूस होना, आंखो में पीलापन, त्वचा में भी पीलापन आदि हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सीय परामर्श लेना जरूरी है। इस मौके पर वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी टीएस नेगी समेत नर्सिंग स्टाफ भी मौजूद रहा।


ये हैं प्रमुख लक्षण

-बुखार

-थकान

-भूख न लगना

-मतली

-उल्टी

-पेट में दर्द

-गहरे रंग का पेशाब

-हल्के रंग का मल

-जोड़ों का दर्द

-पीलिया भारत में एनआईएमएचएएनएस बंगलुरू और  स्थितआईसीएमआर-एनआईटीएमए बेलगावी कर्नाटक में स्थापित होंगी। प्रयोगशाला विकसित करने के लिए संस्थान को चार करोड़ का बजट मिलेगा। 

मंगलवार, 25 जुलाई 2023

पाकिस्तान पहुंची अंजू ने कुबूल किया ईसाई धर्म के बाद इस्लाम धर्म किया स्वीकार

 पाकिस्तान पहुंची अंजू ने कुबूल किया ईसाई धर्म के बाद इस्लाम धर्म किया स्वीकार









फातिमा बनकर नसरुल्लाह से किया निकाह


फेसबुक फ्रेंड से मिलने हिन्दुस्तान से पाकिस्तान गई अंजू ने अब वहां धर्म परिवर्तन कर लिया है और फातिमा बन गई है. अंजू अपने दोस्त नसरुल्लाह से मिलने पाकिस्तान गई थी और कहा था कि वो कुछ दिनों में लौट आएगी. बता दें कि अंजू पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे भी हैं.फेसबुक फ्रेंड से मिलने हिन्दुस्तान से पाकिस्तान गई अंजू ने अब वहां धर्म परिवर्तन कर अंजू से फातिमा बन गई है. उसने धर्म परिवर्तन कर अपने दोस्त नसरुल्लाह से निकाह कर लिया है.



बता दें कि वीजा लेकर पाकिस्तान गई अंजू ने पहले कहा था कि वो बस अपने फेसबुक फ्रेंड से मिलने वहां गई और कुछ दिनों में लौट आएगी. हालांकि अब पाकिस्तान से उसके निकाह कर लेने की खबरें सामने आई है. अंजू भारत में पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे भी हैं. अंजू धर्म परिवर्तन करने से पहले ईसाई थीपाक मीडिया रिपोर्टों के अनुसार धर्म बदलने के बाद अंजू का इस्लामिक नाम फातिमा रखा गया है. शादी जिला अदालत में हुई और अंजू ने इस्लाम अपना लिया है. मालकुंड डिवीजन के डीआइजी नासिर महमूद दस्ती ने अंजू और नसरुल्लाह की शादी की पुष्टि की. दोनों की शादी जिला और सत्र न्यायाधीश डीआइजी मालकुंद की अदालत में करायी गयी जिसके बाद अंजू को पुलिस सुरक्षा में घर पहुंचाया गया.



नसरुल्लाह ने निकाह से किया इनकार



हालांकि निकाह के बाद जब नसरुल्लाह से आज तक ने बातचीत की तो उसने शादी की बात से इनकार कर दिया. इतना ही नहीं नसरुल्लाह ने ये भी कहा कि अंजू (फातिमा) उनकी दोस्त है और वो उससे प्यार नहीं करते हैं. हालांकि इस बीच दोनों का निकाहनामा सामने आया गया जो नसरुल्लाह के दावों पर सवाल खड़ा कर रहा है.