मंगलवार, 31 जनवरी 2023

Farmers are spoiling their health-More than 50 percent are not taking precautions in the use of pesticides

 Farmers are spoiling their health



 





More than 50 percent are not taking precautions in the use of pesticides


 


Many facts found in research on 387 farmers of Lucknow


 


Kumar Sanjay. Lucknow


 


37% farmers do not know that pesticides can prove fatal for them. All such information has come to the fore after research on the farmers of Lucknow district. Due to lack of information and awareness, farmers do not take precautions while using pesticides, which increases the risk of skin and nervous system diseases. Research was done on 387 farmers in which many facts have come to the fore. Research scientists have said that insecticides contain the highest concentration of chemicals. Therefore, it is imperative that farmers are aware of the right usage and toxic effects of chemicals to save themselves and the environment. The present study shows that information on pesticide labels is not effective for farmers. They need to be educated in alternative ways. It was observed that 42.6 percent of the farmers keep pesticides in their homes, due to which there is a possibility of danger in the small children of the house. The remaining pesticides are also not disposed of properly.


 


 


 


they researched


 


From the Department of Community Medicine, Ram Manohar Lohia Institute, Dr.


 


Bina Sachan, Dr. Sunil Dutt Kandpal,Dr. Arvind K. Singh, Dr. Amit Kaushik, Dr. Sugandha Johri and Arshi Ansari did research on the topic Agricultural Pesticide Use and Misuse: A Study to Assess the Cognition and Practice among North India Farmers, which has recently been accepted by the Journal of Family Medicine and Primary Care.


 


 


 


55% - neither read nor follow the label on pesticide


 


44% - do not understand the toxicity level


 


 


 


61% - don't know about alternatives to synthetic pesticides


 


51.2 percent - do not know about organic farming


 


74.3% - Don't know pesticides affect surface water


 


77.6% - Don't know that pesticides affect soil fertility


 


37.0% - Don't know pesticides can cause fatal poisoning


 


65.0% - Don't know when using pesticides

शुक्रवार, 27 जनवरी 2023

PGI 22 employees honored for doing excellent work

 

Emergency will improve with increasing the number of kidney transplants

22 employees honored for doing excellent work

Sanjay Gandhi PGI Institute administration honored 22 of its employees for their excellent work on the occasion of Republic Day. On this occasion, Director Professor RK Dhiman after unfurling the flag said that recruitment will be done soon for 2969 posts. The designations have also been changed and there were discrepancies in the pay scales of many posts in the trauma center, which have also been removed. The recruitment work for faculty and nursing posts is also going on.

Talking about the Emergency Medicine and Kidney Transplantation Centre, he said that the emergency services would be improved by increasing the number of emergency beds by 7 times. Now . It will start functioning completely as soon as the new recruitments are done. He also insisted on increasing kidney transplant from 3 per week to 8 to 10 per week. Also mentioned the Advance Pediatric Center. This advance pediatric center will have 23 departments, in which 125 faculty members and 185 senior residents will also be appointed.Thus there will be a parallel hospital for children, with a single center for all ailments related to them.

Information was also given about the Advance Diabetic Center, which will have all the treatment facilities under one roof for every disease related to diabetes. This center will start functioning by the month of September. The process of creation of Head and Neck Cancer Department and Infectious Diseases Department is also going on.Told that robotic surgery is being done 6 days a week. Stressed on speeding up the organ donation programme. A large number of people participated in this programme. On this occasion, Savitri Singh, General Secretary, Nursing Association, Seema Shukla, President of Employees Federation, Dharmesh Kumar, President of Meditech Association, DK Singh, General Secretary, Saroj Kumar Verma, other officers, employees and faculty members were present.

it was honored

 

 

 

1. Krishnakant Chowdhary, Technical Officer, Neurosurgery

 

2. Arvind Kumar Srivastava, PS, Clinical Immunology and Rheumatology

 

3. Rajesh Srivastava, Chief Technical Officer, Endocrinology

 

4. Arvind Kumar Srivastava, Senior Electrician, Electrical Engineering

 

5. Ajay Kumar Srivastava, Additional Divisional Assistant, Establishment,

 

6. Prabha Manoj Kumar, Librarian Grade-II, NHC Cell, Dean's Office

 

7. Nageshwar Lal, Senior Technical Officer, Cardiology Enco Lab

8. Raghunath Singh, Supervisor, Sanitation

 

9. Akhil Kumar Srivastava, Senior Technical Officer, Pathology

 

10. Deep Chand, Junior Accounts Officer, HRF

 

11. Lalji, Technical Officer, Transfusion Medicine

 

12. Jyoti Sampson, Senior Nursing Officer, Emergency Medicine

 

13. T.G. Rao, Junior Accounts Officer, Finance

 

14. Ram Avtar Pal, Private Secretary, Endocrine Surgery

15. Sudha Rani Sengar, DNS, Nephrology

 

16. Mr. Harish Chandra Yadav, Senior Attendant, B.H.I.

 

17. Dhirendra Kumar, Medical Social Worker, Neurology

 

18. Raju Dhanuk, Attendant Grade-I, Examination Cell

 

19. Dilip Kumar, Data Entry Operator, F.I.R.

 

20. Shimla Singh, Patient Assistant, Director Camp

 

21. Mattie M. Morris, ANS, Gastro Surgery

 

22. V.K. Srivastava, PA, Finance Department

गुरुवार, 26 जनवरी 2023

पीजीआई उत्कृष्ट कार्य करने वाले 22 कर्मचारी हुए सम्मानित

 पीजीआई 





गुर्दा प्रत्यारोपण की संख्या बढ़ाने के साथ इमरजेंसी में होगा सुधार


उत्कृष्ट कार्य करने वाले 22 कर्मचारियों को किया सम्मानित


गणतंत्र दिवस की मौके पर संजय गांधी पीजीआई संस्थान प्रशासन ने अपने 22 कर्मचारियों को उनके उत्कृष्ट कार के लिए सम्मानित किया। इस मौके पर निदेशक प्रोफ़ेसर आर के धीमान ने ध्वजारोहण करने के बाद कहा  कि 2969 पदों पर शीघ्र ही भर्तियां भी की जायेगी। पदनाम भी बदले गये हैं और ट्रामा सेंटर मे अनेक पदों के वेतनमान में विसंगतियां थी, जिन्हें भी दूर किया गया है। फैकल्टी और नर्सिग पदों पर भर्तियो का कार्य भी चल रहा है । 

इस मौके पर बताया किइमरजैंसी मेडिसिन और गुर्दा प्रत्यारोपण केंद्र के विषय में उन्होंने कहा कि इमरजेंसी बेड्स में 7 गुनी बढ़ोतरी से आकस्मिक सेवाओं में  सुधार होगा। अभी । नयी भर्तियो के होते ही यह पूर्णतया कार्य करने लगेगा। उन्होंने किडनी ट्रांसप्लांट को भी 3 प्रति सप्ताह से बढ़ाकर 8 से 10 प्रति सप्ताह करने पर बल दिया। एडवांस पीडियाटिक सेंटर का भी उल्लेख किया। इस एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर में 23 विभाग होंगे, जिसमें 125 संकाय सदस्य और 185 सीनियर रेजिडेंट की भी नियुक्ति की जाएगी। इस प्रकार बच्चों के लिए एक समानांतर अस्पताल होगा, जिसमें उनसे संबंधित सभी बीमारियों के लिए एक ही केंद्र होगा। 

एडवांस डायबिटिक सेंटर के विषय में भी जानकारी दी, जिसमें  डायबिटीज से संबंधित हर बीमारी के लिए एक ही छत के नीचे समस्त उपचार सुविधाएं होंगी। यह सेंटर सितंबर माह तक कार्य करने लगेगा।हेड एंड नेक कैंसर विभाग वह इनफेक्शियस डिजीज  विभाग के सृजन की प्रक्रिया भी चल रही है । बताया कि  रोबोटिक सर्जरी सप्ताह के 6 दिन की जा रही  हैं । अंगदान कार्यक्रम को गति देने पर बल दिया।इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। इस मौके पर कर्मचारी संगठन के महामंत्री सावित्री सिंह नर्सिंग एसोसिएशन की अध्यक्ष सीमा शुक्ला कर्मचारी महासंघ के महामंत्री धर्मेश कुमार मेडिटेक एसोसिएशन के अध्यक्ष डीके सिंह महामंत्री सरोज कुमार वर्मा सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी और संकाय सदस्य मौजूद रहे


यह हुए सम्मानित


1.  कृष्णकांत चौधरी, तकनीकी अधिकारी, न्यूरोसर्जरी

2. अरविंद कुमार श्रीवास्तव, निजी सचिव, क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी और रुमेटोलॉजी

3.  राजेश श्रीवास्तव, मुख्य तकनीकी अधिकारी, एंडोक्रिनोलॉजी

4.  अरविंद कुमार श्रीवास्तव, वरिष्ठ इलेक्ट्रीशियन, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग

5.  अजय कुमार श्रीवास्तव, अपर मंडल सहायक, स्थापना, 

6.  प्रभा मनोज कुमार, लाइब्रेरियन ग्रेड-II, एनएचसी सेल, डीन कार्यालय

7.  नागेश्वर लाल, वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी, कार्डियोलॉजी एन्को लैब

8.  रघुनाथ सिंह, पर्यवेक्षक, स्वच्छता

9.  अखिल कुमार श्रीवास्तव, वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी, पैथोलॉजी

10.  दीप चंद, कनिष्ठ लेखाकार अधिकारी, एचआरएफ

11.  लाल जी, तकनीकी अधिकारी, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन

12.  ज्योति सम्पसन, वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी, आपातकालीन चिकित्सा

13.  टी.जी. राव, कनिष्ठ लेखाकार अधिकारी, वित्त

14. राम अवतार पाल, निजी सचिव, एंडोक्राइन सर्जरी

15. सुधा रानी सेंगर, डीएनएस, नेफ्रोलॉजी

16. श्री हरीश चंद्र यादव, वरिष्ठ परिचारक, बी.एच.आई

17.  धीरेंद्र कुमार, चिकित्सा सामाजिक कार्यकर्ता, न्यूरोलॉजी

18.  राजू धानुक, परिचारक ग्रेड-1, परीक्षा प्रकोष्ठ

19.  दिलीप कुमार, डाटा एंट्री आपरेटर, एफ.आई.आर

20.  शिमला सिंह, रोगी सहायक, निदेशक शिविर

21.  मेट्टी एम मोरिस, एएनएस, गैस्ट्रो सर्जरी

22. वी.के. श्रीवास्तव, पीए, वित्त विभाग




गुरुवार, 19 जनवरी 2023

कीटनाशक के इस्तेमाल में 50 फीसदी से अधिक नहीं बरत रहे है सावधानी

 अपनी सेहत बिगाड़ रहे है किसान

 


कीटनाशक के इस्तेमाल में 50 फीसदी से अधिक नहीं बरत रहे है सावधानी

 

लखनऊ के 387 किसानों पर शोध में मिले कई तथ्य 

 

कुमार संजय। लखनऊ

 

37 फीसदी किसानों को नहीं पता कि कीटनाशक उनके घातक साबित हो सकता है। ऐसी ही तमाम जानकारी लखनऊ जिले के किसानों पर शोध के बाद सामने आयी है। जानकारी और जागरूकता के अभाव में  कीटनाशक इस्तेमाल के समय किसान सावधानी नहीं बरतते है जिससे इनमें त्वचा, तंत्रिका तंत्र के बीमारी की आशंका भी बढ़ जाती है। शोध में 387 किसानों पर शोध किया गया  जिसमें कई तथ्य सामने आए हैं। शोध वैज्ञानिकों ने कहा है कि  कीटनाशक में  रसायनों की उच्चतम सांद्रता होती है। इसलिए यह जरूरी है कि किसान  खुद और पर्यावरण को बचाने के लिए  रसायनों के सही उपयोग और जहरीले प्रभावों से अवगत हों। वर्तमान अध्ययन से पता चलता है कि  जानकारी के लिए  कीटनाशक पर लगा  लेबल किसानों के लिए प्रभावी नहीं है। उन्हें वैकल्पिक तरीकों से शिक्षित करने की आवश्यकता है। देखा गया कि कीटनाशक को 42.6 फीसदी किसान घरों में की भी रख देते है जिससे घर के छोटे बच्चों में खतरे की आशंका रहती है।बचे हुए कीटनाशक निस्तारण भी सही तरीके से नहीं करते हैं।  

 

 

 

इन्होंने किया शोध

 

राममनोहर लोहिया संस्थान के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग से डा.

 

बीना सचान, डा. सुनील दत्त कांडपाल,डा. अरविंद के. सिंह,डा. अमित कौशिक, डा.  सुगंधा जौहरी और अर्शी अंसारी ने एग्रीकल्चर पेस्टिसाइड यूज एंड मिसयूज ए स्टडी टू एसेस द कॉग्निजेंस एंड प्रैक्टिस एमंग नार्थ इंडिया फार्मर विषय को लेकर शोध किया जिसे जर्मल आफ    फेमली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर ने हाल में ही स्वीकार किया है। 

 

 

 

55 फीसदी – कीटनाशक पर लेबल न तो पढ़ते  और न  पालन करते हैं

 

44 फीसदी- विषाक्तता लेवल को नहीं  समझें

 

 

 

61 फीसदी -सिंथेटिक कीटनाशकों के विकल्प के बारे में नहीं जानते

 

51.2 फीसदी- जैविक खेती के बारे में नहीं जानते  की जानकारी है

 

74.3 फीसदी – नहीं जानते कि कीटनाशक सतही जल को प्रभावित करते हैं

 

77.6 फीसदी – नहीं जानते कि  कीटनाशक मिट्टी की उर्वरता को प्रभावित करते हैं

 

37.0  फीसदी – नहीं जानते  कि कीटनाशक घातक विषाक्तता पैदा कर सकते हैं

 

65.0 फीसदी – नहीं जानते कि  कीटनाशकों का इस्तेमाल करते समय  पीपीई  का उपयोग करना चाहिए

 

80 फीसदी -  प्रतिबंधित कीटनाशक के बारे में जानकारी नहीं है

 

ऐसे करें बचाव

-खाली पेट छिड़काव न करे

- छिड़काव करने के बाद कपड़े उतार देने चाहिएं व अच्छी तरह साबुन लगाकर स्नान करें

-  छिड़काव करते समय कुछ भी नहीं खाएं, हवा के रुख के उलट छिड़काव न करें

-  हमेशा हवा के 90 डिग्री कोण पर छिड़काव करो

-  छिड़काव करने से पहले व बाद में स्प्रे पंप को सर्फ के पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए

- छिड़काव करते समय दस्ताने, मास्क, पूरी बाजू की कमीज व पायजामा, पैंट पहन कर रखें

-  नोजल की ऊंचाई करीब डेढ़ फुट रखें व इधर उधर न घुमाएं

- डिब्बे को नष्ट कर मिट्टी में गाड़ दें

 

जैविक खेती स्वास्थ्य और मिट्टी के लिए मुफीद

 

-भूमि की उपजाऊ क्षमता में वृद्धि हो जाती है।

-सिंचाई अंतराल में वृद्धि होती है।

-रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होने से लागत में कमी आती है।

-मिट्टी, खाद्य पदार्थ और जमीन में पानी के माध्यम से होने वाले प्रदूषण में कमी आती है

- रसायन के इस्तेमाल से कुछ अंश शरीर में जाता है जिससे कई बीमारी की आशंका रहती है

 

सोमवार, 16 जनवरी 2023

पीजीआई ने टूटे लिगामेंट को हटाकर रोपित किया नया लिगामेंट -लिगामेंट इंजरी के कारण बंद हो गई थी ट्रेनिंग और कुश्ती

 

पीजीआई ने टूटे  लिगामेंट  को हटाकर रोपित किया नया लिगामेंट 

अब  सुमित कुश्ती में करेंगे देश का नाम रोशन

लिगामेंट इंजरी के कारण बंद हो गई थी ट्रेनिंग और कुश्ती



आजमगढ़ के ग्राम पाखनपुर  के रहने वाले 18 वर्षीय सुमित कुश्ती के दौरान चोट लग गई । चोट के कारण   घुटने में लिगामेंट इंजरी के कारण खेल और ट्रेनिंग दोनो बंद हो गयी थी। वह कैरियर को लेकर काफी निराश थे । संजय गांधी पीजीआई के एपेक्स ट्रामा सेंटर के हड्डी रोग विशेषज्ञ प्रो. पुलक शर्मा ने अपने साथियों के साथ मिल लेप्रोस्कोपिक से एथ्रोस्कोपिक एसीएल रिकंस्ट्रक्शन एंड पार्शियल मेनी सेक्टोमी मेनी सकल रिपेयर   तकनीक से नया लिगामेंट रोपित कर घुटने को जान दे दिया है। दावा है कि वह एक महीने बाद से पहले की तरह कुश्ती लड़ सकेंगे। सुमित फिलहाल सर्जरी के छुट्टी पा गए है। वह बनारस के खेल अकादमी में ट्रेनिंग ले रहे थे जहां वह जारी रखने की उम्मीद रखें है। प्रो. पुलक के मुताबिक फीमर और टीबिया के बीच में लिगामेंट होता है जो घुटने को मजबूती देता है। यह लिगामेंट टूट गया था जिसके कारण   घुटने को मोड़ना मुश्किल था।  वजन उठाना तो दूर की बात थी। कई लिगामेंट और घुटने के पास होते है जिसे स्पेयर लिगामेंट कहते है इनकी कोई खास उपयोगिता नहीं होती है। इस लिगामेंट को निकाल टूटे लिगामेंट की जगह रोपित किया। पहलवान सुमित कुमार का दिनांक चार जनवरी को जटिल ऑपरेशन हुआ। सुमित कुमार राज्य स्तरीय 60 किलोग्राम वर्ग कुश्ती चैंपियन हैं। सुमित का कहना है कि  कई अस्पतालों में इलाज कराने के बाद भी आराम नहीं मिला तो वह एसजीपीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। सुमित कुमार ने डॉ. पुलक शर्मा और उनकी टीम का हृदय से आभार व्यक्त किया है। इस सफलता के लिए निदेशक प्रो.आरके धीमान, ट्रामा सेंटर प्रभारी प्रो. राजकुमार,  चिकित्सा अधीक्षक प्रो. राजेश हर्ष वर्धन ने टीम को बधाई दी है।

 

 

अगले दिन किया आपरेशन

आवश्यक परीक्षणों के बाद, डॉ. पुलक शर्मा के साथी  डॉ. अमरेंद्र सिंह, डॉ. मंजूनाथ और डॉ. संजय शर्मा, एनेस्थिसियोलॉजी विभाग के डॉ. रफत शमीम ने तुरंत भर्ती कर अगले दिन आपरेशन किया। फिजियोथैरेपी के बाद सुमित आज पूरी तरह स्वस्थ है। डॉक्टर्स का कहना है कि सुमित एक महीने के अंदर फिर से रेसलिंग कर सकेगा और जीत भी हासिल करेंगे।

 

मंगलवार, 3 जनवरी 2023

फंगल इंफेक्शन से खराब फेफड़ों को दुरुस्त करने में ही स्टेरॉयड कारगर-

 आईसीयू में भर्ती मरीजों को मिलेगा सटीक इलाज




केवल फंगल इंफेक्शन से खराब फेफड़ों को दुरुस्त करने में ही स्टेरॉयड कारगर

 अंतरराष्ट्रीय जनरल ने पल्मोनरी विभाग के रिसर्च को मान्यता दी

 कुमार संजय। लखनऊ

आईसीयू में भर्ती मरीजों को अब सटीक इलाज मिलेगा। अभी तक 90 फीसदी से अधिक मरीजों को शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता कम करने की दवाएं ( स्टेरॉयड) खास मात्रा में बिना किसी जांच पड़ताल के शुरू कर दी जाती है। ऐसा केवल भारत में ही नहीं पूरी दुनिया में देखने को मिला है।  इससे फायदा कम नुकसान अधिक होता है। संजय गांधी पीजीआई के विशेषज्ञों ने 1161 मरीजों पर लंबे शोध बाद साबित किया है कि फंगल इंफेक्शन है तभी स्टेरायड कारगर है।  फंगस( कवक) भी कई तरह के होते है, इसलिए यह भी  साबित किया है कि एस्परगिलोसिस फंगस  संक्रमण तभी यह कारगर है।  शोध को इंटरनेशनल मेडिकल जर्नल माइकोसिस ने स्वीकार किया है। इस नए तथ्य के सामने आने के बाद आईसीयू मरीजों की काफी राहत मिल सकती है। मृत्यु दर भी कम होगी।    मुख्य शोधकर्ता पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रो जिया हाशिम को  इस शोध के लिए राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने सम्मानित किया था।

चार फीसदी से अधिक फंगल इंफेक्शन  

प्रो. जिया हाशिम ने बताया के मुताबिक  आईसीयू में भर्ती मरीजों के   फेफड़ों की कार्य क्षमता कमजोर हो जाती है। इसे डॉक्टरी भाषा में  एक्यूट रेस्पीरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस) कहते हैं।  आईसीयू के चार फीसदी से अधिक मरीजों में फंगल संक्रमण पाया जाता है।

 

डायबिटीज मरीजों में अधिक है आशंका

 

 एस्परगिलोसिस के कारण फेफड़ों में परेशानी डायबिटीज ग्रस्त लोगों में अधिक है।  फेफड़े में गांठ या कैविटी होने पर भी फंगल इंफेक्शन की संभावना अधिक होती है। पुराने फेफड़े के विकार या क्षतिग्रस्त फेफड़ों हैं।

 

 

 

एस्परगिलोसिस कितना आम है

 

अस्थमा रोगियों के लगभग 2 फीसदी और सिस्टिक फाइब्रोसिस वाले 2-15 फीसदी में फंगल इंफेक्शन की आशंका देखी गयी है।

 

 

यह हैं लक्षण

 

-बुखार, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, खांसी, बलगम के साथ खून आना और ऑक्सीजन का स्तर कम होना।

 

सोमवार, 19 दिसंबर 2022

विशेष जांच की सुविधा नहीं तो भी संभव होगा तंत्रिका तंत्र के टीबी का इलाज- प्रो. रूचिका टंडन

 विशेष जांच की सुविधा नहीं तो भी संभव होगा तंत्रिका तंत्र के टीबी का इलाज



कम होगी मरीजों की दौड़ और समय पर शुरू हो सकेगा इलाज

शोध के मिली राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता

तंत्रिका तंत्र के टीबी के लक्षण और सीएसएफ की जांच के आधार किया जा सकता है इलाज

200 मरीजों में शोध किया शोध

 

तंत्रिका तंत्र में टीबी की पुष्टि के लिए गोल्ड स्टैंडर्ड कहे जाने वाले विशेष जांच जीन एक्सपर्ट, ब्लड कल्चर की सुविधा न होने पर लक्षण और सेरेब्रल स्पाइनल फ्लूइड( सीएसएफ) यानि तंत्रिका तंत्र के द्रव की जांच  के आधार पर इलाज किया जा सकता है। इससे इससे जों की दौड़ कम होती। जांच पर पैसा कम खर्च होगा। समय पर इलाज शुरू हो सकेगा। इन लक्षणों को बताने में

  कामयाबी संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान की न्यूरोलॉजिस्ट

 प्रो. रुचिका टंडन, ड. प्रतीश आनंद और प्रो. संजीव क्षा ने

 हासिल की है। इस शोध को न्यूरोजांली इंडिया में स्थान भी

 मिला है। विशेषज्ञों ने लक्षणों का पता करने के लिए 200

 मरीजों पर शोध किया। लक्षण के आधार पर एमआरआई, जीन

 एक्सपर्ट, ब्लड कल्चर और सीएसएफ द्रव की जांच किया। देखा

 इनमें 37.5 फीसदी में जीन एक्सपर्ट से टीबी की पुष्टि हुई।

 एमआरआई में बदलाव दिखा। सीएसएफ में रासायनिक तत्वों में

 बदलाव मिला। इसके आधार पर कह सकते है। लक्षण और

 सीएसएफ के जांच के आधार पर टीबी का इलाज किया जा

 सकता है। हमने तंत्रिका तंत्र टीबी के सभी मामलों में जिनमें

 जीन एक्सर्ट से पुष्टि नहीं हुई उनमें लक्षण के आधार पर इलाज

 किया जिसमें काफी सफलता मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि

 सीएसएफ की जांच काफी सस्ती है किसी भी पैथोलॉजी जांच

 केंद्र पर हो सकती है। टीबी होने पर  सीएसएफ में  लिम्फोसाइट

 की मात्रा बढ़ जाती है। ग्लूकोज का स्तर कम हो जाता है। इस

 शोध को इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी में स्वीकार किया

 गया। शोध को संस्थान में हाल में ही आयोजित रिसर्च शो केस

 में भी रखा गया।


यह लक्षण तो शुरू करें टीबी का इलाज

-शरीर के भार में कमी

- बेहोश या होश में कमी

- उल्टी . दौरा पड़ना

- गर्दन में अकड़न खास तौर आगे की तरफ न झुकना

-सिर में पानी भरना( हाइड्रोसेफलस)

- शरीर के दूसरे अंगों में टीबी

- ट्यूबरकुलर मेनेंजाइटिस की स्टेज थ्री

 

क्या तंत्रिका तंत्र की टीबी

रीढ़ की हड्डी के स्पाइन कार्ड( नसें) और ब्रेन में टीबी हो सकती है। इसे सेंट्रल नर्वस सिस्टम टीबी कहते हैं। कुल टीबी के मामलों में से एक फीसदी मामले यह टीबी के होती हैं।  रीढ़ की हड्डी( स्पाइनल कार्ड) में टीबी होने पर लकवा की स्थिति आ जाती है। ब्रेन की टीबी होने पर शरीर के अंग काम नहीं करते हैं।समय पर इलाज न होने पर मृत्यु का कारण साबित हो सकती है। 

 

वर्जन

टीबी की पुष्टि के लिए गोल्ड स्टैंडर्ड तय किए गए लेकिन तमाम जगहों पर इन जांच की सुविधा नहीं है । ऐसे में केवल लक्षण और सस्ती और सुलभ सीएसएफ की जांच से आधार टीबी का इलाज शुरू करना चाहिए।  मरीजों को बीमारी की जटिलता और जीवन को बचाया जा सकता है....प्रो. रुचिका टंडन न्यूरोलॉजिस्ट एसजीपीजीआइएमएस लखनऊ

इंफ्रारेड टॉर्च बता देगा कितना हुआ है दिमाग में डैमेज



इंफ्रारेड टॉर्च बता देगा कितना हुआ है दिमाग में डैमेज

 

ब्रेन में चोट की गंभीरता के अनुसार इलाज की दिशा  होगी तय

 

  

रोड एक्सीडेंट में या किसी दूसरे दुर्घटना में घायल होने वाले किसी भी व्यक्ति के दिमाग पर कितना चोट लगा है यह वहां पर भी जनना संभव होगा  जहां पर एमआरआई या सीटी स्कैन की सुविधा नहीं है।  चिकित्सक इंफ्रारेड टॉर्च के जरिए यह पता लगा सकेंगे कि दिमाग को कितना नुकसान हुआ है।  इसके आधार पर वह आगे के लिए कहां पर भेजना है। कितना वह खुद इलाज कर सकते हैं।  इंफ्रारेड टॉर्च के जरिए आंख पर रोशनी डाली जाती है जिससे सेरेब्रॉस्पाइनल फ्लुएड को देखकर ब्रेन में इंजरी का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके अलावा बायो मार्कर परीक्षण भी विकसित किया गया है जो किसी भी छोटे सेंटर पर या किया जा सकता है। इन बायोमार्कर के आधार पर  इंजरी का अंदाजा लगाया सकता है। यह परीक्षण प्रिगनेंसी टेस्ट की तरह ही है। संजय गांधी पीजीआई में आयोजित न्यू डिवलेंपमेंट इन न्यूरो सर्जरी विषय़ आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा में बताया कि  बार इंजरी के कारण लक्षण बाद में आते हैं और बायो मार्कर में बदलाव जल्दी आ जाते हैं।   बिना देर किए मरीज को इलाज के लिए भेजा जा सकेगा। पूर्व निदेशक एसजीपीजीआई प्रो.एके महापात्रा, एम्स दिल्ली के डा. दीपक अग्रवाल, निमहांस बैंगलोर के डा. धवल शुक्ला , अमेरिका के डा. मिलिंद देवगांवकर, संस्थान के प्रो. अरुण कुमार श्रीवास्तव, डा. आशुतोष कुमार सहित अन्य लोगों ने नई तकनीक के बारे में जानकारी दी।   

 

ट्रामा मैनेजमेंट गाइडलाइन तैयार एमसीआई से होगी लागू करने की सिफारिश

 

 एम्स दिल्ली के पूर्व न्यूरो सर्जन प्रोफेसर सुमित सिन्हा ने कहा कि न्यूरोलॉजिकल सोसायटी आफ इंडिया और न्यूरो ट्रामा सोसाइटी ऑफ इंडिया ने मिलकर ट्रामा के मरीजों के इलाज के लिए गाइड लाइन तैयार किया है।  दूसरे देशों में  गाइड लाइन है लेकिन भारत में कोई गाइड लाइन अभी तक नहीं है।  हम लोगों ने मिलकर 2016 में प्रयास शुरू किया और अब यह गाइड लाइन बनकर तैयार हो गया है ।  इस गाइड लाइन के जरिए किस अस्पताल में कितना इलाज होना चाहिए और किस इलाज के लिए मरीज को दूसरे सेंटर भेजना चाहिए सहित तमाम मानक तय किए गए हैं। इसे लागू करने के लिए  मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया और ट्रामा मैनेजमेंट सिफारिश करेंगे।

 

वाकथान निकाल कर किया जागरूक

 वाकथान जरिए रोड एक्सीडेंट से बचाव का संदेश न्यूरो सर्जन सहित अन्य लोगों ने दिया। विभाग के प्रमुख एवं ट्रामा सेंटर  के प्रभारी ने बताया कि  सीट बेल्ट जरूर लगाएं हेलमेट पहने ट्रैफिक रूल का फॉलो करें ओवर स्पीड गाड़ी मत चलाएं और शराब पीकर कभी गाड़ी मत चलाएं। 




शुक्रवार, 16 दिसंबर 2022

कंबीनेशन थेरेपी से लिवर के मरीजों को राहत और लंबी जिंदगी- स्थापित किया रिस्पांस गाइडेड स्लो एलब्यूमिन , फ्यूरोसीमाइड एंड टेरलीप्रेसिन इंफ्यूजन थिरेपी

 





कंबीनेशन थेरेपी से लिवर  के मरीजों को राहत और लंबी जिंदगी

 स्थापित किया रिस्पांस गाइडेड स्लो एलब्यूमिन , फ्यूरोसीमाइड एंड टेरलीप्रेसिन इंफ्यूजन थिरेपी 

 

-लिवर की खाराबी में शरीर में होता है साइटोकाइन स्टार्म

 

-दिल को कम मिलता है खून और किडनी पर बढ़ता है प्रेशर

 


 

 

संजय गांधी स्नातकोत्तर आर्युविज्ञान संस्थान के गैस्ट्रोएंट्रोलाजिस्ट प्रो. गौरव पाण्डेय ने कार्डियोलाजी, क्लीनिकल इम्यूनोलाजी के विशेषज्ञों के साथ मिल कर कंबीनेशन थिरेपी स्थापित किया है। इस थेरेपी से   लिवर सिरोसिस, एक्यूट लिवर फेल्योर, क्रानिक लिवर डिजीज के मरीजों को राहत मिलेगी। जिंदगी लंबी होगी। इसे थेरेपी को  रिस्पांस गाइडेड स्लो एलब्यूमिन , फ्यूरोसीमाइड एंड टेरलीप्रेसिन इंफ्यूजन  नाम दिया है।   इस थिरेपी से एक्यूट लिवर फेल्योर के  135  मरीजों में इलाज किया गया जिसमें काफी अच्छे परिणाम मिले है।  लिवर की इन परेशानियों में क्या होता है शोध किया । रक्त में साइटोकाइन, इंडोटाक्सिन का स्तर का अध्ययन किया। देखा कि यह बढा जाता है।  लिवर को खून सप्लाई करने वाली पोर्टल वेन चौडी हो जाती है।  लिवर के बंधे के रूप में काम करता है। दिल को पूरा खून नहीं मिल पाता है।  आंत में सूजन आ जाता है। ईंडो टाक्सिन , साइटोकाइन मुख्य रक्त प्रवाह में शामिल हो जाता है। इससे शरीर की रक्त वाहिकाएं चौडी हो जाती है।  रक्त दाब कम हो जाता है।   किडनी, हार्ट पर असर पड़ता है। पेट में पानी भर जाता है। फेफडे में पानी जमा हो जाता है। पैर में सूजन होने लगता है। शरीर को संक्रमण से बचाने वाले न्यूट्रोफिल की कार्य शक्ति कम हो जाती है। इससे बार –बार बुखार, शरीर के दूसरे अंगों में संक्रमंण की परेशानी होती है। बार –बार भर्ती होना पड़ता है।  रिस्पांस गाइडेड( जितनी जरूरत उतनी दवा) थिरेपी विकसित किया। इसमें  टेरलीप्रेसीन , एलब्यूमिन, रक्त संचार बढाने के लिए नार एड्रिलीन और डाई यूरेटिक ( फेरोसामाइड) चार दवाओं का कंबीनेशन दिया  । इससे सूजन कम होता है। दिल को रक्त पर्याप्त मात्रा में मिलता है। हार्ट का कार्य शक्ति ठीक होती है।

 

 

 

 वर्जन

 

 लिवर सोरोसिस के 50 फीसदी से अधिक लोगों मे दूसरे आंगों पर कुप्रभाव पड़ता है जिसके कारण कई परेशानी होती है। स्प्लेनचेनिक और प्रणालीगत हेमोडायनामिक्स में सुधार, आंतों की पारगम्यता और एंडोटॉक्सिमिया  , न्यूट्रोफिल कार्यों में सुधार, और संचलन में प्रो-इंफ्लेमेटरी साइटोकिन्स को कम होता है जिससे लिवर सिरोसिस, एक्ट लिवर फेल्योर के मरीजों को राहत मिलती है---प्रो. गौरव पाण्डेय पेट रोग विशेषज्ञ एसजीपीजीआइएमएस

 

 

 

 

शोध को मिली विश्व स्तर पर स्वीकार्यता

 

 

 

रिसपांस गाइडेड स्लो इंफ्युजन आफ एल्ब्यूमिन , वासोकांसट्रिकटर एंड फ्यूरोसमाइड इंप्रूव एसाइिटस, मोबिलाइजेशन एंड सरवाइवल इन एक्यूट आन क्रोनिक लिवर फेल्योर नाम से शोध किया जिसे जर्नल आफ इंफ्लामेशन ने स्वीकार किया है। शोध मे क्लीनिकल इण्यूनोलाजी विभाग के शरीर प्रतिरक्षा विशेषज्ञ   प्रो. विकास अग्रवाल और प्रो. दुर्गा प्रसन्ना मिश्रा , कार्डियोलॉजी विभाग के हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. सुदीप कुमार, पेट रोग विशेषज्ञ प्रो. प्रवीर राय  ने इस शोध रूप से भागीदार रहे।