पीजीआई हड्डी के दुर्लभ ट्यूमर से बुजुर्ग का हाथ बचाया
कलाई की हड्डी में था जायंट सेल ट्यूमर
ट्यूमर निकालकर टांग की हड्डी से बनाई नई कलाई
लखनऊ। कलाई की हड्डी में दुर्लभ और आक्रामक ट्यूमर होने के बाद भी देवरिया के रहने वाले 65 वर्षीय बुजुर्ग मरीज का हाथ काटने की नौबत नहीं आई। संजय गांधी पीजीआइ के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के हड्डी रोग विभाग के प्रोफेसर अमित कुमार रेजिडेंट डा उत्सव और डा अमित ने पहले दवा से ट्यूमर को नियंत्रित किया, फिर उसे पूरी तरह निकालकर मरीज की अपनी टांग की हड्डी से कलाई की हड्डी का पुनर्निर्माण कर दिया। जटिल ऑपरेशन के बाद मरीज अब हाथ से रोजमर्रा के काम कर पा रहा है। खास बात यह है कि पूरा इलाज आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत हुआ।
मरीज की कलाई में लगातार दर्द और सूजन थी। जांच में डिस्टल रेडियस में जायंट सेल ट्यूमर मिला। समय पर इलाज नहीं होने पर ट्यूमर हड्डी को काफी नुकसान पहुंचाकर हाथ की कार्यक्षमता छीन सकता था।
सर्जरी से पहले मरीज को डेनोसुमैब दवा दी गई। इससे ट्यूमर की गतिविधि कम हुई और उसके आसपास नई हड्डी बनने लगी। इसके बाद डॉक्टरों ने ट्यूमर को स्वस्थ हड्डी की सुरक्षित सीमा के साथ पूरी तरह निकाल दिया।
ट्यूमर निकालने के बाद हड्डी में बनी कमी को मरीज की अपनी टांग से ली गई फाइबुला हड्डी के ग्राफ्ट से भरा गया। इससे कलाई को मजबूती और स्थिरता मिली। फॉलोअप में ग्राफ्ट अच्छी तरह जुड़ गया है और ट्यूमर दोबारा होने के संकेत नहीं मिले हैं।
एनेस्थीसिया विभाग के डा. प्रतीक का विशेष सहयोग रहा।

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