रविवार, 30 अगस्त 2026

35 साल के मनुज के अंगदान से तीन मरीजों को जिंदगी की उम्मीद

 




35 साल के मनुज के अंगदान से तीन मरीजों को जिंदगी की उम्मीद

ब्रेन हेमरेज के बाद लोहिया संस्थान में हुई मौत, परिजनों ने किया अंगदान का फैसला; 


लोहिया में  एक किडनी और पीजीआई में हुआ एक  किडनी और लिवर का हुआ ट्रांसप्लांट


ब्रेन हेमरेज के गंभीर 35 वर्षीय बाराबंकी निवासी मनुज कुमार मिश्रा जिंदगी की जंग हार गए, लेकिन उनके अंगदान से तीन मरीजों को नई जिंदगी की उम्मीद मिली है। मनोज को बाथरूम में नहाते समय गिर गए थे । इसके बाद ब्रेन हेमरेज होने पर उन्हें पहले निजी अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर लोहिया संस्थान में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों के प्रयास के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी। ब्रेन डेथ घोषित होने के बाद परिजनों ने अंगदान का फैसला लिया।

अंगदान की सूचना मिलते ही संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसजीपीजीआई) के प्रोफेसर हर्षवर्धन ने सभी संबंधित विभागों को अलर्ट कर दिया।  इसके बाद सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर प्रत्यारोपण की तैयारी शुरू की गई। सोटो के प्रमुख एव चिकित्सा अधीक्षक 

प्रोफेसर हर्षवर्धन को शनिवार दोपहर करीब दो बजे अंगदान की सूचना मिली थी। अंगों को हार्वेस्ट करने और उनका आवंटन करने की प्रक्रिया में सुबह करीब छह बज गए। इससे पहले ही एसजीपीजीआइ के सभी संबंधित विभागों को अलर्ट कर दिया गया था और विभागों ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली थीं।

मनुज की एक किडनी लोहिया संस्थान में 44 वर्षीय अयोध्या निवासी महिला के लिए उपयोग की गई।  लोहिया संस्थान के 

यूरोलॉजी विभाग और ऑर्गन रिट्रीवल एवं किडनी ट्रांसप्लांट विभाग के 

प्रो. ईश्वर दयाल

डॉ. आलोक श्रीवास्तव

डॉ. संजीत सिंह और नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रो. अभिलाष चंद्रा

प्रो. नम्रता राव ,निश्चेतना विभाग से 

प्रो. पीके दास

डा. निधि शुक्ल

ने अहम भूमिका निभाया। 

 

वहीं एसजीपीजीआई में किडनी प्रत्यारोपण के लिए प्रोफेसर नारायण प्रसाद ,प्रो अनुपमा कौल , प्रो रवि शंकर , टेक्नोलॉजिस्ट महेश कुमार  ने चार मरीजों की जांच की। इनमें 34 वर्षीय एक महिला, जो पिछले चार साल से डायलिसिस पर थी, के लिए किडनी उपयुक्त पाई गई।

लिवर प्रत्यारोपण के लिए भी चार मरीजों की जांच की गई, जिसमें 32 वर्षीय एक पुरुष को लिवर प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त पाया गया। हेपेटाइटिस  के संक्रमण के कारण इनको लिवर फैलियर की परेशानी थी। 

रविवार शाम करीब चार बजे संस्थान  में अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू की गई, जो देर रात तक जारी रही। 

 लिवर ट्रांसप्लांट 32 वर्षीय पुरुष है, जिसे हेपेटाइटिस-बी और सी के कारण लिवर फेल्योर था।

लिवर ट्रांसप्लांट की टीम का नेतृत्व प्रोफेसर सुप्रिया शर्मा ने किया जिसमें डॉ. राहुल, डॉ. प्रदीप, डॉ. सारंगी और विभागाध्यक्ष प्रो. अनु बिहारी शामिल रहे।

मरीज को अब लिवर ट्रांसप्लांट रिकवरी आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया है और फिलहाल उसकी स्थिति स्थिर है।

 किडनी प्रत्यारोपण की प्रक्रिया प्रोफेसर एम एस. अंसारी, प्रोफेसर संजय सुरेखा और प्रोफेसर उदय प्रताप सिंह की टीम ने शुरू की।  एनेस्थीसिया विभाग से लीवर और किडनी ट्रांसप्लांट के में प्रोफेसर दिव्या श्रीवास्तव, प्रोफेसर तपस सिंह,डा. तन्वी भार्गव और डा. तृप्ति सिंह शामिल रही। 

पीजीआइ निदेशक प्रोफेसर आरके धीमान और लोहिया के निदेशक प्रो सी एम सिंह ने ट्रांसप्लांट टीम को बधाई दी।  कहा कि संस्थान मल्टी-ऑर्गन ट्रांसप्लांट की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मनोज के परिजनों के इस फैसले से तीन मरीजों के जीवन में नई उम्मीद जगी है। अंगदान ने यह संदेश दिया कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी उसके अंग जरूरतमंद मरीजों को जीवन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। 




लोहिया संस्थान की टीम 


ब्रेन स्टेम डेथ सर्टिफिकेशन टीम

डा. पीके मौर्या

डा. ऋतु करौली

डा. एसएस नाथ

डा. अरविंद कुमार सिंह






फॉरेंसिक विभाग

डा. प्रदीप

डा. आलोक


अंगदान काउंसलिंग टीम

सुभाष शुक्ला ,

डा. संदीप कुमार यादव

डा. एसएस नाथ

कानूनी एवं प्रशासनिक सहयोग

हेड कांस्टेबल कमलेश यादव

विवेक यादव

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