थायरॉयड बचाने की नई तकनीक विकसित, अब जीवनभर दवा खाने की मजबूरी से मिल सकती है राहत
पीजीआइ में डामा तकनीक से सात मरीजों का सफल इलाज, एक ही ऑपरेशन में दोनों ओर की सौम्य गांठों का उपचार
थायरॉयड की सर्जरी के बाद जीवनभर हार्मोन और कई मरीजों में कैल्शियम की दवा लेने की मजबूरी अब कम हो सकती है। संजय गांधी पीजीआइ के एंडोक्राइन एवं ब्रेस्ट सर्जरी विभाग के प्रो. सबारेत्नम मयिलवगनन के नेतृत्व में डायरेक्ट एक्सेस माइक्रोवेव एब्लेशन (डामा) नामक नई हाइब्रिड तकनीक विकसित की गई है। इस तकनीक में थायरॉयड का स्वस्थ हिस्सा सुरक्षित रहेगा। मरीज की प्राकृतिक थायरॉयड कार्यक्षमता बनी रहेगी। जीवनभर हार्मोन रिप्लेसमेंट व कैल्शियम की दवा लेने की जरूरत से यथासंभव बचाया जा सकेगा। यह तकनीक उन मरीजों में कारगर है जिनके थायरॉयड के दोनों हिस्सों में सौम्य (बेनाइन) गांठें होती हैं। अब तक सात चयनित मरीजों पर इसका सफल उपयोग किया गया है। सभी ऑपरेशन तकनीकी और चिकित्सकीय रूप से सफल रहे तथा किसी भी मरीज में कोई बड़ी जटिलता सामने नहीं आई। ऑपरेशन के बाद सभी मरीजों की थायरॉयड कार्यक्षमता सामान्य रही और उपचारित गांठों के आकार में शुरुआती कमी भी दर्ज की गई। विशेषज्ञों के अनुसार, पहले ऐसे मरीजों में अक्सर पूरा थायरॉयड निकालना पड़ता था। इससे रोग तो ठीक हो जाता था, लेकिन मरीज को जीवनभर थायरॉयड हार्मोन की दवा लेनी पड़ती थी। कई मामलों में पैराथायरॉयड ग्रंथियां प्रभावित होने से कैल्शियम की कमी हो जाती थी और लंबे समय तक कैल्शियम की दवा भी लेनी पड़ती थी। इसके अलावा आवाज की नस को नुकसान पहुंचने और अन्य शल्य जटिलताओं का खतरा भी बना रहता था।
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क्या है तकनीक डामा तकनीक में जिस हिस्से में बड़ी या ऑपरेशन योग्य गांठ होती है, उसे सर्जरी से हटाया जाता है, जबकि दूसरी ओर की सौम्य गांठ को उसी ऑपरेशन के दौरान माइक्रोवेव एब्लेशन से नष्ट कर दिया जाता है। प्रो. सबारेत्नम ने बताया कि इस प्रक्रिया में थायरॉयड तक सीधी पहुंच मिलने से माइक्रोवेव प्रोब को अत्यंत सटीक स्थान पर लगाया जा सकता है। इससे आवाज की नस, श्वासनली, अन्ननली और प्रमुख रक्त वाहिकाओं जैसी महत्वपूर्ण संरचनाओं की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होती है। उनका कहना है कि प्रारंभिक परिणाम उत्साहजनक हैं, हालांकि तकनीक की दीर्घकालिक प्रभावशीलता के लिए मरीजों का नियमित फॉलो-अप जारी है।
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इनकी भी रही भूमिका डामा तकनीक के विकास में सहायक प्रोफेसर डा. रजनी के. साह, डा. जगन्नाथ स्पंदना तथा रेजिडेंट डा. नम्रता मस्कारा ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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: डामा तकनीक के प्रमुख फायदे एक ही ऑपरेशन में दोनों ओर की सौम्य थायरॉयड गांठों का इलाज। थायरॉयड का स्वस्थ हिस्सा सुरक्षित रखने का प्रयास। हार्मोन और कैल्शियम की दवा पर निर्भरता कम होने की संभावना। दोबारा बड़ी सर्जरी की जरूरत घट सकती है। महत्वपूर्ण नसों और आसपास के अंगों की बेहतर सुरक्षा।


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