स्पाइन की सर्जरी में अब चोट का खतरा होगा लगभग शून्य, एसजीपीजीआई ने बनाया नया ड्रिलिंग डिवाइस
लखनऊ
स्पाइन की जटिल सर्जरी के दौरान स्पाइनल कॉर्ड को चोट से बचाने के लिए संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसजीपीजीआई) के न्यूरोसर्जरी विभाग ने नया और सुरक्षित स्पाइन-ड्रिलिंग सेफ्टी डिवाइस विकसित किया है। इसे विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. वेद प्रकाश मौर्य ने डिजाइन किया है। डिवाइस को भारत सरकार के इंडियन पेटेंट ऑफिस से पेटेंट भी मिल चुका है।
यह उपकरण खासतौर पर स्प्लिट कॉर्ड मैलफॉर्मेशन टाइप-1 में बनने वाले बोनी स्पर (हड्डी के बढ़े हुए हिस्से) को सुरक्षित तरीके से ड्रिल कर हटाने में मदद करेगा। इस तरह की सर्जरी में ड्रिलिंग के दौरान स्पाइनल कॉर्ड में चोट की आशंका करीब 40 से 50 प्रतिशत तक रहती है। नए डिवाइस के इस्तेमाल से ड्रिल और न्यूरल टिश्यू के बीच सीधे संपर्क की आशंका कम होगी, जिससे इस तरह की इंजरी का खतरा लगभग शून्य तक पहुंचने की उम्मीद है।
यह डिवाइस स्पाइनल कॉर्ड की ओर ड्रिल से पैदा होने वाली गर्मी के ट्रांसमिशन को भी कम करता है। इससे सर्जरी के दौरान मरीज की सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत मिलेगी।
स्प्लिट कॉर्ड मैलफॉर्मेशन एक दुर्लभ जन्मजात समस्या है, जो बच्चों में अधिक देखी जाती है। तेजी से बढ़ने के दौरान बोनी स्पर स्पाइनल कॉर्ड को नुकसान पहुंचा सकता है। सर्जरी में इसे हटाना जरूरी होता है।
यह इनोवेशन यूनिट चीफ प्रो. अरुण कुमार श्रीवास्तव के मार्गदर्शन और न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. अवधेश कुमार जायसवाल के नेतृत्व में विकसित हुआ। एसजीपीजीआई निदेशक प्रो. आर.के. धीमन ने टीम को बधाई देते हुए स्वदेशी मेडिकल इनोवेशन, सर्जिकल रिसर्च और मरीजों की सुरक्षा के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।

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